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प्रॉक्सी वकीलों की लापरवाह पेशी पर दिल्ली हाइकोर्ट सख्त, युवा वकीलों से फाइल पढ़कर आने की अपील
प्रॉक्सी वकीलों की लापरवाह पेशी पर दिल्ली हाइकोर्ट सख्त, युवा वकीलों से फाइल पढ़कर आने की अपील

दिल्ली हाइकोर्ट ने अदालत में बिना तैयारी के पेश होने वाले प्रॉक्सी वकीलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए युवा वकीलों से आग्रह किया कि वे मामले की फाइल और ब्रीफ पढ़कर ही पेश हों। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल नाम मात्र की पेशी से न्यायिक प्रक्रिया में कोई सार्थक मदद नहीं मिलती।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें पत्नी ने अपने पति के खिलाफ अपील दायर की थी।कोर्ट के समक्ष कार्यालय रिपोर्ट से यह सामने आया कि अपील पिछले दो वर्षों से लंबित...

जमानत सुनवाई से पहले अभियोजकों को पूरी जानकारी दें जांच अधिकारी, फाइल के साथ रहें मौजूद: दिल्ली हाइकोर्ट
जमानत सुनवाई से पहले अभियोजकों को पूरी जानकारी दें जांच अधिकारी, फाइल के साथ रहें मौजूद: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि जमानत मामलों की सुनवाई से पहले जांच अधिकारी (IO) अभियोजकों को ठीक से ब्रीफ करें और सुनवाई के दौरान पूरी जांच फाइल के साथ अदालत में मौजूद रहें।कोर्ट ने उम्मीद जताई कि इस दिशा में जल्द ही ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।जस्टिस गिरिश कथपालिया ने यह टिप्पणी एक हत्या के मामले में आरोपी को बेल देते हुए की। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान न तो जांच अधिकारी और न ही संबंधित थाना प्रभारी (SHO) अदालत में उपस्थित थे जो बेहद...

सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य आधार पर रिहाई संभव नहीं: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य आधार पर रिहाई संभव नहीं: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

केंद्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य आधार पर निरुद्धि (डिटेंशन) से रिहा नहीं किया जा सकता।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ को बताया कि अदालत के अनुरोध पर स्वास्थ्य आधार पर निरुद्धि की समीक्षा के लिए गंभीरता से विचार किया गया, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया जा सका।मेहता ने कहा कि जेल मैनुअल के अनुसार वांगचुक की 28 बार चिकित्सकीय जांच की गई है और वे “स्वस्थ, ठीक-ठाक और सामान्य” हैं।...

50 लाख से अधिक संपत्ति खरीद पर TDS कटौती के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की अस्वीकृति
50 लाख से अधिक संपत्ति खरीद पर TDS कटौती के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की अस्वीकृति

सुप्रीम कोर्ट ने आज 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्ति खरीदते समय स्रोत पर कर कटौती (TDS) संबंधी सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।क्या था मामला?आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194IA के तहत यदि किसी अचल संपत्ति (कृषि भूमि को छोड़कर) की बिक्री कीमत 50 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो खरीदार को विक्रेता को भुगतान की जाने वाली राशि पर 1% TDS काटना अनिवार्य है।कटे हुए कर को निर्धारित समय सीमा के भीतर...

बीमित वाहनों को दुर्घटनाओं में प्लांट कर फर्जी MACT दावों पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
बीमित वाहनों को दुर्घटनाओं में 'प्लांट' कर फर्जी MACT दावों पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कथित फर्जी मोटर दुर्घटना मुआवजा दावों के एक “व्यापक रैकेट” पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत के समक्ष आरोप है कि कई हितधारक मिलकर बीमित (इंश्योर्ड) वाहनों का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से दुर्घटनाएं दर्शाने और मुआवजा दावे गढ़ने के लिए कर रहे हैं।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ Oriental Insurance Company Limited द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उड़ीसा हाईकोर्ट के मुआवजा आदेश को चुनौती दी गई थी। बीमा कंपनी का दावा था कि...

जालसाजी के आरोप में बर्खास्त तेलंगाना कोर्ट कर्मचारी की बहाली, सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया बर्खास्तगी आदेश
जालसाजी के आरोप में बर्खास्त तेलंगाना कोर्ट कर्मचारी की बहाली, सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया बर्खास्तगी आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 फरवरी) को करिमनगर स्थित अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल जज की अदालत में कार्यरत एक ऑफिस सबऑर्डिनेट (अधीनस्थ कर्मचारी) को सेवा में पुनर्बहाली का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि कर्मचारी को सभी परिणामी लाभ, बकाया वेतन और अन्य परिलाभ (emoluments) तीन सप्ताह के भीतर दिए जाएं।जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने तेलंगाना हाईकोर्ट के 12-02-2024 के फैसले को रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली। साथ ही 13-11-2018 का बर्खास्तगी आदेश और 8-1-2021 का अपीलीय...

ट्रायल के देर के चरण में बिना प्रासंगिकता व प्रमाण के पेन-ड्राइव साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जा सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
ट्रायल के देर के चरण में बिना प्रासंगिकता व प्रमाण के पेन-ड्राइव साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जा सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मुकदमे में ट्रायल के देर के चरण में पेश किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तभी स्वीकार किए जा सकते हैं, जब उनकी आरोपों से स्पष्ट प्रासंगिकता हो और उन्हें विधि के अनुसार सिद्ध किया जा सके।इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एक फर्जीवाड़ा मामले में मृतक मरीज की कथित आवाज़ रिकॉर्डिंग वाली पेन-ड्राइव को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार कर दिया।जस्टिस बी.पी. शर्मा ने यह फैसला मालिनी जैन द्वारा दायर याचिका पर सुनाया, जिसमें उन्होंने छिंदवाड़ा के प्रथम अपर सेशन जज द्वारा...

क्या राज्य में शैक्षणिक संस्थानों पर लागू है मातृत्व लाभ अधिनियम? इलाहाबाद हाइकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
क्या राज्य में शैक्षणिक संस्थानों पर लागू है मातृत्व लाभ अधिनियम? इलाहाबाद हाइकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से अहम सवाल करते हुए पूछा कि क्या राज्य में शैक्षणिक संस्थानों पर मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 (2017 के संशोधन सहित) को लागू करने संबंधी कोई अधिसूचना आधिकारिक गजट में जारी की गई है या नहीं।कोर्ट ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ वाराणसी स्थित सनबीम वूमेन्स कॉलेज की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके जरिए...

सड़क हादसों की रिपोर्टिंग में लापरवाही पर दिल्ली हाइकोर्ट सख़्त, पुलिस आयुक्त को खामियां दूर करने के निर्देश
सड़क हादसों की रिपोर्टिंग में लापरवाही पर दिल्ली हाइकोर्ट सख़्त, पुलिस आयुक्त को खामियां दूर करने के निर्देश

दिल्ली हाइकोर्ट ने सड़क दुर्घटना मामलों की जांच और रिपोर्टिंग में हो रही लापरवाहियों को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे मोटर दुर्घटना मामलों की निगरानी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए आवश्यक निर्णय लें और ठोस कदम उठाएं।चीफ जस्टिस जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने अनूप कुमार रामपाल द्वारा दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया।याचिका में सड़क दुर्घटनाओं की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही चूकों और...

62 साल के बाद प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकते डॉक्टर, केंद्र सरकार के नियम को दिल्ली हाइकोर्ट की मंज़ूरी
62 साल के बाद प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकते डॉक्टर, केंद्र सरकार के नियम को दिल्ली हाइकोर्ट की मंज़ूरी

दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में किए गए उस संशोधन को सही ठहराया, जिसके तहत केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा (CHS) और उससे संबद्ध सेवाओं के डॉक्टर 62 वर्ष की आयु के बाद प्रशासनिक पदों पर कार्य नहीं कर सकते।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 62 वर्ष ही डॉक्टरों की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु है और 65 वर्ष तक सेवा में बने रहने की अनुमति केवल गैर-प्रशासनिक भूमिकाओं के लिए दी जा सकती है।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने सीनियर CHS डॉक्टरों और उनके संघों द्वारा दायर याचिकाओं को...

गलत पहचान पर गिरफ्तारी अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: निर्दोषों को पकड़ने पर यूपी पुलिस को इलाहाबाद हाइकोर्ट की कड़ी फटकार
गलत पहचान पर गिरफ्तारी अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: निर्दोषों को पकड़ने पर यूपी पुलिस को इलाहाबाद हाइकोर्ट की कड़ी फटकार

इलाहाबाद हाइकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने गलत पहचान के आधार पर दो निर्दोष व्यक्तियों की गिरफ्तारी के मामले में यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। हाइकोर्ट ने साफ कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किए बिना उसकी स्वतंत्रता छीनना कानूनन अस्वीकार्य है और यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर आघात करता है।जस्टिस तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने सोमवार को दोनों मामलों में पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की। साथ ही पुलिस की गंभीर लापरवाही को देखते हुए लखनऊ के पुलिस...

हथियार रखने का कोई मौलिक अधिकार नहीं, आर्म्स लाइसेंस देना कार्यपालिका का विवेकाधीन अधिकार: दिल्ली हाइकोर्ट
हथियार रखने का कोई मौलिक अधिकार नहीं, आर्म्स लाइसेंस देना कार्यपालिका का विवेकाधीन अधिकार: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने साफ़ किया कि भारतीय संविधान के तहत किसी व्यक्ति को हथियार रखने का कोई मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आर्म्स लाइसेंस देना पूरी तरह से आर्म्स एक्ट 1959 और आर्म्स रूल्स 2016 के तहत कार्यपालिका के विवेकाधीन क्षेत्र में आता है। इसमें अदालत अपने विचार कार्यपालिका के स्थान पर नहीं थोप सकती।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें आर्म्स लाइसेंस के लिए दिए गए आवेदन को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता एक पार्किंग ठेकेदार था...

राज्यसभा सदस्य उज्ज्वल निकम को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पद से हटाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा 2012 मर्डर केस का आरोपी
राज्यसभा सदस्य उज्ज्वल निकम को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पद से हटाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा 2012 मर्डर केस का आरोपी

2012 में दिल्ली के व्यवसायी अरुण कुमार टिक्कू की हत्या के आरोपी विजय भिवाजीराव पालांडे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए राज्यसभा सदस्य उज्जवल निकम को मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) पद से हटाने की मांग की है।पालांडे का तर्क है कि निकम, जो राज्यसभा के मनोनीत सदस्य हैं, महाराष्ट्र सरकार की ओर से एसपीपी के रूप में कार्य जारी नहीं रख सकते, क्योंकि यह “लाभ का पद” (Office of Profit) धारण करने के समान होगा। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में निकम का एसपीपी बने रहना संविधान के अनुच्छेद 102(1) के...

एक महिला होकर दूसरी महिला के लिए ऐसी भाषा: सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकील को लगाई कड़ी फटकार
'एक महिला होकर दूसरी महिला के लिए ऐसी भाषा': सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकील को लगाई कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महिला वकील द्वारा बलात्कार पीड़िता के खिलाफ फेसबुक पोस्ट किए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई। कोर्ट ने कहा कि जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह न केवल आपत्तिजनक है बल्कि एक महिला वकील से ऐसी अपेक्षा बिल्कुल नहीं की जा सकती।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष यह मामला केरल की एडवोकेट दीपा जोसेफ की याचिका पर आया था। दीपा जोसेफ ने केरल पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। यह पोस्ट केरल के...

सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट से पूछा- क्या UAPA लगाने का आधार बनता है?
सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट से पूछा- क्या UAPA लगाने का आधार बनता है?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कलकत्ता हाइकोर्ट से कहा कि वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लागू किए जाने के औचित्य की जांच करे। यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर 10 जनवरी को हुए हमले से जुड़ा है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि NIA इस मामले में अपनी जांच से संबंधित सामग्री कलकत्ता हाइकोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश करे ताकि यह तय किया जा सके कि...

राजनीतिक दल से जुड़ने और सक्रिय राजनीति करने का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित: दिल्ली हाइकोर्ट
राजनीतिक दल से जुड़ने और सक्रिय राजनीति करने का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक का राजनीतिक दल से जुड़ने और सक्रिय रूप से राजनीति में भाग लेने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस अधिकार में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या दबाव व्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा की जड़ पर प्रहार करता है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह टिप्पणी वकील को पुलिस सुरक्षा देने के आदेश के दौरान की। वकील ने आरोप लगाया कि उन्हें उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल...

फर्जी फैमिली ट्रस्ट विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने प्रिया कपूर की याचिका पर जारी किया नोटिस
फर्जी फैमिली ट्रस्ट विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने प्रिया कपूर की याचिका पर जारी किया नोटिस

दिल्ली हाइकोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर की ओर से दायर उस याचिका पर बुधवार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने अपनी सास रानी कपूर द्वारा दायर मुकदमे को खारिज करने की मांग की।रानी कपूर ने आरोप लगाया कि प्रिया कपूर समेत अन्य लोगों ने एक फर्जी फैमिली ट्रस्ट बनाकर उन्हें उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत से अवैध रूप से वंचित किया।जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने रानी कपूर को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा गया कि यदि कोई प्रत्युत्तर दाखिल...