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सरकारी और पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज के लिए EWS इनकम लिमिट बढ़ाकर ₹5 लाख की गई: सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया
सरकारी और पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज के लिए EWS इनकम लिमिट बढ़ाकर ₹5 लाख की गई: सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार का फैसला रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें सरकारी अस्पतालों और रियायती ज़मीन पर बने प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज के लिए आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) की इनकम लिमिट को 2.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये सालाना कर दिया गया।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने निर्देश दिया कि इस फैसले का व्यापक प्रचार किया जाए ताकि योग्य लोग इसका फायदा उठा सकें।कोर्ट 2017 में डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाओं के बाद शुरू की गई एक स्वतः...

सिविल जज मुस्लिम शादी खत्म करने का आदेश नहीं दे सकते, फैमिली कोर्ट ही सक्षम फोरम: गुवाहाटी हाईकोर्ट
सिविल जज मुस्लिम शादी खत्म करने का आदेश नहीं दे सकते, फैमिली कोर्ट ही सक्षम फोरम: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल जज के पास तलाक के रूप में मुस्लिम शादी को खत्म करने को प्रमाणित करने और तलाक का घोषणात्मक आदेश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है और सक्षम कोर्ट फैमिली कोर्ट या फैमिली कोर्ट न होने पर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट होगा।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कe एक आदेश बरकरार रखा, जिसने अपीलीय कोर्ट – सिविल जज (जूनियर डिवीजन) द्वारा पारित आदेश खारिज कर दिया, जिसने एक वैवाहिक मुकदमे में एक व्यक्ति को तलाक के रूप में घोषणात्मक राहत दी और लिखित तलाक की पुष्टि के लिए एक...

अनिल अंबानी के खिलाफ धोखाधड़ी वर्गीकरण की कार्यवाही पर रोक को बैंक ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
अनिल अंबानी के खिलाफ 'धोखाधड़ी' वर्गीकरण की कार्यवाही पर रोक को बैंक ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

उद्योगपति अनिल अंबानी के लिए यह मुश्किल खड़ी कर सकता है, तीन बैंक - बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और IDBI बैंक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में सिंगल-जज के आदेश को चुनौती दी। इस जज ने रिलायंस ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन के खिलाफ तीनों बैंकों द्वारा शुरू की गई धोखाधड़ी वर्गीकरण की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, क्योंकि उन्हें बैंकों द्वारा इस्तेमाल किए गए फोरेंसिक ऑडिट में पहली नज़र में 'गंभीर कमियां' मिली थीं।तीनों बैंकों की ओर से पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस...

वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार | कोर्ट वकीलों को क्लाइंट के निर्देश पर फाइल किए गए डॉक्यूमेंट्स का सोर्स बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार | कोर्ट वकीलों को क्लाइंट के निर्देश पर फाइल किए गए डॉक्यूमेंट्स का सोर्स बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील को क्लाइंट द्वारा दिए गए डॉक्यूमेंट का सोर्स बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह विशेषाधिकार प्राप्त बातचीत के दायरे में आता है, जब तक कि धोखाधड़ी का कोई प्रथम दृष्टया न्यायिक निष्कर्ष न हो।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि जब कोई क्लाइंट कानूनी बचाव के लिए अपने वकील को कोई डॉक्यूमेंट देता है तो डॉक्यूमेंट के ओरिजिन से जुड़ा ऐसा काम प्रोफेशनल गोपनीयता का हिस्सा होता है।कोर्ट ने कहा,"कोर्ट में फाइल किए गए डॉक्यूमेंट्स की मुख्य जिम्मेदारी पार्टी...

जमानत आदेश में कोई यात्रा प्रतिबंध नहीं: हाईकोर्ट ने डांसर सपना चौधरी को पासपोर्ट NOC देने का दिया निर्देश
जमानत आदेश में कोई यात्रा प्रतिबंध नहीं: हाईकोर्ट ने डांसर सपना चौधरी को पासपोर्ट NOC देने का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ्ते ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें लोकप्रिय एक्ट्रेस-डांसर और स्टेज परफॉर्मर सपना चौधरी को उनके पासपोर्ट के रिन्यूअल के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) देने से इनकार कर दिया गया।CrPC की धारा 482 के तहत दायर उनकी याचिका स्वीकार करते हुए जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच ने ट्रायल कोर्ट को उन्हें रिन्यूअल के लिए NOC जारी करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि चौधरी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले में बेल ऑर्डर में देश छोड़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया...

क्या भाषण को एक आतंकी कृत्य के योग्य माना जा सकता है? UAPA की धारा 15 की सुप्रीम कोर्ट की विस्तारित परिभाषा का क्या मतलब है?
क्या भाषण को एक आतंकी कृत्य के योग्य माना जा सकता है? UAPA की धारा 15 की सुप्रीम कोर्ट की विस्तारित परिभाषा का क्या मतलब है?

5 जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया, क्योंकि प्रथम दृष्टया यह देखते हुए कि अभियोजन पक्ष के सबूतों से पता चलता है कि उन्होंने दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश में एक 'केंद्रीय और रचनात्मक भूमिका' निभाई थी। इसने पांच अन्य सह-आरोपियों को जमानत दी, सह-आरोपी व्यक्तियों की "भागीदारी के पदानुक्रम" पर अपने तर्कों को बड़ी साजिश में केवल सुविधाजनक / केवल संघ के रूप में आधारित किया, जैसा कि दो अन्य लोगों के खिलाफ जो अपनी केंद्रीय भूमिकाओं के कारण "गुणात्मक रूप से...

कानूनी वारिसों को पक्षकार न बनाने से अपील स्वतः निरस्त नहीं होगी, यदि मृतक के हित अन्य वारिसों द्वारा पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्वित हों : सुप्रीम कोर्ट
कानूनी वारिसों को पक्षकार न बनाने से अपील स्वतः निरस्त नहीं होगी, यदि मृतक के हित अन्य वारिसों द्वारा पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्वित हों : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी मृत पक्षकार के हितों का पर्याप्त रूप से उसके अन्य कानूनी वारिसों द्वारा प्रतिनिधित्व किया जा रहा है, तो उसके किसी एक वारिस को प्रतिस्थापित (सब्स्टीट्यूट) न किए जाने मात्र से मुकदमा या अपील अभियोजन से समाप्त (abatement) नहीं मानी जा सकती।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केवल इस आधार पर विशिष्ट प्रदर्शन (Specific Performance) की डिक्री के...

रिलायंस को विकास हेतु दी गई मुंबई कोस्टल रोड की भूमि सामान्यतः जनता के लिए खुली रहेगी : सुप्रीम कोर्ट
रिलायंस को विकास हेतु दी गई मुंबई कोस्टल रोड की भूमि सामान्यतः जनता के लिए खुली रहेगी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुंबई कोस्टल रोड (साउथ) के पास स्थित वह रीक्लेम्ड भूमि, जिसे रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को लैंडस्केपिंग और विकास कार्यों के लिए सौंपा गया है, सामान्य रूप से आम जनता के लिए खुली रहनी चाहिए। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) का निपटारा कर दिया, जिसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत निजी एजेंसियों को कोस्टल रोड के किनारे की रीक्लेम्ड भूमि पर लैंडस्केपिंग और मेंटेनेंस का काम दिया जाना...

रोहिंग्या फंडिंग सिंडिकेट | इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, जांच अधिकारी के लापरवाह रवैये पर जताई कड़ी नाराज़गी
रोहिंग्या फंडिंग सिंडिकेट | इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, जांच अधिकारी के 'लापरवाह' रवैये पर जताई कड़ी नाराज़गी

इलाहाबाद हाइकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने शुक्रवार को ऐसे व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिस पर बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य कथित राष्ट्रविरोधी तत्वों को अवैध एवं अनधिकृत सहायता देकर भारत में बसाने तथा अशांति और वैमनस्य फैलाने के लिए सिंडिकेट का “मुख्य सरगना” होने का आरोप है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक कदम न उठाने पर जांच एजेंसी, विशेषकर जांच अधिकारी (आईओ), के लापरवाह और...

सोनम वांगचुक की हिरासत: जिला मजिस्ट्रेट ने स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया, SSP की रिपोर्ट कॉपी-पेस्ट की — सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
सोनम वांगचुक की हिरासत: जिला मजिस्ट्रेट ने स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया, SSP की रिपोर्ट कॉपी-पेस्ट की — सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने आज (12 जनवरी) लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) के तहत की गई गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी रखी। यह याचिका उनकी पत्नी डॉ. गीताांजली आंग्मो ने दाखिल की है, जिसमें वांगचुक की हिरासत को अवैध बताया गया है। वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में राज्यhood आंदोलन के हिंसक होने के बाद हिरासत में लिया गया था।इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी. बी. वराले की खंडपीठ कर रही है।आज याचिकाकर्ता की ओर से पेश...

आंध्र के पोलावरम प्रोजेक्ट के खिलाफ तेलंगाना की याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सूट दायर करने की अनुमति दी
आंध्र के पोलावरम प्रोजेक्ट के खिलाफ तेलंगाना की याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सूट दायर करने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने आज तेलंगाना सरकार को पोलावरम बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के विस्तार को चुनौती देने वाली अपनी रिट याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और उसे अनुच्छेद 131 के तहत सिविल सूट के रूप में चुनौती उठाने की स्वतंत्रता प्रदान की।यह मामला चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष था। तेलंगाना सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका केंद्र सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ दायर की थी, जिसमें पोलावरम–बनकाचेरला लिंक परियोजना के विस्तार के लिए दी गई वित्तीय...

कोर्ट परिसर गरिमामय और पवित्र स्थल हैं, उन्हें प्रदर्शन का मंच नहीं बनाया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
कोर्ट परिसर गरिमामय और पवित्र स्थल हैं, उन्हें प्रदर्शन का मंच नहीं बनाया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में अदालत कक्ष के भीतर नारेबाजी करने, एक आरोपी को धमकाने, पुलिसकर्मियों से हाथापाई करने और उनके वैधानिक कर्तव्यों में बाधा डालने के आरोप में दो व्यक्तियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने वाली किसी भी अवैध गतिविधि को हल्के में नहीं लिया जा सकता। न्यायालय ने कहा—“न्यायालय परिसर, जिसमें अदालत कक्ष और उसके आसपास का क्षेत्र शामिल है, न्याय के...

पीड़िता के सहमति से वयस्क होने पर MP हाईकोर्ट ने POCSO सजा रद्द की, जज व अभियोजक से जवाब तलब
पीड़िता के सहमति से वयस्क होने पर MP हाईकोर्ट ने POCSO सजा रद्द की, जज व अभियोजक से जवाब तलब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO अधिनियम के तहत एक व्यक्ति की सजा को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ट्रायल कोर्ट ने इस तथ्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया कि पीड़िता एक सहमति से संबंध में रहने वाली वयस्क (कंसेंटिंग एडल्ट) थी। इस मामले में न्यायालय ने यह भी पाया कि विशेष न्यायाधीश द्वारा की गई गंभीर चूक के कारण अभियुक्त को तीन वर्षों से अधिक समय तक जेल में रखा गया, जो न्याय के साथ अन्याय है।यह मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की खंडपीठ के समक्ष आया। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश और लोक...

NCLT चेयरमैन के अंतरराज्यीय मामलों के स्थानांतरण की शक्ति पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
NCLT चेयरमैन के अंतरराज्यीय मामलों के स्थानांतरण की शक्ति पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट यह जांच करेगा कि क्या राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के चेयरमैन के पास प्रशासनिक आदेश के माध्यम से एक राज्य से दूसरे राज्य में मामलों को स्थानांतरित करने की शक्ति है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने हाल ही में उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें गुजरात हाइकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई जिसमें कहा गया कि NCLT अध्यक्ष को प्रशासनिक आदेश द्वारा एक राज्य से दूसरे राज्य में मामलों को स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है।नोटिस जारी करते...

ट्रेन के कोच में पेशाब करने और हंगामा करने के आरोपी न्यायिक अधिकारी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पुनर्बहाली पर रोक
ट्रेन के कोच में पेशाब करने और हंगामा करने के आरोपी न्यायिक अधिकारी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पुनर्बहाली पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द करते हुए उसकी पुनर्बहाली का निर्देश दिया गया था। उक्त न्यायिक अधिकारी पर ट्रेन यात्रा के दौरान उपद्रव मचाने महिला यात्री के सामने अश्लील हरकत करने और कोच में पेशाब करने के गंभीर आरोप हैं।सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित न्यायिक अधिकारी का आचरण सबसे गंभीर किस्म का घोर कदाचार है और उसे सेवा से बर्खास्त ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मामले को चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि यह...

ठेकेदार के माध्यम से रखे गए कर्मचारी नियमित कर्मियों के समान दर्जा नहीं मांग सकते: सुप्रीम कोर्ट
ठेकेदार के माध्यम से रखे गए कर्मचारी नियमित कर्मियों के समान दर्जा नहीं मांग सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार या तीसरे पक्ष की एजेंसियों के जरिए नियुक्त किए गए कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान सेवा लाभ और दर्जे का दावा नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि यदि ऐसे कर्मचारियों को नियमित कर्मियों के बराबर माना गया तो इससे सार्वजनिक नियुक्ति की पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया की बुनियाद ही कमजोर हो जाएगी।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने कहा कि राज्य संस्थाओं में नियमित नियुक्ति एक सार्वजनिक संपत्ति के समान है, जिसे ठेकेदारों के...

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ TMC सांसदों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ TMC सांसदों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने आज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से जवाब मांगा। इस मामले की सुनवाई चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ कर रही है। यह आवेदन टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन द्वारा दाखिल किए गए हैं।डेरेक ओ'ब्रायन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील दी कि पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित निर्देश...