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हाईकोर्ट ने शहदोल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के खिलाफ झूठी शिकायत को लेकर मानहानि मामला रद्द करने से किया इनकार
हाईकोर्ट ने शहदोल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के खिलाफ झूठी शिकायत को लेकर मानहानि मामला रद्द करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहदोल जिला बार एसोसिएशन के वकील और अध्यक्ष की अर्जी खारिज की, जिसमें मानहानि के आरोपों पर संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि आरोप पहली नज़र में अपराध के तत्वों को पूरा करते हैं।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने टिप्पणी की,"यह एक स्थापित सिद्धांत है कि CrPC की धारा 482 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग बहुत ही कम मामलों में और केवल तभी किया जाना चाहिए, जब शिकायत में रिकॉर्ड के आधार पर कोई अपराध सामने न आता हो। मौजूदा मामले में आरोप पहली नज़र में मानहानि के...

ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करना या बदलना जज की ईमानदारी पर सवाल नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करना या बदलना जज की ईमानदारी पर सवाल नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि ट्रायल कोर्ट का कोई आदेश किसी ऊपरी अदालत ने रद्द किया या बदल दिया, तो इससे संबंधित न्यायिक अधिकारी की काबिलियत, ईमानदारी या क्षमता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता, जब तक कि इस बारे में कोई खास प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज न की गई हो।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि इस तरह की न्यायिक जांच अदालतों की पदानुक्रमित संरचना की एक स्वाभाविक विशेषता है और यह न्यायिक प्रक्रिया के सामान्य क्रम का हिस्सा है।कोर्ट ने कहा,"...यह तथ्य कि किसी अदालत (चाहे वह ट्रायल कोर्ट हो...

आतंकवादियों से संपर्क की झूठी खबर का मामला: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दैनिक जागरण के संपादकीय मामलों के जानकार के खिलाफ दी केस की अनुमति
'आतंकवादियों से संपर्क' की झूठी खबर का मामला: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दैनिक जागरण के 'संपादकीय' मामलों के जानकार के खिलाफ दी केस की अनुमति

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट ने साफ़ किया कि मानहानि का अपराध सिर्फ़ उन मामलों तक सीमित नहीं है, जहां कोई व्यक्ति किसी दूसरे की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता हो। कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि रणबीर दंड संहिता (RPC) की धारा 499 उन स्थितियों को भी अपने दायरे में लेती है, जहां कोई व्यक्ति यह जानते हुए या यह मानने का उचित कारण रखते हुए कोई आरोप प्रकाशित करता है कि ऐसा आरोप किसी दूसरे व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाएगा।जस्टिस संजय धर ने यह टिप्पणी एक अख़बार में छपी ख़बर से जुड़ी...

लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम में संशोधन के लिए बिल पेश, सेल्फ-परसीव्ड पहचान को हटाने का प्रस्ताव
लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम में संशोधन के लिए बिल पेश, सेल्फ-परसीव्ड पहचान को हटाने का प्रस्ताव

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 को 12 मार्च को लोकसभा में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा पेश किया गया। यह बिल ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव करता है।यह बिल "ट्रांसजेंडर व्यक्ति" की परिभाषा को सीमित करने, लैंगिक पहचान की मान्यता की प्रक्रिया में बदलाव करने और व्यक्तियों को अंग-भंग या ज़बरदस्ती के माध्यम से ट्रांसजेंडर पहचान में बदलने से जुड़े अपराधों के लिए कड़े दंडात्मक...

रियासती शासकों को मिलने वाले प्रिवी पर्स विशेषाधिकारों पर कानूनी अधिकार के तौर पर दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने मिज़ो सरदारों का दावा खारिज किया
'रियासती शासकों को मिलने वाले 'प्रिवी पर्स' विशेषाधिकारों पर कानूनी अधिकार के तौर पर दावा नहीं किया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने मिज़ो सरदारों का दावा खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मार्च) को मिजो चीफ काउंसिल द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि भारत संघ ने पूर्व लुशाई हिल्स जिले (वर्तमान मिजोरम राज्य) के आदिवासी सरदारों की भूमि का अधिग्रहण बिना उचित मुआवजे का भुगतान किए किया था।जबकि अदालत ने माना कि उनके दावे तब उत्पन्न हुए जब संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 19 (1) (एफ) और अनुच्छेद 31 के तहत एक मौलिक अधिकार था, प्रमुख अपने अधिकारों के किसी भी उल्लंघन को स्थापित करने में विफल रहे।उन्होंने यह भी दावा किया था कि वे...

3 साल की प्रैक्टिस शर्त बनी रहेगी, सिर्फ लागू करने का तरीका तय करना है: सुप्रीम कोर्ट
'3 साल की प्रैक्टिस शर्त बनी रहेगी, सिर्फ लागू करने का तरीका तय करना है': सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निचली न्यायिक सेवा (सिविल जज जूनियर डिवीजन) में नियुक्ति के लिए अनिवार्य 3 वर्ष के प्रैक्टिस नियम की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी हाईकोर्टों को निर्देश दिया कि आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई जाए।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि जिन हाईकोर्टों ने पहले ही सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है, वे आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाएं। साथ ही...

ममता बनर्जी की निजी ज़िंदगी पर लिखी किताब के अंश पोस्ट करने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने वकील के ख़िलाफ़ मानहानि केस पर लगाई रोक
ममता बनर्जी की निजी ज़िंदगी पर लिखी किताब के अंश पोस्ट करने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने वकील के ख़िलाफ़ मानहानि केस पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने वकील कौस्तव बागची की याचिका पर नोटिस जारी किया और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। बागची ने अपनी याचिका में अपने ख़िलाफ़ दायर मानहानि की शिकायत को रद्द करने की मांग की थी। यह शिकायत तब दायर की गई, जब उन्होंने एक किताब का अंश पोस्ट किया, जिसमें कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की निजी ज़िंदगी के बारे में कुछ टिप्पणियां की गई थीं।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 31 अक्टूबर, 2025 के आदेश के ख़िलाफ़ दायर एक विशेष...

ज्यूडिशिलय सर्विस के लिए 3 साल की प्रैक्टिस के नियम का विरोध कोचिंग सेंटर करवा रहे हैं: जस्टिस के. विनोद चंद्रन
ज्यूडिशिलय सर्विस के लिए 3 साल की प्रैक्टिस के नियम का विरोध कोचिंग सेंटर करवा रहे हैं: जस्टिस के. विनोद चंद्रन

जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने शुक्रवार को टिप्पणी की कि न्यायिक सेवा भर्ती के लिए कोचिंग सेंटर ही शुरुआती स्तर के न्यायिक पदों के लिए बार में तीन साल की प्रैक्टिस की अनिवार्य शर्त का विरोध करवा रहे हैं।जस्टिस चंद्रन सीनियर एडवोकेट पिंकी आनंद की बात का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने तर्क दिया कि प्रैक्टिस की यह शर्त उम्मीदवारों के लिए एक रुकावट बन सकती है और ज्यूडिशिलय सर्विस में उनके प्रवेश में देरी कर सकती है, क्योंकि परीक्षाओं की तैयारी के लिए कुछ अतिरिक्त साल चाहिए होते हैं।जस्टिस चंद्रन ने टिप्पणी...

महज पुलिस के बयान पर आधारित होने के कारण ही FIR पर शक नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST मामले में अग्रिम ज़मानत रद्द की
'महज पुलिस के बयान पर आधारित होने के कारण ही FIR पर शक नहीं किया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST मामले में अग्रिम ज़मानत रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों की अग्रिम ज़मानत रद्द की, जिन पर कथित तौर पर अनुसूचित जाति वर्ग के सदस्यों के साथ जाति-आधारित गाली-गलौज करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि किसी FIR की प्रामाणिकता पर सिर्फ इसलिए शक नहीं किया जा सकता कि वह किसी शिकायतकर्ता के बजाय पुलिस के बयान के आधार पर दर्ज की गई।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें SC/ST मामले में अग्रिम ज़मानत दी गई। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के बयान के आधार पर दर्ज FIR की असलियत...

प्रथम दृष्टया सबूत दिखाते हैं कि भारतीयों की विदेश में तस्करी की गई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नौकरी रैकेट मामले में कथित मास्टरमाइंड को ज़मानत देने से किया इनकार
'प्रथम दृष्टया सबूत दिखाते हैं कि भारतीयों की विदेश में तस्करी की गई': बॉम्बे हाईकोर्ट ने नौकरी रैकेट मामले में कथित 'मास्टरमाइंड' को ज़मानत देने से किया इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में 46 वर्षीय एक व्यक्ति को ज़मानत पर रिहा करने से इनकार किया। इस व्यक्ति पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक अंतरराष्ट्रीय नौकरी रैकेट का 'मास्टरमाइंड' होने का आरोप लगाया। इस रैकेट के तहत भारत के शिक्षित युवाओं की विदेश में 'तस्करी' की जाती थी और फिर उन्हें लाओस में नकली कॉल सेंटरों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था, जहां वे अमेरिकियों और ब्रिटिश नागरिकों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए मनाकर ठगी करते थे।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चंदक की खंडपीठ ने...

शॉपिंग मॉल जैसी याचिका : व्यापक PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार
'शॉपिंग मॉल जैसी याचिका' : व्यापक PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक प्राधिकरणों की कथित लापरवाही से होने वाली मौतों को रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका बहुत व्यापक है और इसमें मांगी गई राहतें इतनी विस्तृत हैं कि उन्हें लागू करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे सार्वजनिक प्राधिकरणों...

सुप्रीम कोर्ट ने ब्लड बैंकों में NAT टेस्ट अनिवार्य करने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने ब्लड बैंकों में NAT टेस्ट अनिवार्य करने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिट याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें ब्लड बैंकों में खून डोनेट करते समय न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) को अनिवार्य बनाने की मांग की गई।यह देखते हुए कि NAT एक ज़्यादा महंगा प्रोसेस है, जैसा कि याचिकाकर्ता ने खुद माना, कोर्ट ने कहा कि वह इसे अनिवार्य बनाने का निर्देश जारी नहीं कर सकता, क्योंकि इससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया मुद्दा एक नई...

पीरियड लीव अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट
पीरियड लीव अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी कार्यस्थलों में महिलाओं के लिए पेड मेंस्ट्रुअल लीव (मासिक धर्म अवकाश) की मांग करने वाली एक याचिका का निस्तारण करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वह याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व पर सभी हितधारकों से परामर्श करके नीति बनाने पर विचार करे।सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी चिंता जताई कि यदि कानून बनाकर मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य कर दिया गया तो इसका महिलाओं के रोजगार पर उल्टा असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से हिचक सकते हैं,...

S. 149 IPC | गैर-कानूनी जमाव के हर सदस्य के खास कामों को साबित न कर पाना अभियोजन पक्ष के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
S. 149 IPC | गैर-कानूनी जमाव के हर सदस्य के खास कामों को साबित न कर पाना अभियोजन पक्ष के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने चार लोगों की हत्या की सज़ा और उम्रकैद बरकरार रखते हुए कहा कि अगर आरोपी भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 149 के तहत एक ही मकसद वाले गैर-कानूनी जमाव के सदस्यों के तौर पर काम करते हैं तो आरोपी द्वारा मृतक पर गोली चलाने का कोई खास चश्मदीद गवाह न होना अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक नहीं है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की बेंच ने दोषी लोगों द्वारा दायर अपीलें सुनीं। इन लोगों ने दूसरे आधारों के अलावा, अपनी सज़ा को इस तर्क पर चुनौती दी कि घटना के स्वतंत्र गवाह...

महुआ मोइत्रा मामले में लोकपाल कानून की व्याख्या पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, नोटिस जारी
महुआ मोइत्रा मामले में लोकपाल कानून की व्याख्या पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को नोटिस जारी करते हुए उस याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया, जिसमें लोकपाल ने दिल्ली हाइकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी। इस फैसले में कहा गया था कि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत आरोपपत्र दाखिल करने और अभियोजन शुरू करने के लिए अलग-अलग मंजूरी का प्रावधान नहीं है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए कहा कि कानून की धारा 20(7)(क) और धारा 20(8)...

BREAKING: चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, घड़ियालों पर खतरे को लेकर स्वतः संज्ञान
BREAKING: चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, घड़ियालों पर खतरे को लेकर स्वतः संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन और उससे संकटग्रस्त जलीय जीवों, खासकर घड़ियालों पर पड़ रहे खतरे को लेकर स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मुद्दे को उठाया।सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने बताया कि हाल ही में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों और एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि जिस संरक्षित क्षेत्र में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम चल रहा...

POP मूर्ति विसर्जन विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बॉम्बे हाइकोर्ट जाने को कहा
POP मूर्ति विसर्जन विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बॉम्बे हाइकोर्ट जाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियों के निर्माण और उनके विसर्जन की अनुमति देने वाले आदेशों को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को बॉम्बे हाइकोर्ट का रुख करने को कहा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी दिशानिर्देशों को पहले से ही हाइकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है और मामला वहां विचाराधीन है। ऐसे में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं...