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BREAKING | विजय अभिनीत जना नायकन फिल्म पर हाइकोर्ट की रोक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
BREAKING | विजय अभिनीत जना नायकन फिल्म पर हाइकोर्ट की रोक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

तमिल एक्टर विजय की फिल्म 'जना नायकन' के निर्माता ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश पर मद्रास हाइकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी ने शुक्रवार को मद्रास हाइकोर्ट की खंडपीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की। खंडपीठ ने एकल पीठ द्वारा CBFC को फिल्म को तत्काल प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश पर रोक लगा दी थी।यह फिल्म एक्टर विजय की बतौर एक्टर आखिरी फिल्म बताई...

धुरंधर फ़िल्म-निर्माताओं को राहत, बलोच समुदाय पर आपत्तिजनक शब्द म्यूट करने पर हाईकोर्ट ने याचिका की बंद
'धुरंधर' फ़िल्म-निर्माताओं को राहत, बलोच समुदाय पर आपत्तिजनक शब्द म्यूट करने पर हाईकोर्ट ने याचिका की बंद

गुजरात हाइकोर्ट ने फिल्म 'धुरंधर' में बलोच समुदाय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक संवाद हटाने की मांग को लेकर दायर याचिका को बंद कर दिया। फिल्म निर्माताओं की ओर से अदालत को यह जानकारी दिए जाने के बाद कि संबंधित शब्द को पहले ही म्यूट कर दिया गया, कोर्ट ने माना कि अब कोई विवाद शेष नहीं रह गया।यह मामला बलोच समुदाय से जुड़े दो व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिनमें उत्तर गुजरात बलोच समाज ट्रस्ट, पाटन के उपाध्यक्ष भी शामिल थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म में बलोच समुदाय को लेकर कुछ संवाद...

गलत गिरफ्तारी और 54 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए NRI को 14 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश
गलत गिरफ्तारी और 54 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए NRI को 14 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश

केरल हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक NRI व्यक्ति और उसके परिवार को गलत गिरफ्तारी और अवैध हिरासत के लिए कुल 14 लाख रुपये मुआवजा अदा करे। कोर्ट ने माना कि पुलिस की कार्रवाई के कारण याचिकाकर्ताओं को मानसिक पीड़ा, सामाजिक अपमान, उत्पीड़न और गंभीर नुकसान उठाना पड़ा।जस्टिस पी.एम. मनोज ने NRI व्यक्ति वी.के. ताजुद्दीन को 10 लाख रुपये तथा उनकी पत्नी, पुत्र, पुत्री और नाबालिग पुत्र को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता वी.के. ताजुद्दीन...

जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज़ (विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत पिछली तारीख से नियमितीकरण नहीं: हाइकोर्ट
जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज़ (विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत पिछली तारीख से नियमितीकरण नहीं: हाइकोर्ट

जम्मू–कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने सेवा मामलों में बार-बार उठने वाले एक अहम सवाल पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि केवल निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर लेने मात्र से किसी कर्मचारी को पिछली तारीख से नियमितीकरण का अधिकार नहीं मिल जाता। हाइकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू एंड कश्मीर सिविल सर्विसेज़ (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2010 के तहत नियमितीकरण केवल भविष्य प्रभाव से ही किया जा सकता है, भले ही कर्मचारी ने निर्धारित योग्यता अवधि पहले ही पूरी कर ली हो।जस्टिस संजय धर ने जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट...

जमानत को मशीनी तरीके से मना नहीं किया जाना चाहिए, इसे अप्रासंगिक बातों पर नहीं दिया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
जमानत को मशीनी तरीके से मना नहीं किया जाना चाहिए, इसे अप्रासंगिक बातों पर नहीं दिया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट (POCSO Act) के तहत एक मामले में जमानत दी गई, जिसमें उस पर एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि जमानत का आदेश गलत, अनुचित है और उसने संबंधित सबूतों को नज़रअंदाज़ किया।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने शिकायतकर्ता/पीड़ित की जमानत आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार करते हुए कहा,“यह तय कानून है कि सिर्फ चार्जशीट...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना लोकस स्टैंडी के लगाए गए अवैध खनन के आरोपों पर सुनवाई करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना लोकस स्टैंडी के लगाए गए अवैध खनन के आरोपों पर सुनवाई करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध रेत खनन और खनन लीज के आवंटन का आरोप लगाने वाली याचिका यह देखते हुए खारिज की कि याचिका एक ऐसे याचिकाकर्ता ने दायर की थी, जिसने अपना लोकस नहीं बताया। ऐसा लग रहा था कि यह याचिका किसी एक व्यक्ति से निजी दुश्मनी निकालने के लिए दायर की गई।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा;"याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रतिवादी नंबर 3 से 5 अवैध रेत खनन में लगी फर्में हैं और कथित तौर पर प्रतिवादी नंबर 6 और 7, जो सरकारी अधिकारी हैं, उसके साथ मिलकर काम कर रही हैं। यह...

S.138 NI Act | एक ही ट्रांज़ैक्शन के कई चेक बाउंस होने पर कई शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं: सुप्रीम कोर्ट
S.138 NI Act | एक ही ट्रांज़ैक्शन के कई चेक बाउंस होने पर कई शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही ट्रांज़ैक्शन से जुड़े कई चेक बाउंस होने पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत अलग-अलग केस बन सकते हैं। ऐसी शिकायतों को सिर्फ़ ज़्यादा संख्या के आधार पर शुरुआत में ही खारिज नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जिसने चेक बाउंस की शिकायतों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एक ही देनदारी के लिए समानांतर केस चलाना गलत है।हाईकोर्ट के नज़रिए से असहमत होते हुए सुप्रीम...

पत्नी की ज़्यादा क्वालिफिकेशन गुज़ारा भत्ता में रुकावट नहीं, सालों तक घरेलू काम के बाद नौकरी पर लौटना मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पत्नी की ज़्यादा क्वालिफिकेशन गुज़ारा भत्ता में रुकावट नहीं, सालों तक घरेलू काम के बाद नौकरी पर लौटना मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी पत्नी को सिर्फ़ इसलिए CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा भत्ता देने से मना नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह बहुत ज़्यादा पढ़ी-लिखी है या उसके पास वोकेशनल स्किल्स हैं, क्योंकि इससे यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि याचिकाकर्ता नंबर 1/पत्नी पैसे कमाने के लिए काम कर रही है।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने यह भी कहा कि पति का अपनी पत्नी का कानूनी तौर पर भरण-पोषण करने की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए सिर्फ़ उसकी क्वालिफिकेशन पर निर्भर रहना गलत है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी...

S.48 UP Municipality Act | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगरपालिका अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बताते हुए जारी किए दिशा-निर्देश
S.48 UP Municipality Act | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'नगरपालिका' अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बताते हुए जारी किए दिशा-निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने खास प्रक्रिया के दिशा-निर्देश दिए , जिनका पालन राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48 के तहत नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष को हटाने से पहले करना होगा।कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ऐसा हटाना सिर्फ शुरुआती जांच और कारण बताओ नोटिस के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि आरोपों को तय करने और गवाहों से जिरह सहित एक "पूरी जांच" ज़रूरी है।जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने निम्नलिखित सिद्धांत बताए, जिनका पालन राज्य को धारा 48(2-A) के...

नाबालिग को 2.5 महीने तक गैर-कानूनी हिरासत में रखने के लिए ₹5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश, हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई
नाबालिग को 2.5 महीने तक गैर-कानूनी हिरासत में रखने के लिए ₹5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश, हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई

पटना हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक नाबालिग को ₹5,00,000/- का मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसे बिहार पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने इस काम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन बताया।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रितेश कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि गिरफ्तारी कानून की तय प्रक्रिया की पूरी तरह से अनदेखी करके सिर्फ़ डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DIG) के कहने पर की गई, जबकि नाबालिग को पहले ही चार्जशीट में बरी कर दिया गया।हाईकोर्ट ने...

विरोध शिकायत के आधार पर संज्ञान लेने वाले मजिस्ट्रेट को स्पष्ट आदेश देना होगा और रेफर रिपोर्ट पर विचार करना होगा: केरल हाईकोर्ट
विरोध शिकायत के आधार पर संज्ञान लेने वाले मजिस्ट्रेट को स्पष्ट आदेश देना होगा और रेफर रिपोर्ट पर विचार करना होगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि विरोध शिकायत के आधार पर संज्ञान लेने वाले मजिस्ट्रेट को पुलिस द्वारा दायर रेफर रिपोर्ट पर विचार करना चाहिए और एक स्पष्ट आदेश पारित करना चाहिए।परमेश्वरन नायर बनाम सुरेंद्रन [2009 (1) KLT 794] और सी.आर. चंद्रन बनाम केरल राज्य [ILR 2024 (3) Ker. 245] के फैसलों का हवाला देते हुए जस्टिस सी. प्रदीप कुमार ने कहा:“इसलिए यह स्पष्ट है कि एक निजी शिकायतकर्ता के आधार पर किसी अपराध का संज्ञान लेते समय, खासकर पुलिस द्वारा दायर रेफर रिपोर्ट के खिलाफ विरोध शिकायत के रूप में दायर...

उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार, इसे हल्के में कम नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार, इसे हल्के में कम नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है जिसे हल्के में कम नहीं किया जा सकता।जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा,"उच्च या प्रोफेशनल शिक्षा पाने का अधिकार, भले ही भारत के संविधान के भाग III में मौलिक अधिकार के रूप में साफ तौर पर नहीं बताया गया, लेकिन यह राज्य की एक सकारात्मक जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार को सुनिश्चित करे और इसे हल्के में कम करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।"कोर्ट ने उम्मीदवार हर्षित अग्रवाल द्वारा दायर याचिका मंज़ूरी की, जिसने...

पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव पांच साल के कार्यकाल से आगे नहीं टाले जा सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव पांच साल के कार्यकाल से आगे नहीं टाले जा सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 के तहत जारी किए गए कानूनी आदेश स्टेट इलेक्शन कमीशन के अधिकार को खत्म नहीं कर सकते या चुनावों को टालने को सही नहीं ठहरा सकते।कोर्ट ने टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार, पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव उनके पांच साल के कार्यकाल खत्म होने से पहले पूरे होने चाहिए।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की:“शासन में शामिल सिस्टम के सभी अंगों को तालमेल से काम करना चाहिए... एकतरफा फैसला लेने के...

सरकारी भूमि पर बिना स्वामित्व लंबे समय तक कब्जा होने से निषेधाज्ञा का अधिकार नहीं मिलता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
सरकारी भूमि पर बिना स्वामित्व लंबे समय तक कब्जा होने से निषेधाज्ञा का अधिकार नहीं मिलता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के एक अधिकारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने सरकारी जमीन पर अपने कब्जे का दावा किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भूमि पर लंबे समय तक कब्जा मात्र से, बिना किसी वैध अधिकार के, कोई कानूनी हक या संरक्षण नहीं मिलता।जस्टिस हिर्देश की पीठ ने कहा कि—“जिस व्यक्ति के पास विवादित संपत्ति पर कोई वैधानिक अधिकार या स्वामित्व नहीं है, वह अनधिकृत कब्जेदार या अतिक्रमणकारी होता है। ऐसे व्यक्ति को उस भूमि के संबंध में...

मकान मालिक अपनी ज़रूरतों का सर्वश्रेष्ठ निर्णायक जरूर है, लेकिन किरायेदार को बेदखल करने के लिए वास्तविक आवश्यकता का सबूत देना अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट
मकान मालिक अपनी ज़रूरतों का 'सर्वश्रेष्ठ निर्णायक' जरूर है, लेकिन किरायेदार को बेदखल करने के लिए वास्तविक आवश्यकता का सबूत देना अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया है कि भले ही आम तौर पर मकान मालिक को अपनी आवश्यकता का “सर्वश्रेष्ठ निर्णायक” माना जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह बिना ठोस सबूत के किरायेदार को बेदखल कर सकता है। किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 के तहत बेदखली मांगते समय मकान मालिक को अपनी वास्तविक और ईमानदार आवश्यकता (बोना फाइड नीड) को प्रमाणित करना आवश्यक होता है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह टिप्पणी उस पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें मकान मालिक ने धारा 14(1)(e) के तहत दायर अपनी बेदखली याचिका खारिज किए...

बच्चे की सुरक्षा और भावनात्मक स्थिरता सर्वोपरि, विवादित आरोप तय किए बिना भी माता-पिता की मुलाकात सीमित की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
बच्चे की सुरक्षा और भावनात्मक स्थिरता सर्वोपरि, विवादित आरोप तय किए बिना भी माता-पिता की मुलाकात सीमित की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि हालांकि किसी माता-पिता को अपने बच्चे से नियमित और सार्थक मिलने-जुलने का अधिकार होता है, लेकिन अंतरिम (अस्थायी) चरण में यदि परिस्थितियाँ यह संकेत दें कि इससे बच्चे की सुरक्षा की भावना, भावनात्मक भलाई या मानसिक स्थिरता पर खतरा हो सकता है, तो ऐसे अधिकारों को नियंत्रित या सीमित किया जा सकता है, भले ही माता-पिता के बीच लगे आरोपों पर अंतिम निर्णय न हुआ हो।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा:“अंतरिम मुलाकात तय करते समय अदालत को विवादित...