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धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा के विरुद्ध: देवता ने उत्तर प्रदेश बांके बिहारी मंदिर न्यास अध्यादेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया
'धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा के विरुद्ध': देवता ने 'उत्तर प्रदेश बांके बिहारी मंदिर न्यास अध्यादेश' को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया

राज्यपाल द्वारा 26 मई, 2025 को जारी उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई।पीठासीन देवता श्री बांके बिहारी, शबैत और हरिदासी संप्रदाय के सखी संप्रदाय के सदस्यों द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया कि यह अध्यादेश सीधे तौर पर उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण करता है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g), 25, 26 और 300A का पूर्ण उल्लंघन है।इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरिंदम सिन्हा...

एक जज को भविष्य की संभावनाओं या लोकप्रियता की चिंता नहीं करनी चाहिए: न्यायपालिका में नैतिकता पर बोले जस्टिस ए.एस. ओक
एक जज को भविष्य की संभावनाओं या लोकप्रियता की चिंता नहीं करनी चाहिए: न्यायपालिका में नैतिकता पर बोले जस्टिस ए.एस. ओक

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय एस. ओक ने बुधवार को कहा कि जजों को अपने निर्णयों को व्यक्तिगत मान्यताओं या लोकप्रिय भावनाओं से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए और जजों के लिए नैतिकता पूरी तरह से वैधानिकता और संवैधानिकता पर आधारित होनी चाहिए।वह ग्लोबल ज्यूरिस्ट्स द्वारा आयोजित "न्यायपालिका में नैतिकता: एक प्रतिमान या विरोधाभास" विषय पर व्याख्यान श्रृंखला में बोल रहे थे।जस्टिस ओक ने कहा कि पदभार ग्रहण करने से पहले जज नैतिकता, धर्म या दर्शन पर व्यक्तिगत विचार रख सकते हैं, लेकिन एक बार नियुक्त...

S. 389 CrPC | सजा निलंबित करने के लिए हाईकोर्ट को यह आकलन करना चाहिए कि क्या दोषी के बरी होने की उचित संभावना है: सुप्रीम कोर्ट
S. 389 CrPC | सजा निलंबित करने के लिए हाईकोर्ट को यह आकलन करना चाहिए कि क्या दोषी के बरी होने की उचित संभावना है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (6 अगस्त) को राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के लिए POCSO Act के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को जमानत देने और सजा निलंबित करने का आदेश दिया गया था। न्यायालय ने कहा कि हाईकोर्ट यह आकलन करने में विफल रहा कि क्या दोषी के बरी होने की उचित संभावना है।न्यायालय ने कहा,"यह उम्मीद की जा सकती है कि हाईकोर्ट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 389 के तहत सजा निलंबन के लिए दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह जांच करेगा कि क्या प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड...

अच्छे वकीलों को जज क्यों नहीं नियुक्त किया जा रहा? केंद्र सरकार से जवाब चाहिए: जस्टिस एमबी लोकुर
अच्छे वकीलों को जज क्यों नहीं नियुक्त किया जा रहा? केंद्र सरकार से जवाब चाहिए: जस्टिस एमबी लोकुर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी लोकुर ने बुधवार (6 अगस्त) को जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में बढ़ते कार्यपालिका के हस्तक्षेप पर चिंता जताई। साथ ही इस बात पर अधिक पारदर्शिता की मांग की कि सरकार कुछ उम्मीदवारों को उनकी उत्कृष्ट वकीलों के रूप में प्रतिष्ठा के बावजूद, नियुक्त क्यों नहीं कर रही है।दिल्ली में एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस लोकुर ने कहा,"हाल के दिनों में जजों की नियुक्ति में कई समस्याएं आई हैं। नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यपालिका का काफी हस्तक्षेप रहा है।"जस्टिस लोकुर ने बताया...

राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए अदालतों का इस्तेमाल नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए अदालतों का इस्तेमाल नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए अदालतों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पार्टी और तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। मद्रास हाईकोर्ट ने सरकारी कल्याणकारी योजना के लिए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नाम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने यह आदेश विपक्षी...

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसे 2018 में एक संशोधन के माध्यम से पेश किया गया था। यह रिट याचिका सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन द्वारा दायर की गई है।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने एडवोकेट प्रशांत भूषण (CPIL की ओर से) और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (केंद्र की ओर से) की दो दिनों तक सुनवाई की।संक्षेप में मामलाभूषण ने PC Act की धारा 17A को चुनौती देते हुए तर्क...

कोयला लेवी घोटाला मामले में सूर्यकांत तिवारी की अंतरिम ज़मानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, DMF घोटाला मामले में दी अंतरिम ज़मानत
कोयला लेवी 'घोटाला' मामले में सूर्यकांत तिवारी की अंतरिम ज़मानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, DMF 'घोटाला' मामले में दी अंतरिम ज़मानत

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ कोयला लेवी 'घोटाला' मामले में व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी को दी गई अंतरिम ज़मानत रद्द करने से इनकार किया। हालांकि, कोर्ट ने DMF घोटाला मामले में व्यवसायी को मई में पहले लगाई गई शर्तों और नियमों पर अंतरिम ज़मानत दी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने विस्तृत दलीलें सुनने के बाद राहत प्रदान की। इस पर विचार करते हुए खंडपीठ ने कहा कि मई के आदेश के तहत तिवारी पर शर्त लगाई, जिसके अनुसार वह जाँच एजेंसियों/निचली अदालतों द्वारा आवश्यक होने पर ही छत्तीसगढ़...

साधारण धोखाधड़ी के आरोपों वाले आपराधिक मामलों के लंबित रहने मात्र से मध्यस्थता पर कोई रोक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
साधारण धोखाधड़ी के आरोपों वाले आपराधिक मामलों के लंबित रहने मात्र से मध्यस्थता पर कोई रोक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बिहार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाले में मध्यस्थता कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देते हुए कहा है कि धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात जैसे साधारण धोखाधड़ी से जुड़े अपराधों में आपराधिक कार्यवाही के लंबित रहने मात्र से किसी विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने पर रोक नहीं लगती।न्यायालय ने कहा,"केवल इस तथ्य से कि एक ही घटना/घटनाओं के संबंध में आपराधिक कार्यवाही शुरू की जा सकती है या शुरू की गई, इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचता कि विवाद, जो अन्यथा मध्यस्थता योग्य है, अब...

बच्चे में अनाथ बच्चा भी शामिल: सुप्रीम कोर्ट ने अनाथों को RTE Act के तहत मिलने वाले लाभों के सर्वेक्षण का आदेश दिया
'बच्चे' में 'अनाथ बच्चा' भी शामिल: सुप्रीम कोर्ट ने अनाथों को RTE Act के तहत मिलने वाले लाभों के सर्वेक्षण का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे सर्वेक्षण करके पता लगाएं कि अनाथ बच्चों को बच्चों के निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार, 2009 (RTE Act) के तहत निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का लाभ मिल रहा है या नहीं। देश में अनाथ बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की माँग वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ के समक्ष वकील और व्यक्तिगत रूप से याचिकाकर्ता पौलोमी पाविनी ने दलील दी कि यूनिसेफ के आंकड़ों...

पुलिस प्रशासन पर धब्बा: उड़ीसा हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा अपहृत नाबालिग लड़की को छुड़ाने के लिए कथित तौर पर पैसे मांगने पर एसपी को पेश होने का आदेश दिया
'पुलिस प्रशासन पर धब्बा': उड़ीसा हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा अपहृत नाबालिग लड़की को छुड़ाने के लिए कथित तौर पर पैसे मांगने पर एसपी को पेश होने का आदेश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने मंगलवार (5 अगस्त) को उन पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई, जिन्होंने कथित तौर पर पहले से ही अपहृत नाबालिग लड़की को छुड़ाने के लिए किसी प्रकार की 'रिश्वत' मांगी थी। मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति मुरारी श्री रमन की खंडपीठ एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक व्यक्ति द्वारा अपनी नाबालिग बेटी का पता लगाने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका जारी करने की मांग की गई थी, जिसका 18 जून, 2025 को अपहरण कर लिया गया था।सुनवाई की पिछली तारीख (22 जुलाई) पर, राज्य...

बलात्कार मामले में पीड़िता की विश्वसनीय गवाही को केवल बाहरी चोटों की गैरमौजूदगी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
बलात्कार मामले में पीड़िता की विश्वसनीय गवाही को केवल बाहरी चोटों की गैरमौजूदगी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की एक लड़की से यौन शोषण के आरोपी की सजा को सही ठहराते हुए कहा कि अगर पीड़िता की गवाही साफ और भरोसेमंद है, तो सिर्फ इसलिए उसे गलत नहीं माना जा सकता क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट में कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई।अदालत ने कहा,"यह कानून का एक दोहराया हुआ सिद्धांत है कि बलात्कार के मामलों में केवल अभियोजन पक्ष की गवाही ही पर्याप्त हो सकती है और पीड़िता का एकमात्र साक्ष्य, जब ठोस और सुसंगत हो तो दोषसिद्धि का पता लगाने के लिए उचित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।"अदालत ने आगे कहा,"केवल...

उधारकर्ता द्वारा अवैध रि-एंट्री पर डीएम SARFAESI Act की धारा 14 के तहत कब्जे के आदेश को पुनः निष्पादित कर सकते हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
उधारकर्ता द्वारा अवैध रि-एंट्री पर डीएम SARFAESI Act की धारा 14 के तहत कब्जे के आदेश को पुनः निष्पादित कर सकते हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस हिरदेश की खंडपीठ ने एक अपील स्वीकार करते हुए यह माना कि जिला मजिस्ट्रेट, उधारकर्ता द्वारा अवैध रूप से रि-एंट्री के बाद, SARFAESI अधिनियम की धारा 14 के तहत कब्जे के आदेशों को पुनः निष्पादित कर सकते हैं। न्यायालय ने प्रतिवादी प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उधारकर्ता को गिरवी रखी गई संपत्ति से बेदखल करने के लिए याचिकाकर्ता को आवश्यक सहायता प्रदान करें। मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता ने उधारकर्ता को एक निश्चित बंधक ऋण सुविधा प्रदान की।...

अपमानजनक अभियान: गुजरात हाईकोर्ट ने जजों पर घृणास्पद हमले के लिए वकील को 3 महीने की जेल दी और ₹1 लाख का जुर्माना लगाया
'अपमानजनक अभियान': गुजरात हाईकोर्ट ने जजों पर 'घृणास्पद हमले' के लिए वकील को 3 महीने की जेल दी और ₹1 लाख का जुर्माना लगाया

गुजरात हाईकोर्ट ने एक वकील को हाईकोर्ट के जजों और न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ "झूठे" और "निंदनीय" आरोप लगाने के लिए न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया और उसे तीन महीने के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस आरटी वच्चानी की खंडपीठ ने अवमाननाकर्ता, जो हाईकोर्ट के साथ-साथ राज्य की अन्य अदालतों में कार्यरत एक वकील है, के खिलाफ पिछले कई वर्षों (2011 से शुरू) में स्वतः संज्ञान से दायर अवमानना याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया।पीठ ने कहा कि कार्यवाही के दौरान...

मां या बच्चे की जान को छोड़ बाकी मामलों में गर्भपात को असंवैधानिक घोषित करने की याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा
मां या बच्चे की जान को छोड़ बाकी मामलों में गर्भपात को असंवैधानिक घोषित करने की याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें यह घोषित करने की मांग की गई है कि गर्भवती महिला या अजन्मे बच्चे की जान को गंभीर और तात्कालिक खतरा छोड़कर अन्य सभी परिस्थितियों में गर्भपात (medical termination of pregnancy) असंवैधानिक है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है।यह याचिका हरियाणा निवासी दीपक कुमार द्वारा दायर की गई है, जिसमें मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 की धारा 3(2) के साथ उसमें दी गई व्याख्या-1...