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'मोदी ज़हरीले सांप' टिप्पणी पर मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग, कोर्ट ने जारी किया नोटिस
दिल्ली कोर्ट ने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ कथित घृणास्पद भाषण और मानहानि के आरोप में आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई।राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने एडवोकेट रविंदर गुप्ता द्वारा दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें शिकायत पर संज्ञान लेने से...
MACT मुआवज़े पर विचार करते समय मृतक के वारिसों को मिलने वाली फ़ैमिली पेंशन का कोई असर नहीं होता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 (MV Act) के तहत मुआवज़े की गणना करते समय दावेदार को मिल रही पेंशन और मोटर व्हीकल दुर्घटना में मृतक के कानूनी वारिसों को मिल रही फ़ैमिली पेंशन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।सेबेस्टियानी लाकड़ा और अन्य बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और अन्य और हनुमंतराजू बी. एलआर बनाम एम. अकरम पाशा और अन्य में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए जस्टिस संदीप जैन ने कहा,“सुप्रीम कोर्ट के ऊपर दिए गए फ़ैसलों से यह साफ़ है कि दावेदार को दी जाने वाली पेंशन...
दिल्ली दंगों की साज़िश का मामला: सुप्रीम कोर्ट खालिद सैफी की ज़मानत याचिका पर करेगा सुनवाई, सह-आरोपी को मिली ज़मानत की बराबरी का दावा किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य खालिद सैफी की याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में 2020 के दिल्ली दंगों में एक बड़ी साज़िश के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा ज़मानत न दिए जाने को चुनौती दी गई, जिसमें इंडियन पैनल कोड (IPC) और UAPA के तहत आरोप शामिल रहैं।हालांकि, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि सैफी सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के फैसले के साथ बराबरी का दावा नहीं कर सकते, जिसमें पांच सह-आरोपियों को ज़मानत दी गई।सैफी ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2...
Interest Act | अगर कॉन्ट्रैक्ट में पेमेंट में रुकावट है तो देरी से पेमेंट पर ब्याज का दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कॉन्ट्रैक्ट में देरी से पेमेंट पर ब्याज देने का नियम नहीं होता है तो कोई पार्टी इसका हकदार नहीं है।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने केरल हाईकोर्ट का फैसला खारिज किया, जिसमें रेस्पोंडेंट के पक्ष में देरी से पेमेंट पर ब्याज देने के फैसले को बरकरार रखा गया।यह मामला अप्रैल, 2013 में केरल वाटर अथॉरिटी और रेस्पोंडेंट-कॉन्ट्रैक्टर के बीच गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कालीकट में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए हुए कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है। काम जुलाई 2014...
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुमशुदा लोगों के मामलों में 'ऑम्निबस' राहत की मांग वाली PIL खारिज की, कहा- पुलिसिंग पुलिस पर छोड़ देनी चाहिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को जनहित याचिका खारिज की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी से लोगों के लापता होने के हालिया मुद्दे पर “ऑम्निबस” प्रार्थना की मांग की गई।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता- आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट को फटकार लगाते हुए कहा कि PIL में इस मुद्दे पर कोई खास उदाहरण या डिटेल्स नहीं हैं।जब ट्रस्ट की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मुद्दा गंभीर हैं तो बेंच ने टिप्पणी की:“इसलिए मामले को गंभीरता से लें। सिर्फ इसलिए कि आपको लगता है कि किसी मुद्दे को एक...
छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शव कब्र से निकालकर गांव से बाहर पुनः दफनाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने आज छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के मृतकों के शवों को जबरन कब्र से निकालकर गांव से बाहर स्थानांतरित किए जाने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया कि “इस बीच दफनाए गए शवों को आगे नहीं निकाला जाएगा।” याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्विस ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन शवों को हटाने की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है, जिसके बाद अदालत ने यह अंतरिम...
भाई-भतीजावाद लोकतंत्र के लिए घातक: हरियाणा अधिकारियों को दिए गए डीलक्स फ्लैटों का आवंटन सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से जुड़ी एक हाउसिंग सोसाइटी में फ्लैट आवंटन में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज़्म) पाए जाने पर आवंटन रद्द कर दिया। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा कि सोसाइटी की गवर्निंग बॉडी के सदस्यों ने अपने पद का दुरुपयोग कर स्वयं और अपने अधीनस्थों को लाभ पहुंचाया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें आवंटन प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार किया गया था।मामला HUDA,...
अरुणाचल सीएम के रिश्तेदारों को ₹1270 करोड़ के ठेके देने का आरोप; जांच याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके दिए जाने के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने एडवोकेट प्रशांत भूषण की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य के कई सरकारी ठेके मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, माता और भतीजे से जुड़ी कंपनियों को दिए गए। भूषण ने अदालत...
नाबालिग के स्तन पकड़ना, पायजामे की डोरी खोलना दुष्कर्म का प्रयास नहीं—हाईकोर्ट का फैसला गलत : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग लड़की के स्तन पकड़ने और उसके पायजामे की डोरी खोलने की कोशिश करना दुष्कर्म का प्रयास नहीं, बल्कि केवल “तैयारी” (preparation) है। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की तीन-जजों की खंडपीठ ने माना कि हाईकोर्ट ने आपराधिक कानून के स्थापित सिद्धांतों का स्पष्ट रूप से गलत अनुप्रयोग किया। अदालत ने विशेष न्यायाधीश (POCSO), कासगंज द्वारा जारी मूल समन आदेश बहाल कर दिया,...
POCSO Act: जब कानून न्यूनतम सजा तय करता है तो अदालत कम दंड नहीं दे सकती: बॉम्बे हाइकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कानून किसी अपराध के लिए अनिवार्य न्यूनतम सजा निर्धारित करती है तो अदालत के पास उससे कम सजा देने का कोई विवेकाधिकार नहीं होता।ऐसी स्थिति में अपीलीय अदालत द्वारा न्यूनतम वैधानिक सजा देना सजा में वृद्धि नहीं बल्कि कानून के अनुरूप त्रुटि का सुधार है।जस्टिस राजनिश आर. व्यास दो आपस में जुड़ी अपीलों पर सुनवाई कर रहे थे। स्पेशल जज (POCSO) ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(n) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 5(एल) सहपठित...
शादीशुदा दंपति और नाबालिग बच्चे के हित में कार्यवाही समाप्त: गौहाटी हाइकोर्ट ने बाल विवाह और POCSO मामला किया रद्द
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बाल विवाह निषेध अधिनियम और POCSO Act के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।अदालत ने कहा कि जब दोनों पक्ष विवाह कर चुके हैं, साथ रह रहे हैं और उनका एक नाबालिग बच्चा भी है, तो मुकदमे को जारी रखना निरर्थक होगा।जस्टिस प्रांजल दास ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 528 के तहत अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया।उन्होंने कहा,“वर्तमान मामले के तथ्यों से जो वस्तुस्थिति सामने आई, उसे अनदेखा नहीं किया जा...
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का अधिकार: DM का प्रमाणपत्र जेंडर की अंतिम पुष्टि, पासपोर्ट प्राधिकरण मेडिकल जांच की मांग नहीं कर सकता : इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 की धारा 7 के तहत जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र जेंडर/पहचान का अंतिम और निर्णायक प्रमाण है। पासपोर्ट प्राधिकरण ऐसे मामले में दोबारा मेडिकल जांच या जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव की शर्त नहीं रख सकता।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने खुश आर गोयल की याचिका का निस्तारण करते हुए यह टिप्पणी की।याचिका में पासपोर्ट अधिकारियों की उस कार्रवाई को चुनौती दी गई,...
“ED को हथियार बनाया गया” बनाम “ED को आतंकित किया गया” : ममता बनर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस
I-PAC कार्यालय में तलाशी के दौरान कथित बाधा को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर मामले में एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे “हथियार” नहीं बनाया गया, बल्कि “आतंकित” किया गया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने यह टिप्पणी सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा की उस दलील के जवाब में की, जिसमें उन्होंने एजेंसी के “weaponization” (राजनीतिक उपयोग) का आरोप लगाया था।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने...
जघन्य अपराधों में जमानत के सिद्धांत गंभीर आर्थिक अपराधों पर भी लागू : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जघन्य अपराधों में जमानत के लिए लागू सिद्धांत गंभीर आर्थिक अपराधों पर भी समान रूप से लागू होते हैं, क्योंकि ऐसे अपराध नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक आदतन आर्थिक अपराधी को जमानत दे दी गई थी। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल सह-अभियुक्त के साथ समानता (parity) के आधार पर जमानत दी, जबकि आरोपी की सक्रिय भूमिका,...
लाल किले पर हुए बम धमाके के सिलसिले में फेसबुक पर आपत्तिजनक कमेंट पोस्ट करने के आरोपी को मिली ज़मानत
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने लाल किले के पास हुए बम धमाके के सिलसिले में फेसबुक पर कथित तौर पर आपत्तिजनक कमेंट पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार हुए व्यक्ति को स्थायी ज़मानत दी।जस्टिस प्रांजल दास ने ज़मानत अर्जी मंज़ूर करते हुए कहा,“मामले के मेरिट पर जाए बिना; सिर्फ़ हिरासत की अवधि और जांच पूरी होने पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित कोर्ट की संतुष्टि के लिए उतनी ही रकम के एक उपयुक्त ज़मानत के साथ 25,000 रुपये के ज़मानत बॉन्ड पर जाने की अनुमति दी जाएगी।”न्यायालय के समक्ष रखे गए मामले के अनुसार...
कानूनी वारिस संयुक्त किरायेदार होते हैं, सह-किरायेदार नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने बेदखली डिक्री बरकरार रखी
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस अलग-अलग या स्वतंत्र किरायेदारी अधिकार प्राप्त नहीं करते, बल्कि वे संयुक्त किरायेदार के रूप में उसके स्थान पर आते हैं। ऐसे मामलों में एक संयुक्त किरायेदार के विरुद्ध की गई कार्यवाही सभी पर बाध्यकारी होती है।जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए सह-किरायेदार के उत्तराधिकारियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में बेदखली डिक्री के क्रियान्वयन को चुनौती दी गई...
पेंशन के लिए पूर्व सेवा की गणना पर कोई टकराव नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट की पूर्ण पीठ का स्पष्ट निर्णय
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट की पूर्ण पीठ ने पेंशन संबंधी लाभ के लिए पूर्व सेवा की गणना को लेकर दो खंडपीठ के निर्णयों में कथित विरोधाभास के प्रश्न पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।अदालत ने कहा कि दोनों निर्णय अलग-अलग तथ्यात्मक और वैधानिक परिस्थितियों में दिए गए, इसलिए उनमें किसी प्रकार का वास्तविक टकराव नहीं है।चीफ जस्टिस शील नागू, जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने कहा,“किसी भी निर्णयों के बीच कथित टकराव वास्तविक, प्रत्यक्ष और अपूरणीय होना चाहिए, जो समान तथ्यों और समान विधिक...
अतीत के आधार पर अनवरत कैद उचित नहीं: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट ने पूर्व हिजबुल मुजाहिद्दीन सदस्य को दी जमानत
जम्मू कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और शीघ्र सुनवाई के संवैधानिक अधिकार को पुनः रेखांकित करते हुए कहा कि किसी आरोपी के पूर्व आचरण के आधार पर जिसके लिए वह पहले ही अभियोजन और हिरासत झेल चुका हो उसे वर्तमान मामले में अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता, जब तक उसके खिलाफ विश्वसनीय और प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध न हों।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अब्दुल राशिद की जमानत अपील स्वीकार की और NIA कोर्ट जम्मू द्वारा पारित जमानत...
युवा वकीलों के लिए बड़ी राहत: राजस्थान हाइकोर्ट ने बनाया जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड, कानून की किताबों के लिए मिलेगी सहायता
राजस्थान हाइकोर्ट ने प्रथम पीढ़ी के युवा वकीलों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक अहम पहल की।हाइकोर्ट ने जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड के गठन का निर्देश दिया, जिसके माध्यम से कम आयु और सीमित अनुभव वाले वकीलों को कानून की पुस्तकें खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।यह आदेश जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने पारित किया।अदालत ने कहा कि पहली पीढ़ी के युवा वकीलों के सामने अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने में गंभीर आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियाँ हैं। उनके पास न तो पारिवारिक पृष्ठभूमि का सहारा होता है और न...
गंभीर अपराधों में पीड़ित को मुआवज़ा सज़ा का विकल्प नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ हाईकोर्ट के उस ट्रेंड की आलोचना की, जिसमें गंभीर अपराधों में पीड़ित को दिए जाने वाले मुआवज़े की रकम बढ़ाकर जेल की सज़ा कम कर दी जाती है।कोर्ट ने कहा कि इस तरह के तरीके से यह गलत मैसेज जाएगा कि आरोपी पैसे का मुआवज़ा देकर सज़ा से बच सकता है।कोर्ट ने कहा,"पीड़ित को दिया जाने वाला मुआवज़ा सिर्फ़ मुआवज़े के तौर पर है। इसे सज़ा के बराबर या उसका विकल्प नहीं माना जा सकता।" कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें हत्या की कोशिश के दो दोषियों की सज़ा घटाकर दो महीने कर दी...




















