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प्रोबेट कार्यवाही लंबित होने से रजिस्टर्ड वसीयत में जालसाजी के आरोप वाली FIR पर कोई रोक नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
प्रोबेट कार्यवाही लंबित होने से रजिस्टर्ड वसीयत में जालसाजी के आरोप वाली FIR पर कोई रोक नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने रजिस्टर्ड वसीयत में जालसाजी के आरोप वाली FIR रद्द करने से यह कहते हुए इनकार किया कि वसीयत की वैधता की जांच करने वाली प्रोबेट कार्यवाही लंबित होने से जाली दस्तावेज़ बनाने और इस्तेमाल करने के आरोपों की समानांतर आपराधिक जांच पर कोई रोक नहीं लगती है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने अपने आदेश में यह कहा:"इसलिए जालसाजी, दस्तावेज़ों में हेरफेर और उनका गलत फायदे के लिए इस्तेमाल सिर्फ सिविल अमान्यता के मामले नहीं हैं, बल्कि आपराधिक कानून के तहत स्वतंत्र अपराध हैं। इसलिए किसी...

पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी सत्यापन को पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग को दिए विस्तृत निर्देश
पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' सत्यापन को पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग को दिए विस्तृत निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) प्रक्रिया के संबंध में चुनाव आयोग को कई अहम निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' श्रेणी में रखे गए मतदाताओं का सत्यापन पूरी तरह पारदर्शी ढंग से हो और इससे लोगों को अनावश्यक तनाव या असुविधा न हो।अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जिन व्यक्तियों को गणना (एन्यूमरेशन) फॉर्म में कथित 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के आधार पर नोटिस भेजे गए हैं, उनकी सूची पंचायत भवन और ब्लॉक...

चेक जारी करने वाले द्वारा पेमेंट रोकने के लिए किए गए बड़े बदलाव पर NI Act की धारा 138 लागू होगी; बदलाव किसने किया यह जांच का विषय: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
चेक जारी करने वाले द्वारा पेमेंट रोकने के लिए किए गए बड़े बदलाव पर NI Act की धारा 138 लागू होगी; 'बदलाव किसने किया' यह जांच का विषय: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि चेक में किया गया कोई बड़ा बदलाव अपने आप में आरोपी को आपराधिक ज़िम्मेदारी से बरी नहीं करता, जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) के तहत निर्णायक कारक सिर्फ़ बदलाव की मौजूदगी नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति की पहचान है जिसने वह बदलाव किया।जस्टिस संजय धर की बेंच ने फैसला सुनाया कि जहां पेमेंट रोकने और धारा 138 के तहत कार्यवाही को नाकाम करने के लिए खुद ड्रॉअर द्वारा बदलाव किया जाता है, वहां मुक़दमे को शुरुआती दौर में ही खत्म नहीं किया...

मालवीय नगर चुनाव विवाद: सतीश उपाध्याय की जीत बरकरार, हाइकोर्ट ने खारिज की सोमनाथ भारती की याचिका
मालवीय नगर चुनाव विवाद: सतीश उपाध्याय की जीत बरकरार, हाइकोर्ट ने खारिज की सोमनाथ भारती की याचिका

दिल्ली हाइकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर नेता और पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती को बड़ा कानूनी झटका दिया। अदालत ने मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय के निर्वाचन को चुनौती देने वाली भारती की चुनाव याचिका खारिज की।जस्टिस जसमीत सिंह की एकल पीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में एक ऐसी गंभीर कानूनी खामी है, जिसे बाद में सुधारा नहीं जा सकता। गौरतलब है कि वर्ष 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में सतीश उपाध्याय ने सोमनाथ भारती को मात्र 2,131 मतों...

SC/ST Act के तहत अपराध के लिए अपमान का आधार पीड़ित का अनुसूचित जाति/जनजाति से होना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
SC/ST Act के तहत अपराध के लिए अपमान का आधार पीड़ित का अनुसूचित जाति/जनजाति से होना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल अपशब्दों का प्रयोग करना अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराध नहीं है, जब तक कि ऐसा कृत्य किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करने के स्पष्ट इरादे से न किया गया हो। अदालत ने कहा कि केवल अपमान, भले ही आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी हो, तब तक दंडनीय नहीं है जब तक उसमें जातिगत अपमान का विशिष्ट आशय सिद्ध न हो।जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने अपीलकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को...

Cash For Query Row: लोकपाल ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ़ मंज़ूरी पर फैसला करने के लिए और समय मांगने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया
Cash For Query Row: लोकपाल ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ़ मंज़ूरी पर फैसला करने के लिए और समय मांगने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया

भारत के लोकपाल ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता महुआ मोइत्रा के खिलाफ़ कैश फॉर क्वेरी मामले में CBI को चार्जशीट दाखिल करने की मंज़ूरी देने पर फैसला करने के लिए और समय मांगा।बता दें, पिछले साल हाईकोर्ट ने लोकपाल का आदेश रद्द कर दिया था, जिसमें CBI को उनके खिलाफ़ चार्जशीट दाखिल करने की मंज़ूरी दी गई थी।कोर्ट ने कहा था कि लोकपाल ने लोकपाल अधिनियम के प्रावधानों को समझने में गलती की। इसलिए लोकपाल से एक महीने के भीतर मंज़ूरी के पहलू पर विचार करने का अनुरोध...

इनकम टैक्स नोटिस मामले NDTV फाउंडर प्रणय रॉय और राधिका रॉय को राहत, हाईकोर्ट ने डिपार्टमेंट पर 2 लाख का जुर्माना लगाया
इनकम टैक्स नोटिस मामले NDTV फाउंडर प्रणय रॉय और राधिका रॉय को राहत, हाईकोर्ट ने डिपार्टमेंट पर 2 लाख का जुर्माना लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यू दिल्ली टेलीविज़न लिमिटेड (NDTV) के फाउंडर प्रणय रॉय और राधिका रॉय (याचिकाकर्ता) को जारी किए गए इनकम टैक्स री-असेसमेंट नोटिस रद्द कर दिया। यह मामला न्यूज़ नेटवर्क के प्रमोटर ग्रुप RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक ट्रांज़ैक्शन से संबंधित है।बेंच ने टैक्स अधिकारियों पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि प्रत्येक याचिकाकर्ता को 1 लाख रुपये का भुगतान किया जाए।याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट सचिंत जॉली ने तर्क दिया कि टैक्स अधिकारियों ने पहले...

दुष्कर्म के मामलों में सुनवाई की समयसीमा पीड़ित के न्याय के लिए, आरोपी को खुद-ब-खुद जमानत मिलने का आधार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट
दुष्कर्म के मामलों में सुनवाई की समयसीमा 'पीड़ित के न्याय' के लिए, आरोपी को खुद-ब-खुद जमानत मिलने का आधार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 309 के तहत दुष्कर्म के मुकदमों को दो महीने में पूरा करने का प्रावधान पीड़िता को 'त्वरित न्याय' दिलाने के लिए बनाया गया। इसे आरोपी द्वारा देरी के आधार पर 'ऑटोमैटिक बेल' (स्वचालित जमानत) पाने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय धर की पीठ ने एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी दो व्यक्तियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।क्या...

IPC की धारा 407: गंतव्य से पहले माल उतारना भी आपराधिक विश्वासघात- जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कानून
IPC की धारा 407: गंतव्य से पहले माल उतारना भी आपराधिक विश्वासघात- जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कानून

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी वाहक को माल सुपुर्द किया गया और वह उसे निर्धारित गंतव्य के बजाय रास्ते में ही कहीं और उतार देता है या मार्ग बदल देता है तो यह आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) का अपराध माना जाएगा।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस अपराध को स्थापित करने के लिए माल की वास्तविक बिक्री या उसके निपटान को साबित करना अनिवार्य नहीं है।पूरा मामलायह मामला मार्च, 2006 का है जब विदिशा के जिला आपूर्ति अधिकारी ने...

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेने को एमपी सरकार से कहा
कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेने को एमपी सरकार से कहा

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह मंत्री विजय शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में अभियोजन की स्वीकृति (Sanction to Prosecute) पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले।चीफ जस्टिस सुर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस बागची की खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुका है, लेकिन राज्य सरकार की स्वीकृति का इंतज़ार है, जो भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (सांप्रदायिक वैमनस्य और घृणा को बढ़ावा देना) के तहत...

POCSO Act | चोट की रिपोर्ट न होने पर पीड़ित को मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
POCSO Act | चोट की रिपोर्ट न होने पर पीड़ित को मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष नियम, 2015 के तहत मुआवज़ा तब दिया जाना चाहिए, जब FIR में प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफ़ेंसेस एक्ट, 2012 (POCSO Act) की धारा 4 के तहत अपराध का ज़िक्र हो। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि चोट की रिपोर्ट में किसी चोट का ज़िक्र नहीं है, मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने कहा,“इस स्कीम के तहत पेनिट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट की शिकार को मुआवज़ा इसलिए नहीं दिया...

मनीष सिसोदिया की चुनाव जीत के खिलाफ याचिका खारिज: केवल FIR दर्ज होना आपराधिक इतिहास नहीं
मनीष सिसोदिया की चुनाव जीत के खिलाफ याचिका खारिज: केवल FIR दर्ज होना आपराधिक इतिहास नहीं

दिल्ली हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि किसी चुनाव उम्मीदवार के खिलाफ केवल FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं कि उसके विरुद्ध कोई आपराधिक मामला लंबित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के तहत किसी उम्मीदवार को अपने रिकॉर्ड का खुलासा करने की वैधानिक बाध्यता केवल तभी होती है, जब उस मामले में अदालत द्वारा आरोप तय कर दिए गए हों या अपराध का संज्ञान ले लिया गया हो।जस्टिस जसमीत सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता मनीष सिसोदिया की 2020 विधानसभा चुनाव में...

बार एसोसिएशन राज्य की श्रेणी में नहीं आते, ये सार्वजनिक कार्य नहीं करते: दिल्ली हाइकोर्ट
बार एसोसिएशन 'राज्य' की श्रेणी में नहीं आते, ये सार्वजनिक कार्य नहीं करते: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि बार एसोसिएशन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' या उसकी संस्था की श्रेणी में नहीं आते हैं।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि बार एसोसिएशनों द्वारा किए जाने वाले कार्य मुख्य रूप से व्यक्तिगत वकीलों के हितों की रक्षा के लिए होते हैं, जिन्हें 'सार्वजनिक कार्य' नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह निर्णय एक महिला वकील की अपील खारिज करते हुए सुनाया, जिसमें उन्होंने अपने चैंबर में वकीलों द्वारा किए गए...

स्टाफ़ ने जमानत रिकॉर्ड को रिजेक्टेड की जगह अलाउड लिखा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह क्लर्कियल गलती नहीं है, साइन किया हुआ ऑर्डर वापस नहीं लिया जा सकता
स्टाफ़ ने जमानत रिकॉर्ड को 'रिजेक्टेड' की जगह 'अलाउड' लिखा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह 'क्लर्कियल गलती' नहीं है, साइन किया हुआ ऑर्डर वापस नहीं लिया जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें उसने अपने पहले के आदेश को वापस ले लिया था, जिसमें आरोपी को जमानत दी गई। कोर्ट ने कहा कि एक बार जजमेंट या ऑर्डर साइन हो जाने के बाद क्लर्कियल या गणितीय गलती को ठीक करने के अलावा उसे वापस लेना गलत है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच के सामने एक ऐसा मामला आया, जिसमें हाईकोर्ट ने जमानत देने वाले आदेश को इस आधार पर पलट दिया/वापस ले लिया कि कोर्ट मास्टर ने, हालांकि उसने ऑपरेटिव हिस्से में याचिका को रिजेक्टेड के तौर पर...

नीरव मोदी और बैंक ऑफ इंडिया विवाद: ब्रिटिश अदालत के अनुरोध पर गवाह के बयान दर्ज करेगा दिल्ली हाइकोर्ट
नीरव मोदी और बैंक ऑफ इंडिया विवाद: ब्रिटिश अदालत के अनुरोध पर गवाह के बयान दर्ज करेगा दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने ऐतिहासिक मिसाल पेश करते हुए इंग्लैंड और वेल्स के सुप्रीम कोर्ट (किंग्स बेंच डिवीजन) के उस अनुरोध पर कार्रवाई शुरू की, जिसमें भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी और बैंक ऑफ इंडिया के बीच चल रहे एक कानूनी मामले में भारत में मौजूद गवाह के बयान दर्ज करने की मांग की गई। यह मामला बैंक ऑफ इंडिया द्वारा नीरव मोदी पर लगाए गए कर्ज न चुकाने के आरोपों से जुड़ा है।जस्टिस सी. हरि शंकर की पीठ इस विषय पर सुनवाई कर रही है, जहां ब्रिटिश अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी अनिमेष बरुआ का साक्ष्य दर्ज...

पिछले 5 सालों के IT रिटर्न हमारे सामने रखें, इनकम का सोर्स बताएं: सुप्रीम कोर्ट ने फालतू PIL दायर करने वाले याचिकाकर्ता को फटकारा
'पिछले 5 सालों के IT रिटर्न हमारे सामने रखें, इनकम का सोर्स बताएं': सुप्रीम कोर्ट ने 'फालतू' PIL दायर करने वाले याचिकाकर्ता को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में याचिकाकर्ता से पिछले पांच सालों के इनकम-टैक्स रिटर्न और अपनी इनकम के सोर्स का एफिडेविट रिकॉर्ड पर रखने को कहा। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका (PIL) दायर की थी।यह तब हुआ, जब कोर्ट ने यह राय बनाई कि याचिका "फालतू" थी और "पब्लिसिटी स्टंट" के तौर पर दायर की गई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा,"इससे पहले कि हम याचिकाकर्ता पर, जिसने कथित तौर पर जनहित में एक फालतू याचिका दायर की, जो पब्लिसिटी स्टंट से ज़्यादा...

POCSO Act: उम्र छिपाने और फर्जी आधार के जरिए हुई शादी के मामले में मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने आरोपी को दी जमानत
POCSO Act: उम्र छिपाने और फर्जी आधार के जरिए हुई शादी के मामले में मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने आरोपी को दी जमानत

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने एक 34 वर्षीय व्यक्ति की जमानत याचिका स्वीकार की, जिस पर अपनी 15 वर्षीय पत्नी के साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता के साथ लड़की के परिवार ने धोखाधड़ी की थी और फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से उसकी वास्तविक उम्र को छिपाकर यह विवाह संपन्न कराया गया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की खंडपीठ ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि आरोपी ने इस मामले के प्रकाश में आने से पहले ही राजस्थान के बारां जिले में लड़की के परिजनों के विरुद्ध...

क्या भारत में OCI कार्डधारकों के बच्चों को भारतीय मूल का व्यक्ति माना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला
क्या भारत में OCI कार्डधारकों के बच्चों को 'भारतीय मूल का व्यक्ति' माना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पेशल लीव पिटीशन पर नोटिस जारी किया, जिसमें यह जांच की जाएगी कि क्या "भारतीय मूल के व्यक्तियों" में ऐसे बच्चे शामिल हो सकते हैं, जो भारत में पैदा हुए, जिनके माता-पिता जन्म के समय भारत के नागरिक नहीं हैं, लेकिन कानूनी तौर पर ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक हैं।यह SLP दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसने सिंगल जज का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया कि अपीलकर्ता "भारतीय मूल" का व्यक्ति बनने के योग्य है।अपीलकर्ता रचिता फ्रांसिस...

अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम: परिवार न होने के आधार पर वयस्क पीड़िता को संरक्षण गृह में नहीं रखा जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट
अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम: परिवार न होने के आधार पर वयस्क पीड़िता को संरक्षण गृह में नहीं रखा जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट

बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा कि अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 का उद्देश्य यौन शोषण की शिकार महिलाओं को दंडित करना नहीं है। अदालत ने ऐसी महिला को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया, जिसे पुलिस छापे के दौरान बचाया गया लेकिन इस आधार पर जबरन संरक्षण गृह भेज दिया गया कि उसका कोई परिवार या आय का साधन नहीं है।जस्टिस निजामुद्दीन जमादार ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें महिला को एक वर्ष के लिए संरक्षण गृह में रखने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी...