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शराब नीति मामला: केजरीवाल समेत सभी आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए समय, 2 अप्रैल को अगली सुनवाई
दिल्ली शराब नीति मामले में दिल्ली हाइकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।बता दें, यह याचिका विशेष अदालत द्वारा दिए गए कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने (एक्सपंज) की मांग से जुड़ी है।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने आरोपियों के वकीलों के अनुरोध पर उन्हें अतिरिक्त समय दिया और मामले को 2 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दिया।सुनवाई के दौरान ED की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू और विशेष वकील...
धारा 151 CPC के तहत निष्फल मुकदमों को समाप्त कर सकती है सिविल कोर्ट: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी मुकदमे का मूल कारण (cause of action) बाद की घटनाओं के चलते समाप्त हो जाता है, तो सिविल कोर्ट अपनी निहित शक्तियों (Section 151 CPC) का प्रयोग करते हुए ऐसे मुकदमे को निष्फल (infructuous) घोषित कर खारिज कर सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मुकदमों को केवल अंतरिम आदेश बनाए रखने या भविष्य की संभावनाओं के आधार पर लंबित नहीं रखा जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने भारत संघ द्वारा दायर सिविल रिवीजन आवेदन पर सुनवाई करते हुए की। याचिका सिटी सिविल कोर्ट के...
FIR रद्द करने की याचिका को मेरिट पर सुनना जरूरी, पुलिस को निर्देश देकर निपटाना गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एफआईआर रद्द करने (quashing) की याचिकाओं को हाईकोर्ट द्वारा मेरिट पर तय किया जाना अनिवार्य है और केवल पुलिस को अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) के दिशा-निर्देशों का पालन करने का निर्देश देकर याचिका का निस्तारण करना न्यायसंगत नहीं है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बिना मामले के तथ्यों और कानून का परीक्षण किए, केवल पुलिस को गिरफ्तारी संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करने को कहकर...
पीड़ित और दोषी एक ही गांव के हों, यह अकेले पैरोल से इनकार का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि दोषी और पीड़ित एक ही गांव में रहते हैं, पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि ऐसी आशंका सिर्फ अनुमान (conjecture) पर आधारित है और इससे पैरोल के सुधारात्मक उद्देश्य पर असर पड़ता है।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि पैरोल का उद्देश्य कैदी को परिवार से जोड़कर उसमें आत्ममंथन और सुधार की भावना विकसित करना है।मामला क्या था?याचिकाकर्ता की पैरोल अर्जी इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि वह और पीड़ित एक...
एल्विश यादव को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने 'स्नेक वेनम' मामले में FIR रद्द की, नई शिकायत की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी राहत देते हुए कथित स्नेक वेनम मामले में दर्ज FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द की। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित प्राधिकरण कानून के अनुसार नई शिकायत दर्ज कर सकता है।जस्टिस एम. एम. सुंद्रेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में कानूनी आधारों पर एफआईआर टिक नहीं पाती।अदालत ने दो मुख्य पहलुओं पर विचार किया पहला, मादक द्रव्य कानून (NDPS Act) की धाराओं का लागू होना और दूसरा, वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत...
बिना प्रभावी सुनवाई का अवसर दिए विदेशी तलाक डिक्री मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक का डिक्री तब तक भारत में मान्य नहीं होगा, जब तक कि दूसरे पक्ष को उस कार्यवाही में प्रभावी और सार्थक रूप से भाग लेने का अवसर न दिया गया हो।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें अमेरिकी अदालत द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को मान्यता दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पति को अमेरिकी कार्यवाही में ना तो प्रभावी सुनवाई का अवसर मिला और ना ही उसने उसमें सार्थक भागीदारी...
ईशा फाउंडेशन के खिलाफ कथित मानहानि सामग्री हटाने का आदेश: दिल्ली हाइकोर्ट सख्त, मीडिया आउटलेट की याचिका खारिज
दिल्ली हाइकोर्ट ने तमिल मीडिया संस्थान नक्कीरन पब्लिकेशंस को सद्गुरु की ईशा फाउंडेशन के खिलाफ प्रकाशित कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने का निर्देश दिया।अदालत ने साथ ही नक्कीरन द्वारा दायर वह आवेदन भी खारिज किया, जिसमें मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही खत्म करने की मांग की गई।जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने साफ शब्दों में कहा, आदेश 7 नियम 11 की याचिका खारिज की जाती है। सभी आपत्तिजनक सामग्री हटाई जाए।यह मामला वर्ष 2024 में दायर उस मानहानि वाद से जुड़ा है, जिसमें ईशा फाउंडेशन ने आरोप लगाया था कि नक्कीरन...
अवैध कब्जे पर सख्त रुख: SAIL ग्रेच्युटी रोककर पेनल रेंट में कर सकता है एडजस्ट—सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) अपने कर्मचारियों द्वारा रिटायरमेंट के बाद कंपनी के क्वार्टर खाली न करने की स्थिति में ग्रेच्युटी रोक सकता है और बकाया से दंडात्मक किराया (penal rent) समायोजित कर सकता है। अदालत ने इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट के विपरीत आदेशों को रद्द कर दिया।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने SAIL की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि कंपनी के ग्रेच्युटी नियम, 1978 के तहत प्रबंधन को यह अधिकार है कि वह नियमों का पालन न होने पर...
'उस्ताद भगत सिंह' पर आपत्तिजनक सामग्री पर रोक: बेंगलुरु कोर्ट ने जारी किया 'जॉन डो' आदेश
एक्टर पवन कल्याण की फिल्म उस्ताद भगत सिंह को लेकर बेंगलुरु सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री के प्रसार पर अस्थायी रोक लगाई। अदालत ने 'जॉन डो' के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी यह आदेश लागू किया।मिथ्री मूवी मेकर्स द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एकतरफा (एक्स-पार्टी) अंतरिम आदेश पारित किया।कोर्ट ने निर्देश दिया कि कोई भी व्यक्ति या मंच फिल्म के बारे में झूठी, दुर्भावनापूर्ण, अपमानजनक या मानहानिकारक सामग्री का प्रसारण, प्रकाशन या साझा...
वडोदरा कार हादसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत में दखल देने से किया इनकार
वडोदरा कार हादसे के बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की याचिका खारिज करते हुए आरोपी को मिली जमानत में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी पहले ही लगभग नौ महीने से हिरासत में है, ऐसे में उसे और समय तक जेल में रखने का कोई ठोस आधार नहीं है।यह मामला 23 वर्षीय कानून के छात्र रक्षित रवीश चोरासिया से जुड़ा है, जिस पर मार्च 2025 में नशे की हालत में लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप है। इस हादसे में एक...
नीरव मोदी प्रत्यर्पण मामला: पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज ने ब्रिटेन में दिया समर्थन, सुनवाई पूरी
भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले में एक नया मोड़ आया है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज दीपक वर्मा ने यूनाइटेड किंगडम में उसकी अपील के समर्थन में गवाही दी।रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस दीपक वर्मा ने कहा कि यदि नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो उससे CBI, ED और अन्य जांच एजेंसियां पूछताछ कर सकती हैं।उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा दिया गया यह आश्वासन कि मोदी से पूछताछ नहीं होगी, भारतीय अदालतों पर बाध्यकारी नहीं होगा।नीरव मोदी की ओर से यह दलील दी जा रही है कि भारत लाए...
दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन दशक पुराने मामले में क्लर्क को बरी किया, कहा- CBI केस साबित करने में नाकाम रही
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग (DESU) के पूर्व क्लर्क को 1994 के भ्रष्टाचार के मामले में बरी किया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपी ने रिश्वत की मांग की थी या उसे स्वीकार किया था।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने स्पेशल जज के 2003 का फैसला रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत दोषी ठहराया गया था।यह मामला एक उपभोक्ता की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी, जो उस समय DESU कार्यालय में...
अगर पुलिस 'दबाव डाले' तो अवमानना का मामला भेजें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को दी सलाह
हाल ही में दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब मजिस्ट्रेट कुछ खास 'असुविधाजनक' मामलों की जांच के आदेश देते हैं तो कभी-कभी बड़े पुलिस अधिकारी उन पर 'दबाव डालने' की कोशिश करते हैं।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने मजिस्ट्रेटों को साफ तौर पर सलाह दी कि अगर उन्हें किसी पुलिस अधिकारी की तरफ से ऐसी कोई शर्मिंदगी या दबाव महसूस हो, तो वे कभी भी हाईकोर्ट में अवमानना का मामला भेज सकते हैं।बेंच ने अपने आदेश में कहा,"मजिस्ट्रेट को ज़रूरी आदेश देने में हिचकिचाना...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 साल बाद पुलिसकर्मी पर चाकू से हमला करने के आरोपी की सजा बरकरार रखी
एक पुलिस अधिकारी पर "साहसी हमले" के दो दशक से भी ज़्यादा समय बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति की सज़ा और दोषसिद्धि बरकरार रखी, जिसने पिछली पुलिस कार्रवाई के दौरान रोके जाने के बदले में एक हेड कांस्टेबल पर चाकू से हमला किया था।जस्टिस विमल कुमार यादव ने आरोपी द्वारा दायर अपील खारिज की और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 392, 394 और 397 (लूट) के तहत उसकी दोषसिद्धि की पुष्टि की।यह मामला अप्रैल 2002 का है, जब हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार ड्यूटी के बाद घर लौट रहे थे, तभी दिल्ली के...
सोशल मीडिया पर सिर्फ़ 'बुली' या 'गैर-पेशेवर' शब्द इस्तेमाल करना मानहानि नहीं: दिल्ली कोर्ट
दिल्ली कोर्ट ने हाल ही में कहा कि सोशल मीडिया पर सिर्फ़ "बुली" या "गैर-पेशेवर" जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना मानहानि नहीं है, और न ही इनमें मानहानि करने की कोई संभावना है।तीस हज़ारी कोर्ट के ज़िला जज अरविंद बंसल ने कहा,"कोर्ट मानहानि कानून की आड़ में सोशल मीडिया पर की गई आलोचना की उचित बातों को खारिज नहीं कर सकती।" जज ने ये बातें तब कहीं जब वे एक कारोबारी विदुर कनोडिया द्वारा सोशल मीडिया प्रोफेशनल लक्षिता जैन के खिलाफ दायर सिविल मानहानि के मुकदमे को खारिज कर रहे थे। जैन ने इंस्टाग्राम पर...
आत्महत्या सभ्य दुनिया की समस्या, जो तनाव और सामाजिक दबाव से पैदा होती है: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में व्यक्ति को दोषी ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आत्महत्या तेज़ी से "सभ्य दुनिया की एक समस्या" बनती जा रही है, जो अक्सर तनाव, सामाजिक दबाव और सहयोग प्रणालियों के टूटने के कारण होती है। कोर्ट ने यह टिप्पणी अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए की।जस्टिस विमल कुमार यादव ने ये टिप्पणियां पति द्वारा दायर अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कीं। उन्होंने पति की सज़ा को IPC की धारा 304B (दहेज मृत्यु) से बदलकर IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत कर दिया, जबकि IPC...
अपीलीय अदालत को MACT मुआवज़े में हल्के में दखल नहीं देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को फैसला सुनाया कि अपीलीय अदालतें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा तय की गई विकलांगता और मुआवज़े के आकलन में तब तक दखल नहीं दे सकतीं, जब तक कि वे सबूतों का पूरी तरह से फिर से मूल्यांकन न करें और स्पष्ट तथा ठोस कारण न बताएं।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"...जब कोई अपीलीय अदालत मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा विधिवत दर्ज किए गए तथ्यों के निष्कर्षों में दखल देती है, खासकर विकलांगता के आकलन और कमाई की क्षमता में...
ID Act के तहत 'उद्योग' की परिभाषा से दान और पेशे को बाहर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा जयसिंह की दलील
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा (1978) में तत्कालीन जस्टिस वी. के. कृष्णा अय्यर द्वारा दी गई "उद्योग" की विस्तृत परिभाषा के संबंध में एक संदर्भ पर सुनवाई जारी रखी।सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह (1978 के फैसले का समर्थन करते हुए) ने प्रस्तुत किया कि अब निरस्त औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 रोजगार की सुरक्षा के लिए एक लाभकारी कानून था। उन्होंने कहा कि यह एक पूर्व-संवैधानिक कानून था जिसे इंग्लैंड में हो रहे औद्योगिक विकास की पृष्ठभूमि में तैयार...
कानूनी कार्यवाही के कारण हुई भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत
भगत सिंह को अपने जीवनकाल के दौरान दो महत्वपूर्ण ट्रायलों का सामना करना पड़ा। पहला दिल्ली में केंद्रीय विधान सभा बम की घटना से उत्पन्न हुआ, जबकि दूसरा लाला लाजपत राय की मौत के जवाब में सॉन्डर्स की हत्या से संबंधित लाहौर षड्यंत्र मामला था। पूर्व में, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जबकि बाद वाले में भगत सिंह को सुखदेव और राजगुरु के साथ मौत की सजा सुनाई गई थी। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, तीन क्रांतिकारियों को 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई। लगभग 45 साल बाद अपनी शहादत...
फैंटम मिसालें: भारतीय अदालतों में AI-जनित केस लॉ का उदय
सामान्य कानून निर्णयों की वैधता मिसाल की प्रामाणिकता पर निर्भर करती है। यदि मनगढ़ंत अधिकारी न्यायिक तर्क में प्रवेश करते हैं, तो निर्णय के सिद्धांत की अखंडता से ही समझौता किया जाता है। हाल ही में, हालांकि, वैश्विक क्षेत्राधिकारों में एक विघटनकारी और अत्यधिक चिंताजनक प्रवृत्ति उभरी है, फैंटम केस कानून प्रस्तुत करना। लिखित प्रस्तुतियों की समीक्षा करने वाले न्यायिक अधिकारी तेजी से उन निर्णयों के लिए पूरी तरह से प्रारूपित उद्धरणों की खोज कर रहे हैं जो बस मौजूद ही नहीं हैं। ये अपराधी इन वकीलों...




















