अरुणाचल सीएम के रिश्तेदारों को ₹1270 करोड़ के ठेके देने का आरोप; जांच याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

Praveen Mishra

18 Feb 2026 3:17 PM IST

  • अरुणाचल सीएम के रिश्तेदारों को ₹1270 करोड़ के ठेके देने का आरोप; जांच याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

    सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके दिए जाने के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने एडवोकेट प्रशांत भूषण की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।

    याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य के कई सरकारी ठेके मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, माता और भतीजे से जुड़ी कंपनियों को दिए गए। भूषण ने अदालत को बताया कि पिछले 11 वर्षों में मुख्यमंत्री की पत्नी की कंपनी 'ब्रांड ईगल्स' और स्वयं मुख्यमंत्री से जुड़ी 'फ्रंटियर एसोसिएट्स' को बड़े पैमाने पर ठेके दिए गए। उनके अनुसार, लगभग 15 कंपनियां मुख्यमंत्री से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़ी हैं और इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की आशंका है, इसलिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराई जानी चाहिए।

    भूषण ने दावा किया कि केवल 'ब्रांड ईगल्स' को 11 वर्षों में 31 ठेके दिए गए जिनकी कुल कीमत लगभग ₹188 करोड़ है, जबकि 'फ्रंटियर एसोसिएट्स' को 13 वर्षों में 91 ठेके मिले जिनकी कुल कीमत लगभग ₹145 करोड़ बताई गई। उन्होंने यह भी कहा कि कई कार्य बिना टेंडर के वर्क ऑर्डर के माध्यम से दिए गए, जबकि राज्य के नियमों के अनुसार एक समय में किसी कंपनी को सीमित संख्या में ही कार्य दिए जा सकते हैं।

    राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट रऊफ रहीम ने कहा कि राज्य सरकार का हलफनामा 2015 से 2025 की अवधि तक सीमित है और केवल चार कंपनियों—ब्रांड ईगल्स, फ्रंटियर एसोसिएट्स, एलायंस ट्रेडिंग और आरडी कंस्ट्रक्शन—से संबंधित जानकारी दी गई है। भूषण ने आरोप लगाया कि इन चार कंपनियों को पिछले दस वर्षों में लगभग ₹1,270 करोड़ के कार्य दिए गए, जिनमें से कई बिना टेंडर के दिए गए।

    याचिकाकर्ताओं ने जांच के लिए कई प्रश्न उठाए हैं, जिनमें यह शामिल है कि क्या संबंधित कंपनियां मुख्यमंत्री या उनके परिवार से जुड़ी हैं, क्या यह जानकारी विभाग को दी गई थी, क्या बोली लगाने वाली कंपनियां आपस में संबंधित थीं, क्या अनुबंध बाजार दरों पर दिए गए और क्या कार्य टेंडर की शर्तों के अनुसार पूरे किए गए।

    यह मामला 2024 में दायर याचिका से उत्पन्न हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया कि महत्वपूर्ण सरकारी ठेके मुख्यमंत्री के करीबी व्यक्तियों को दिए गए, जिनमें उनकी पत्नी की कंपनी और भतीजे की कंपनी भी शामिल है। अदालत ने जनवरी 2024 में नोटिस जारी किया था और मार्च 2025 में गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा था। इससे पहले एक अन्य मामले में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया था, जिसमें मंत्रियों द्वारा अपने रिश्तेदारों को अनुचित लाभ न देने संबंधी आचार संहिता की बात कही गई थी।

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