दिल्ली दंगों की साज़िश का मामला: सुप्रीम कोर्ट खालिद सैफी की ज़मानत याचिका पर करेगा सुनवाई, सह-आरोपी को मिली ज़मानत की बराबरी का दावा किया खारिज

Shahadat

18 Feb 2026 4:11 PM IST

  • दिल्ली दंगों की साज़िश का मामला: सुप्रीम कोर्ट खालिद सैफी की ज़मानत याचिका पर करेगा सुनवाई, सह-आरोपी को मिली ज़मानत की बराबरी का दावा किया खारिज

    सुप्रीम कोर्ट ने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य खालिद सैफी की याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में 2020 के दिल्ली दंगों में एक बड़ी साज़िश के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा ज़मानत न दिए जाने को चुनौती दी गई, जिसमें इंडियन पैनल कोड (IPC) और UAPA के तहत आरोप शामिल रहैं।

    हालांकि, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि सैफी सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के फैसले के साथ बराबरी का दावा नहीं कर सकते, जिसमें पांच सह-आरोपियों को ज़मानत दी गई।

    सैफी ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर, 2025 के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की, जिसमें उन्हें ज़मानत देने से इनकार किया गया। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने मामले के पांच अन्य आरोपियों को ज़मानत दी थी, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था। बाद में बाकी दो आरोपी तस्लीम अहमद और अब खालिद सैफी ने कोर्ट का रुख किया। तस्लीम अहमद की याचिका में नोटिस जारी किया गया। सैफी की याचिका के मुताबिक, उसने पांच साल जेल की सज़ा काटी है और वह गुलफिशा और दूसरों के साथ बराबरी की मांग कर रहा है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में जमानत मिली थी।

    जस्टिस कुमार ने एडवोकेट रजत कुमार (सैफी) से पूछा कि आरोपी की क्या भूमिका थी। कुमार ने बताया कि आरोप है कि सैफी DPSG, CAB टीम और यूनाइटेड अगेंस्ट हेट जैसे कई WhatsApp ग्रुप्स का मेंबर था और खुरेजी, करावल नगर, कर्दम नगर और निज़ामुद्दीन में कई प्रोटेस्ट साइट्स का क्रिएटर था। आगे आरोप यह है कि उसने सांप्रदायिक दंगे भड़काने के इरादे से भड़काऊ भाषण दिया।

    उस पर DPSG ग्रुप में मैसेज भेजने का आरोप है, जिसमें लोगों को पुलिस द्वारा लगाए गए CCTV कैमरों को काले टेप से ढकने का निर्देश दिया गया।

    कुमार ने कहा कि हो सकता है कि वह खुरेजी में प्रोटेस्ट साइट का हिस्सा रहे हों, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि वह दूसरे प्रोटेस्ट साइट का हिस्सा थे।

    जस्टिस अरविंद कुमार ने फिर पूछा:

    "आप लोगों को सांप्रदायिक दंगों के लिए भड़काना चाहते हैं, आह? फिर आप उन पांच लोगों के साथ बराबरी का दावा करते हैं?... क्या यही आपकी मुख्य दलील है?... अगर आप हमारे फैसले पर बराबरी का दावा कर रहे हैं तो हम सीधे कहेंगे नहीं!.. दूसरा, आप कह रहे हैं कि आपने कभी लोगों को सांप्रदायिक दंगों के लिए नहीं भड़काया और आपने कभी इस तरह के भाषण नहीं दिए..."

    कुमार ने कहा कि प्रोटेस्ट साइट पर कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ, जिसे सैफी ने संभाला था और वहां से कोई हथियार वगैरह बरामद नहीं हुआ।

    हालांकि, जस्टिस कुमार ने मौखिक रूप से कहा कि शारीरिक हिंसा कोई ज़रूरत नहीं है।

    जस्टिस कुमार ने कहा,

    "अगर यह X जगह पर होता है, और आप लोगों से कहते हैं कि Y जगह जाकर ऐसा करें। अगर यह उस जगह पर नहीं है, जहां आपने X पर भाषण दिया था, अगर यह नहीं होता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि दंगे नहीं हुए हैं। प्लीज़ मुझे बताएं कि कितने लोग मारे गए?...हम आपको 153 बताएंगे...और कितने लोग घायल हुए, और कितने पुलिसवाले मारे गए? आपको पूरी तैयारी के साथ आना चाहिए। सॉरी, नहीं।"

    शुरू में कोर्ट ने आदेश देने से मना कर दिया, लेकिन बाद में उसने नोटिस जारी किया और तस्लीम मामले के साथ टैग कर दिया।

    Case Details: ABDUL KHALID SAIFI @ KHALID SAIFI Vs STATE (NCT OF DELHI)|Diary No. 7493 / 2026

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