“ED को हथियार बनाया गया” बनाम “ED को आतंकित किया गया” : ममता बनर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस

Praveen Mishra

18 Feb 2026 1:37 PM IST

  • “ED को हथियार बनाया गया” बनाम “ED को आतंकित किया गया” : ममता बनर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस

    I-PAC कार्यालय में तलाशी के दौरान कथित बाधा को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर मामले में एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे “हथियार” नहीं बनाया गया, बल्कि “आतंकित” किया गया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने यह टिप्पणी सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा की उस दलील के जवाब में की, जिसमें उन्होंने एजेंसी के “weaponization” (राजनीतिक उपयोग) का आरोप लगाया था।

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने मामले को 18 मार्च के लिए सूचीबद्ध किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ED अपनी प्रत्युत्तर हलफनामा (rejoinder) दाखिल करने वाली है। यह याचिका ED ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस अधिकारियों और राज्य प्रशासन ने कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय में 8 जनवरी को की गई तलाशी के दौरान एजेंसी के काम में बाधा डाली।

    पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर की आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और कहा था कि मामला गंभीर है तथा इसकी जांच आवश्यक है, अन्यथा राज्य में “कानूनहीनता की स्थिति” उत्पन्न हो सकती है। अदालत ने राज्य सरकार को तलाशी स्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया था।

    मामले की पृष्ठभूमि

    कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग जांच से संबंधित है। ED का आरोप है कि तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ मौके पर पहुंचीं, अधिकारियों से तीखी बातचीत की और कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गईं, जिससे जांच प्रभावित हुई। एजेंसी के अनुसार, मुख्यमंत्री की उपस्थिति और कथित दस्तावेज हटाने की घटना ने अधिकारियों को भयभीत किया और एजेंसी के स्वतंत्र कार्य में बाधा उत्पन्न की। ED ने राज्य प्रशासन पर बार-बार सहयोग न करने का भी आरोप लगाया है।

    वहीं, पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी ED अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में ED ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है, यह कहते हुए कि राज्य कार्यपालिका के कथित हस्तक्षेप के कारण निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी आवश्यक है। इससे पहले ED ने इसी घटना को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का भी रुख किया था। 14 जनवरी को हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए ED के उस बयान को रिकॉर्ड किया था कि I-PAC कार्यालय या उसके निदेशक प्रतीक जैन से कोई सामग्री जब्त नहीं की गई।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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