छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शव कब्र से निकालकर गांव से बाहर पुनः दफनाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

Praveen Mishra

18 Feb 2026 3:33 PM IST

  • छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शव कब्र से निकालकर गांव से बाहर पुनः दफनाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने आज छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के मृतकों के शवों को जबरन कब्र से निकालकर गांव से बाहर स्थानांतरित किए जाने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी।

    जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया कि “इस बीच दफनाए गए शवों को आगे नहीं निकाला जाएगा।” याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्विस ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन शवों को हटाने की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है, जिसके बाद अदालत ने यह अंतरिम राहत दी।

    अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों को अपने गांव की सीमा के भीतर मृतकों को दफनाने से जबरन रोका जा रहा है, जबकि अन्य समुदायों को ऐसा करने की अनुमति है। आरोप है कि याचिकाकर्ताओं के परिजनों के शव उनकी जानकारी के बिना कब्र से निकालकर गांव से दूर स्थानों पर ले जाने का प्रयास किया गया।

    याचिका में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के रमेश बघेल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में आए विभाजित फैसले का उपयोग पुलिस द्वारा ईसाइयों को अपने गांव में दफनाने से रोकने के लिए किया जा रहा है, भले ही वहां कोई स्थानीय विवाद न हो। उस मामले में एक न्यायाधीश ने निजी भूमि पर दफन की अनुमति दी थी, जबकि दूसरे न्यायाधीश ने केवल निर्धारित ईसाई कब्रिस्तान में दफनाने की बात कही थी।

    इस पृष्ठभूमि में याचिका में मांग की गई है कि धर्म, जाति या समुदाय की परवाह किए बिना सभी लोगों को अपने निवास वाले गांव में मृतकों को दफनाने का अधिकार घोषित किया जाए। साथ ही राज्य के सभी ग्राम पंचायतों को प्रत्येक गांव में सभी समुदायों के लिए कब्रिस्तान हेतु भूमि चिन्हित करने और पारंपरिक दफन प्रथाओं में हस्तक्षेप न करने के निर्देश देने की मांग भी की गई है।

    उल्लेखनीय है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी थी, जिसमें ग्राम सभा द्वारा गांव के प्रवेश द्वार पर ईसाई पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक संबंधी बोर्ड लगाए जाने की कार्रवाई को सही ठहराया गया था।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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