कानूनी वारिस संयुक्त किरायेदार होते हैं, सह-किरायेदार नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने बेदखली डिक्री बरकरार रखी
Amir Ahmad
18 Feb 2026 12:59 PM IST

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस अलग-अलग या स्वतंत्र किरायेदारी अधिकार प्राप्त नहीं करते, बल्कि वे संयुक्त किरायेदार के रूप में उसके स्थान पर आते हैं। ऐसे मामलों में एक संयुक्त किरायेदार के विरुद्ध की गई कार्यवाही सभी पर बाध्यकारी होती है।
जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए सह-किरायेदार के उत्तराधिकारियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में बेदखली डिक्री के क्रियान्वयन को चुनौती दी गई थी।
मामला
विवादित संपत्ति वर्ष 1949 में दो सह-किरायेदारों को किराये पर दी गई। बाद में दोनों मूल किरायेदारों की मृत्यु हो गई, लेकिन उनके परिवार के सदस्य बिना किराया दिए और बिना संपत्ति खाली किए वहीं निवास करते रहे। इसके बाद मकान मालिक द्वारा बेदखली की कार्यवाही शुरू की गई, जिसे सक्षम प्राधिकरण ने स्वीकार कर लिया।
डिक्री के क्रियान्वयन के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति उठाई कि उनके दिवंगत पिता, जो मूल सह-किरायेदारों में से एक के उत्तराधिकारी थे, को बेदखली कार्यवाही में पक्षकार नहीं बनाया गया। इसलिए डिक्री उनके विरुद्ध लागू नहीं की जा सकती।
किराया न्यायाधिकरण और अपीलीय प्राधिकरण ने इस आपत्ति को खारिज किया, जिसके बाद हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई।
हाइकोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि चूंकि मूल किरायेदारी सह-किरायेदारी थी, इसलिए वे और अन्य सह-किरायेदारों के उत्तराधिकारी भी सह-किरायेदार ही हैं और उन्हें बेदखली वाद में अलग से पक्षकार बनाया जाना आवश्यक था।
अदालत ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि स्थापित विधिक सिद्धांत के अनुसार मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद किरायेदारी अधिकार उसके वारिसों को संयुक्त किरायेदारी के रूप में प्राप्त होते हैं, न कि अलग-अलग स्वतंत्र सह-किरायेदारी के रूप में।
पीठ ने कहा,
“संयुक्त किरायेदारी अविभाज्य होती है। इससे अलग-अलग स्वतंत्र किरायेदारी अधिकार उत्पन्न नहीं होते। सह-किरायेदार अपने अधिकार स्वतंत्र रूप से प्राप्त करते हैं, जबकि संयुक्त किरायेदार सामूहिक रूप से अधिकार प्राप्त करते हैं और एक ही किरायेदारी का प्रतिनिधित्व करते हैं। संयुक्त किरायेदारी के मामलों में किसी एक संयुक्त किरायेदार को नोटिस देना या उसके विरुद्ध बेदखली कार्यवाही प्रारंभ करना पर्याप्त है और ऐसी डिक्री सभी संयुक्त किरायेदारों पर लागू होती है।”
अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता मूल किरायेदार से अधिक या स्वतंत्र दर्जा दावा नहीं कर सकते। चूंकि कानूनन वे संयुक्त किरायेदार हैं, इसलिए बेदखली डिक्री उनके विरुद्ध भी प्रभावी है।
इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की और बेदखली डिक्री बरकरार रखी।

