शादीशुदा दंपति और नाबालिग बच्चे के हित में कार्यवाही समाप्त: गौहाटी हाइकोर्ट ने बाल विवाह और POCSO मामला किया रद्द

Amir Ahmad

18 Feb 2026 1:41 PM IST

  • शादीशुदा दंपति और नाबालिग बच्चे के हित में कार्यवाही समाप्त: गौहाटी हाइकोर्ट ने बाल विवाह और POCSO मामला किया रद्द

    गुवाहाटी हाइकोर्ट ने विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बाल विवाह निषेध अधिनियम और POCSO Act के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।

    अदालत ने कहा कि जब दोनों पक्ष विवाह कर चुके हैं, साथ रह रहे हैं और उनका एक नाबालिग बच्चा भी है, तो मुकदमे को जारी रखना निरर्थक होगा।

    जस्टिस प्रांजल दास ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 528 के तहत अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया।

    उन्होंने कहा,

    “वर्तमान मामले के तथ्यों से जो वस्तुस्थिति सामने आई, उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। पक्षकार विवाहित हैं, शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं और उनका एक नाबालिग बच्चा भी है। ऐसे में मुकदमे को जारी रखना निरर्थक प्रयास होगा। इसके अलावा इस प्रकार का अभियोजन बच्चे और पीड़िता के हितों के प्रतिकूल भी हो सकता है।”

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि याचिका में रोचक स्थिति यह थी कि आरोपी और कथित पीड़िता दोनों ने संयुक्त रूप से कार्यवाही रद्द करने का अनुरोध किया था।

    मामला

    यह याचिका BNSS की धारा 528 के तहत दायर की गई थी। मामला बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 9, 10 और 11 तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (POCSO) की धारा 6 और 17 के तहत दक्षिण सालमारा मनकाचर के स्पेशल जज के कोर्ट में लंबित था।

    FIR 02.02.2023 को तत्कालीन ग्राम रक्षा दल (वीडीपी) सचिव द्वारा दर्ज कराई गई, जिसमें बाल विवाह का आरोप लगाया गया। जांच के बाद आरोप-पत्र दाखिल हुआ और आरोप तय होने के पश्चात मामला साक्ष्य के चरण में पहुंच गया।

    इस बीच कथित पीड़िता ने हाइकोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर कहा कि उसने याचिकाकर्ता से विवाह कर लिया है। वह उसके साथ पत्नी के रूप में रह रही है और उनका एक बच्चा भी है। उसने कहा कि मुकदमा जारी रहने से उसे और उसके बच्चे को नुकसान होगा और उसने कार्यवाही रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

    अदालत की टिप्पणी

    हाइकोर्ट ने कहा कि समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों से विधिक स्थिति स्पष्ट है। हालांकि, कुछ गंभीर और समाज पर व्यापक प्रभाव डालने वाले अपराध इस श्रेणी से बाहर रखे जाते हैं।

    अदालत ने माना कि बाल विवाह निषेध अधिनियम का उद्देश्य नाबालिग लड़कियों के विवाह जैसी सामाजिक बुराई को अपराध घोषित करना है। नाबालिगता के कारण POCSO Act की धाराएं भी लगाई गई थीं जो गंभीर अपराधों की श्रेणी में आती हैं।

    फिर भी न्यायालय ने कहा कि मामले की विशेष परिस्थितियों में जहां दोनों पक्ष अब वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं और एक बच्चे के माता-पिता हैं। मुकदमे को जारी रखना व्यावहारिक नहीं होगा और इससे संबंधित पक्षों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

    इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही रद्द की और आपराधिक याचिका स्वीकार की।

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