ताज़ा खबरे
'जल्द इंसाफ़ आर्टिकल 21 की ज़रूरी शर्त': सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई के अधिकार के उल्लंघन पर 35 साल पुराना केस रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस कांस्टेबल के खिलाफ 35 साल से चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने माना कि इस केस को जारी रखना संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जल्द सुनवाई के उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।कोर्ट ने कहा,"जल्द सुनवाई का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 की ज़रूरी शर्तों में से एक है, चाहे आरोपी जेल में हो या ज़मानत पर, और अपराध की प्रकृति चाहे जो भी हो। यह जल्द सुनवाई संविधान के आर्टिकल 21 की ज़रूरी शर्तों में से एक है। अगर किसी केस के तथ्यों और परिस्थितियों...
मुक़दमेबाज़ के ड्राइवर ने रिकॉर्ड की कोर्ट की कार्यवाही: हाईकोर्ट ने ज़ब्त किया मोबाइल, अवमानना नोटिस जारी
राजस्थान हाईकोर्ट ने मुक़दमेबाज़ और उसके ड्राइवर को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इन पर आरोप है कि इन्होंने गुपचुप और बिना अनुमति के मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करके कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड की। कोर्ट ने इस काम को 'न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971' के तहत प्रथम दृष्टया 'आपराधिक अवमानना' माना है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने टिप्पणी की कि इन हरकतों से न केवल न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न हुई, बल्कि कोर्ट की गरिमा भी कम हुई।मामले की पृष्ठभूमिउक्त मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने पाया कि कोई...
लेबर कोर्ट ID Act की धारा 33C(2) के तहत TA/DA जैसे विवादित सर्विस अधिकारों पर फैसला नहीं दे सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 (ID Act) की धारा 33C(2) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली लेबर कोर्ट, विवादित सर्विस अधिकारों पर फैसला नहीं दे सकतीं; वे सिर्फ पहले से मौजूद अधिकारों की गणना या वसूली तक ही सीमित हैं।जस्टिस शैल जैन ने यह टिप्पणी इलाहाबाद बैंक की रिट याचिका को मंज़ूरी देते हुए की। इस याचिका में बैंक ने इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल-कम-लेबर कोर्ट-II के 2007 के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह एक रिटायर...
'सिर्फ़ सीनियर वकीलों के क्लाइंट को ही ज़मानत मिलती है': कहने वाले वकील को हाईकोर्ट से राहत, माफी स्वीकार की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वकील को चेतावनी दी, जिसने यह दावा किया था कि कोर्ट सिर्फ़ उन आरोपियों को ज़मानत देता है, जिनका प्रतिनिधित्व सीनियर वकील करते हैं, न कि जूनियर वकील; कोर्ट ने उसकी माफ़ी स्वीकार की।जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने यह टिप्पणी की:"उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए, जब मिस्टर सैनी ने अपनी माफ़ी मांगी तो यह कोर्ट उनके ख़िलाफ़ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का इच्छुक नहीं है। हालांकि, उन्हें चेतावनी दी जाती है कि वे न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता के प्रति सचेत रहें और इस कोर्ट...
आरोपियों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: पुलिस द्वारा कथित 'जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण' परेड की जांच के आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के पुलिस अधीक्षक को उन आरोपों की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया कि पुलिस कर्मियों ने 'जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से' याचिकाकर्ता और अन्य सह-आरोपियों को सार्वजनिक परेड के लिए मजबूर किया।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने टिप्पणी की कि अनुच्छेद 21 के तहत उल्लंघन साबित करने के लिए याचिकाकर्ता को यह साबित करना होगा कि पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई 'जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण थी। उसका मकसद याचिकाकर्ता को अपमानित करना या नीचा दिखाना था।'हालांकि, बेंच ने यह भी कहा...
पंजाब सीएम भगवंत मान और मंत्रियों को अयोग्य ठहराने की मांग, हाईकोर्ट ने खारिज की PIL
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और अन्य मंत्रियों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली PIL खारिज की। कोर्ट ने कहा कि 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट तभी स्वीकार्य होती है, जब किसी व्यक्ति में सार्वजनिक पद धारण करने की पात्रता का स्पष्ट अभाव हो।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी ने कहा,"हमने पूरी याचिका को पढ़ा है, लेकिन प्रतिवादी नंबर 3 से 18 पर भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोप लगाने के अलावा, हमें उनके पद पर बने रहने के लिए ज़रूरी योग्यताओं में किसी भी कमी के बारे में...
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी पाए गए बच्चे को दी गई 10 साल की सज़ा रद्द की, कहा- IPC की धारा 302 के तहत ऐसी सज़ा गैर-कानूनी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी पाए गए कानून के साथ संघर्षरत बच्चे को दी गई 10 साल की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 302 के तहत ऐसी सज़ा साफ़ तौर पर गैर-कानूनी है।कोर्ट ने साफ़ किया कि भले ही किसी किशोर पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाए, लेकिन हत्या के लिए सज़ा सिर्फ़ आजीवन कारावास (रिहाई की संभावना के साथ) ही हो सकती है, न कि कोई तय समय की सज़ा।बता दें, IPC की धारा 302 हत्या के लिए मौत या आजीवन कारावास की सज़ा का प्रावधान करती है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता...
Industrial Dispute | दिल्ली में एम्प्लॉयर का ऑफिस होना ही अपने आपमें दिल्ली के लेबर अधिकारियों को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं देता: हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि औद्योगिक विवादों में "उचित सरकार" (Appropriate Government) की पहचान करने के लिए नौकरी की जगह और वह जगह जहां नौकरी खत्म होने का फैसला लागू होता है, ये दो मुख्य कारक होते हैं।जस्टिस शैल जैन ने यह टिप्पणी की कि दिल्ली में एम्प्लॉयर का ऑफिस होना ही अपने आप में दिल्ली के लेबर अधिकारियों को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं दे देता।कोर्ट ने कहा,"दिल्ली में किसी पुराने समय में कोई बिज़नेस पता होना, यह साबित नहीं करता कि नवंबर 2009 में जो औद्योगिक विवाद पैदा हुआ था, उसका उस...
प्रधानमंत्री की अपील के बाद साइकिल से हाईकोर्ट पहुंचे जस्टिस द्वारका धीश बंसल, बोले- छोटी दूरी के लिए साइकिल अपनाएं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस द्वारका धीश बंसल हाल ही में साइकिल से अदालत पहुंचते नजर आए। उन्होंने यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बाद उठाया है।फ्री प्रेस जर्नल द्वारा साझा किए गए वीडियो में जस्टिस बंसल साइकिल चलाते हुए लोगों को संदेश देते दिखाई दिए कि जहां संभव हो, 1 से 2 किलोमीटर जैसी छोटी दूरी के लिए साइकिल का इस्तेमाल करना चाहिए।वीडियो में जस्टिस बंसल ने कहा,“माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ईंधन बचाने की अपील की है। इसे ध्यान में रखते हुए मुझे लगा कि मुझे भी...
न्यायिक दुर्व्यवहार
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक जज अपना आपा खोने और केवल दो साल के अभ्यास वाले एक युवा वकील को कारावास का आदेश देने के बाद इस सप्ताह न्यायिक समाचार निर्माता बन गए हैं । सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने अभ्यावेदन और प्रस्तावों के माध्यम से भारत के मुख्य न्यायाधीश का ध्यान आकर्षित किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः इस मुद्दे को जब्त कर लिया, और दो रिट याचिकाएं दर्ज करने के बाद, यह कहकर न्यायिक पक्ष में मामले को शालीनता से बंद कर दियाःसभी स्तरों पर न्यायपालिका के...
मुस्लिम लड़कियों पर कथित भड़काऊ बयान मामले में लेखक चक्रवर्ती सुलीबेले के खिलाफ FIR पर कर्नाटक हाईकोर्ट की रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लेखक और राजनीतिक कार्यकर्ता चक्रवर्ती सुलीबेले के खिलाफ दर्ज FIR की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। उन पर धारवाड़ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम लड़कियों को लेकर कथित भड़काऊ और मुस्लिम विरोधी बयान देने का आरोप है।जस्टिस हंचाटे संजीवकुमार की एकलपीठ ने 7 मई के आदेश में कहा कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है, लेकिन प्रथमदृष्टया अंतरिम राहत देने का मामला बनता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि धारवाड़ टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज Crime No.0063/2026 से संबंधित आगे की...
राजनीतिक प्रतिशोध का मामला, BJP सांसदों जैसी राहत दी जाए: ED गिरफ्तारी के खिलाफ पंजाब मंत्री संजीव अरोड़ा की हाईकोर्ट से मांग
पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हुई गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और रिमांड आदेश रद्द करने की मांग करते हुए इसे कानून और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और अगली सुनवाई 14 मई के लिए तय की।संजीव अरोड़ा की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने अदालत में कहा,“पंजाब में राजनीतिक प्रतिशोध की...
बिना सुनवाई ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट ने किया TTFI का आदेश रद्द
दिल्ली हाईकोर्ट ने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) द्वारा महासचिव और पूर्व ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करने का आदेश रद्द किया। अदालत ने कहा कि फेडरेशन ने उन्हें बिना सुनवाई का मौका दिए कार्रवाई कर प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस कृष्ण मुरारी को स्वतंत्र जांच प्राधिकारी नियुक्त किया। वह TTFI के कामकाज और उसके पदाधिकारियों के आचरण की जांच करेंगे।कमलेश मेहता ने 28 जनवरी 2026 को TTFI की...
दूरदर्शन पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण की मांग, हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 का दूरदर्शन और DD स्पोर्ट्स जैसे मुफ्त सार्वजनिक प्रसारण मंचों पर प्रसारण सुनिश्चित कराने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और प्रसार भारती को नोटिस जारी किया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती से जवाब मांगा।याचिकाकर्ता अवधेश बैरवा की ओर से सीनियर एडवोकेट वैभव गग्गर ने अदालत में दलील दी कि यदि लोगों को टूर्नामेंट देखने से वंचित किया गया तो यह नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन होगा और देश में फुटबॉल तथा खेल...
'Articles 25-26 में morality का मतलब सार्वजनिक नैतिकता नहीं हो सकता, वरना बहुसंख्यक सोच धार्मिक स्वतंत्रता पर हावी हो जाएगी' : सबरीमला संदर्भ में दलील
सबरीमला संदर्भ मामले में सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की संविधान पीठ के समक्ष दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त “morality” शब्द का अर्थ सामाजिक या सार्वजनिक नैतिकता नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि morality को बहुसंख्यक समाज की नैतिक धारणाओं के रूप में पढ़ा गया, तो इससे धार्मिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने का रास्ता खुल जाएगा।राजू रामचंद्रन ने कहा कि संविधान किसी भी मौलिक अधिकार को “अतार्किक बहुसंख्यक भावना” के आधार पर सीमित करने की अनुमति नहीं...
पत्नी की शिक्षा या अकेले कमाने की क्षमता CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने में बाधा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ इस बात से कि पत्नी पढ़ी-लिखी है या उसमें कमाने की क्षमता है, उसे CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने आगे कहा कि जिस बात पर विचार किया जाना चाहिए, वह यह है कि क्या उसमें खुद का भरण-पोषण करने की वास्तविक और मौजूदा क्षमता है। वह भी उसी जीवन-स्तर के अनुसार, जिसका वह अपने वैवाहिक घर में आनंद लेती थी।कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि वह किसी लाभकारी रोज़गार में है और खुद का...
ड्यूटी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में मारे गए पुलिस के सपोर्ट स्टाफ को पेंशन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के 'फॉलोअर' (सपोर्ट स्टाफ) के परिवार को पेंशन देने से इनकार किया, जिसकी ड्यूटी पर जाते समय एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं 'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' के नियम 3 के दायरे में नहीं आतीं; यह नियम उन विशेष परिस्थितियों को बताता है जिनमें पेंशन दी जा सकती है।'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' का नियम 3 कहता है कि ये नियम उत्तर प्रदेश के सभी राजपत्रित/अराजपत्रित पुलिस, PAC या अग्निशमन सेवा...
आत्मा पर पहरा: धर्मांतरण-विरोधी कानून और संवैधानिक स्वतंत्रता का मौन क्षरण
जब राज्य को विश्वास या स्नेह के लिए अनुमति की आवश्यकता होने लगती है, तो यह अब अकेले आचरण को नियंत्रित नहीं करता है। यह व्यक्ति के आंतरिक जीवन में घुसपैठ करना शुरू कर देता है।कुछ स्वतंत्रताएं एक संवैधानिक स्थान पर इतनी अंतरंग होती हैं कि कोई भी नियामक निरीक्षण स्वाभाविक रूप से परेशान करने वाला प्रतीत होता है। सोचने, विश्वास करने और प्रेम करने की स्वतंत्रता मानव गरिमा का मूल है। समकालीन भारत में, इन स्वतंत्रताओं को धर्मांतरण विरोधी कानूनों के तहत तेजी से विधायी संदेह के अधीन किया जाता है।वर्तमान...
देशभर की अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए CJI ने बनाई समिति, 50 हजार करोड़ रुपये तक की जरूरत का खाका तैयार होगा
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने देशभर की अदालतों में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने के लिए न्यायिक अवसंरचना सलाहकार समिति का गठन किया।समिति अदालतों के लिए 40 हजार करोड़ से 50 हजार करोड़ रुपये तक की वित्तीय आवश्यकता का विस्तृत खाका तैयार करेगी। 8 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के महासचिव भारत पराशर द्वारा जारी संचार के अनुसार समिति का उद्देश्य देशभर की अदालतों की आधारभूत जरूरतों का आकलन कर केंद्र सरकार के समक्ष पर्याप्त वित्तीय सहायता का प्रस्ताव रखना है।यह प्रस्ताव...
पेड़ों की छंटाई पर बिना अनुमति वाली SOP पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार की उस मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अमल पर रोक लगाई, जिसमें 15.7 सेंटीमीटर से कम घेराव वाली शाखाओं की सामान्य देखभाल और हल्की छंटाई” बिना ट्री अधिकारी की पूर्व अनुमति के करने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि यह SOP अदालत के पहले दिए गए बाध्यकारी फैसले के विपरीत है।अदालत ने कहा कि 2 मई 2025 को दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 33 के तहत जारी अधिसूचना के जरिए सरकार वर्ष 2023 में दिए गए अदालत के फैसले को निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है। उस...




















