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सिर्फ रोते हुए देखने से दहेज उत्पीड़न साबित नहीं होता: दहेज मौत मामले में दिल्ली हाईकोर्ट
दहेज हत्या और क्रूरता के मामले में पति और उसके परिवार के सदस्यों को आरोपमुक्त किए जाने को बरकरार रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक को रोते हुए दिखाने मात्र से दहेज उत्पीड़न का कोई मामला नहीं बनता है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि मृतक के भाई और बहन के बयानों से प्रथम दृष्टया भी स्थापित नहीं होता कि मृतक को उनकी कथित मांगों को पूरा करने के लिए ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। "मृतक की बहन का बयान CrPC की धारा 161 के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें उसने यह भी कहा था कि होली के...
दलित छात्र की मौत पर झारखंड हाईकोर्ट की BIT मेसरा को फटकार, ₹20 लाख मुआवजा और रैगिंग रोकने के निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने बीआईटी मेसरा, पॉलिटेक्निक कॉलेज द्वारा तीसरे सेमेस्टर के छात्र के माता-पिता को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसे कथित तौर पर हरिजन/दलित के नाम पर जातिवादी गालियों का शिकार होना पड़ा था और कई हिंसक हमलों के कारण उसकी मौत हो गई थी।जस्टिस संजय प्रसाद ने घटना को 'नृशंस हमला' करार देते हुए कॉलेज को उनके लापरवाह रवैये और खराब प्रशासन के लिए आड़े हाथ लिया, जिसमें आवश्यक अनुशासन बनाए रखने में उनकी विफलता भी शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप छात्र की दुखद मौत हुई। अदालत...
दिल्ली कोर्ट में चावल फेंकने पर आरोपी पर जुर्माना, वकीलों को काला जादू का शक
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में एक मामले में आरोपी एक डॉक्टर को फर्श पर चावल फेंककर अदालती कार्यवाही रोकने के लिए 2000 रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई, जिसे अदालत कक्ष में वकीलों द्वारा काला जादू होने का संदेह था।तीस हजारी अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने कहा कि आरोपी ने अपने अति कृत्य के कारण न्यायिक कार्यवाही में 15-20 मिनट की बाधा डाली, यह कहते हुए कि यदि किया गया कार्य अनियंत्रित हो जाता है, तो अदालत की कार्य करने की क्षमता को नष्ट कर देगा। "कोर्ट रूम एक ऐसी जगह...
'राजनीतिक रूप से तटस्थ' CAG की नियुक्ति हेतु तंत्र की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर, वर्तमान CAG की नियुक्ति पर सवाल
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के रूप में के. संजय मूर्ति की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। साथ ही इस उच्च संवैधानिक पद पर "राजनीतिक रूप से तटस्थ व्यक्ति" की नियुक्ति के लिए केंद्र द्वारा एक पारदर्शी तंत्र तैयार करने की मांग की गई।गैर-सरकारी संगठन 'लोक प्रहरी' द्वारा जनहित में दायर की गई इस याचिका में यह घोषित करने की मांग की गई कि CAG की नियुक्ति की मौजूदा चयन प्रक्रिया संविधान सभा के आदेश के विरुद्ध है और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती...
The Indian Contract Act में Free Concern तब बनती है जब उसमें Undue Influence नहीं हो
Undue Influence शब्द थोड़ा कठिन शब्द है परंतु किसी भी स्वतंत्र सहमति के लिए Undue Influence घातक होता है, इसे हिंदी में असम्यक असर कहा जाता है। कोई भी सहमति स्वतंत्र नहीं होती है यदि उसमें असम्यक असर का समावेश होता है। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत असम्यक असर को परिभाषित किया गया है।यदि संविदा असम्यक असर से पीड़ित है तो पीड़ित पक्षकार के विकल्प पर शून्यकरणीय होगी। असम्यक असर की अवधारणा प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को कुछ बातें साबित करना होती।संविदा के पक्षकारों की स्थिति आपसी संबंध...
The Indian Contract Act में कोई Free Concern में Coercion नहीं होना
वैध संविदा के लिए स्वतंत्र सहमति आवश्यक गुण है। स्वतंत्र सहमति की परिभाषा भारतीय संविदा अधिनियम के अंतर्गत धारा 14 में प्रस्तुत की गई है। धारा 14 के अंतर्गत स्वतंत्र सहमति के गुणों का उल्लेख किया गया है। किसी भी वैध संविदा के लिए स्वतंत्र सहमति आवश्यक है।सम्मति का तात्पर्य वास्तविक सम्मति से है। इसे शुद्ध सम्मती भी कहते हैं। यदि यह स्वतंत्र या शुद्ध नहीं है तो यह संविदा को प्रतिकूल रूप में प्रभावित कर सकती है। इस प्रकार जब भी विधिमान्य संविदा का सृजन किया जाना तात्पर्य हो तो ऐसी स्थिति में...
पूर्व विधायक अब्बास अंसारी गैंगस्टर एक्ट मामले में ज़मानत शर्तों में ढील की मांग को लेकर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक अब्बास अंसारी ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के मामले में ज़मानत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई कि उनकी अंतरिम ज़मानत की शर्तों में संशोधन किया जाए ताकि उन्हें भारत में यात्रा करने से पहले निचली अदालत की पूर्व अनुमति न लेनी पड़े।यह मामला जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष था। सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल (अंसारी की ओर से) ने बताया कि 2022 के एक भड़काऊ भाषण मामले में हाल ही में दोषी ठहराए जाने और 2 साल की कैद की सजा सुनाए जाने के...
सुप्रीम कोर्ट में EVM वोटों की फिर से गिनती करने पर पलटा हरियाणा सरपंच चुनाव का नतीजा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक दुर्लभ घटना में हरियाणा में एक ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजों को पलट दिया, जब उसने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) अपने पास मंगवाईं और रजिस्ट्रार द्वारा वोटों की पुनर्गणना करवाई।पुनर्गणना के बाद 'पराजित' उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित किए गए उम्मीदवार से 51 वोट अधिक मिले। अतः, चुनाव न्यायाधिकरण के अंतिम निर्णय के अधीन न्यायालय ने पानीपत के उपायुक्त-सह-निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया कि वे दो दिनों के भीतर अधिसूचना जारी करें, जिसमें पराजित उम्मीदवार (याचिकाकर्ता) को...
पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 85 - 89: अप्रयुक्त दस्तावेजों का विनाश
पंजीकरण अधिनियम, 1908 (Registration Act, 1908) के भाग XV को समझते हैं, जिसमें विभिन्न प्रावधान (miscellaneous provisions) शामिल हैं। ये धाराएँ पंजीकरण प्रणाली से संबंधित कई महत्वपूर्ण और विविध मुद्दों को संबोधित करती हैं, जैसे अप्रयुक्त दस्तावेजों को नष्ट करना, अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा, और सरकारी अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों के पंजीकरण की विशेष प्रक्रिया।धारा 85. अप्रयुक्त दस्तावेजों का विनाश (Destruction of unclaimed documents)यह धारा अप्रयुक्त दस्तावेजों को नष्ट करने की अनुमति देती है।...
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 39: मौद्रिक दंडों के निष्पादन की प्रक्रिया
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहारों पर भारी मौद्रिक दंड (monetary penalties) लगाने की शक्ति प्राप्त है। हालाँकि, केवल जुर्माना लगाना ही पर्याप्त नहीं है; इसे प्रभावी ढंग से वसूल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 39 (Section 39) इसी प्रक्रिया का विवरण देती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि CCI द्वारा लगाए गए दंडों को सख्ती से लागू किया जाए। यह धारा CCI को जुर्माने की वसूली के लिए लचीले और शक्तिशाली तरीके प्रदान करती है। धारा 39: मौद्रिक दंड...
वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 43 से 46: अपराधों का संज्ञान और न्यायिक सुरक्षा
वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981, के तहत प्रदूषण के मामलों से निपटने के लिए एक विशिष्ट कानूनी प्रक्रिया स्थापित की गई है। अध्याय VII में, धारा 43 से 46 तक के प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि अपराधों का संज्ञान (cognizance) सही तरीके से लिया जाए, बोर्ड के सदस्यों को कानूनी सुरक्षा मिले, और उनकी कार्रवाई को नागरिक अदालतों (civil courts) में चुनौती न दी जा सके।धारा 43 - अपराधों का संज्ञान (Cognizance of Offences)यह धारा अदालतों को अधिनियम के तहत अपराधों का संज्ञान लेने की प्रक्रिया...
क्या Advocates को Consumer Protection Act के तहत “Deficiency in Service” के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का विधायी उद्देश्य और दायरा (Legislative Intent and Scope of the Consumer Protection Act)सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले यह देखा कि Consumer Protection Act, 1986 और 2019 के पुनः लागू संस्करण में क्या विधायिका (Legislature) ने कभी यह इरादा जताया था कि इसमें Professions और Professionals द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को शामिल किया जाए। State of Karnataka v. Vishwabharathi House Building Coop. Society, Common Cause v. Union of India और Lucknow Development Authority v. M.K. Gupta...
'पहले हाईकोर्ट कॉलेजियम को निर्णय लेना होगा': हाईकोर्ट जजों के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकीलों पर विचार करने के SCBA अध्यक्ष के अनुरोध पर सीजेआई गवई
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान, SCBA अध्यक्ष विकास सिंह ने हाईकोर्ट जजों के रूप में पदोन्नति के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकीलों पर विचार करने और उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति के लिए विचार किए जा सकने वाले सभी योग्य वकीलों का एक डेटाबेस बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।कार्यक्रम में उपस्थित चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई ने जवाब दिया कि सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की नियुक्ति के संबंध में पहला निर्णय हाईकोर्ट कॉलेजियम को लेना होगा।उन्होंने कहा,"हम केवल...
सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख बंदरगाहों के लिए टैरिफ प्राधिकरण के आदेशों के विरुद्ध अपीलीय निकाय के गठन की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 अगस्त) को प्रमुख बंदरगाहों के लिए टैरिफ प्राधिकरण (TAMP) के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए एक्सपर्ट कमेटी के गठन की सिफारिश की, जिसका गठन प्रमुख बंदरगाह न्यास अधिनियम, 1961 के अंतर्गत टैरिफ निर्धारण के लिए किया गया। यह वर्तमान में सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की प्रथा के स्थान पर किया जाएगा।न्यायालय ने कहा,"हम किसी भी प्राधिकारी का अनादर किए बिना अपील के उपाय को अधिक प्रभावी और सार्थक बनाने की सिफारिश करते हैं। यह उचित होगा कि न्यायनिर्णयन...
अनुकंपा नियुक्ति के खिलाफ बेतुकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने BSNL पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने के खिलाफ बेतुकी याचिका दायर करने पर BSNL पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया, जिसके माता-पिता की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ ने मृतक कर्मचारी के कानूनी उत्तराधिकारियों को अनुकंपा नियुक्ति देने संबंधी सुस्थापित कानून के बावजूद ऐसी याचिकाएं दायर किए जाने पर आश्चर्य व्यक्त किया। हालांकि, न्यायालय ने BSNL को उस अधिकारी से जुर्माना वसूलने की छूट दी, जिसने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी याचिका...
ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार की ज़मानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत के विरुद्ध अपीलों से संबंधित सिद्धांतों का सारांश प्रस्तुत किया
बुधवार (13 अगस्त) को सागर धनखड़ हत्याकांड में ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार की ज़मानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत के विरुद्ध अपील के संबंध में सिद्धांत निर्धारित किए। न्यायालय ने कहा कि ज़मानत के विरुद्ध अपील और ज़मानत रद्द करने की अपील अलग-अलग अवधारणाएं हैं, क्योंकि दोनों में अलग-अलग मानदंड शामिल हैं।न्यायालय ने कहा कि ज़मानत के विरुद्ध अपील पर हाईकोर्ट विचार कर सकता है, यदि यह दर्शाया गया हो कि ज़मानत आदेश अपराध की गंभीरता, अपराध के प्रभाव, आदेश का अवैध होना, विकृत होना, गवाहों को...
ECI को SIR करने का अधिकार, लेकिन प्रक्रिया मतदाता-अनुकूल और उचित होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौखिक रूप से प्रथम दृष्टया यह विचार व्यक्त किया कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) के पास मतदाता सूची की जांच (SIR) करने का अधिकार है।न्यायालय ने कहा कि SIR के लिए चुनाव आयोग की शक्तियां जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) में निहित हैं। इसलिए न्यायालय ने कहा कि वह चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया से रोकना नहीं चाहता।हालांकि, न्यायालय ने यह भी कहा कि इसके कार्यान्वयन का तरीका 'उचित' होना चाहिए और...
हाईकोर्ट ने अपील के दौरान मर चुके पुलिसकर्मी की 36 साल पुराने हिरासत में मौत मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी
गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार (14 अगस्त) को सेशन कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें 1989 में 22 वर्षीय एक व्यक्ति की हिरासत में हुई मौत के मामले में पुलिसकर्मी को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया।बता दें, यह घटना अक्टूबर 1989 में हुई थी। सेशन कोर्ट का मामला 1990 में दर्ज किया गया और सेशन कोर्ट ने 2000 में दोषसिद्धि और सजा का आदेश पारित किया था।जस्टिस गीता गोपी ने सेशन कोर्ट के 30 नवंबर, 2000 का फैसला बरकरार रखते हुए अपने आदेश में कहा:"परिणामस्वरूप, मृतक अपीलकर्ता, उसके और सह-अभियुक्तों द्वारा किए...
क्या 1 जुलाई, 2024 से पहले दर्ज की गई शिकायतों पर संज्ञान लेने पर BNSS की धारा 223 लागू होगी?: सुप्रीम कोर्ट तय करेगा
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाया गया कि क्या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 223, 1 जुलाई, 2024 से पहले दर्ज की गई शिकायतों पर 1 जुलाई, 2024 के बाद संज्ञान लेने पर लागू होगी।BNSS 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी हुआ। BNSS की धारा 223(1) के प्रावधान के अनुसार, किसी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले अभियुक्त को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जिसे BNSS ने प्रतिस्थापित कर दिया।यह...
प्रीमियम व्हिस्की उपभोक्ता 'ब्लेंडर्स प्राइड' और 'लंदन प्राइड' को लेकर भ्रमित नहीं होंगे: सुप्रीम कोर्ट ने पर्नोड रिकार्ड की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (14 अगस्त) को पर्नोड रिकार्ड की अंतरिम निषेधाज्ञा याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने पंजीकृत व्हिस्की चिह्नों "ब्लेंडर्स प्राइड" और "इम्पीरियल ब्लू" के कथित उल्लंघन के खिलाफ दायर याचिका को खारिज किया। इस याचिका में देसी व्हिस्की ब्रांड "लंदन प्राइड" का इस्तेमाल किया गया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि विचाराधीन ब्रांड प्रीमियम और अल्ट्रा-प्रीमियम व्हिस्की हैं, जो समझदार उपभोक्ताओं के लिए हैं, जो खरीदारी के फैसले अधिक सावधानी से लेते हैं।...




















