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हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (11 अगस्त, 2025 से 15 अगस्त, 2025) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।माता-पिता की निजता का अधिकार, संतान के पितृत्व जानने के अधिकार पर भारी: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्त्वपूर्ण निर्णय में कहा कि कुछ परिस्थितियों में माता-पिता का निजता और गरिमा का अधिकार संतान के पितृत्व जानने के अधिकार पर हावी हो सकता है। अदालत ने DNA टेस्ट कराने के...
माता-पिता की निजता का अधिकार, संतान के पितृत्व जानने के अधिकार पर भारी: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्त्वपूर्ण निर्णय में कहा कि कुछ परिस्थितियों में माता-पिता का निजता और गरिमा का अधिकार संतान के पितृत्व जानने के अधिकार पर हावी हो सकता है। अदालत ने DNA टेस्ट कराने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा लेकिन पुलिस की ज़बरदस्ती या बल प्रयोग की अनुमति देने वाले हिस्से को हटा दिया।जस्टिस अर्चना पुरी ने कहा कि बच्चे को अपने पितृत्व की सच्चाई जानने का अधिकार है। विशेषकर तब जब पिता होने से इंकार किया गया हो। उन्होंने कहा कि न्याय के हित में यह आवश्यक है कि सत्य सामने...
MCOCA Act के तहत चल रही समवर्ती कार्यवाही SC/ST Act के तहत मुकदमे में देरी के लिए पर्याप्त कारण नहीं: हाईकोर्ट ने जमानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर पीठ) ने माना कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 (MACOCA Act) के तहत लंबित मुकदमे का अपने आप में किसी अन्य मुकदमे को स्थगित रखने का पर्याप्त कारण नहीं है। इसलिए मुकदमे में प्रगति के बिना लंबे समय तक हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के की पीठ गोंदिया सेशन कोर्ट द्वारा आईपीसी, शस्त्र अधिनियम, SC/ST Act और बॉम्बे पुलिस एक्ट के तहत हत्या और अन्य अपराधों के आरोपी जुल्फिकार उर्फ छोटू को...
DV Act की धारा 31 के तहत आपराधिक दायित्व तभी, जब धारा 12 से 23 के तहत पारित संरक्षण आदेश का उल्लंघन हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (Domestic Violence Act) की धारा 31 के तहत आपराधिक कार्यवाही तभी शुरू हो सकती है, जब मजिस्ट्रेट द्वारा एक्ट की धारा 12 से 23 के अंतर्गत पारित संरक्षण आदेश या अंतरिम संरक्षण आदेश का उल्लंघन किया गया हो।जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा,“यदि पहले से कोई संरक्षण आदेश पारित नहीं हुआ तो पुलिस को सीधे एक्ट की धारा 31 के तहत FIR दर्ज करने का अधिकार नहीं है। एक्ट की प्रक्रिया यह है कि पहले नागरिक कार्यवाही के तहत आदेश पारित हो और केवल उसके...
आज के समय में 7 हज़ार का भरण-पोषण भत्ता बहुत मामूली राशि: पटना हाईकोर्ट ने कहा- स्वस्थ फल विक्रेता पति भुगतान करने में सक्षम
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें एक फल विक्रेता पति को CrPC की धारा 125 के तहत अपनी पत्नी को 7,000 प्रति माह भरण-पोषण के रूप में देने का निर्देश दिया गया था, क्योंकि न्यायालय ने कहा था कि उक्त राशि आज के समय में 'बहुत मामूली' राशि है।जस्टिस बिबेक चौधरी की पीठ ने पति की आपराधिक पुनर्विचार याचिका यह कहते हुए खारिज की कि पत्नी के पक्ष में भरण-पोषण भत्ता देते समय वास्तविक आय नहीं बल्कि पति की कमाने की क्षमता मुख्य विचारणीय बिंदु है।इस मामले में याचिकाकर्ता (मोहम्मद...
केरल में जन-शिकायतों के लिए दहेज निषेध पोर्टल हुआ लागू
राज्य सरकार ने केरल हाईकोर्ट को जनता द्वारा शिकायत दर्ज कराने हेतु समर्पित दहेज निषेध पोर्टल शुरू करने की जानकारी दी।यह दलीलें लॉ ग्रेजुएट और लोक नीति पेशेवर द्वारा दायर जनहित याचिका पर राज्य द्वारा प्रस्तुत प्रति-हलफनामे के माध्यम से दी गईं। इस याचिका में केरल दहेज निषेध नियम 2004 के नियम 5 के तहत की गई शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई के संबंध में राज्य को जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।यह प्रति-हलफनामा चीफ जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस बसंत बालाजी की खंडपीठ के समक्ष...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने समूह ग और घ के पदों की भर्ती प्रक्रियाओं में व्यवस्थागत अनियमितताओं की कड़ी आलोचना की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने समूह ग और घ के पदों की भर्ती प्रक्रियाओं में व्यवस्थागत अनियमितताओं की कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह की गड़बड़ियां हाशिये पर पड़े वर्गों के विश्वास को गहराई से कम करती हैं, जो इन नौकरियों को सामाजिक-आर्थिक उत्थान का महत्वपूर्ण मार्ग मानते हैं।यह टिप्पणी हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के बायोमेट्रिक सत्यापन के निर्देश देने वाले अपने आदेश का पालन न करने पर प्रथम दृष्टया अवमानना का...
चुनाव लोकतंत्र की जान हैं, निष्पक्ष और पारदर्शी होने चाहिए, हर वोट की अहमियत है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि चुनाव लोकतंत्र की जीवनरेखा हैं और चूँकि हर वोट मायने रखता है, इसलिए चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाने चाहिए।जस्टिस रवीन्द्र मैथानी की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब वह पुष्पा नेगी द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। नेगी ने यह याचिका इस मांग के साथ दाखिल की थी कि नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष के आगामी चुनाव को पारदर्शी ढंग से कराए जाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएँ।नेगी ने अदालत को बताया कि उन्हें चुनाव प्रक्रिया...
पत्नी का कभी-कभार शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना पति के साथ क्रूरता नहीं : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि पत्नी का कभी-कभार पति के साथ सहवास से इनकार करना हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13(1)(i-a) के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता, जब तक कि निरंतर रूप से दांपत्य संबंधों से इनकार न किया गया हो।जस्टिस विशाल धागट और जस्टिस रामकुमार चौबे की खंडपीठ ने यह कहते हुए पति द्वारा दायर प्रथम अपील को खारिज कर दिया कि फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक याचिका को ठुकराना सही था।मामला संक्षेप मेंअपीलकर्ता पति ने फैमिली कोर्ट एक्ट 1984 की धारा 19 के तहत हाईकोर्ट का दरवाज़ा...
3 लाख से 1 करोड़ तक के मूल्य वाले ट्रेडमार्क उल्लंघन विवादों की सुनवाई सिविल जज (सीनियर डिवीजन) करेंगे: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में जहां किसी कमर्शियल विवाद का मूल्य 3 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक है, वहां सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग), जिसे सिविल कोर्ट के रूप में नामित किया गया है, उनको ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामलों की सुनवाई करने का अधिकार है।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने यह निर्णय खाद्य उत्पाद कंपनी खेमका फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अपील स्वीकार करते हुए दिया। यह अपील 2024 में सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग)-प्रथम, जमशेदपुर द्वारा...
मुकदमा शुरू न करना पत्नी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 वर्षों से लंबित क्रूरता मामले में प्रतिदिन सुनवाई का आदेश दिया
क्रूरता मामले की सुनवाई शुरू करने के लिए निचली अदालत को निर्देश देने की पत्नी की प्रार्थना पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह खेदजनक है कि FIR और आरोपपत्र दाखिल करने के दो दशक से अधिक समय बाद भी मुकदमा शुरू नहीं हुआ।जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा कि निचली अदालत के कार्यभार के प्रति न्यायालय सचेत है।उन्होंने कहा,“FIR दर्ज होने के दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह खेदजनक है कि निचली अदालत इस मामले में कोई प्रभावी कार्यवाही शुरू करने या संचालित करने में विफल रही है। निचली अदालत की...
NBFC को अधिक ब्याज लेने पर भी NI Act की धारा 139 के तहत चेक धारक के पक्ष में रहेगी धारणा: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई चेक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) को जारी किया गया, जिसने केरल मनी लेंडर्स एक्ट के तहत निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज वसूला हो तब भी नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 139 के तहत चेक धारक के पक्ष में धारणा बनी रहेगी।जस्टिस एम.बी. स्नेहलता ने कहा कि NBFC का पूरा कार्य आरबीआई द्वारा नियंत्रित होता है। इसीलिए उस पर केरल मनी लेंडर्स एक्ट लागू नहीं होता। इसलिए आरोपी द्वारा यह तर्क कि लेन-देन अवैध था और चेक किसी वैध देयता के निर्वहन के लिए...
कॉन्ट्रैक्ट जॉब में मिली मातृत्व अवकाश रेगुलर नौकरी में भी जारी रहेगी: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध पर काम करने के दौरान स्वीकृत मातृत्व अवकाश को केवल इसलिए कम नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने नियमितीकरण के समय मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र जमा किया था।छुट्टी रद्द करने के राज्य के आदेश को रद्द करते हुए जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की कि, "मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जमा करने से उत्तरदाताओं को याचिकाकर्ता को 21.8.2021 से 180 दिनों की अवधि के लिए दिए गए मातृत्व अवकाश को कम करने का कोई अधिकार नहीं मिल सकता था। याचिकाकर्ता कामिनी शर्मा ने सितंबर 2018 में अनुबंध के...
सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप : जुलाई, 2025
सुप्रीम कोर्ट में जुलाई, 2025 में क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप। जुलाई महीने के सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।स्टूडेंट्स के कल्याण के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की, कहा- मानसिक स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंगस्टूडेंट्स के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार जीवन और सम्मान के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का...
स्कूल ने स्टूडेंट का फॉर्म CBSE को नहीं भेजा, कोर्ट ने जताई नाराज़गी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक स्कूल को तीन बार याद दिलाने के बावजूद सुधार परीक्षा लिखने के लिए एक छात्र का परीक्षा फॉर्म सीबीएसई को नहीं भेजने पर हैरानी जताई है।इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि स्कूल ने पहले ही छात्र को 1.10 लाख रुपये का मुआवजा दिया था और छात्र को विषय के लिए रिपीट पेपर में उपस्थित होने की अनुमति दी गई थी, अदालत ने सीबीएसई को एक सप्ताह में परिणाम घोषित करने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने अपने आदेश में कहा, बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,...
ग्राम पंचायत के नए प्रतिनिधि पुराने फैसले रद्द नहीं कर सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर बेंच) ने माना है कि ग्रामपंचायत के निर्वाचित निकाय में बाद में बदलाव, अपने आप में, अपने पहले निकाय द्वारा पारित निर्णयों या प्रस्तावों को रद्द करने का औचित्य नहीं ठहराता है। ऐसा दृष्टिकोण स्थानीय प्रशासन की स्थिरता को कमजोर करेगा और पंचायती राज संस्थाओं के उद्देश्य के विपरीत है।जस्टिस श्रीमती एमएस जावलकर और जस्टिस प्रवीण एस. पाटिल की खंडपीठ सिद्धार्थ ईश्वर मोटघरे द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, वर्धा के 22 दिसंबर,...
HP Co-Operative Societies Act | किसी को भी बिना सुनवाई के दोषी नहीं ठहराया जा सकता, भले ही अधिनियम में आपत्तियां दर्ज करने का प्रावधान न हो: हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही हिमाचल प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1968 में निष्पादन कार्यवाही में आपत्तियां दर्ज करने के लिए विशिष्ट प्रावधान न हों, फिर भी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत लागू होने चाहिए और ऋणी को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।मंडी के कलेक्टर-सह-उप रजिस्ट्रार का आदेश रद्द करते हुए जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की:"प्राधिकरण द्वारा दिए गए निष्कर्ष कि चूंकि हिमाचल प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम और नियमों में निष्पादन कार्यवाही के निर्णय के दौरान कोई आपत्ति दर्ज करने का...
रोजगार अनुबंधों में सेवा समाप्ति के बाद के प्रतिबंधात्मक अनुबंध अनुबंध अधिनियम की धारा 27 के तहत अमान्य: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस जसमीत सिंह की दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने माना कि रोजगार अनुबंधों में सेवा-पश्चात के प्रतिबंधात्मक अनुबंध, जो रोजगार समाप्ति के बाद प्रभावी होते हैं, अमान्य हैं और भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 (Contract Act) की धारा 27 के तहत प्रवर्तनीय नहीं हैं और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) का उल्लंघन करते हैं। न्यायालय ने मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (Arbitration Act) की धारा 9 के तहत आवेदन में दिए गए निषेधाज्ञा रद्द की, जिसने प्रतिवादियों को उनके रोजगार अनुबंधों की समाप्ति के बाद प्रतिस्पर्धी व्यवसाय...
सुनवाई के दौरान व्यक्ति ने मजिस्ट्रेट पर तानी बंदूक, हाईकोर्ट ने आर्म्स लाइसेंस रद्द करने का फैसला रखा बरकरार
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने पुंछ के निर्वाचित जिला विकास परिषद (DDC) सदस्य को जारी किए गए आर्म्स लाइसेंस रद्द करने का फैसला बरकरार रखा। न्यायालय ने पाया कि उसने आधिकारिक कार्रवाई के दौरान तहसीलदार और SDM व SDPO सहित अतिक्रमण विरोधी टीम पर अपनी लाइसेंसी पिस्तौल तान दी थी।जस्टिस एम.ए. चौधरी की पीठ ने कहा कि यह मामला किसी निजी शिकायत से संबंधित नहीं है, बल्कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में दर्ज की गई घटना से संबंधित है।अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता...
दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: J&K में खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल में ड्रैगन बोट रेसिंग जोड़ें
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से कहे कि वह श्रीनगर के डल झील में 21 से 23 अगस्त तक आयोजित होने वाले खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल में प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में 'ड्रैगन बोट रेसिंग' को शामिल करे।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि खेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित नियमों के अनुसार संहिताबद्ध है और खेलो इंडिया के दिशानिर्देश प्रतिस्पर्धी कैलेंडर में उभरते हुए खेलों को शामिल करने की संभावना को बाहर नहीं करते हैं। "प्रतिवादी नंबर 1 को उक्त...



















