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पड़ोस का झगड़ा आत्महत्या के लिए उकसाने के बराबर नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने महिला को बरी किया
'पड़ोस का झगड़ा आत्महत्या के लिए उकसाने के बराबर नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने महिला को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने पड़ोसी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में महिला को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पड़ोस में झगड़े सामुदायिक जीवन में आम हैं और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उकसावे की भावना इतनी बढ़ जानी चाहिए कि पीड़ित के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प न बचे।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने कहा,"हम यह मानने को तैयार नहीं हैं कि जब अपीलकर्ता के परिवार और पीड़ित के परिवार के बीच तीखी बहस हुई तो दोनों में से किसी भी परिवार के किसी सदस्य को...

भारत-पाकिस्तान एशिया कप मैच रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कहा- क्रिकेट राष्ट्रीय हित से ऊपर नहीं
भारत-पाकिस्तान एशिया कप मैच रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कहा- 'क्रिकेट राष्ट्रीय हित से ऊपर नहीं'

एशिया कप टी20 टूर्नामेंट के तहत 14 सितंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई।चार याचिकाकर्ता वर्तमान में वकालत कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलना राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है और यह सशस्त्र बलों के साथ-साथ हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों के बलिदान को कमतर आंकता है।याचिका में कहा गया,"पाकिस्तान के साथ खेलने से यह उल्टा संदेश जाता है कि जहां...

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CBI अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश बरकरार रखा, कहा- कभी-कभी जांच करने वालों की भी जांच की जाए
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CBI अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश बरकरार रखा, कहा- कभी-कभी जांच करने वालों की भी जांच की जाए

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का वह निर्देश बरकरार रखा, जिसमें दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त नीरज कुमार और इंस्पेक्टर विनोद कुमार पांडे के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह निर्देश वर्ष 2000 में CBI में प्रतिनियुक्ति के दौरान धमकाने, अभिलेखों में हेराफेरी और जालसाजी के आरोपों के बाद दिया गया था।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ 2001 में दो व्यक्तियों द्वारा दायर रिट याचिकाओं में हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ अधिकारियों की अपीलों पर विचार कर रही थी, जिसमें...

आप कैसे कह सकते हैं कि राज्य झूठा बोल रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपाल के पास वर्षों से लंबित हैं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा
आप कैसे कह सकते हैं कि राज्य झूठा बोल रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपाल के पास वर्षों से लंबित हैं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा

राष्ट्रपति संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल किया कि केंद्र कैसे कह सकता है कि राज्य "झूठा अलार्म" बजा रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपालों के पास 3-4 वर्षों से लंबित हैं। यह केंद्र द्वारा दी गई इस दलील के जवाब में था कि पिछले 55 वर्षों में, "17000" में से केवल 20 विधेयकों पर ही सहमति रोकी गई है और 90% मामलों में विधेयकों पर एक महीने के भीतर ही सहमति दे दी गई।इस संदर्भ में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा:"राज्यपाल की भूमिका संविधान के संरक्षक, भारत...

मद्रास हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के वोटर लिस्ट हेराफेरी आरोप पर दायर PIL खारिज की, याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया
मद्रास हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के वोटर लिस्ट हेराफेरी आरोप पर दायर PIL खारिज की, याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया

मद्रास हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है, जिसमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा 2024 लोकसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेराफेरी के आरोपों पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा गया था।चीफ़ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जूसस्तिके जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में ठोस सामग्री नहीं है और यह केवल पक्षकारों द्वारा लगाए गए आरोप-प्रत्यारोपों का हवाला देती है। कोर्ट ने कहा कि याचिका मूल रूप से अदालत से बिना आधार वाली जांच कराने की मांग करती है। कोर्ट ने...

दिल्ली कोर्ट ने सोनिया गांधी पर वोटर लिस्ट मामले में FIR की मांग पर फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली कोर्ट ने सोनिया गांधी पर वोटर लिस्ट मामले में FIR की मांग पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया। याचिका में आरोप है कि गांधी ने भारतीय नागरिकता मिलने से तीन साल पहले, 1980 में ही जाली दस्तावेज़ों के आधार पर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा लिया था।राऊज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने विकास त्रिपाठी द्वारा दायर इस याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा। त्रिपाठी की ओर से सीनियर एडवोकेट पवन नारंग ने दलील दी कि मतदाता सूची में नाम जुड़ने...

नियम न हों तो आरक्षित उम्मीदवार छूट लेकर भी सामान्य वर्ग में चयनित हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट
नियम न हों तो आरक्षित उम्मीदवार छूट लेकर भी सामान्य वर्ग में चयनित हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक भर्ती नियमों में स्पष्ट रूप से मना न किया गया हो, आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जिसने शारीरिक मानकों में छूट ली हो, अगर मेरिट में चयनित होता है तो उसे सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) की पोस्ट पर भी नियुक्त किया जा सकता है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक सामान्य वर्ग के उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी, जिसने CISF असिस्टेंट कमांडेंट (एक्जीक्यूटिव) भर्ती में एक अंक से चयन चूक जाने के बाद, आरक्षित वर्ग के...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों द्वारा जाति-आधारित रैलियां आयोजित करने पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों द्वारा जाति-आधारित रैलियां आयोजित करने पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने पिछले सप्ताह भारत संघ और उत्तर प्रदेश सरकार को 2013 की जनहित याचिका (पीआईएल) पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें राजनीतिक दलों द्वारा जाति-आधारित रैलियां आयोजित करने के संबंध में अपना रुख स्पष्ट किया गया।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने एडवोकेट मोती लाल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।जनहित याचिका में जाति-आधारित रैलियां आयोजित करने वाली सभी राजनीतिक रैलियों पर प्रतिबंध लगाने और भारत के चुनाव आयोग (ECI) को ऐसी...

दिल्ली हाईकोर्ट नेत्रहीन उम्मीदवारों के लिए CMSE में 1% आरक्षण की मांग पर केंद्र व UPSC से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट नेत्रहीन उम्मीदवारों के लिए CMSE में 1% आरक्षण की मांग पर केंद्र व UPSC से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा (CMSE) में नेत्रहीन और कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए 1% आरक्षण की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। यह आरक्षण विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34(1)(a) के तहत अनिवार्य है।चीफ़ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से...

सुप्रीम कोर्ट : टेंडर नोटिस में मांगे ही नहीं गए दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति पर बोली खारिज नहीं की जा सकती
सुप्रीम कोर्ट : टेंडर नोटिस में मांगे ही नहीं गए दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति पर बोली खारिज नहीं की जा सकती

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को कहा कि नोटिस इन्वाइटिंग टेंडर (NIT) के तहत मांगे ही नहीं गए किसी दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति के आधार पर किसी बोली को खारिज करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर प्राधिकरण उन शर्तों को लागू नहीं कर सकते, जो टेंडर दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से लिखी ही नहीं गई हों।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बोलीदाता की अयोग्यता केवल इसलिए बरकरार रखी गई थी कि उसने जॉइंट वेंचर...

अयोध्या मामले में समझौते की संभावना होने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता नहीं: एस. मुरलीधर
अयोध्या मामले में समझौते की संभावना होने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता नहीं: एस. मुरलीधर

सीनियर एडवोकेट और हाईकोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर ने हाल ही में अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बातचीत के जरिए समझौते का विकल्प आगे न बढ़ाने पर निराशा जताई।उन्होंने कहा कि जिस दिन फैसला सुरक्षित रखा गया, उस दिन कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थता पैनल (जस्टिस इब्राहिम कलीफुल्ला, श्री श्री रविशंकर और सीनियर एडवोकेट श्रीराम पंचु) ने बताया था कि कुछ पक्षों के बीच समझौता हो गया है और सुन्नी वक्फ बोर्ड कुछ शर्तों के आधार पर अपने दावे छोड़ने को तैयार है। लेकिन कोर्ट ने यह...

अभिषेक बच्चन की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका पर जल्द आदेश देगा दिल्ली हाईकोर्ट
अभिषेक बच्चन की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका पर जल्द आदेश देगा दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (10 सितंबर) को संकेत दिया कि वह अभिनेता अभिषेक बच्चन की उस याचिका पर आदेश पारित करेगा जिसमें उन्होंने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की है।जस्टिस तेजस करिया ने यह टिप्पणी उस समय की जब बच्चन के वकील ने पोस्ट-लंच सत्र में उन प्रतिवादी संस्थाओं के संबंध में नोट पेश किया जिनके खिलाफ वह राहत चाहते हैं। गौरतलब है कि मंगलवार को अदालत ने अभिषेक की पत्नी ऐश्वर्या राय बच्चन की याचिका (जिसमें उन्होंने अपने 'पर्सनैलिटी राइट्स' की सुरक्षा मांगी थी) पर सुनवाई...

नाबालिग से विवाहित पुरुष द्वारा यौन शोषण अक्षम्य, कमजोर वर्ग की महिलाओं-बच्चों पर समाज रहे सतर्क: कर्नाटक हाईकोर्ट
नाबालिग से विवाहित पुरुष द्वारा यौन शोषण अक्षम्य, कमजोर वर्ग की महिलाओं-बच्चों पर समाज रहे सतर्क: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक विवाहित व्यक्ति द्वारा एक नाबालिग लड़की पर यौन उत्पीड़न का कृत्य अक्षम्य है और इसे सख्ती से देखा जाना चाहिए, न केवल बच्चों और महिलाओं के मन में विश्वास बहाल करने के लिए, बल्कि बड़े पैमाने पर समाज को एक मजबूत संकेत भेजने के लिए भी।पीठ ने कहा, "यहां यह देखा गया है कि, पीड़िता अनुसूचित जाति से संबंधित है और वह शोषण के उद्देश्य से अपीलकर्ता जैसे व्यक्तियों के प्रति अतिसंवेदनशील है। इसलिए, समाज के कमजोर वर्गों से संबंधित महिलाओं और बच्चों के प्रति अधिक सतर्क...

बलात्कार पीड़िता और उसके बच्चे का DNA टेस्ट नियमित रूप से नहीं कराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बलात्कार पीड़िता और उसके बच्चे का DNA टेस्ट नियमित रूप से नहीं कराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बलात्कार पीड़िता और उसके बच्चे का DNA टेस्ट सामान्य तौर पर कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इसका गहरा सामाजिक प्रभाव पड़ता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं मामलों में जब अनिवार्य और अपरिहार्य परिस्थितियां रिकॉर्ड पर सामने आएं और DNA टेस्ट कराने की ठोस आवश्यकता सिद्ध हो तभी ऐसा आदेश पारित किया जा सकता है।जस्टिस राजीव मिश्रा की पीठ एक मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमें अभियुक्त ने ट्रायल कोर्ट द्वारा DNA टेस्ट की अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।संबंधित...

दिल्ली हाईकोर्ट: मुस्लिम पुरुष की संपत्ति से पोते-पोतियां केवल तब बाहर होंगे, जब उसके बेटे-बेटियां जीवित हों
दिल्ली हाईकोर्ट: मुस्लिम पुरुष की संपत्ति से पोते-पोतियां केवल तब बाहर होंगे, जब उसके बेटे-बेटियां जीवित हों

दिल्ली हाईकोर्ट: मुस्लिम पुरुष की संपत्ति से पोते-पोतियां केवल तब बाहर होंगे, जब उसके बेटे-बेटियां जीवित हों दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मुस्लिम पुरुष की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति से पोते-पोतियां केवल तभी बाहर किए जा सकते हैं, जब उस समय उसका बेटा या बेटी जीवित हो। यदि मृतक के कोई अन्य संतान नहीं है तो पोते-पोतियाँ उसके एकमात्र जीवित वंशज होने के नाते उत्तराधिकार से वंचित नहीं किए जा सकते।जस्टिस मनीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की एकलपीठ मोहम्मद आरिफ की संपत्ति से जुड़े विवाद की सुनवाई कर रही...

बृजभूषण शरण सिंह के सीएम को लिखे पत्र पर वकील की मानहानि शिकायत में पत्रकारों को तलब करने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया रद्द
बृजभूषण शरण सिंह के सीएम को लिखे पत्र पर वकील की मानहानि शिकायत में पत्रकारों को तलब करने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) ने हाल ही में एक अहम आदेश पारित करते हुए लखनऊ की विशेष सीजेएम अदालत द्वारा पारित उस आदेश को निरस्त किया जिसके तहत दो पत्रकारों को मानहानि के मामले में तलब किया गया था। यह शिकायत एडवोकेट डॉ. मोहम्मद कमरान ने दायर की थी जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के आधार पर प्रकाशित समाचार से उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।मामला संडे व्यूज़ अख़बार की रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसके मालिक दिव्या श्रीवास्तव और संपादक...

निष्पक्ष सुनवाई की अवधारणा से समझौता: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों को थानों से गवाही देने की अनुमति देने वाले नोटिफिकेशन पर जताई चिंता
निष्पक्ष सुनवाई की अवधारणा से समझौता: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों को थानों से गवाही देने की अनुमति देने वाले नोटिफिकेशन पर जताई चिंता

दिल्ली हाईकोर्ट ने को कहा कि उपराज्यपाल (LG) द्वारा 13 अगस्त को जारी वह अधिसूचना जिसके तहत राजधानी के सभी पुलिस थानों को पुलिसकर्मियों की गवाही दर्ज करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये अदालत के समक्ष पेश होने की जगह नामित किया गया, प्रथम दृष्टया निष्पक्ष सुनवाई की अवधारणा से समझौता करती है।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि LG को स्थान निर्धारित करने का अधिकार है। हालांकि, सवाल यह है कि क्यों विशेष रूप से पुलिस थानों को ही नामित किया गया।खंडपीठ ने...

पीड़िता के द्वारा रिश्ते को जारी रखने की इच्छा जताने पर हाईकोर्ट ने युवक पर पॉक्सो केस खत्म किया
पीड़िता के द्वारा रिश्ते को जारी रखने की इच्छा जताने पर हाईकोर्ट ने युवक पर पॉक्सो केस खत्म किया

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक 18 साल के युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही खत्म कर दी। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता और उसके माता-पिता की ओर से युवक के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।जस्टिस जी. गिरीश ने बताया कि पीड़िता, जो अब 18 साल की है, ने हलफनामे में कहा है कि वह याचिकाकर्ता के साथ अपने रिश्ते को आगे भी जारी रखना चाहती है। कोर्ट के अनुसार, दोनों स्कूल के साथी थे और एक-दूसरे से प्यार करते थे। जब पीड़िता की उम्र करीब 17½ साल थी, तब दोनों की सहमति से कुछ नज़दीकी संबंध बने। फिर...