नियम न हों तो आरक्षित उम्मीदवार छूट लेकर भी सामान्य वर्ग में चयनित हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

10 Sept 2025 5:06 PM IST

  • नियम न हों तो आरक्षित उम्मीदवार छूट लेकर भी सामान्य वर्ग में चयनित हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक भर्ती नियमों में स्पष्ट रूप से मना न किया गया हो, आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जिसने शारीरिक मानकों में छूट ली हो, अगर मेरिट में चयनित होता है तो उसे सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) की पोस्ट पर भी नियुक्त किया जा सकता है।

    जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक सामान्य वर्ग के उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी, जिसने CISF असिस्टेंट कमांडेंट (एक्जीक्यूटिव) भर्ती में एक अंक से चयन चूक जाने के बाद, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार की सामान्य सीट पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि एसटी श्रेणी के तहत कम ऊँचाई मानक की छूट लेने के बावजूद, यदि उम्मीदवार मेरिट में सामान्य सीट के लिए योग्य है, तो वह उस पर दावा कर सकता है।

    2017 की भर्ती में, अपीलकर्ता (सामान्य वर्ग) को 363 अंक मिले जबकि कटऑफ 364 था। उसने एक एसटी उम्मीदवार की नियुक्ति को चुनौती दी, जिसे 366 अंक मिले थे और जिसने सामान्य सीट भरी थी लेकिन शारीरिक मानकों में छूट ली थी।

    जस्टिस बागची द्वारा लिखे फैसले में कहा गया कि चूँकि CISF के नियमों में यह स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है कि "शारीरिक मानकों में छूट" लेने पर उम्मीदवार सामान्य वर्ग की सीट पर दावा नहीं कर सकता, इसलिए अपीलकर्ता की दलील खारिज की जाती है।

    कोर्ट ने कहा, "हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि 01.07.1998 का कार्यालय ज्ञापन यह नहीं कहता कि शारीरिक मानकों में छूट लेने से आरक्षित उम्मीदवार सामान्य श्रेणी की सीट पर नियुक्ति से वंचित होगा, यदि उसने उस श्रेणी की कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।"

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) की भर्ती में लागू नियमों से मामला अलग है, क्योंकि वहाँ विशेष रूप से शारीरिक मानकों की छूट को सामान्य श्रेणी में नियुक्ति पर रोक बताया गया है।

    इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य वर्ग उम्मीदवार की अपील खारिज कर दी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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