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अरुंधति रॉय की किताब के कवर पर बिना स्वास्थ्य चेतावनी बीड़ी पीते दिखने पर याचिका: केरल हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा
केरल हाईकोर्ट ने अरुंधति रॉय की किताब “Mother Mary Comes To Me” के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता, जो एक अधिवक्ता हैं, ने कहा है कि किताब के कवर पर रॉय बीड़ी पीते हुए दिख रही हैं लेकिन उस पर अनिवार्य स्वास्थ्य चेतावनी नहीं है। उन्होंने मांग की है कि जब तक वैधानिक लेबल नहीं लगाया जाता, तब तक किताब की बिक्री पर रोक लगाई जाए।याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यह कवर सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन निषेध और व्यापार, उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2013 की...
तेल कंपनियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे बायोडीज़ल निर्माता
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय बायोडीज़ल संघ द्वारा दायर याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। इस याचिका में सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई, जिसमें बिना मिश्रित हाई-स्पीड डीज़ल की बिक्री पर उत्पाद शुल्क छूट को एक और वर्ष, 1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2026 तक बढ़ा दिया गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने एमसी मेहता बनाम भारत संघ मामले में याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस आवेदन पर नोटिस जारी किया।केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या...
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला आने तक NHAI द्वारा CLAT-PG अंकों के आधार पर वकीलों की भर्ती पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 सितंबर) को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की 11 अगस्त की अधिसूचना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें कहा गया कि वकीलों की भर्ती के लिए CLAT-PG अंक आधार होंगे।अदालत ने याचिका पर फैसला सुनाए जाने तक NHAI द्वारा भर्ती पर भी रोक लगाई।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सभी पक्षकारों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।पिछली सुनवाई में NHAI ने हाईकोर्ट को बताया कि वह वकीलों की भर्ती के लिए...
दिल्ली कोर्ट ने अदानी ग्रुप के खिलाफ एकपक्षीय 'गैग ऑर्डर' किया ख़ारिज
दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने गुरुवार को वह एकपक्षीय आदेश रद्द किया, जिसके तहत चार पत्रकारों को अडानी ग्रुप से संबंधित कथित मानहानिपूर्ण रिपोर्टें प्रकाशित करने से रोका गया। यह आदेश निचली अदालत ने 6 सितंबर को पारित किया।डिस्ट्रिक्ट जज आशीष अग्रवाल ने पत्रकार रवी नायर, अबीर दासगुप्ता, अयस्कांत दास और आयुष जोशी की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित लेख पहले से ही लंबे समय से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट को आदेश पारित करने से पहले पत्रकारों को सुना जाना चाहिए।अदालत ने कहा कि...
बार-बार मुकदमेबाजी की अनुमति नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठाओं को कुंभी दर्जा देने के खिलाफ PIL खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार के उस शासनादेश (GR) के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज की, जिसके तहत मराठा समुदाय के उन सदस्यों को जो स्वयं को कुंभी मूल का बताते हैं, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में कुंभी जाति का प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अखंड की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर पहले से ही याचिका अदालत में लंबित है और नई याचिका दाख़िल करना मुकदमेबाजी की अनावश्यक पुनरावृत्ति होगी।चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की,“हम मुकदमेबाजी...
भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट सेशन जज के खिलाफ की विभागीय जांच की सिफारिश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सेशन जज के खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। अदालत ने पाया कि जज ने ज़मीन अधिग्रहण कार्यालय में कार्यरत सरकारी कंप्यूटर ऑपरेटर जिस पर 5 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि गबन करने का आरोप है, उनके खिलाफ गंभीर धाराओं को नज़रअंदाज़ कर केवल हल्की धारा कायम रखी, जिससे उसे अनुचित लाभ मिला।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की पीठ ने आदेश दिया कि इस मामले की प्रति प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (विजिलेंस), हाईकोर्ट ऑफ़ मध्यप्रदेश, जबलपुर को भेजी जाए और माननीय चीफ जस्टिस के...
नारायण साई की अस्थायी ज़मानत याचिका पर आदेश पारित करेगा गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 सितंबर) को यह संकेत दिया कि वह बलात्कार मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे नारायण साई की उस अर्जी पर आदेश पारित करेगा, जिसमें उन्होंने अपनी बीमार मां से मिलने के लिए अस्थायी ज़मानत की मांग की।नारायण साई को 2019 में सूरत की सेशंस कोर्ट ने दोषी ठहराकर उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। उन्होंने दलील दी कि उनकी माँ की तबीयत नाज़ुक है और उन्हें कभी भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है। उनकी ओर से कहा गया कि इससे पहले भी इसी आधार पर अदालत उन्हें अस्थायी ज़मानत दे चुकी है।मामले की सुनवाई...
सुप्रीम कोर्ट से पुष्टि प्राप्त भूमि अधिग्रहण धारा 24(2) के तहत न तो निरस्त होगा, न ही पुनर्जीवित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन भूमि अधिग्रहण कार्यवाहियों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही वैध ठहरा चुका है, उन्हें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में न्यायसंगत मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 24(2) के आधार पर न तो पुनर्जीवित किया जा सकता है और न ही अमान्य घोषित।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने यह टिप्पणी मेरठ ज़िले की भूमि अधिग्रहण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। अदालत ने कहा कि अधिग्रहण की कार्यवाही 1990 में पूरी हो चुकी थी।...
सिर्फ 'तेज़ रफ़्तार' शब्द कहना लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल गवाह का यह कहना कि आरोपी “तेज़ रफ़्तार” से गाड़ी चला रहा था, लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जस्टिस राकेश काइंथला ने स्पष्ट किया कि अभियोजन को आरोपी की विशेष लापरवाही साबित करनी होगी।मामला जुलाई 2009 का है जब सूचक ने ऊना में अपनी कार सड़क के किनारे खड़ी की थी। आरोप था कि एचआरटीसी बस चालक ने पीछे से तेज़ रफ़्तार में टक्कर मारी। ट्रायल कोर्ट ने चालक को दोषी ठहराया था और कहा था कि सड़क सीधी थी और बस रोकी जा सकती थी। परंतु अपीलीय अदालत ने चालक को...
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य-यूटी को 4 महीने में नियम बनाकर सिख विवाह दर्ज करने का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में 17 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे आनंद विवाह अधिनियम, 1909 (Anand Marriage Act) के तहत सिख विवाहों (आनंद कारज) के पंजीकरण के लिए नियम चार माह में बनाएँ। कोर्ट ने कहा कि नियम न बनाने से सिख नागरिकों के साथ असमान व्यवहार हो रहा है और यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि जब कानून आनंद कारज को मान्यता देता है तो पंजीकरण की व्यवस्था भी होनी चाहिए। जब तक राज्य अपने नियम नहीं बनाते, तब...
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला को 22 हफ्ते का गर्भपात कराने की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 वर्षीय अविवाहित महिला को 22-हफ्ते का गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। यह गर्भ एक व्यक्ति द्वारा शादी का झूठा वादा करके बनाए गए शारीरिक संबंधों के कारण ठहरा था, जिससे महिला को गंभीर शारीरिक और मानसिक आघात पहुँचा था।जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि अगर महिला को यह गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर किया जाता है तो उसकी पीड़ा और बढ़ जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ेगा, जिससे उसके शरीर पर हुए घाव शायद ही भर पाएंगेमहिला के अनुसार, वह उस व्यक्ति के...
सरकारी फाइल में की गई टिप्पणी का कोई कानूनी महत्व नहीं, निलंबन रद्द नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी अधिकारियों द्वारा फाइलों में की गई टिप्पणियां या टिपण्णी केवल उनके बीच का आंतरिक पत्राचार है, इसका कोई कानूनी महत्व नहीं होता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे एक प्रधान ने अपने निलंबन आदेश के खिलाफ दायर किया था। याचिकाकर्ता को राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 के तहत निलंबित किया गया था। यह निलंबन 2017 में उसके सरपंच कार्यकाल के दौरान हुई एक घटना से संबंधित आरोप पत्र के बाद किया गया था।याचिकाकर्ता का तर्क था कि उस पर...
Specific Relief Act में Recovery Of Property और कॉन्ट्रैक्ट का पालन करवाने की रिलीफ
Recovery of Propertyविनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम 1963 के भाग 2 के अध्याय 1 में Recovery of Property से संबंधित उपबंध है। यह उपबंध विनिर्दिष्ट स्थावर तथा विनिर्दिष्ट जंगम दोनों प्रकार की संपत्तियों के संबंध में है। विनिर्दिष्ट स्थावर संपत्ति के कब्जे के प्रत्युध्दरण से संबंधित उपबंध धारा 5 धारा 6 में है जबकि विनिर्दिष्ट जंगम संपत्ति के प्रत्युध्दरण के बारे में उपबंध धारा 7 तथा धारा 8 में दिए गए हैं।भारत में संविदा विधि के मूल सिद्धांत भारतीय संविदा अधिनियम 1872 में उल्लिखित हैं परंतु उनमें...
Specific Relief Act के प्रावधान
यह अधिनियम किसी विशेष व्यक्ति के विरुद्ध अनुतोष के संबंध में उल्लेख कर रहा है, यदि कोई अधिकार प्रभुसत्ता द्वारा व्यक्ति को दिया जाता है तो इस अधिकार के साथ में उस अधिकार के लिए उपचार भी दिए जाते हैं। यदि केवल अधिकार दे दिया जाए उपचार नहीं दिया जाए तो ऐसी स्थिति में उस अधिकार का कोई महत्व नहीं रह जाता है। सिविल अधिकार जब दिए जाते हैं तो उस अधिनियम में उस अधिकार के उपचार से संबंधित प्रावधानों का भी उल्लेख किया जाता है जैसे कि भारत के संविधान के अंतर्गत भाग 3 में मूल अधिकारों का उल्लेख किया गया है...
बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला: हाईकोर्ट के निर्देश पर मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 145 के तहत अलग से प्रारंभिक आदेश की जरूरत नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया कि यदि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 145 के तहत किसी जांच का विशेष निर्देश दिया तो मजिस्ट्रेट को धारा 145(1) के तहत अलग प्रारंभिक आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में शांति भंग होने की संभावना वाले विवाद के बारे में संतुष्टि पहले ही हाईकोर्ट द्वारा दर्ज कर ली जाती है और मजिस्ट्रेट का कर्तव्य केवल निर्देशानुसार जांच करना होता है।मामले की पृष्ठभूमिजस्टिस अमित बोरकर रोमेल हाउसिंग एलएलपी...
RTI से खुलासा: केसों के ढेर के बीच NCLT में न्यायिक और तकनीकी सदस्यों के पद खाली
वकील द्वारा दायर की गई RTI (सूचना का अधिकार) से यह सामने आया कि बड़ी संख्या में लंबित मामलों के बावजूद राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) में कई पद खाली पड़े हैं।वकील द्वारा 12 सितंबर 2025 को दायर आवेदन (रजिस्ट्रेशन नंबर MOCAF/R/E/25/01140) में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से NCLT और NCLAT में लंबित मामलों, न्यायिक और तकनीकी सदस्यों के खाली पदों और भर्ती प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी मांगी गई।RTI से मिले मुख्य बिंदुलंबित मामलों पर अस्पष्ट जवाब: NCLT के संयुक्त रजिस्ट्रार ने जवाब में...
सिटिंग जज पर 'स्कैंडलस' टिप्पणियां करने के लिए एडवोकेट निलेश ओझा के खिलाफ होगी अतिरिक्त आपराधिक अवमानना कार्यवाही
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एडवोकेट निलेश ओझा के खिलाफ स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना की एक और कार्यवाही शुरू की। अदालत ने पाया कि ओझा ने सिटिंग जज के खिलाफ स्कैंडलस और अपमानजनक आरोप” लगाए, जबकि वे खुद पर लंबित आपराधिक अवमानना मामले में अपना बचाव कर रहे थे।इस वर्ष अप्रैल में हाईकोर्ट ने ओझा के खिलाफ स्वतः संज्ञान अवमानना कार्यवाही शुरू की थी, क्योंकि उन्होंने जस्टिस रेवती मोहिता-डेरे और तत्कालीन चीफ जस्टिस देवेंद्र उपाध्याय (वर्तमान में दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) के खिलाफ मानहानिकारक और...
"मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं": विष्णु मूर्ति मामले में सीजेआई गवई ने दी सफाई
खजुराहो के एक मंदिर में भगवान विष्णु की जीर्ण-शीर्ण मूर्ति के पुनर्निर्माण की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए अपनी टिप्पणियों से उपजे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई ने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।सीजेआई ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी इस तथ्य के संदर्भ में थी कि मंदिर ASI के अधिकार क्षेत्र में है।सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ कर्नाटक में बड़े पैमाने पर अवैध लौह अयस्क खनन के मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी, जिससे...
बिहार फेलोशिप 2025
परिचय (About the organisation and the opportunity)न्याया (Nyaaya), विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी की पहल है। यह एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो नागरिकों को सरल, व्यावहारिक और भाषा-अनुकूल कानूनी जानकारी उपलब्ध कराता है। न्याया का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति, विशेषकर वंचित समुदायों के लोग, अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझें तथा कानून का उपयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए कर सकें। इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए न्याया बिहार राज्य में बिहार फेलोशिप 2025-26 की शुरुआत कर रहा है। यह एक साल की सवेतन फ़ेलोशिप...
दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: पिता की वसीयत न होने पर संपत्ति पर बेटे का निजी हक
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया कि जिस पिता की मृत्यु बिना वसीयत बनाए होती है, उसकी संपत्ति उसके बेटे को उसकी व्यक्तिगत हैसियत से मिलती है, न कि उसके अपने परिवार के 'कर्ता' के रूप में। इस फैसले के अनुसार जब तक पिता जीवित है, तब तक उसका बेटा उस संपत्ति में कोई अधिकार नहीं जता सकता।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 बिना वसीयत वाले उत्तराधिकार के मामले में जन्मसिद्ध अधिकार की अवधारणा को बाहर कर देती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पोते का अधिकार...




















