ताज़ा खबरे

आँखों में धूल झोंकने वाली कार्रवाई पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट नाराज़, मुख्य सचिव से मांगा नया हलफनामा
आँखों में धूल झोंकने' वाली कार्रवाई पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट नाराज़, मुख्य सचिव से मांगा नया हलफनामा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़कों पर होने वाली गुंडागर्दी को रोकने के लिए राज्य के अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों पर असंतुष्टि व्यक्त की है। यह गुंडागर्दी मुख्य रूप से लापरवाह ड्राइवरों द्वारा स्टंट करने और रिकॉर्ड करने, और सार्वजनिक सड़कों पर जन्मदिन मनाने के कारण होती है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि राज्य द्वारा की गई कार्रवाई केवल आँखों में धूल झोंकने के समान प्रतीत होती है और अधिकारियों के प्रयास में गंभीरता की कमी है।कोर्ट ने 13 अक्टूबर को मुख्य...

संवेदनशीलता से निपटा जाए: आय के विवरण के अभाव में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का मुआवज़ा अस्वीकार करना गलत- राजस्थान हाईकोर्ट
संवेदनशीलता से निपटा जाए: आय के विवरण के अभाव में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का मुआवज़ा अस्वीकार करना गलत- राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की मुआवज़े की याचिका इस तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया कि उसने अपने स्कूल की फीस आदि के भुगतान के लिए आय के स्रोत का विवरण प्रस्तुत नहीं किया।जस्टिस अनूप कुमार ढ़ांड ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे मामलों को अदालतों द्वारा संवेदनशीलता के साथ निपटा जाना चाहिए। चूंकि दुष्कर्म एक अमानवीय अपराध है, इसलिए पीड़िता को सांत्वना के रूप में मुआवज़ा दिया जाना चाहिए।कोर्ट ने दुष्कर्म को 'नारीत्व पर थोपी गई यातना का...

Motor Accident Compensation | विदेश में अर्जित आय को नियंत्रित किया जाना चाहिए या नहीं: सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला
Motor Accident Compensation | विदेश में अर्जित आय को नियंत्रित किया जाना चाहिए या नहीं: सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना के उन मामलों में मुआवज़े का आकलन कैसे किया जाए, इस प्रश्न को एक बड़ी पीठ को भेज दिया, जहां मृतक विदेश में कार्यरत था। यह निर्णय इस बात पर भिन्न न्यायिक उदाहरणों के मद्देनज़र लिया गया कि क्या विदेश में अर्जित आय को मानक कटौती और गुणक लागू करने से पहले नियंत्रित किया जाना चाहिए।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने यह आदेश हरि शंकर ब्रह्मा के परिवार के सदस्यों, थारुनोजू ईश्वरम्मा और अन्य द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया। ब्रह्मा की 2009 में...

धोखाधड़ी ने 27 साल की सेवा भी की रद्द: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- धोखाधड़ी सभी गंभीर लेनदेन को ध्वस्त कर देती है
धोखाधड़ी ने 27 साल की सेवा भी की रद्द: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- धोखाधड़ी सभी गंभीर लेनदेन को ध्वस्त कर देती है'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में यह मानते हुए कि धोखाधड़ी हर चीज को दूषित कर देती है, एक ऐसे कर्मचारी को कोई राहत देने से इनकार किया, जिसने धोखाधड़ी के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की थी और 27 साल तक सेवा की थी। कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के आधार पर प्राप्त नियुक्ति को शुरुआत से ही शून्य माना जाएगा।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने अनुकंपा नियुक्ति की तारीख, यानी 31.03.1998 से ही नियुक्ति को शून्य घोषित करने का आदेश बरकरार रखा।उन्होंने कहा,"धोखाधड़ी ऐसी नियुक्ति से उत्पन्न होने वाले सभी...

वकीलों को मुवक्किलों के साथ संचार का खुलासा करने के लिए जांच एजेंसियों द्वारा दी जाने वाली धमकियों से बचाना ही BSA की धारा 132 का उद्देश्य: सुप्रीम कोर्ट
वकीलों को मुवक्किलों के साथ संचार का खुलासा करने के लिए जांच एजेंसियों द्वारा दी जाने वाली धमकियों से बचाना ही BSA की धारा 132 का उद्देश्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारियों द्वारा वकीलों को मनमाने ढंग से समन भेजने से बचाने के लिए निर्देश जारी करते हुए कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 132-134 का उद्देश्य वकीलों को अपने मुवक्किलों के साथ विशेष संचार का खुलासा करने के लिए अनावश्यक धमकाने से बचाना है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने जांच एजेंसियों द्वारा अभियुक्तों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को मनमाने ढंग से समन भेजने के मुद्दे पर कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान...

इन-हाउस काउंसल वकील नहीं, नियोक्ता के साथ उनका संवाद BSA की धारा 132 के तहत संरक्षित नहीं: सुप्रीम कोर्ट
इन-हाउस काउंसल 'वकील' नहीं, नियोक्ता के साथ उनका संवाद BSA की धारा 132 के तहत संरक्षित नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इन-हाउस वकीलों और उनके नियोक्ताओं के बीच संवाद भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 132 के तहत मुवक्किल-वकील विशेषाधिकार द्वारा संरक्षित नहीं है, क्योंकि एडवोकेट एक्ट, 1961 के अर्थ में इन-हाउस काउंसल 'वकील' नहीं हैं।हालांकि, कोर्ट ने माना कि इन-हाउस वकील और उनकी कंपनी के कानूनी सलाहकार के बीच संवाद BSA की धारा 134 के तहत प्रकटीकरण से संरक्षित रहेगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी जांच एजेंसियों द्वारा अपने...

एमएस धोनी द्वारा दायर ₹100 करोड़ के मानहानि का मुकदमा रद्द करने की अपील खारिज
एमएस धोनी द्वारा दायर ₹100 करोड़ के मानहानि का मुकदमा रद्द करने की अपील खारिज

मद्रास हाईकोर्ट ने रिटायर आईपीएस अधिकारी जी संपत कुमार द्वारा सिंगल जज के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज की, जिसमें क्रिकेटर एमएस धोनी द्वारा आईपीएस अधिकारी और अन्य के खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा खारिज करने से इनकार कर दिया गया था।धोनी ने 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी कांड से संबंधित प्रतिवादियों द्वारा प्रस्तुत सामग्री के लिए मानहानि का मुकदमा दायर किया था।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस एम जोतिरमन की खंडपीठ ने शुक्रवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी द्वारा दायर अपील खारिज की।दिसंबर, 2021 में सिंगल जज...

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ED को नोटिस जारी किया
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ED को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने आज छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया है। यह गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले से जुड़ी है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और एन. हरिहरन बघेल की ओर से पेश हुए, जबकि एडिसनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ईडी की ओर से उपस्थित थे। बघेल की ओर से हिरासत से रिहाई की मांग की गई, लेकिन...

क्या ED राज्य पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग कर सकती है? मद्रास हाईकोर्ट ने पूछा सवाल
क्या ED राज्य पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग कर सकती है? मद्रास हाईकोर्ट ने पूछा सवाल

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह सवाल उठाया कि क्या प्रवर्तन निदेशालय (ED), जो एक जांच एजेंसी है, दूसरी जांच एजेंसी (राज्य पुलिस) को मामला दर्ज करने का निर्देश देने के लिए अदालत में याचिका दायर कर सकती है?चीफ़ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की खंडपीठ ED द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में तमिलनाडु राज्य को रेत खनन मामले की जांच में सहयोग करने और पुलिस महानिदेशक को ED के पत्र के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। ...

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की नई राजिंदर नगर मार्केट में कामर्शियल उपयोग के लिए दुरुपयोग की गई संपत्ति की सीलिंग बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की नई राजिंदर नगर मार्केट में कामर्शियल उपयोग के लिए दुरुपयोग की गई संपत्ति की सीलिंग बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 अक्टूबर) को नई राजिंदर नगर मार्केट, दिल्ली में एक संपत्ति की डी-सीलिंग की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आवासीय मंजिलों का कामर्शियल उपयोग अवैध है और सीलिंग उचित थी।चीफ़ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा कि संपत्ति को “दुकान-कम-निवास” (shop-cum-residence) के रूप में स्वीकृति मिली थी, जिसमें केवल भूतल पर व्यापार की अनुमति थी, जबकि ऊपरी मंजिलें आवासीय उपयोग के लिए थीं। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश किया गया न्यायिक...

BREAKING| BSA की धारा 132 के तहत अपवादों को छोड़कर वकीलों को समन जारी नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए निर्देश
BREAKING| BSA की धारा 132 के तहत अपवादों को छोड़कर वकीलों को समन जारी नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 अक्टूबर) को कुछ निर्देश जारी किए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच एजेंसियां आपराधिक मामलों में अभियुक्तों को दी गई कानूनी सलाह के आधार पर वकीलों को मनमाने ढंग से समन जारी न करें।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने जांच एजेंसियों द्वारा अभियुक्तों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को मनमाने ढंग से समन जारी करने के मुद्दे पर कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिए गए मामले में यह निर्णय सुनाया।यद्यपि कोर्ट ने कोई...

सुप्रीम कोर्ट ने CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति घटाने के निर्देश पर पुनर्विचार याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति घटाने के निर्देश पर पुनर्विचार याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने 23 मई 2025 के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी, जिसमें यह माना गया था कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) सभी कैडर से संबंधित मामलों में ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप-A सर्विसेज (OGAS) का हिस्सा हैं।उस निर्णय में अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि प्रत्येक CAPF में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति वाले पदों की संख्या सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (SAG) स्तर तक धीरे-धीरे कम की जाए, ताकि CAPF अधिकारियों...

Delhi Riots UAPA Case | 5 साल जेल में, हिंसा का कोई सबूत नहीं: उमर खालिद, शरजील इमाम और गुलफिशा ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई ज़मानत की गुहार
Delhi Riots UAPA Case | '5 साल जेल में, हिंसा का कोई सबूत नहीं': उमर खालिद, शरजील इमाम और गुलफिशा ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई ज़मानत की गुहार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों की व्यापक साजिश के मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। इन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने सह-आरोपी मीरान हैदर, मोहम्मद सलीम खान और शिफा उर रहमान के साथ-साथ दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के लिए मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित की।ये याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 2...

सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए वकीलों के डिजिटल डिवाइस की प्रस्तुति पर निर्देश जारी किए, कहा- मुवक्किलों के दस्तावेज़ BSA की धारा 132 के अंतर्गत नहीं आते
सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए वकीलों के डिजिटल डिवाइस की प्रस्तुति पर निर्देश जारी किए, कहा- मुवक्किलों के दस्तावेज़ BSA की धारा 132 के अंतर्गत नहीं आते

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के दस्तावेज़ों और डिजिटल डिवाइस, जिनमें मुवक्किलों की जानकारी हो सकती है, उनकी प्रस्तुति को विनियमित करने के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुवक्किल से संबंधित लेकिन वकील द्वारा रखे गए दस्तावेज़, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 132 के तहत विशेषाधिकार के अंतर्गत नहीं आते, चाहे वे दीवानी या आपराधिक कार्यवाही में हों। हालांकि, ऐसी प्रस्तुति में सख्त प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किया जाना चाहिए।आपराधिक मामलों में यदि किसी वकील को मुवक्किल का...