छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ED को नोटिस जारी किया

Praveen Mishra

31 Oct 2025 5:40 PM IST

  • छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ED को नोटिस जारी किया

    सुप्रीम कोर्ट ने आज छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया है। यह गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले से जुड़ी है।

    जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और एन. हरिहरन बघेल की ओर से पेश हुए, जबकि एडिसनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ईडी की ओर से उपस्थित थे।

    बघेल की ओर से हिरासत से रिहाई की मांग की गई, लेकिन जस्टिस सूर्यकांत ने इसे स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया।

    सिब्बल ने तर्क दिया कि ईडी ने बिना कोई नोटिस या समन जारी किए, केवल “सहयोग न करने” के आधार पर गिरफ्तारी की, जो कानून के अनुसार अवैध है। उन्होंने कहा, “बिना नोटिस दिए गैर-सहयोग का आरोप लगाकर गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।”

    इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि गिरफ्तारी का आधार केवल “गैर-सहयोग” नहीं था। ईडी की ओर से एएसजी ने बताया कि जांच में पर्याप्त सबूत हैं और कोर्ट ने ईडी को जांच पूरी करने के लिए 3 महीने का समय दिया है।

    खंडपीठ ने कहा कि मामला केवल गिरफ्तारी के आधार का नहीं, बल्कि धारा 190 की व्याख्या का भी है कि जांच कितने समय तक चल सकती है। अदालत ने ईडी से जवाब दाखिल करने को कहा और अगली सुनवाई तय की।

    इसके अलावा, बघेल द्वारा धारा 44, 50 और 63 PMLA को चुनौती देने वाली याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसकी सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

    गौरतलब है कि ईडी ने 18 जुलाई 2025 को आयकर विभाग, एसीबी और ईओडब्ल्यू की रिपोर्टों के आधार पर चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था।

    इससे पहले, हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि धारा 50 के तहत नोटिस न देना सिर्फ प्रक्रियात्मक चूक है, अवैधता नहीं।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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