दिल्ली हाईकोर्ट ने दाएं हाथ पर टैटू होने पर सेना से अयोग्य ठहराने के नियम पर सवाल उठाया

Praveen Mishra

31 Oct 2025 5:14 PM IST

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने दाएं हाथ पर टैटू होने पर सेना से अयोग्य ठहराने के नियम पर सवाल उठाया

    दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नियम पर सवाल उठाया है, जिसमें केवल दाएँ हाथ पर टैटू होने के आधार पर उम्मीदवार को भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed Forces) से अयोग्य ठहराया जाता है, जबकि बाएँ हाथ पर टैटू की अनुमति दी जाती है।

    जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने इस मामले में कहा कि दिशा-निर्देशों के अनुसार शरीर के “पारंपरिक हिस्सों जैसे अग्रभाग (forearm) के अंदरूनी भाग” पर टैटू होने पर कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन यह केवल बाएँ हाथ पर ही स्वीकार्य बताया गया है, दाएँ हाथ पर नहीं।

    कोर्ट ने कहा कि यह नियम शायद इसलिए बनाया गया क्योंकि “आज की युवा पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित होकर टैटू बनवाती है।”

    यह मामला विपिन कुमार नामक उम्मीदवार से जुड़ा है, जिसे सीआरपीएफ (CRPF) में मोटर मैकेनिक वाहन पद के लिए केवल दाएँ हाथ पर टैटू होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि यदि अनुमति मिले तो वे टैटू हटाने के लिए सर्जरी करवाने को तैयार हैं।

    गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, धार्मिक प्रतीक या नाम वाले टैटू की अनुमति है। लेकिन स्थान के लिहाज से केवल बाएँ हाथ (non-saluting limb) या हाथ की पीठ (dorsum of the hand) पर छोटे आकार (¼ भाग से कम) के टैटू की इजाजत दी गई है।

    कोर्ट ने टिप्पणी की, “प्रथम दृष्टया हमें समझ नहीं आता कि केवल दाएँ हाथ पर टैटू होने से किसी उम्मीदवार को भर्ती से अयोग्य कैसे ठहराया जा सकता है।”

    इस नियम की वैधता पर सवाल उठाते हुए, अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि यह नियम क्यों न रद्द किया जाए।

    मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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