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MCD की अपनी गलतियों के कारण वह बकाया रोक नहीं सकती: हाईकोर्ट ने ठेकेदार के पक्ष में ₹1.01 करोड़ का फैसला बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा ठेकेदार के पक्ष में दिए गए ₹1.01 करोड़ से ज़्यादा के फैसले के खिलाफ दायर अपील यह कहते हुए खारिज की कि जब देरी उसकी अपनी गलतियों के कारण हुई हो तो नगर निकाय पेमेंट रोक नहीं सकता।जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस अनीश दयाल की डिवीजन बेंच ने कहा,“अपीलकर्ता ने खुद ऐसी स्थिति बनाई, जिसमें पेड़ हटाने में उनकी विफलता के कारण रुकावटें आईं, जिससे कॉन्ट्रैक्ट के सुचारू रूप से पूरा होने पर असर पड़ा। ऐसी स्थिति में और पेड़ हटाने में विफलता के लिए, जिसके...
परिवार के सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, जब हालत में सुधार हो रहा हो, तो अंतरिम ज़मानत देने का असाधारण आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को अस्थायी/अंतरिम ज़मानत मांगने वाली अर्ज़ी यह देखते हुए खारिज की कि परिवार के किसी सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, खासकर जब हालत कंट्रोल में हो और उसमें सुधार हो रहा हो, तो अस्थायी/अंतरिम ज़मानत देने के लिए यह काफ़ी आधार नहीं है।जस्टिस मिलिंद रमेश फडके की बेंच ने कहा,"परिवार के किसी सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, खासकर जब हालत कंट्रोल में हो और उसमें सुधार हो रहा हो, तो यह कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है जिसके आधार पर गंभीर अपराधों वाले मामले में अस्थायी/अंतरिम ज़मानत...
पीएम केयर्स फंड कानूनी संस्था, लेकिन RTI Act के तहत उसे प्राइवेसी का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पीएम केयर्स फंड, एक कानूनी या सरकारी संस्था होने के बावजूद, सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत प्राइवेसी के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही यह फंड एक राज्य हो, लेकिन सिर्फ इसलिए कि यह एक पब्लिक अथॉरिटी है। कुछ सार्वजनिक काम करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने प्राइवेसी के अधिकार को खो देता है।कोर्ट एक गिरीश मित्तल द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रहा...
The Synthetic Victim: भारत के POCSO कानून में 'बच्चे' की परिभाषा पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि बाहरी रूप के आधार पर होनी चाहिए
संवैधानिक ढांचा और सिंथेटिक नाबालिगों की समस्या2012 में, संसद ने यौन अपराधों के खिलाफ बच्चों की देखभाल करने के लिए 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम' शीर्षक के तहत लिंग-तटस्थ कानून बनाया। यह अधिनियम बच्चे को 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति के रूप में संदर्भित करता है। बाद में वर्ष 2019 में, कानून ने इसे संशोधित करने की मांग की और एक नया प्रावधान पेश किया, और एक नया खंड 2 (1) (डीए), जो बाल पोर्नोग्राफी से संबंधित है, जोड़ा गया। इस संशोधन ने कंप्यूटर-जनित छवियों या चित्रों के उपयोग...
भ्रष्टाचार पर लगाम के लिए युवा पीढ़ी अवैध संपत्ति को ठुकराए: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से अपील की है कि वे अपने माता-पिता या अभिभावकों द्वारा अवैध या भ्रष्ट साधनों से अर्जित संपत्ति को अस्वीकार करें। उन्होंने कहा कि यदि युवा ऐसी संपत्ति के लाभार्थी बनने से इंकार कर दें, तो यह न केवल सुशासन बल्कि देश के प्रति भी एक बड़ी सेवा होगी।जस्टिस नागरत्ना ने कहा —“देश के युवाओं और बच्चों को अपने माता-पिता या अभिभावकों की ज्ञात आय से अधिक अर्जित संपत्ति को स्वीकार करने के बजाय उसे ठुकरा...
भारत की न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता: नियुक्ति, पदोन्नति, जजों का ट्रांसफर
संविधान सभा (सीए) ने एक स्वतंत्र न्यायपालिका की आवश्यकता पर चर्चा की, ताकि एक संविधान अदालत लोगों को न्याय प्रदान कर सके। इसमें न्यायाधीशों की नियुक्ति और कार्यकाल, उनकी सेवानिवृत्ति की आयु, वेतन आदि शामिल थे। सीए ने संविधान का मसौदा तैयार किया और प्रख्यापित किया, जिसमें बुनियादी विशेषताएं हैं, जिनके तत्व हैं: हम लोगों की सर्वोच्चता; संविधान की प्रधानता और इसके एकात्मक चरित्र; राष्ट्र और राज्य की संप्रभुता; गणतंत्र, लोकतांत्रिक, संसदीय रूप सरकार; संविधान का संघीय चरित्र, और; कार्यपालिका,...
अंतरराष्ट्रीय अपराधी होने का हवाला: अबू सलेम को 2 दिन की आपात पैरोल देने पर महाराष्ट्र सरकार की सहमति, एस्कॉर्ट अनिवार्य
बॉम्बे हाईकोर्ट को मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार ने बताया कि 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी करार दिए जा चुके गैंगस्टर अबू सलेम को परिवार से मिलने के लिए दो दिन की आपातकालीन पैरोल देने पर सहमति बना ली गई। हालांकि राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सलेम को बिना सुरक्षा एस्कॉर्ट के रिहा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह एक “अंतरराष्ट्रीय अपराधी” है, और उसे एस्कॉर्ट का खर्च खुद वहन करना होगा।यह मामला जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चंदक की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। अबू सलेम ने अपनी वकील...
रजिस्टर्ड दस्तावेज़ से प्राप्त संपत्ति का स्वामित्व मौखिक पारिवारिक समझौते के दावों पर प्रभावी रहेगा: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति के संबंध में यदि स्वामित्व रिजस्टर्ड विक्रय/हस्तांतरण डीड के आधार पर स्थापित है तो उसे केवल अस्पष्ट या अप्रमाणित मौखिक पारिवारिक समझौते के दावों के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती। हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसे मौखिक दावे जब तक ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से समर्थित न हों रजिस्टर्ड टाइटल को परास्त नहीं कर सकते।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने व्यक्ति द्वारा दायर अपीलों को खारिज किया, जिसमें उसने आवासीय संपत्ति पर संयुक्त...
सुप्रीम कोर्ट का कोल इंडिया को बहु-दिव्यांग उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आज (13 जनवरी) को कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन को निर्देश दिया कि वे एक महिला उम्मीदवार के लिए विशेष (Supernumerary) पद सृजित करें, जिसे वर्ष 2016 में इंटरव्यू में सफल होने के बावजूद नौकरी से वंचित कर दिया गया था क्योंकि वह एक से अधिक दिव्यांगताओं (Multiple Disabilities) से पीड़ित थी।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि यह आदेश विशेष परिस्थितियों में दिया गया है और इसे नज़ीर (precedent) नहीं माना जाएगा।अपीलकर्ता...
जीवन और स्वतंत्रता के प्रतिकूल: गुलफिशा फातिमा मामले में जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की दलीलें
नया वर्ष उमर ख़ालिद और शरजील इमाम के लिए शुभ संकेत लेकर नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार) मामले में दिए गए 142 पृष्ठों के विस्तृत निर्णय में इन दोनों आरोपियों को जमानत देने से एक बार फिर इनकार कर दिया। इसके विपरीत अदालत ने सह-आरोपी अन्य पाँच व्यक्तियों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि उनकी भूमिका गंभीर प्रकृति की नहीं थी। निर्णय में जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक तर्कों पर तो विचार किया गया, किंतु वह दृष्टिकोण अत्यंत सीमित...
राज्यपाल ने कोई अपवर्जन आदेश न जारी करने पर अनुसूचित क्षेत्रों को नगर सीमा में शामिल किया जा सकता है: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसके तहत पांचवीं अनुसूची के पैरा 6(2) के अंतर्गत अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्रों में आने वाले कई गांवों और ग्राम पंचायत क्षेत्रों को नगर पालिका सीमा में शामिल किया गया। यह अधिसूचना राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 3 सहपठित धारा 329 के तहत जारी की गई।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह स्पष्ट किया कि जब तक राज्यपाल द्वारा पांचवीं अनुसूची के पैरा 5(1)...
CrPC की धारा 311 | वकील की बीमारी के कारण अभियुक्त को जिरह से वंचित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अभियुक्त के वकील की बीमारी और तय तारीख पर अदालत में उपस्थित न हो पाने के कारण अभियुक्त को अभियोजन गवाहों से क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जिरह करना अभियुक्त का वैधानिक अधिकार है और निष्पक्ष सुनवाई के लिए यह अवसर देना अनिवार्य है।यह फैसला जस्टिस अनूप कुमार ढांद की पीठ ने उस याचिका पर सुनाया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा अभियुक्त की क्रॉस एक्जामिनेशन का अवसर बंद किए जाने और CrPC की धारा 311 के तहत दायर आवेदन को खारिज...
'फिजूल याचिका' पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, संसद से सावरकर का चित्र हटाने की मांग ठुकराई
सुप्रीम कोर्ट ने आज संसद और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से वी.डी. सावरकर के चित्र हटाने की मांग वाली याचिका पर कड़ी नाराज़गी जताई और इसे “फिजूल (frivolous)” करार दिया।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ इस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।यह याचिका एक सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी बालासुंदरम बालामुरुगन द्वारा दायर की गई थी, जो स्वयं याचिकाकर्ता के रूप में अदालत में उपस्थित हुए।याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए चीफ जस्टिस ने कहा—“आप इस तरह की फिजूल याचिकाएं...
हर आवारा कुत्ते के हमले पर प्रशासन और डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी तय करेंगे: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर गंभीर चिंता जताते हुए संकेत दिया कि यदि किसी व्यक्ति — विशेषकर बच्चों और बुज़ुर्गों — को कुत्तों के हमले से चोट या मृत्यु होती है, तो इसके लिए न केवल नगर निकाय बल्कि कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग भी जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ आवारा कुत्तों से जुड़ी एक सुओ मोटो याचिका की सुनवाई कर रही थी।जस्टिस विक्रम नाथ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा—“अगर किसी बच्चे या बुज़ुर्ग...
पर्सनल ज़िम्मेदारी तय न होने तक बिल्डर कंपनी के खिलाफ़ डिक्री को डायरेक्टर्स/प्रमोटर्स के खिलाफ़ तब तक लागू नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को कहा कि घर खरीदार सिर्फ़ बिल्डर कंपनी के खिलाफ़ मिली डिक्री को उसके डायरेक्टर्स या प्रमोटर्स के खिलाफ़ पर्सनली लागू नहीं कर सकते, जब तक कि ओरिजिनल कार्यवाही में उनके खिलाफ़ ज़िम्मेदारी का कोई खास फ़ैसला न दिया गया हो।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने घर खरीदार की याचिका खारिज करते हुए कहा,"यह साफ़ है कि डिक्री को लागू करने की प्रक्रिया से ज़िम्मेदारी को बदला या बढ़ाया नहीं जा सकता ताकि उन लोगों को बांधा जा सके जो न तो डिक्री के...
Right To Education Act | प्राइवेट स्कूलों में गरीब स्टूडडेंट को मुफ्त शिक्षा मिले, यह सुनिश्चित करें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) की व्याख्या करते हुए कहा कि संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि समाज के कमज़ोर और वंचित वर्गों के स्टूडडेंट्स को आस-पड़ोस के स्कूलों में एडमिशन से मना न किया जाए।कोर्ट ने यह भी कहा कि आस-पड़ोस के स्कूलों की भी यह समान ज़िम्मेदारी है कि वे RTE Act और संविधान के अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) के तहत अनिवार्य रूप से 25% छात्रों को एडमिशन दें।...
पीएम मोदी डिग्री मामला: गुजरात हाइकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की संजय सिंह से अलग ट्रायल की मांग खारिज की
गुजरात हाइकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़े मानहानि मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज की। केजरीवाल ने इस मामले में पार्टी नेता संजय सिंह से अलग ट्रायल चलाने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।जस्टिस एम.आर. मेंगदे ने मंगलवार, 13 जनवरी को आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिका खारिज की जाती है। फिलहाल आदेश की विस्तृत प्रति आना बाकी है। हाइकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला पिछले महीने सुरक्षित...
सरोगेसी कानून में आयु सीमा वैध, पहली कोशिश असफल होने के आधार पर छूट नहीं दी जा सकती: गुवाहाटी हाइकोर्ट
गुवाहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरोगेसी से संबंधित कानून में तय की गई आयु सीमा पूरी तरह संवैधानिक है। इसमें केवल इस आधार पर इसमें छूट नहीं दी जा सकती कि दंपति की पहली सरोगेसी कोशिश असफल हो गई। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत कठिनाइयां चाहे जितनी भी वास्तविक हों, वे जनहित में बनाए गए वैधानिक प्रावधानों को शिथिल करने या निरस्त करने का आधार नहीं बन सकतीं।इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि सरोगेसी कानून के तहत लगाए गए प्रतिबंध वैध राज्य...
भारत माता चित्र विवाद: हाइकोर्ट ने केरल यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार के खिलाफ जारी आरोप-पत्र पर लगाई रोक
केरल हाइकोर्ट ने सोमवार 12 जनवरी को केरल यूनिवर्सिटी के कुलपति (कार्यवाहक) द्वारा पूर्व यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार के. एस. अनिलकुमार के खिलाफ जारी आरोप-पत्र (मेमो ऑफ चार्जेस) पर अंतरिम रोक लगाई। यह आदेश जस्टिस पी. वी. कुन्हीकृष्णन ने पूर्व रजिस्ट्रार द्वारा दायर याचिका पर पारित किया, जिसमें कुलपति की ओर से आरोप-पत्र जारी करने के अधिकार को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कुलपति ने केरल यूनिवर्सिटी एक्ट, 1974 की धारा 10(13) का सहारा लेते हुए आरोप-पत्र जारी किया। इस धारा के...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने जांच से पहले मंज़ूरी को अनिवार्य बनाने वाले PC Act की धारा 17A की वैधता पर सुनाया खंडिता फैसला
सुप्रीम कोर्ट की दो-जजों की बेंच ने आज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A की संवैधानिकता पर खंडित फैसला सुनाया, जिसे 2018 के संशोधन द्वारा जोड़ा गया था, जिसमें यह अनिवार्य है कि अधिनियम के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार से पूर्व मंज़ूरी लेनी होगी।जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि धारा 17A असंवैधानिक है, वहीं जस्टिस केवी विश्वनाथन ने ऐसा करने से इनकार किया। इसके बजाय उन्होंने इसे इस तरह से पढ़ा कि मंज़ूरी का सवाल लोकपाल या लोकायुक्त द्वारा तय किया जाना...




















