जानिए हमारा कानून

जानिए अभियुक्त द्वारा भोगी गई कारावास की अवधि को कारावास के दंडादेश की अवधि से मुजरा (Set Off) कैसे किया जाता है
जानिए अभियुक्त द्वारा भोगी गई कारावास की अवधि को कारावास के दंडादेश की अवधि से मुजरा (Set Off) कैसे किया जाता है

अन्वेषण ( Investigation), जांच (Inquiry) और विचारण (Trial) किसी भी दंडादेश के पूर्व की प्रक्रिया है। अनेक संज्ञेय अपराधों के अंतर्गत अभियुक्त को अन्वेषण, जांच और विचारण के अंतराल में कारागार में निरूद्ध रहना पड़ सकता है। किसी आरोपी व्यक्ति को उसके दोषसिद्ध (Convicted) होते होते संज्ञेय अपराध के मामले में लंबे समय तक कारावास में रहना पड़ सकता है। न्यायालय द्वारा अभियुक्त को ज़मानत पर छोड़ दिए जाने का अधिकार प्राप्त होता है। विचारण की समाप्ति के पश्चात अभियुक्त को दंडादेश दिया जाता है। अपील के...

जानिए कब किसी सिद्धदोष अपराधी को बगैर कारावास के सदाचरण की परिवीक्षा ( Probation) और भर्त्सना (Admonition) पर छोड़ा जा सकता है
जानिए कब किसी सिद्धदोष अपराधी को बगैर कारावास के सदाचरण की परिवीक्षा ( Probation) और भर्त्सना (Admonition) पर छोड़ा जा सकता है

भारतीय दंड प्रणाली का अधिकांश स्वरूप सुधारात्मक प्रकृति का है। इस विचार पर बल दिया गया है कि आंख के बदले आंख लेने से सारी दुनिया अंधी हो जाएगी, इसीलिए भारतीय दंड प्रणाली को भी सुधारात्मक प्रकृति का बनाया गया है। इस दंड प्रणाली में किसी अपराधी को सुधारने के प्रयास किए जाते हैं न कि उसके किए गए अपराध के बदले, उससे बदला लिया जाता है। भारतवर्ष एक लोकतांत्रिक देश है, जहां बदले जैसा न्याय नहीं होता है तथा सुधार के आधुनिक विचार को अपनाया गया है, परंतु ये सुधार केवल छोटे मामलों में और ऐसे अपराध...

धारा 154 साक्ष्य अधिनियम: पक्षद्रोही गवाह (Hostile Witness) कौन होता है और कब उसे बुलाने वाला पक्ष उसका प्रति परीक्षण कर सकता है?
धारा 154 साक्ष्य अधिनियम: पक्षद्रोही गवाह (Hostile Witness) कौन होता है और कब उसे बुलाने वाला पक्ष उसका प्रति परीक्षण कर सकता है?

किसी मामले में जब किसी पक्ष द्वारा एक गवाह अदालत के समक्ष पेश किया जाता, तो ऐसा माना जाता है कि जिस पक्ष ने उस गवाह को बुलाया है, वह गवाह उस पक्ष के हित में अदालत के समक्ष गवाही/साक्ष्य देगा। आम तौर पर वह ऐसा कुछ भी अदालत के समक्ष नहीं कहेगा, जोकि विरोधी पक्ष (Adverse Party) के हित में हो या उसे फायदा पहुंचाए। यह बात तार्किक भी मालूम होती है कि जो पक्ष अपनी तरफ से किसी गवाह को अदालत के समक्ष गवाही देने के लिए बुला रहा है वह उसके पक्ष में ही बोलेगा, इसलिए धारा 145 r/w धारा 146 के अंतर्गत,...

हिंदू उत्तराध‌िकार अध‌िनियम से पहले और बाद में हिंदू का वसीयत करने का अध‌िकार
हिंदू उत्तराध‌िकार अध‌िनियम से पहले और बाद में हिंदू का वसीयत करने का अध‌िकार

अशोक किनीएलआरएस द्वारा वी कल्याणस्वामी (डी) बनाम एलआरएस द्वारा एल भक्तवत्सलम (डी) मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला वसीयत के निष्पादन से जुड़े कानूनी सिद्धांतों की विस्तृत चर्चा करता है। यह माना जाता है कि, ऐसी स्थिति में, जब वसीयत के दोनों उप‌स्थित गवाह मर चुके हों , तब यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि कम से कम एक उपस्थित गवाह का सत्यापन उसका लिखावट में हो। जब दोनों उपस्थित गवाहों की मृत्यु हो चुकी हो, तो यह माना जाता है कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 63 के तहत आवश्यक रूप से सत्यापन की...

जानिए परिशांति बनाए रखने के लिए निष्पादित किए जाने वाले बंधपत्र की प्रक्रिया
जानिए परिशांति बनाए रखने के लिए निष्पादित किए जाने वाले बंधपत्र की प्रक्रिया

जब कभी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा परिशांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र लिए जाते हैं तो ऐसे बंधपत्र लेने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के अध्याय 8 में प्रक्रिया भी बताई गई है तथा बंधपत्रो को निष्पादित नहीं करने के कारण होने वाले परिणामों का भी उल्लेख किया गया है। पूर्व के लेख में इस विषय पर वर्णन किया गया था कि किन लोगों के लिए इस तरह के बंधपत्र निष्पादित किए जाने का आदेश किया जा सकता है तथा इस लेख में बंधपत्र निष्पादित किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया जा रहा है। प्रतिभूति के लिए आदेशित...