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भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग: 6 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत निजी प्रतिरक्षा का अधिकार
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग: 6 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत निजी प्रतिरक्षा का अधिकार

राज्य प्रत्येक व्यक्ति के शरीर और संपत्ति की रक्षा करने का कर्तव्य रखता है। एक राज्य का यह कर्तव्य होता है कि वह अपने नागरिकों तथा गैर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें उनके शरीर की रक्षा करें तथा उनकी संपत्ति की रक्षा करें। प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर और संपत्ति की रक्षा करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है। जिस प्रकार की सुरक्षा का अधिकार उपलब्ध नहीं होता तो शायद उसका शरीर संपत्ति हमेशा खतरे में पाए जाते, शरीर संपत्ति की रक्षा का अधिकार कानून द्वारा प्रदत है अर्थात शरीर और संपत्ति की रक्षा...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग: 5 ऐसे कौन से अपवाद हैंं जिन्हें भारतीय दंड संहिता से छूट प्राप्त है
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग: 5 ऐसे कौन से अपवाद हैंं जिन्हें भारतीय दंड संहिता से छूट प्राप्त है

भारतीय दंड संहिता सीरीज के अंतर्गत पिछले आलेख में सामान्य स्पष्टीकरण का अध्ययन किया गया था। इस आलेख में 'साधारण अपवाद' भारतीय दंड संहिता के अध्याय 4 का अध्ययन किया जा रहा है। भारतीय दंड संहिता 1860 के अध्याय 4 के अंतर्गत साधारण अपवाद दिए गए। साधारण अपवाद से तात्पर्य से वह अपवाद जिन्हें भारतीय दंड संहिता में वर्णित किए गए किसी अपराध से मुक्ति मिली है।कोई भी कार्य नैतिक दृष्टि से कितना भी बुरा क्यों न हो वह तब तक अपराध नहीं होता है जब तक किसी विधि के अंतर्गत उसे अपराध वर्णित न किया जाए।जब किसी...

दहेज मृत्यु-धारा 304 बी के तहत दोष नहीं हो सकता, यदि यह स्‍थापित ना हो कि मृत्यु का कारण अप्राकृतिक थाः सुप्रीम कोर्ट
दहेज मृत्यु-धारा 304 बी के तहत दोष नहीं हो सकता, यदि यह स्‍थापित ना हो कि मृत्यु का कारण अप्राकृतिक थाः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी के तहत दहेज हत्या का अपराध नहीं बनाया जा सकता है, यदि यह स्‍थापित नहीं हो पाता है कि मृत्यु का कारण अप्राकृतिक था। अदालत ने यह भी कहा कि यह भी दिखाया जाना चाहिए कि मृतक पत्नी को मृत्यु से पहले दहेज की मांग के संबंध में क्रूरता या उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा था।यह मानते हुए कि इन कारकों को स्थापित नहीं किया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा तीन व्यक्तियों (मृतक पत्नी के पति, ससुर और सास) को धारा 304 बी आईपीसी के तहत...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग: 3 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत विशेष शब्दों की परिभाषा (General Explanation)
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग: 3 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत विशेष शब्दों की परिभाषा (General Explanation)

भारतीय दंड संहिता से संबंधित आलेखों की सीरीज में अब तक दंड संहिता का सामान्य परिचय तथा इस संहिता के विस्तार पर चर्चा की जा चुकी है। भारत के भीतर और भारत के बाहर किए जाने वाले अपराधों पर भी प्रकाश डाला जा चुका है। इस आलेख में भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत प्रयुक्त उन शब्दों पर चर्चा की जा रही है जिनका उल्लेख इस संहिता के अध्याय 2 'साधारण स्पष्टीकरण' में किया गया है।भारतीय दंड संहिता 1860 के विशेष शब्द-भारतीय दंड संहिता समस्त भारतवर्ष के लिए एक साधारण दंड विधि है। इस संहिता के अध्याय 2 के अंतर्गत...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग: 2 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत भारत के भीतर और भारत के बाहर होने वाले अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग: 2 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत भारत के भीतर और भारत के बाहर होने वाले अपराध

दंड संहिता से संबंधित पहले आलेख में भारतीय दंड संहिता का सामान्य परिचय लेखक द्वारा दिया गया है। इस आलेख में भारतीय दंड संहिता के सबसे पहले अध्याय पर चर्चा की जा रही है। इस अध्याय के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता के विस्तार और भारत के भीतर तथा भारत के बाहर होने वाले अपराधों के संबंध में उल्लेख किया गया है।भारतीय दंड संहिता का विस्तार और भारत के भीतर तथा भारत के बाहर किए गए अपराध-भारतीय दंड संहिता समस्त भारत के लिए एक सामान्य दंड संहिता है तथा अपराधों तथा उनके दंड के उल्लेख के लक्ष्य से भारतीय दंड...

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम (Specific Relief Act) भाग 3: विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम के अंतर्गत संविदाओं का पालन क्या होता है (Performance of Contracts)
विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम (Specific Relief Act) भाग 3: विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम के अंतर्गत संविदाओं का पालन क्या होता है (Performance of Contracts)

पिछले आलेखों में विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम 1963 के संदर्भ में मूल बातें तथा कब्जे को पुनः प्राप्त करने हेतु प्रावधानों पर चर्चा की गई है। विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम से संबंधित इस आलेख भाग 3 के अंतर्गत संविदाओं के विशेष पालन के संबंध में उल्लेख किया जा रहा है। संविदाओं का विनिर्दिष्ट पालन (Performance of Contracts)भारतीय संविदा अधिनियम 1872 के अंतर्गत संविदा से संबंधित प्रावधानों का उपबंध किया गया है। भारतीय संविदा अधिनियम के अंतर्गत ही इस अधिनियम से जुड़े हुए उपचारों का भी उल्लेख किया गया है...

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम (Specific Relief Act) भाग 2: विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम के अंतर्गत संपत्ति के कब्ज़े का प्रत्युद्धरण (Recovery) क्या होता है
विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम (Specific Relief Act) भाग 2: विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम के अंतर्गत संपत्ति के कब्ज़े का प्रत्युद्धरण (Recovery) क्या होता है

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम 1963 संपत्ति के कब्जे का प्रत्युद्धरण के लिए व्यवस्था करता है। अधिनियम की धारा 5, 6 स्थावर संपत्ति के प्रत्युद्धरण के बारे में उपबंध करती है तथा धारा 7 धारा 8 जंगम संपत्ति के प्रत्युद्धरण के बारे में उपबंध करती है। विनिर्दिष्ट स्थावर संपत्ति का प्रत्युद्धरण विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम 1963 की धारा 5 के अनुसार जो व्यक्ति किसी विशेष संपत्ति के कब्जे का हकदार है वह सिविल प्रक्रिया संहिता 1960 द्वारा उपबंधित प्रकार से उसका प्रत्युद्धरण कर सकता है।स्थावर संपत्ति के...

संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 22 :  अभिकरण की संविदा के अंतर्गत अभिकर्ता के कर्तव्य और अधिकार क्या होतें हैं ( Rights and duties of Agent)
संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 22 :  अभिकरण की संविदा के अंतर्गत अभिकर्ता के कर्तव्य और अधिकार क्या होतें हैं ( Rights and duties of Agent)

संविदा विधि से संबंधित सीरीज के अंतर्गत संविदा विधि के प्रावधानों पर सारगर्भित आलेख लेखक द्वारा लिखे जा रहे हैं। अब तक के आलेखों में संविदा विधि के आधारभूत सिद्धांतों का अध्ययन किया जा चुका है और उसके साथ उपनिधान, गिरवी, प्रत्याभूति,क्षतिपूर्ति तथा एजेंसी जैसे विषय का भी सारगर्भित अध्ययन किया जा चुका है। पिछले आलेख में एजेंसी की संविदा के अंतर्गत अभिकर्ता को प्राप्त प्राधिकार के संबंध में चर्चा की गई थी। इस आलेख में एक अभिकर्ता के अपने स्वामी के प्रति क्या अधिकार होते हैं और क्या कर्तव्य होते...

संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 21 :  अभिकरण की संविदा के अंतर्गत अभिकर्ता का प्राधिकार क्या होता है (Agent Authority)
संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 21 : अभिकरण की संविदा के अंतर्गत अभिकर्ता का प्राधिकार क्या होता है (Agent Authority)

संविदा विधि सीरीज के अंतर्गत पिछले आलेख में अभिकरण की संविदा के संबंध में विशेष बातों का उल्लेख किया गया था। अभिकरण की संविदा क्या होती है पिछले आलेख में इस संबंध में चर्चा की जा चुकी है इस आलेख में अभिकर्ता के प्राधिकार के संबंध में उल्लेख किया जा रहा है। अभिकर्ता के प्राधिकार ( Agent Authority)अभिकरण की संविदा के अंतर्गत मालिक अपने द्वारा किए जाने वाले कार्यों को किसी अभिकर्ता को सौंप देता है। इस प्रकार वह अपने कार्यों का प्रत्यारोपण कर देता है। मालिक के कार्य अभिकर्ता द्वारा किए जाते हैं तो...

संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 20 :  संविदा विधि के अंतर्गत अभिकरण की संविदा क्या होती है (Agency)
संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 20 : संविदा विधि के अंतर्गत अभिकरण की संविदा क्या होती है (Agency)

संविदा विधि के संदर्भ में लिखे जा रहे हैं आलेखों के अंतर्गत अब तक उपनिधान की संविदा तक समझा जा चुका है। पिछले आलेख में उपनिधान के रूप में गिरवी क्या होता है इस संदर्भ में उल्लेख किया गया था। संविदा विधि सीरीज के आलेखों में अब अंतिम आलेखों का समय चल रहा है, संविदा अधिनियम के सबसे अंत में एजेंसी का उल्लेख किया गया है, इस आलेख में एजेंसी की संविदा के संदर्भ में संविदा विधि के संदर्भ में लिखे जा रहे हैं आलेखों के अंतर्गत अब तक उपनिधान की संविदा तक समझा जा चुका है। पिछले आलेख में उपनिधान के रूप में...

संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 19 :   संविदा विधि के अंतर्गत गिरवी रूपी उपनिधान क्या होता है (Contract of Bailment and Pledge)
संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 19 : संविदा विधि के अंतर्गत गिरवी रूपी उपनिधान क्या होता है (Contract of Bailment and Pledge)

संविदा विधि के पिछले आलेख के अंतर्गत उपनिधान के संदर्भ में चर्चा की गई है। उपनिधान का एक आम साधारण रूप और है जिसे गिरवी कहा जाता है। गिरवी बहुत साधारण अवधारणा है परंतु वैधानिक रूप से इस अवधारणा के अर्थ बड़े विस्तृत हैं। इस आलेख के अंतर्गत उपनिधान के अंतर्गत गिरवी की अवधारणा पर उल्लेख किया जा रहा है। गिरवीजैसा कि पूर्व ऊपर उल्लेख किया गया है गिरवी एक साधारण अवधारणा है जो आम जीवन में हमें देखने को मिलती है। कर्ज के लिए गिरवी किसी कीमती वस्तु को रखा जाता है तथा कर्ज के भुगतान के समय उसे पुनः वापस...

संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 18 :  उपनिधान की संविदा में उपनिहिती के क्या कर्तव्य होतें हैं (Duties of a Bailee)
संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 18 : उपनिधान की संविदा में उपनिहिती के क्या कर्तव्य होतें हैं (Duties of a Bailee)

संविदा विधि से संबंधित लाइवलॉ वेबसाइट पर उपलब्ध की जा रही इस सीरीज के आलेखों के अंतर्गत अब तक संविदा विधि के आधारभूत सिद्धांतों के साथ प्रत्याभूति की संविदा, क्षतिपूर्ति की संविदा तथा उपनिधान की संविदा के संदर्भ में सारगर्भित उल्लेख किया जाता चुका है। इस आलेख में उपनिधान की संविदा के अंतर्गत एक उपनिहिती के कर्तव्यों पर विवेचना की जा रही है। पिछले आलेख में उपनिधान की संविदा क्या होती है इस संदर्भ में विवेचना की गई थी तथा यह आलेख दूसरा आलेख है। यदि पाठकगण आलेख 18 का अध्ययन करना चाहते हैं तो इसके...