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भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 26: भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत उद्यापन, लूट और डकैती के अंतर्गत अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 26: भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत उद्यापन, लूट और डकैती के अंतर्गत अपराध

पिछले आलेख में चोरी से संबंधित विषय का अध्ययन किया गया था, इस आलेख में उद्यापन, लूट और डकैती के अपराधों पर प्रकाश डाला जा रहा है। भारतीय दंड संहिता 1860 के अध्याय 17 के अंतर्गत संपत्ति से जुड़े हुए अपराधों के अंतर्गत उल्लेख किया गया है क्योंकि राज्य का यह परम कर्तव्य है कि वह अपनी सीमा में रहने वाले व्यक्तियों की संपत्ति की रक्षा करें। संपत्ति से जुड़े अपराधों की सूची में चोरी,उद्यापन, लूट, डकैती, आपराधिक दुर्विनियोग,आपराधिक न्यास भंग, रिष्टि का उल्लेख मिलता है। संपत्ति से जुड़े हुए अपराधों के...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 25: भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत चोरी का अपराध क्या होता है
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 25: भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत चोरी का अपराध क्या होता है

भारतीय दंड संहिता सीरीज के अंतर्गत लिखे जा रहे आलेखों में पिछले आलेख में दास बनाने और मनुष्य को खरीदने बेचने के संदर्भ में उल्लेखित अपराधों पर चर्चा की गई थी, इस आलेख में चोरी के अपराध के संदर्भ में उल्लेख किया जा रहा है।चोरी प्राचीन समय से चलता आ रहा एक प्रसिद्ध अपराध है। हर समाज हर परिस्थिति में यह अपराध घटित होता रहा है। वर्तमान में भी यह अपराध चारों ओर देखने को मिलता है। भारतीय दंड संहिता भारत की सीमा में केवल व्यक्तियों के शरीर की ही रक्षा हेतु दंड विधान का निर्माण नहीं करती है अपितु यह दंड...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 24 : बंधुआ मजदूरी और दास बनाने तथा व्यक्तियों को खरीदने बेचने के अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 24 : बंधुआ मजदूरी और दास बनाने तथा व्यक्तियों को खरीदने बेचने के अपराध

किसी समय मनुष्यों को खरीद बेच कर दस बनाने जैसी प्रथा प्रचलित रही थी। मनुष्य खरीदे और बेचे जाते थे, एक समय था जब राजा महाराजा जमीदार और साहूकार लोग निर्धन और कमजोर लोगों को अपने यहां दास के रूप में रख लिया करते थे। जैसा कि हमें स्वतंत्रता पूर्व के लेखकों की कहानियों में भी यह प्राप्त होता है। थोड़े से कर्ज के रुपयों के लिए लोगों को सारे जीवन के लिए दास बना लिया जाता था, उन से बलपूर्वक श्रम और बेगार लेते थे। लोगों पर अत्याचार किया जाता था। भारत का संविधान समानता तथा प्रतिष्ठा के जीवन का उल्लेख...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 22 :  मारपीट के अपराध के अंतर्गत गंभीर चोट पहुंचाने पर क्या हैं प्रावधान
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 22 : मारपीट के अपराध के अंतर्गत गंभीर चोट पहुंचाने पर क्या हैं प्रावधान

पिछले आलेख में मारपीट के दौरान साधारण चोट पहुंचाने पर होने वाले अपराधों के संबंध में उल्लेख किया गया था, इस आलेख के अंतर्गत स्वेच्छा से गंभीर चोट कारित करने के संबंध में उल्लेख किया जा रहा है। गंभीर चोटभारतीय दंड संहिता के अंतर्गत धारा 320 गंभीर चोट की परिभाषा प्रस्तुत कर रही है। दंड सहिंता सभी प्रकार की चोट को गंभीर चोट नहीं मानती है, गंभीर चोट के लिए एक विशेष प्रारूप तैयार किया गया है जिसके अंतर्गत ही किसी चोट को गंभीर चोट माना जाता है।जब कोई चोट इस प्रारूप के अंतर्गत होती है तब वह गंभीर चोट...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 21 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत मारपीट से संबंधित अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 21 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत मारपीट से संबंधित अपराध

पिछले आलेख में मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधियों की सूची में गर्भपात और शिशुओं से संबंधित अपराध के विषय में उल्लेख किया गया है, इस आलेख में मारपीट के परिणामस्वरूप होने वाली उपहति के विषय में चर्चा की जा रही है। विचारों में मतभेद से जीवन के सामान्य अनुक्रम में अनेक ऐसे मामले हो जाते हैं जिनमें लोग एक दूसरे के प्रति हिंसक होकर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। कभी-कभी विवाद गाली गलौज से शुरू होकर मारपीट तक जाता है तथा मारपीट से होते हुए हत्या तक पहुंच जाता है। ऐसे विवादों में अपराधिक मानव वध और...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 20 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत गर्भपात और शिशुओं से संबंधित अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 20 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत गर्भपात और शिशुओं से संबंधित अपराध

भारतीय दंड संहिता सीरीज के अंतर्गत पिछले आलेख में आत्महत्या का दुष्प्रेरण तथा हत्या के प्रयास के अपराध के संबंध में चर्चा की गई थी, अब इस आलेख में गर्भपात और शिशुओं से संबंधित अपराध पर सारगर्भित चर्चा की जा रही है।भारतीय दंड संहिता 1860 एक अत्यंत विषाद ग्रंथ है। भारत के राज्य द्वारा अपने नागरिकों को किस प्रकार की सुरक्षा दी जाएगी इसका पूरा उल्लेख इस दंड संहिता के अंतर्गत मिलता है। भारतीय दंड संहिता केवल जीवित व्यक्तियों के ही प्राणों की रक्षा नहीं करती है अपितु गर्भ में रहने वाले व्यक्तियों की...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 19 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आत्महत्या का दुष्प्रेरण और हत्या का प्रयास
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 19 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आत्महत्या का दुष्प्रेरण और हत्या का प्रयास

पिछले आलेख में मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के संबंध में भारतीय दंड संहिता के अध्याय 16 के अंतर्गत उतावलेपन द्वारा और उपेक्षा द्वारा मृत्यु कार्य करने तथा दहेज मृत्यु के संबंध में चर्चा की गई थी, इस आलेख में अध्याय 16 के अंतर्गत जीवन के लिए संकटकारी अपराध आत्महत्या का दुष्प्रेरण तथा हत्या का प्रयास अपराध के संबंध में उल्लेख किया जा रहा है। आत्महत्या का दुष्प्रेरणजैसा कि पिछले आलेख में उल्लेख किया गया है भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत किसी अपराध को कारित करना ही अपराध नहीं है अपितु इस...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 18 : लापरवाही से मृत्यु कारित करना तथा दहेज मृत्यु का अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 18 : लापरवाही से मृत्यु कारित करना तथा दहेज मृत्यु का अपराध

पिछले आलेख में भारतीय दंड संहिता के अध्याय 16 के अंतर्गत जीवन के लिए संकटकारी अपराधों की श्रंखला में अपराधिक मानव वध तथा हत्या के अपराध पर विश्लेषण किया गया था इस आलेख में दंड संहिता के भाग 16 से ही तथा जीवन के लिए संकटकारी अपराधों में से ही अपराध लापरवाही से मृत्यु कारित करना तथा दहेज मृत्यु पर चर्चा की जा रही है। भारतीय दंड संहिता 1860 केवल अपराधिक मानव वध और हत्या के लिए ही दंडित नहीं करती है अपितु उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करने पर अर्थात लापरवाही से कोई मृत्यु होने पर तथा वर्तमान समाज का...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 15 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत लोक सुविधा शिष्टाचार और सदाचार को प्रभावित करने वाले अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 15 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत लोक सुविधा शिष्टाचार और सदाचार को प्रभावित करने वाले अपराध

पिछले आलेख में भारतीय दंड संहिता के अध्याय 14 के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अपराधों के संबंध में चर्चा की गई थी इस आलेख में इस ही अध्याय से संबंधित लोक सुविधा, शिष्टता और सदाचार से संबंधित अपराधों पर सारगर्भित उल्लेख किया जा रहा है। लोक सुविधा को प्रभावित करने वाले अपराधभारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत उन सभी कार्य या लोप को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है जो किसी न किसी प्रकार से लोक सुविधा और शेम को प्रभावित करते हैं। क्षेम का अर्थ है सुरक्षा होता है। भारतीय दंड संहिता की...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 14 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने वाले अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 14 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने वाले अपराध

पिछले आलेख में झूठी गवाही देने के अपराधों के संदर्भ में चर्चा की गई थी इस आलेख में लोक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने वाले अपराधों का उल्लेख किया जा रहा है।लोक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने वाले अपराध-भारतीय दंड संहिता अपने उस उद्देश्य को प्राप्त करना चाहती है जिसमें वह एक स्वस्थ समाज, एक शांत समाज तथा एक सदाचारी समाज की स्थापना कर सके। सभी नागरिकों का तथा गैर नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वह सभी भारत की सीमा के अंतर्गत आने वाले किसी भी भूभाग पर बसने वाले भारतीय समाज में किसी प्रकार के ऐसे अपराध को नहीं...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 12 : लोक सेवकों तथा लोक सेवकों के विधि पूर्ण प्राधिकार के अवमान से संबंधित अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 12 : लोक सेवकों तथा लोक सेवकों के विधि पूर्ण प्राधिकार के अवमान से संबंधित अपराध

पिछले आलेख में लोग शांति से संबंधित अध्याय के प्रावधानों पर चर्चा की गई थी। इस आलेख में लोक सेवकों से संबंधित अपराधों के संबंध में चर्चा की जा रही है। भारतीय दंड संहिता 1860 सभी प्रकार के अपराधों को संकलित करके एक संग्रह बनाया गया है। समय-समय पर इस संहिता में उल्लेखित अपराधों से संबंधित अन्य अधिनियम भी बना दिए गए हैं। उन अधिनियम के बनाए जाने के बाद इस सहिंता में उन अपराधों से संबंधित जो धाराएं दी गई थी उन धाराओं को निरसित कर दिया गया। जैसे कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम जब बनाया गया तो लोक सेवकों...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 10 : लोक शांति के विरुद्ध अपराध और विधि विरुद्ध जमाव
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 10 : लोक शांति के विरुद्ध अपराध और विधि विरुद्ध जमाव

पिछले आलेख में राज्य के विरुद्ध अपराधों के संबंध में चर्चा की गई थी इस आलेख में लोक शांति के विरुद्ध अपराधों के संबंध में सारगर्भित चर्चा की जा रही है तथा विशेष प्रावधानों का उल्लेख किया जा रहा है। किसी भी राष्ट्र के लिए शांति आवश्यक होती है। मनुष्य का विकास शांति के होते हुए ही संभव है यदि किसी समाज में शांति नहीं है तो समाज का विकास संभव ही नहीं है। राष्ट्र की प्रगति के लिए शांति अति आवश्यक होती है। भारत विविधताओं से भरा हुआ राष्ट्र है यहां विभिन्न प्रकार की संस्कृतियां और समाज एक साथ रहतें...