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संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग: 9 अंतरण पर लगाई कौन सी शर्त शून्य होगी
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 10 और धारा 11 अंतरण पर लगाई कुछ शर्तों को शून्य करार देती है। इस आलेख के अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 10 और 11 से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला जा रहा है। इससे पूर्व के आलेख में इस अधिनियम की धारा 9 जो मौखिक अंतरण के संबंध में उल्लेख कर रही है पर चर्चा की गई थी। कुछ शर्ते ऐसी होती हैं जो किसी अंतरण में अधिरोपित कर दी जाती हैं तो उन शर्तों को शून्य समझा जाता है तथा इस अधिनियम के अंतर्गत उन शर्तों को स्पष्ट रूप से शून्य करार दिया गया है।अन्य अंतरण को...
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग: 10 अजन्मे बालक के फायदे के लिए संपत्ति का अंतरण और शाश्वतता के विरुद्ध संपत्ति का अंतरण
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 अजन्मे बालक के लाभ के लिए किए जाने वाले अंतरण पर भी प्रतिबंध लगाता है तथा संपत्ति में शाश्वतता के विरुद्ध नियम पर भी प्रतिबंध लगाती है। इससे संबंधित संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 13 और धारा 14 में स्पष्ट उल्लेख किए गए हैं। पिछले आलेख में धारा 10, 11 और 12 से संबंधित ऐसी शर्तों पर अंतरण के संबंध में उल्लेख किया गया था जिनको शून्य करार दिया गया है। इस आलेख के अंतर्गत धारा 13 और धारा 14 से संबंधित प्रावधानों पर चर्चा की जा रही है।इस अधिनियम में वर्णित सिद्धान्त ऐसे...
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग: 8 मौखिक अंतरण क्या होता है
संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 9 मौखिक अंतरण के संबंध में उल्लेख कर रही है। यह धारा उपबंधित करती है कि उस दशा में जिसमें विधि द्वारा कोई लेख अभिव्यक्त रूप से अपेक्षित नहीं है संपत्ति का अंतरण लिखे बिना किया जा सकता है। इस आलेख के अंतर्गत धारा 9 से संबंधित प्रमुख बातों का उल्लेख किया जा रहा जो मौखिक अंतरण पर प्रकाश डालती है। इससे पूर्व के आलेख में संपत्ति अंतरण के पश्चात होने वाले प्रभाव पर उल्लेख किया गया था जो कि इस अधिनियम की धारा 8 से संबंधित है।मौखिक अंतरण कानून का यह नियम है कि इसके...
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग: 7 अंतरण करने के लिए सक्षम पक्षकार और अंतरण का प्रभाव
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 से संबंधित प्रस्तुत किए जा रहे आलेखों में अब तक किन संपत्तियों को अंतरित किया जा सकता है जो कि इस अधिनियम की धारा 6 से संबंधित है का अध्ययन किया जा चुका है। इस आलेख के अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 7 जो कि अंतरण करने के लिए सक्षम पक्षकारों का उल्लेख कर रही है तथा धारा 8 जो कि अंतरण के प्रभाव का उल्लेख कर रही है का अध्ययन किया जा रहा है।अंतरण करने के लिए सक्षम व्यक्ति-संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 7 अंतरण करने के लिए सक्षम व्यक्तियों का उल्लेख कर रही है। इस धारा के...
सिविल मुकदमों में कौन-कौन पक्षकार बन सकता या बनाया जा सकता है?
क्या सिविल मुकदमा किसी के भी द्वारा और किसी के भी खिलाफ दाखिल किया जा सकता है? किसी भी व्यक्ति को सिविल मुकदमे में पक्षकार बनाने के पीछे क्या विचार होता है? क्या कानूनी रूप से किसी भी तरह की कोई रोक-टोक मौजूद है जो किसी व्यक्ति को गैर-जरुरी मुकदमेबाज़ी से बचाती हो?किसी भी सिविल मुक़दमे में दो पक्षकार होते है। प्रथम, वादी जिसने अदालत में मुकदमा दाखिल किया हो या जिसके अधिकारों का हनन हुआ हो अथवा जो किसी व्यक्ति विशेष से अपने अधिकारों की मांग करता हो। द्वितीय, प्रतिवादी जिसके खिलाफ वादी द्वारा मुकदमा...
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग 6: जानिए कौन सी संपत्तियों को अंतरित नहीं किया जा सकता
संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 6 के अंतर्गत जिन संपत्तियों को अंतरित किया जा सकता है उनका उल्लेख किया गया है। धारा 6 के अनुसार सभी संपत्तियों को अंतरित किया जा सकता है पर इस धारा के अंतर्गत कुछ ऐसे अपवाद प्रस्तुत किए गए हैं जिन्हें अंतरित नहीं किया जा सकता है। इन अपवादों को कुल 10 खंडों में बांटा गया है। इससे पूर्व के आलेख में संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 6 के अंदर बताए गए अपवादों में सर्वप्रथम पहले अपवाद का उल्लेख किया गया था। इस आलेख के अंतर्गत अन्य अपवादों का उल्लेख किया जा रहा है अर्थात...
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग:5 क्या संपत्ति अंतरित की जा सकती है
संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 6 जिन संपत्तियों को अंतरित किया जा सकता है उनके संबंध में उल्लेख कर रही है। इस आलेख के अंतर्गत ऐसी कुछ संपत्तियों का उल्लेख किया जाएगा जिन्हें अंतरित नहीं किया जा सकता क्योंकि इस अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत सभी संपत्तियों को अंतरित किए जाने का उल्लेख कर दिया गया है तथा कुछ ही संपत्तियां ऐसी हैं जिन्हें अंतरित नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया है।कौन सी संपत्ति अंतरित की जा सकती है-संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 6 सभी प्रकार की संपत्तियों को अंतरित करने का वर्णन...
क्या किसी एक मुद्दे (सिविल) पर बार-बार मुकदमा दायर किया जा सकता है?
Res Judicata (पूर्व न्याय / निर्णय न्यायोचित) का सिद्धांतमुक़दमे दायर करने सम्बन्धी सवालों में एक सवाल बहुत आम है, वो यह है कि क्या एक ही मुद्दे पर बार-बार मुकदमा दायर किया जा सकता है। क्या किसी भी विवाद का कोई अन्त होता है या फिर किसी भी मुद्दे को जीवन भर बार-बार न्यायालयों में ताउम्र खींचा जा सकता है। क्या किसी कानून के तहत एक बार न्यायालय द्वारा हल किये गए विवाद को आखिरी माना जा सकता है। इन सब सवालों से सम्बंधित है - पूर्व न्याय / निर्णय न्यायोचित का सिद्धांत। अंग्रेजी में इसे Res Judicata का...
कानून के किस फंदे में फंसे हैं राज कुंद्रा और भारत में अश्लीलता पर क्या कहता है कानून?
राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी मामला ज़ोर पर है। अश्लीलता को भारत में अपराध माना गया है और अश्लीलता के ख़िलाफ़ भारत में ज्यादा कठोर तो नहीं फिर भी सज़ा दिए जाने जितना कानून तो मौजूद ही है। आइए जानते हैं अश्लीलता से जुड़ा भारत का कानून-अश्लीलता- भारत की गुनाहों की किताब आई पी सी की धारा 292 अश्लीलता शब्द का मतलब बताती है। इस दफ़ा में अश्लीलता उसे माना गया है जिसमे कुछ ऐसा हो जिससे लोगों की सेक्स को लेकर भावना भड़क जाए या फिर जिसे देखकर सेक्स करने का मन करने लगे। अगर कुछ भी ऐसा किसी किताब में, किसी अखबार में,...
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग 4: जानिए संपत्ति अंतरण क्या होता है
संपत्ति अंतरण अधिनियम सिविल विधियों में एक महत्वपूर्ण अधिनियम है तथा इस अधिनियम के अंतर्गत संपत्तियों के अंतरण से संबंधित समस्त विधान को संकलित कर अधिनियमित किया गया है। इस अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत संपत्ति अंतरण की परिभाषा प्रस्तुत की गई है तथा यह स्पष्ट किया गया है कि संपत्ति अंतरण क्या होता है तथा किन चीजों के अंतरण को संपत्ति अंतरण माना जाएगा। इस आलेख के अंतर्गत लेखक संपत्ति अंतरण के विषय में प्रकाश डाल रहे है तथा संपत्ति अंतरण की परिभाषा पर विस्तृत टीका नवीन न्याय निर्णय के साथ प्रस्तुत...
सम्पत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग 3: सूचना क्या होती है और कितने प्रकार की होती है
संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 भारत में अधिनियमित सिविल विधियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस सीरीज के अंतर्गत लेखक द्वारा संपत्ति अंतरण अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर आलेख लिखे जा रहे हैं इस श्रंखला में इस आलेख के अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 3 जोकि इस अधिनियम में उपयोग किए गए महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषाएं तथा स्पष्टीकरण प्रस्तुत करती है का वर्णन किया जा रहा है। इससे पूर्व के आलेख में इस ही धारा से संबंधित स्थावर संपत्ति शब्द पर विस्तारपूर्वक टीका टिप्पणी की गई थी। इस आलेख के अंतर्गत संपत्ति...
बाल विवाह निषेध और महत्वपूर्ण कानून
भारत में बाल विवाह सदियों से प्रचलित है और यह किसी धर्म विशेष से नहीं होकर सभी धर्मों, समुदायों और वर्गों में लम्बे समय से चल रही एक प्रथा है। वर्तमान समय में यह प्रथा ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिलती है। बाल विवाह के पीछे कारणों में मुख्यतः गरीबी, अशिक्षा, पितृसत्ता जैसे कारक हैं। बाल विवाह से तात्पर्य है उस विवाह से जब बालक अथवा बालिका अथवा दोनों विवाह के लिए निर्धारित उम्र से काम के हों। वर्तमान समय में बालक के लिए 21 साल एवं बालिका के लिए 18 साल निर्धारित है। यदि कोई भी व्यक्ति इस...
जानिए सिविल मुक़दमे कहां दायर किए जा सकते हैं?
मुकदमा दायर करने के दौरान सर्व प्रथम यह निर्धारित करना आवश्यक है कि "मुकदमा कहाँ एवं किस कोर्ट / न्यायालय में दाखिल किया जायेगा?" कोई भी मुकदमा किसी भी स्थान / न्यायालय में दाखिल नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक न्यायालय को कुछ निश्चित प्रकार के मुक़दमे तय करने का अधिकार होता है। आमतौर पर मुक़दमे उनकी प्रकृति के आधार पर विभिन्न प्रकार के होते हैं। जैसे संपत्ति, अनुबंध, अपकार, वैवाहिक कार्यवाही, आदि। किसी मुकदमे का विचार करने, निर्णय लेने और निर्णय लेने का न्यायालय का अधिकार-क्षेत्र वाद की...
सम्पत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग 2: स्थावर सम्पत्ति क्या होती है
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 मूल रूप से अचल संपत्तियों के अंतरण के विनियमन हेतु निर्माण किया गया है। इस अधिनियम में कहीं भी चल संपत्ति की परिभाषा नहीं है जबकि इस अधिनियम में धारा 3 के अंतर्गत स्थावर संपत्ति अर्थात अचल संपत्ति की परिभाषा प्रस्तुत की गई है। इस अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत कुछ महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषाओं को प्रस्तुत किया गया है और यह धारा इस अधिनियम की अत्यधिक महत्वपूर्ण धाराओं में से एक हैं।इस धारा में स्थावर संपत्ति पदावली का प्रयोग बिना यह स्पष्ट किए हुए की संपत्ति क्या है...
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 भाग 1: अधिनियम का सामान्य परिचय
इस आलेख के माध्यम से संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 का सामान्य परिचय प्रस्तुत किया जा रहा है तथा इसके बाद के आलेखों में इस अधिनियम से संबंधित संपूर्ण महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित टीका टिप्पणी की जाएगी। यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि इस अधिनियम के महत्वपूर्ण विषय किस संबंध में उल्लेख कर रहे हैं तथा इस अधिनियम में महत्वपूर्ण धाराएं कौन-कौन सी है।संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882-संपत्ति एक लंबे समय से जटिल विषय रहा है। संपत्ति किसे माना जाए तथा किसे नहीं माना जाए इस विषय पर समय-समय पर समाज में नित नए...
मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम [Arbitration and Conciliation (Amendment) Act], 2019 भाग 4: मध्यस्थ की नियुक्ति कैसे होती है (Appointment of Arbitrator)
मध्यस्थता करार के संबंध में पिछले आलेख में विस्तारपूर्वक उल्लेख किया गया था, इस आलेख के अंतर्गत मध्यस्थ की नियुक्ति के संबंध में अध्ययन किया जा रहा है।मध्यस्थ की नियुक्ति-मध्यस्थ की नियुक्ति मध्यस्थता करार के प्रावधानों के अनुसार की जाती है। मध्यस्थ की नियुक्ति तीन प्रकार से की जा सकती है-1. पक्षकारों द्वारा-2. निर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा-3. मध्यस्थता अधिकरण द्वारा-1. पक्षकार द्वारा मध्यस्थ की नियुक्ति-जहाँ मध्यस्थ या मध्यस्थों को नियुक्ति पक्षकारों द्वारा की गई हो, वहां वह तत्काल को मध्यस्य...
केशवानंद भारती मामले से जुड़े 50 रोचक तथ्य
केशवानंद भारती श्रीपादगलवरु एंड अन्य बनाम केरल राज्य एंड अन्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय इतिहास की एक ऐसी घटना है जो कल्पना से परे है। ऐसा कहा जाता है कि इस निर्णय ने भारत के संविधान की रक्षा की और भारत में अधिनायकवादी शासन या एक दलीय सरकार के शासन को आने से रोका।13 जजों की बेंच के 7 जजों के बहुमत के फैसले ने गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य के मामले में 11 जजों की बेंच के फैसले को पलट दिया, जिसमें 24वें, 25वें और 29वें संविधान संशोधन की वैधता को बरकरार रखा था, सिवाय अनुच्छेद 31-सी के...
भारत का संविधान और आपातकाल
भारत के संविधान के अंतर्गत आपातकालीन समय के लिए कुछ व्यवस्थाएं की गई हैं। इन व्यवस्थाओं के अंतर्गत आपातकालीन परिस्थितियों में भारत के संविधान की स्थिति बदल जाती है। भारत का संविधान एक संघीय संविधान है, राज्यों का एक संघ कहा जा सकता है।संघ को अलग शक्तियां और भारत के राज्यों को अलग शक्तियां दी गई है परंतु भारत के संविधान की बनावट से यह प्रतीत होता है कि यहां संघ अधिक शक्तिशाली है। भारत के संविधान में आपात उपबंध का समावेश कर संकटकाल में भारत का संविधान संघात्मक से एकात्मक संविधान में बदल जाता है।...
मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम [Arbitration and Conciliation (Amendment) Act], 2019 भाग 3: मध्यस्थता करार क्या होता है
पिछले आलेख में मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम से संबंधित विशेष शब्दों का अध्ययन किया गया था, इस आलेख में 'मध्यस्थता करार' के संबंध में विस्तार से अध्ययन किया जा रहा हैइस अधिनियम की धारा 7 मध्यस्थता करार को परिभाषित नहीं करती है। धारा 7 की उपधारा (1) उल्लेखित करती है कि मध्यस्थता करार एक ऐसा करार हैं जो विवाद के मामलों में यह प्रावधान करती है कि ऐसे विवाद को मध्यस्थ को सौंपा जाना चाहिये।पक्षकारों के मध्य किसी विवाद किसी मध्यस्थता को सौंपने का करार मध्यस्थता करार वर्तमान के विवादों या भविष्य के...
मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम [Arbitration and Conciliation (Amendment) Act], 2019 भाग 2: मध्यस्थता और सुलह अधिनियम से संबंधित विशेष शब्द
मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम [Arbitration and Conciliation (Amendment) Act] के पिछले आलेख में मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 से संबंधित सामान्य परिचय प्रस्तुत किया गया था, इस आलेख में इस अधिनियम से संबंधित विशेष शब्दों का वर्णन किया जा रहा है।मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 के अंतर्गत कुछ ऐसे शब्द हैं जिन पर इस अधिनियम के अंतर्गत विशेष प्रकाश डाला गया है तथा यह शब्द अधिनियम में विशेष रूप से उपयोगी है। इस आलेख के अंतर्गत ऐसे शब्दों को विस्तारपूर्वक वर्णित किया जा रहा है। 1....











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