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मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम [Arbitration and Conciliation (Amendment) Act], 2019 भाग 2: मध्यस्थता और सुलह अधिनियम से संबंधित विशेष शब्द
मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम [Arbitration and Conciliation (Amendment) Act] के पिछले आलेख में मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 से संबंधित सामान्य परिचय प्रस्तुत किया गया था, इस आलेख में इस अधिनियम से संबंधित विशेष शब्दों का वर्णन किया जा रहा है।मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 के अंतर्गत कुछ ऐसे शब्द हैं जिन पर इस अधिनियम के अंतर्गत विशेष प्रकाश डाला गया है तथा यह शब्द अधिनियम में विशेष रूप से उपयोगी है। इस आलेख के अंतर्गत ऐसे शब्दों को विस्तारपूर्वक वर्णित किया जा रहा है। 1....
मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम 2019 भाग: 1 सामान्य परिचय
विवादों को न्यायालय के बाहर समाप्त करने के उद्देश्य से मध्यस्थता तथा सुलह अधिनियम 1996 बनाया गय। यह अधिनियम इसके नाम से ही प्रतीत होता है कि विवादों को सुलह के माध्यम से निपटाने का प्रयास कर रहा है। इसके द्वारा मध्यस्थता के नियमों को समेकित किया गया है तथा उन्हें सूचित भी किया गया है।इस अधिनियम के पीछे मूल उद्देश्य है कि अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय, प्रादेशिक विवादों को सुलझाने में मध्यस्थता के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाए। यह अधिनियम अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए...
आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में केवल दो महीने का किराया; किरायेदारी की अवधि के बाद किराया बढ़ेगा: ड्राफ्ट मॉडल टेनेंसी एक्ट की मुख्य विशेषताएं
अशोक किनिकेंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मॉडल टेनेंसी एक्ट को मंजूरी दी।अब, यह मॉडल एक्ट सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा जाएगा, ताकि वे नए कानून बनाकर या मौजूदा किरायेदारी के कानूनों में उपयुक्त संशोधन करके अनुकूलन कर सकें। सरकार के अनुसार, मॉडल टेनेंसी एक्ट का उद्देश्य देश में एक जीवंत, टिकाऊ और समावेशी रेंटल हाउसिंग मार्केट बनाना है।सरकार की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, "इससे सभी आय समूहों के लिए किराये के मकानों का पार्याप्त निर्माण हो सकेगा, जिससे बेघरों की समस्या को हल किया...
क्या चुनाव हारने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त हो सकता है?
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीता लिया है लेकिन पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हार गईं। ममता ने कहा है कि वे राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगी।क्या चुनाव हारने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त हो सकता है? इससे जुड़े संविधानिक प्रावधान कौन-कौन से हैं? इस कॉलम में इससे संबंधित कानून और मिसाल पर चर्चा किया गया है।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति से संबंधित है।यह इस प्रकार है कि,भारतीय...
भारत का संविधान ( Constitution of India): भारत में चुनाव सुधार और समितियां
भारत में अब तक 17 आम चुनाव हो चुके हैं। वैसे तो सभी चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से बीते हैं, लेकिन कुछ चुनावों में कुछ ऐसी चीजें देखने को मिली हैं, जिससे जनता का चुनावों में आस्था कम हुआ है। चुनावों में काले धन, हिंसा, मतदान केंद्रों पर कब्जा करने की प्रवृत्तियां निरंतर बढ़ रही हैं। इसे सही समय रहते नियंत्रित करना आवश्यक है।इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव में सुधार करने का प्रयास किया। साल 1990 में दिनेश गोस्वामी की अध्यक्षता में गठित समिति ने चुनाव...
किशोर-न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 के अंतर्गत संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक के संदर्भ में प्रावधान
किशोर न्याय अधिनियम केवल किशोरों के संबंध में उन किशोरों के लिए ही उपबंध नहीं करता है जो किसी अपराध में संलिप्त है अपितु इसमे उन बालकों को भी शामिल किया गया है जिन्हें देख रेख की आवश्यकता है। इससे संबंधित प्रावधानों को यहां इस आलेख में प्रस्तुत किया जा रहा है।चाइल्ड वेलफेयर कमेटीइस अधिनियम की धारा 29 के अंतर्गत प्रत्येक जिले के लिए, जैसा कि अधिसूचना में विहित किया जाए देख रेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक के कल्याण के लिए ऐसी समिति को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करने के...
किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत विधि विरोधी किशोर तथा किशोर न्याय बोर्ड
किशोर न्याय अधिनियम से संबंधित पिछले आलेख में इस अधिनियम का सामान्य परिचय तथा इस अधिनियम में दिए गए विशेष शब्दों की परिभाषाओं का अध्ययन किया गया था। इस आलेख के अंतर्गत विधि विरोधी किशोर के संबंध में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तथा किशोर न्याय बोर्ड के गठन पर चर्चा की जा रही है।किशोर न्याय बोर्डइस अधिनियम की धारा 4 किशोर न्याय बोर्ड से संबंधित धारा है। इस धारा के अंतर्गत किशोर न्याय बोर्ड का गठन किया गया है। इस धारा में विधि-विरोधी कार्यों में लिप्त किशोरों के मामलों में जाँच एवं सुनवाई आदि हेतु...
किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम का परिचय और परिभाषाएं
किशोर न्याय के संबंध में भारत की संसद द्वारा बनाए गए किशोर न्याय बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम, 2000 का सामान्य परिचय इस आलेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है तथा इस अधिनियम के अंतर्गत दी गई विशेष शब्दों की परिभाषाओं पर टिप्पणी की जा रही है।भारतीय दंड संहिता की धारा 82 (7) वर्ष से कम आयु के शिशु के कार्य को अपराध नहीं मानती है अर्थात कोई ऐसा बालक जिसकी आयु 7 वर्ष से कम है उसके द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं माना जाता है। इसी के साथ धारा 83 (7) वर्ष से ऊपर किंतु 12 वर्ष से कम...
जानिए अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के मुख्य प्रावधान
स्वतंत्रता के बाद भारत में वेश्यावृत्ति को दंडनीय अपराध बनाया गया तथा वेश्यावृत्ति को रोकने हेतु अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 भारत की संसद द्वारा बनाया गया। वेश्यावृत्ति या अनैतिक शारीरिक व्यापार प्राचीन व्यवसाय के रूप में अपनी पहचान रखता है। संपूर्ण विश्व में महिला एवं पुरुष वेश्या द्वारा सामाजिक पर आर्थिक मान्यताओं के कारण इस जीवन शैली के व्यवसाय को अपनाया जाता है। भौतिकता वादी जीवन शैली संपन्न आधुनिकता ने अनैतिक व्यापार की प्रवृत्ति को और भी बढ़ावा प्रदान किया है। समाज के प्रत्येक...
जानिए गर्भपात और लिंग चयन निषेध से संबंधित कानून
भारत की संसद द्वारा गर्भपात और लिंग चयन निषेध से संबंधित विस्तृत अधिनियमों का निर्माण किया गया है। गर्भ का समापन तथा भ्रूण लिंग चयन निषेध अधिनियम, दो प्रमुख अधिनियम लिंग चयन निषेध और गर्भपात से संबंधित है। इस आलेख में इन दोनों अधिनियमों का अध्ययन किया जा रहा है।एमटीपी एक्ट 1971 (गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम)भारत की संसद द्वारा बनाया गया यह अधिनियम गर्भ के समापन से संबंधित है। गर्भ का समापन एक ऐसा कार्य है जिसे गर्भपात कहा जाता है। गर्भपात का अर्थ होता है गर्भधारण की अवधि पूर्ण होने के पूर्व...
भारत का संविधान (Constitution of India): भारत में दल-बदल की राजनीति और दल-बदल कानून
भारतीय राजनीति में 'दल-बदल' काफी प्रचलित है। इसे आसान भाषा में आप कह सकते हैं कि सांसद या विधायक द्वारा एक दल (अपना दल) छोड़कर दूसरे दल में शामिल होना। जिस तरह से सासंद और विधायक अपने राजनीतिक और निजी लाभ के लिए दल बदलते रहते हैं, इसलिए राजनीति में इन्हें 'आया राम, गया राम' कहा जाता है। इस आलेख में हम दल-बदल की राजनीतिक घटनाओं और इससे जुडें कानूनों के बारे में जानेंगे।1957 से 1967 तक की अवधि में रिसर्च के अनुसार 542 बार लोगों ( सांसद/विधायक) ने अपने दल बदले। 1967 में चौथे आम चुनाव के प्रथम वर्ष...
कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक शोषण से संरक्षण के लिए कानून
भारतीय महिलाओं के हितों की प्रतिरक्षा हेतु अनेक प्रयास भारत की संसद द्वारा किए गए हैं। भारत के संविधान निर्माताओं ने भी महिलाओं के अधिकारों को स्पष्ट करने हेतु भारत के संविधान में संपूर्ण प्रावधान किए हैं। किसी समय भारतीय महिलाएं घरेलू कार्य करती थी तथा घर की चारदीवारी के भीतर उनका संसार होता था। समय ने प्रगति की भारत को स्वतंत्रता मिली तथा भारत ने अपने संविधान का निर्माण किया। भारत के संविधान में अवसर की समानता दी गई तथा गरिमा और प्रतिष्ठा से भरा हुआ जीवन दिया गया। इस गरिमा और प्रतिष्ठा में...
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 का परिचय
इस आलेख के अंतर्गत भारत की महिलाओं के विरुद्ध होने वाले बुरे व्यवहार और आचरण के विरुद्ध भारत की संसद द्वारा बनाए गए घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 का सामान्य परिचय प्रस्तुत किया जा रहा है।भारत की स्वतंत्रता के बाद से महिलाओं की आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक स्थिति में निरंतर प्रगति हुई है। स्वतंत्रता के पूर्व भी महिलाओं के प्रति समाज के दमनकारी दृष्टिकोण प्रभावी रहा है। स्वतंत्रता के बाद भारत के संविधान निर्माताओं ने महिलाओं के प्रति समाज के दमनकारी दृष्टिकोण की समाप्ति के लिए...
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 25: भारत के संविधान के अंतर्गत संसद की संविधान संशोधन करने की शक्ति तथा संशोधन की प्रक्रिया
भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख के अंतर्गत संविधान में उल्लेखित किए गए आपात उपबंध के संबंध में चर्चा की गई थी, इस आलेख में भारत के संविधान में निहित संसद द्वारा संविधान संशोधन की शक्ति तथा उसकी प्रक्रिया के संबंध में सारगर्भित चर्चा की जा रही है।भारत के संविधान का संशोधन (अनुच्छेद 368)भारत की स्वतंत्रता के बाद भारत के संविधान निर्माताओं ने भारत राज्य के लिए संविधान तैयार किया। भारत का संविधान संविधान सभा द्वारा अंतिम रूप से अंगीकृत अधिनियमित 26 जनवरी 1950 ईस्वी में किया गया। 26 नवंबर 1950...
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत दिए जाने वाले आदेश
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम से संबंधित इसके पूर्व के आलेख में अधिनियम का एक सामान्य परिचय दिया गया था, इस आलेख के अंतर्गत उन आदेशों का उल्लेख किया जा रहा है जो इस अधिनियम के अंतर्गत किसी व्यथित पक्षकार द्वारा आवेदन दिए जाने पर प्रत्यार्थी के विरुद्ध जारी किए जाते हैं।घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के अंतर्गत दिए जाने वाले आदेश-घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 2 (झ) में वर्णित मजिस्ट्रेट को धारा 12 में अधिकार है कि वह व्यथित व्यक्ति, संरक्षण...
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 24: भारत के संविधान के अंतर्गत आपात उपबंध (Emergency Provisions)
भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख के अंतर्गत संविधान में उल्लेखित किए गए आरक्षण पर अध्ययन किया गया था, इस आलेख के अंतर्गत संविधान में उल्लेखित किए गए आपात उपबंध पर चर्चा की जाए जा रही है।भारत के संविधान के अंतर्गत आपातकालीन समय के लिए कुछ व्यवस्थाएं की गई हैं। इन व्यवस्थाओं के अंतर्गत आपातकालीन परिस्थितियों में भारत के संविधान की स्थिति बदल जाती है। भारत का संविधान एक संघीय संविधान है, राज्यों का एक संघ कहा जा सकता है। संघ को अलग शक्तियां और भारत के राज्यों को अलग शक्तियां दी गई है परंतु...
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 23: भारत के संविधान के अंतर्गत अनुसूचित जातियां, आंग्ल भारतीय समुदाय, पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यकों के लिए विशेष आरक्षण के उपबंध
भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख में लोकतांत्रिक व्यवस्था को समृद्ध करने हेतु निर्वाचन के संबंध में संविधान में किए गए प्रावधानों पर चर्चा की गई थी, इस आलेख के अंतर्गत कुछ विशेष समुदायों को दिए गए आरक्षण पर चर्चा की जा रही है।जब भारत स्वतंत्र हुआ भारत के समाज की आर्थिक व सामाजिक स्थितियां अत्यंत अस्त व्यस्त थी। भारतीय समाज जातिगत व्यवस्था से एक लंबे युग से त्रस्त रहा है। किसी भी समाज के किसी भी देश की उन्नति के लिए आवश्यक है कि उस समाज देश का हर वर्ग समान रूप से आर्थिक व सामाजिक...
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 22: भारत के संविधान के अंतर्गत निर्वाचन
भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख में संघ और राज्यों के लिए सेवाओं के संबंध में तथा संघ लोक सेवा आयोग के संबंध में चर्चा की गई थी, इस आलेख के अंतर्गत भारत के संविधान में उल्लेखित किए गए निर्वाचन के संबंध में चर्चा की जा रही है।निर्वाचनभारत का संविधान भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में उल्लेखित करता है, कोई भी लोकतांत्रिक राज्य में सरकार का संचालन जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। किसी भी मजबूत लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष चुनाव आवश्यक है यदि चुनाव निष्पक्ष होगा तो...
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 21: केंद्र और राज्यों के अंतर्गत सेवाएं
भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख में संपत्ति के अधिकार पर चर्चा की गई थी, इस आलेख के अंतर्गत संविधान में उल्लेखित की की गई सेवाओं पर चर्चा की जा रही है।भारत के परिसंघ संविधान ने केंद्र और राज्यों को अलग-अलग सेवाएं दी है। देश के प्रशासन के लिए लोक सेवकों की भर्ती का प्रावधान भारत के संविधान में उल्लेखित किया गया है। प्रशासन संबंधी नीतियों का निर्धारण तो मंत्रिमंडल करता है किंतु उनका कार्यान्वयन लोकसेवक ही करते हैं तथा लोक सेवकों को राजनीतिक या व्यक्तिगत दबाव से मुक्त रखना आवश्यक है जिससे वह...
भारत का संविधान (Constitution of India) भाग 20: भारतीय संविधान के अंतर्गत संपत्ति का अधिकार
भारत के संविधान से संबंधित पिछले आलेख में संघ और राज्यों के बीच संबंधों पर संक्षेप में चर्चा की गई थी, इस आलेख में संविधान के अनुच्छेद 300(ए) में उल्लेखित किए गए संपत्ति के अधिकार पर सारगर्भित चर्चा की जा रही है।संपत्ति का अधिकारभारत के संविधान के 44 पर संशोधन अधिनियम 1978 द्वारा संविधान में अनुच्छेद 300 (ए) जोड़ा गया है जिसके अनुसार संपत्ति का अधिकार प्रदान किया गया है। 44 वें संविधान संशोधन द्वारा मूल अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद 31 द्वारा प्रदत संपत्ति के मूल अधिकार को समाप्त कर दिया गया अब वह...

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