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आर्बिट्रेशन एंड कन्सीलिएशन एक्ट की धारा 12 के तहत Arbitrators की नियुक्ति को चुनौती देने के लिए आधार
मध्यस्थता एक वैध कानूनी प्रक्रिया है, जो अदालतों के बाहर होती है, फिर भी एक ही समय में अदालत के फैसले की तरह अंतिम और कानूनी रूप से प्रतिबंधित निर्णय होता है। इसमें अदालत के बजाय कम से कम एक स्वतंत्र बाहरी व्यक्ति द्वारा विवाद का आश्वासन शामिल है। बाहरी लोगों, जिन्हें मध्यस्थ कहा जाता है, का नाम विवादग्रस्त सभाओं द्वारा या उनके लाभ के लिए रखा जाता है। मध्यस्थता पक्षकारों की मध्यस्थता समझ की शर्तों के अनुसार की जाती है, जो आम तौर पर पक्षों के बीच एक व्यावसायिक अनुबंध की व्यवस्था में पाई जाती...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 92: आदेश 20 नियम 2 व 3 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश के नियम 2 में कोर्ट के पीठासीन अधिकारी को निर्णय सुनाने की शक्ति दी गई है अर्थात जो भी न्यायालय का तत्कालीन न्यायाधीश होगा उसके द्वारा निर्णय सुनाया जा सकता है एवं नियम 3 में निर्णय पर हस्ताक्षर किए जाने के प्रावधान हैं। इस आलेख के अंतर्गत इन दोनों ही नियमों पर संयुक्त रूप से टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-2 न्यायाधीश के पूर्ववर्ती द्वारा लिखे गये निर्णय को सुनाने की शक्ति- [न्यायाधीश ऐसे निर्णय को...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 91: आदेश 20 नियम 1 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। किसी भी सिविल वाद का निपटारा निर्णय पर हो जाता है, किसी भी प्राथमिक अदालत में लाया गया वाद निर्णय पर आकर समाप्त हो जाता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि निर्णय हो जाने पर ही सिविल कार्यवाही का अंत हो जाता है। इसके पश्चात भी अपील,पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन जैसे मार्ग है एवं डिक्री का निष्पादन भी अगली कड़ी है लेकिन यह कहा जा सकता है कि सिविल वाद का न होकर भी अंत निर्णय पर हो जाता है। निर्णय के साथ ही न्यायालय अपनी अंतिम...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 90: आदेश 19 नियम 3 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 19 शपथपत्र से संबंधित है। शपथपत्र का उदगम सीपीसी के इस ही आदेश के अंतर्गत हुआ है, यही आदेश शपथपत्र की जननी है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 19 के नियम 3 पर प्रकाश डाला जा रहा है।नियम-3 वे विषय जिन तक शपथपत्र सीमित होंगे- (1) शपथपत्र ऐसे तथ्यों तक ही सीमित होंगे जिनको अभिसाक्षी अपने निजी ज्ञान से साबित करने में समर्थ है, किन्तु अन्तर्वर्ती आवेदनों के शपथपत्रों में उसके विश्वास पर आधारित कथन ग्राह्य हो सकेंगे:परन्तु यह तब जब कि उनके लिए...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 89: आदेश 19 नियम 2 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 19 शपथपत्र से संबंधित है। शपथपत्र का उदगम सीपीसी के इस ही आदेश के अंतर्गत हुआ है, यही आदेश शपथपत्र की जननी है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 19 के नियम 2 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-2 अभिसाक्षी की प्रतिपरीक्षा के लिए हाजिरी कराने का आदेश देने की शक्ति(1) किसी भी आवेदन पर साक्ष्य शपथपत्र द्वारा दिया जा सकेगा, किन्तु न्यायालय दोनों पक्षकारों में से किसी की भी प्रेरणा पर अभिसाक्षी को आदेश दे सकेगा कि वह प्रतिपरीक्षा के लिए हाजिर...
Appointment of Arbitrators: 2015 और 2019 के संशोधन के बाद आर्बिट्रेशन एंड कन्सीलिएशन एक्ट की धारा 11 के तहत मध्यस्थों की नियुक्ति
आर्बिट्रेशन एंड कन्सीलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 11 मध्यस्थों (Arbitrators) की नियुक्ति से संबंधित है। किसी भी राष्ट्रीयता के व्यक्ति को मध्यस्थ नियुक्त किया जा सकता है, जब तक कि पक्षकारों द्वारा विपरीत इरादा व्यक्त नहीं किया जाता। यह कार्रवाई के विभिन्न पाठ्यक्रमों का प्रावधान करता है, जो विवाद के पक्षकार मध्यस्थों को नियुक्त करने के लिए ले सकते हैं।एक्ट की धारा 11 पक्षकारों को नियुक्ति के लिए प्रक्रिया पर सहमत होकर स्वयं मध्यस्थ चुनने की अनुमति देती है। यदि पक्षकार स्वयं माध्यस्थकों की नियुक्ति...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 88: आदेश 19 नियम 19 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 19 शपथपत्र से संबंधित है। शपथपत्र काफी चर्चित शब्द है एवं अनेकों मामलों में काम आता है। शपथपत्र का उदगम सीपीसी के इस ही आदेश के अंतर्गत हुआ है, यही आदेश शपथपत्र की जननी है। आपराधिक विधि में भी शपथपत्र का कहीं भी उल्लेख नहीं मिलता है, सीपीसी एक सिविल प्रक्रिया कानून है जो शपथपत्र के नियमों को स्पष्ट करती है। इस आदेश के अंतर्गत शपथपत्र की कोई परिभाषा तो नहीं दी गई है किंतु यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी वाद में शपथपत्र का क्या महत्व...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 87: आदेश 18 नियम 18 व 19 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 18 वाद की सुनवाई और साक्षियों की परीक्षा है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 18 के नियम 18 एवं 19 पर विवेचना प्रस्तुत की जा रही है।नियम-18 निरीक्षण करने की न्यायालय की शक्ति-यायालय ऐसी किसी भी सम्पत्ति या वस्तु का निरीक्षण वाद के किसी भी प्रक्रम में कर सकेगा जिसके सम्बन्ध में कोई प्रश्न पैदा हो। और जहाँ न्यायालय किसी सम्पति या वस्तु का निरीक्षण करता है वहाँ वह यथासाध्य शीघ्र, ऐसे निरीक्षण में देखे गए किन्हीं सुसंगत तथ्यों का ज्ञापन बनाएगा और...
Arbitration का अर्थ और Mediation के साथ इसका अंतर
आर्बिट्रेशन, जिसे माध्यस्थम (Arbitration) भी कहा जाता है, एक सिद्धांत है, जिसके तहत विवाद को अदालत के चक्कर काटे बिना सुलझाया जा सकता है। भारत में 'ऑल्टरनेटिव डिस्प्यूट रिड्रेसल' (ADR) का एक प्रकार 'आर्बिट्रेशन' या 'माध्यम' है। आर्बिट्रेशन में विवाद में फंसे दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) चुना है. जो उस विवाद को सुलझाता है।मध्यस्थता अदालत के बाहर वाणिज्यिक विवादों (commercial disputes) को हल करने की एक विधि है ताकि उन पर मामले का बोझ कम किया जा सके। किसी विवाद को किसी...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 86: आदेश 18 नियम 17 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 18 वाद की सुनवाई और साक्षियों की परीक्षा है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 18 के नियम 17 पर विवेचना प्रस्तुत की जा रही है।नियम-17 न्यायालय साक्षी को पुनः बुला सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा-न्यायालय वाद के किसी भी प्रक्रम में ऐसे किसी भी साक्षी को पुन: बुला सकेगा जिसकी परीक्षा की जा चुकी है और (तत्समय प्रवृत्त साक्ष्य की विधि के अधीन रहते हुए) उससे ऐसे प्रश्न पूछ सकेगा जो न्यायालय ठीक समझे।यह नियम न्यायालय को किसी साक्षी को दोबारा बुलाने...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 85: आदेश 18 नियम 16 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 18 वाद की सुनवाई और साक्षियों की परीक्षा है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 18 के नियम 16 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-16. साक्षी की तुरन्त परीक्षा करने की शक्ति- (1) जहाँ साक्षी न्यायालय की अधिकारिता से बाहर जाने वाला है या इस बात का पर्याप्त कारण न्यायालय को समाधानप्रद रूप में दर्शित कर दिया जाता है कि उसका साक्ष्य तुरन्त क्यों लिया जाना चाहिए वहाँ न्यायालय वाद के संस्थित किए जाने के पश्चात् किसी भी समय ऐसे साक्षी का साक्ष्य किसी...
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908 आदेश भाग 85: आदेश 18 नियम 16 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 18 वाद की सुनवाई और साक्षियों की परीक्षा है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 18 के नियम 16 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-16. साक्षी की तुरन्त परीक्षा करने की शक्ति- (1) जहाँ साक्षी न्यायालय की अधिकारिता से बाहर जाने वाला है या इस बात का पर्याप्त कारण न्यायालय को समाधानप्रद रूप में दर्शित कर दिया जाता है कि उसका साक्ष्य तुरन्त क्यों लिया जाना चाहिए वहाँ न्यायालय वाद के संस्थित किए जाने के पश्चात् किसी भी समय ऐसे साक्षी का साक्ष्य किसी...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 84: आदेश 18 नियम 5 व 6 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 18 वाद की सुनवाई और साक्षियों की परीक्षा है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 18 के नियम 5 एवं 6 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम- 5 जिन मामलों की अपील हो सकती है उनमें साक्ष्य कैसे लिखा जाएगा-जिन मामलों में अपील की जाती है उन मामलों में हर साक्षी का साक्ष्य-(क) न्यायालय की भाषा में-(1) न्यायाधीश द्वारा या उसकी उपस्थिति में और उसके वैयक्तिक निदेशन और अधीक्षण में लिखा जाएगा: या (2) न्यायाधीश के बोलने के साथ ही टाइपराईटर पर टाईप किया...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 83: आदेश 18 नियम 4 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 18 वाद की सुनवाई और साक्षियों की परीक्षा है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 18 के नियम 4 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-4 साक्ष्य का अभिलेखन (1) प्रत्येक मामले में किसी साक्षी की मुख्य परीक्षा शपथ-पत्र पर होगी और उसकी प्रतियां उस पक्षकार द्वारा, जो उसे साक्ष्य देने के लिए बुलाता है, विरोधी पक्षकार को दी जायेगी :परन्तु जहां दस्तावेज फाइल किए गए हों और पक्षकार उन दस्तावेजों पर निर्भर करते हों, वहाँ शपथ-पत्र के साथ फाइल किए गए ऐसे...
सुप्रीम कोर्ट ने रिमिशन एप्लिकेशन तय करने के लिए कारकों को संक्षेप में प्रस्तुत किया
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने न केवल बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की माफी को रद्द कर दिया, बल्कि माफी आवेदनों पर विचार करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश भी प्रदान किए। सुप्रीम कोर्ट ने उन प्रमुख कारकों पर प्रकाश डाला जिन्हें ध्यान में रखा जाना चाहिए, आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत ऐसी याचिकाओं का मूल्यांकन करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप की पेशकश की।यह फैसला न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ ने दिया, जिन्होंने बिलकिस बानो द्वारा दायर एक रिट याचिका के साथ-साथ दोषियों...
प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 का संक्षिप्त विवरण
अधिनियम का इतिहास:1991 का प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का मकसद 15 अगस्त 1947 के बाद के धार्मिक स्थलों की स्थिति को यथावत करना है और किसी भी पूजा स्थल के परिवर्तन को रोकना है, साथ ही उनके धार्मिक चरित्र की रक्षा करना है। 15 अगस्त 1947 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, जब वह एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, और संप्रभु राज्य बना, जिसमें कोई राज्य धर्म नहीं है और सभी धर्मों को बराबरी से देखा जाता है। 1991 में, राम जन्मभूमि आंदोलन के चरम पर, संसद ने वर्शिप एक्ट (विशेष प्रावधान) अधिनियम पारित किया और राष्ट्रपति ने...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 82: आदेश 18 नियम 2 से 3(क) के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 18 वाद की सुनवाई और साक्षियों की परीक्षा है। इस आदेश के अंतर्गत साक्षी की परीक्षा से संबंधित प्रावधान है। इस आलेख के अंतर्गत नियम 2,3(क) व 3 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-2 कथन और साक्ष्य का पेश किया जाना - (1) उस दिन जो वाद की सुनवाई के लिए नियत किया गया हो, या किसी अन्य दिन जिस दिन के लिए सुनवाई स्थगित की गई हो, वह पक्षकार जिसे आरम्भ करने का अधिकार है, अपने मामले का कथन करेगा और उन विवाद्यकों के समर्थन में अपना साक्ष्य पेश...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 81: आदेश 18 नियम 1 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 18 वाद की सुनवाई और साक्षियों की परीक्षा। वास्तविकता में इस प्रक्रम पर कोई वाद का विचारण प्रारंभ होता है। विवाधक तय हो जाने के पश्चात न्यायालय वाद की सुनवाई शुरू करते हुए साक्षियों की परीक्षा करता है। यह आदेश इस संहिता के महत्वपूर्ण आदेशों में से एक है। इस आलेख के अंतर्गत आदेश 18 के नियम 1 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-1 आरम्भ करने का अधिकार-आरम्भ करने का अधिकार वादी को तब के सिवाय है जब कि वादी द्वारा अधिकथित तथ्यों को...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 80: आदेश 17 (स्थगन) के नियम 3 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 17 किसी वाद में स्थगन के अर्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताता है कि अदालत किन किन परिस्थितियों में स्थगन आदेश दे सकती है। इस आलेख के अंतर्गत नियम-3 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-3 पक्षकारों में से किसी पक्षकार के साक्ष्य, आदि पेश करने में असफल रहने पर भी न्यायालय आगे कार्यवाही कर सकेगा-जहां वाद का कोई ऐसा पक्षकार जिसे समय अनुदत्त किया गया है, अपना साक्ष्य पेश करने में या अपने साक्षियों को हाजिर कराने में या वाद को आगे प्रगति के...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 79: आदेश 17 (स्थगन) के नियम 2 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 17 किसी वाद में स्थगन के अर्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताता है कि अदालत किन किन परिस्थितियों में स्थगन आदेश दे सकती है। आदेश 17 का नियम-2 स्थगित दिनांक को उपसंजात होने में असफल रहने पर अपनायी जाने वाली प्रक्रिया से संबंधित है।नियम-2 यदि पक्षकार नियत दिन पर उपसंजात होने में असफल रहते है तो प्रक्रिया-वाद की सुनाई जिस दिन के लिए स्थगित हुई है, यदि उस दिन पक्षकार या उनमें से कोई उपसंजात होने में असफल रहते हैं, तो न्यायालय आदेश 9 द्वारा उस...















