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सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 108: आदेश 21 नियम 16 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 21 का नाम डिक्रियों और आदेशों का निष्पादन है। इस आदेश का नियम 16 डिक्री के अंतिरिति द्वारा निष्पादन हेतु आवेदन किये जाने का प्रावधान करती है। किसी डिक्री को ऐसे व्यक्ति के आवेदन पर भी निष्पादित किया जा सकता है जिसे डिक्रीधारी द्वारा डिक्री ट्रांसफर कर दी गई है, इस आलेख नियम 16 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-16 डिक्री के अन्तरिती द्वारा निष्पादन के लिए आवेदन- जहां किसी डिक्री का या, यदि कोई डिकी दो या अधिक व्यक्तियों के पक्ष...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 107: आदेश 21 नियम 15 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 21 का नाम डिक्रियों और आदेशों का निष्पादन है। इस आदेश का नियम 15 संयुक्त डिक्रीदार से संबंधित है। कभी कभी यह स्थिति होती है कि कोई डिक्री संयुक्त रूप से होती है तब उन संयुक्त डिक्रीधारी द्वारा निष्पादन की कार्यवाही किस प्रकार की जाए यह नियम 15 में बताया गया है।नियम-15 संयुक्त डिक्रीदार द्वारा निष्पादन के लिए आवेदन- (1) जहां डिक्री एक से अधिक व्यक्तियों के पक्ष में संयुक्त रूप से पारित की गई है वहां, जब तक कि डिक्री में इसके प्रतिकूल...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 106: आदेश 21 नियम 10 से 14 तक के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 21 का नाम डिक्रियों और आदेशों का निष्पादन है। इस आलेख के अंतर्गत नियम 10 से 14 तक के प्रावधानों पर चर्चा प्रस्तुत की जा रही है।नियम-10 निष्पादन के लिए आवेदन- जहां डिक्री का धारक उसका निष्पादन कराना चाहता है वहां वह डिक्री पारित करने वाले न्यायालय से या इस निमित्त नियुक्त अधिकारी से (यदि कोई हो) या यदि डिक्री किसी अन्य न्यायालय को इसमें इसके पूर्व अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अधीन भेजी गई है तो उस न्यायालय से या उसके उचित अधिकारी से आवेदन...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 105: आदेश 21 नियम 3 से 9 तक के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 21 का नाम डिक्रियों और आदेशों का निष्पादन है। इस आलेख के अंतर्गत नियम 3 से 9 तक के प्रावधानों पर चर्चा प्रस्तुत की जा रही है।नियम-3 एक से अधिक अधिकारिता में स्थित भूमि-जहां स्थावर सम्पत्ति दो या अधिक न्यायालयों की अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर स्थित एक सम्पदा या भूधृति के रूप में है वहां पूरी सम्पदा या भूधृत्ति को ऐसे न्यायालयों में से कोई भी एक न्यायालय कुर्क कर सकेगा और उसका विक्रय कर सकेगा।नियम-4 लघुवाद न्यायालय को अन्तरण -...
आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996 के तहत आर्बिट्रल अवार्ड
आर्बिट्रल अवार्ड और कार्यवाहियों की समाप्ति (Termination of Proceedings) को पूरी तरह से आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996 के अध्याय VI (Chapter VI) में संबोधित किया गया। एक्ट की धारा 28 से 33 तक यह "मध्यस्थता निर्णय देने और कार्यवाही की समाप्ति" के बारे में है।मध्यस्थ की भूमिका उन विवादों को हल करना है, जो पक्षों को मध्यस्थता के लिए प्रस्तुत करने के लिए सहमति में हैं। मध्यस्थ के निर्णयों के लिए कुछ औपचारिकताओं के अधीन दस्तावेज की आवश्यकता होती है। इसे मध्यस्थ पुरस्कार के रूप में संदर्भित...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 104: आदेश 21 नियम 2 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 21 का नाम डिक्रियों और आदेशों का निष्पादन है। निष्पादन का अर्थ डिक्री में दिए गए आदेश को लागू करवाने से है।नियम-2 डिक्रीदार को न्यायालय के बाहर संदाय- (1) जहां किसी प्रकार की डिक्री के अधीन कोई धन न्यायालय के बाहर संदत किया गया है या किसी प्रकार की पूरी डिक्री या उसके किसी भाग का समायोजन डिक्रीदार को समाधानप्रद रूप में अन्यथा कर दिया गया है। यहां डिक्रीदार उस न्यायालय को जिसका कर्तव्य डिक्री का निष्पादन करना है यह प्रभाणित करेगा कि...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 103: आदेश 21 नियम 1 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 21 का नाम डिक्रियों और आदेशों का निष्पादन है। सिविल लॉ में किसी भी प्रकरण को जीत जाने पर ही मुकदमेंबाजी का अंत नहीं हो जाता है अपितु उसके बाद भी निर्णय को लागू करवाने के लिए निष्पादन के लिए अलग से मुकदमेबाजी करनी होती है। सीपीसी का आदेश 20 पर एक वाद के निर्णय के साथ उसका अंत हो जाता है किंतु ऐसा अंत होकर भी नहीं होता है और डिक्री का निष्पादन कराने हेतु पृथक मुकदमा लगाना होता है। आदेश 21 में यही निष्पादन के नियम दिए गए हैं। यह अत्यंत...
आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996 के तहत आर्बिट्रल अवार्ड
आर्बिट्रल अवार्ड और कार्यवाहियों की समाप्ति (termination of proceedings) को पूरी तरह से आर्बिट्रेशन एंड कन्सीलिएशन एक्ट, 1996 के अध्याय VI (Chapter VI) में संबोधित किया गया है। धारा 28 से 33 तक यह "मध्यस्थता निर्णय देने और कार्यवाही की समाप्ति" के बारे में है।एक मध्यस्थ की भूमिका उन विवादों को हल करना है जो पक्षों को मध्यस्थता के लिए प्रस्तुत करने के लिए सहमति में हैं। मध्यस्थ के निर्णयों के लिए कुछ औपचारिकताओं के अधीन एक दस्तावेज की आवश्यकता होती है, और इसे मध्यस्थ पुरस्कार के रूप में संदर्भित...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 102: आदेश 20 नियम 18 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश का नियम 18 में विभाजन संबंधी वादों में डिक्री की व्यवस्था की गई है। इस आलेख के अंतर्गत नियम 18 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-18 सम्पत्ति के विभाजन के लिए या उनमें के अंश पर पृथक् कब्जे के लिए वाद में डिक्री-जब न्यायालय सम्पत्ति के विभाजन के लिए या उसमें के अंश पर पृथक् कब्जे के लिए डिक्री पारित करता है तब-(1) यदि और जहां तक डिक्री ऐसी सम्पदा से सम्बंधित है जिस पर सरकार को संदेय राजस्व निर्धारित...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 101: आदेश 20 नियम 15,16,17 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश का नियम 15 में भागीदारी के विघटन पर होने वाले डिक्री के संबंध में प्रावधान है, नियम 16 में मालिक एवं अभिकर्ता के बीच लेखा को लेकर होने वाली डिक्री के संबंध में प्रावधान है, नियम 17 में लेखाओं के संबंध में विशेष निदेश दिए गए हैं। इस आलेख के अंतर्गत उक्त तीनों नियमों पर संयुक्त रूप से टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-15 भागीदारी के विघटन के लिए वाद में डिक्री- जहां तक वाद भागीदारी के विघटन के लिए या...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 100: आदेश 20 नियम 14 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश का नियम 14 शुफ़ा के दावे में डिक्री कैसी हो इस संबंध में उल्लेख कर रहा है। शुफ़ा का अधिकार एक मुस्लिम व्यक्ति को अपने रक्तसंबंधि व्यक्ति की संपत्ति पर रहता है। यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी किसी पैतृक संपत्ति में प्राप्त हिस्से को विक्रय करना चाहता है तो उसे खरीदने का पहला अधिकार उसके उस हिस्से का है जिसकी संपत्ति उस विक्रय की जाने वाली संपत्ति के एकदम पास स्थित है। सीपीसी के आदेश 20 नियम 14 में ऐसे ही...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 99: आदेश 20 नियम 13 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश का नियम 13 प्रशासन वाद में डिक्री से संबंधित है। प्रशासन अर्थात किसी संपत्ति को नियमित करने से है। इस आलेख के अंतर्गत विस्तार से नियम 13 पर चर्चा की जा रही है।नियम-13) प्रशासन वाद में डिक्री- (1) जहां वाद किसी सम्पत्ति के लेखा के लिए और न्यायालय की डिक्री के अधीन उसके सम्यक् प्रशासन के लिए है, वहां न्यायालय अन्तिम डिक्री पारित करने के पूर्व ऐसे लेखाओं के लिए जाने और जांचों के किए जाने का आदेश देने वाली...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 98: आदेश 20 नियम 12 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश का नियम 12 स्थावर संपत्ति के संबंध में डिक्री का उल्लेख कर रहा है। यह नियम उन बातों को स्पष्ट कर रहा है जिनका समावेश एक स्थावर संपत्ति के संबंध डिक्री में होता है।नियम-12-कब्जा और अन्तःकालीन लाभों के लिए डिक्री- (1) जहां वाद स्थावर सम्पत्ति के कब्जे का प्रत्युद्धरण करने और भाटक या अन्तःकालीन लाभों के लिए है वहां न्यायालय ऐसी डिक्री पारित कर सकेगा जो-( क) सम्पत्ति के कब्जे के लिए हो;(ख) ऐसे भाटकों के...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 97: आदेश 20 नियम 11 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश का नियम 11 डिक्री के किश्तों द्वारा संदाय के संबंध में उल्लेख करता है। ऐसा उस डिक्री में किया जाता है जहां डिक्री धन से संदाय के संबंध में है। इस आलेख के अंतर्गत नियम 20 विस्तारित विवेचन किया जा रहा है।नियम-11 डिक्री किस्तों द्वारा संदाय के लिए निदेश दे सकेगी- (1) यदि और जहां तक कोई डिक्री धन के संदाय के लिए है तो और वहां तक न्यायालय उस संविदा में, जिसके अधीन धन संदेय है, अन्तर्विष्ट किसी बात के होते...
धारा 27 के अनुसार Arbitration में साक्ष्य लेने में न्यायालय की सहायता कैसे की जाती है?
आर्बिट्रेशन एंड कन्सीलिएशन एक्ट, 1996, (माध्यस्थम् अधिनियम) की धारा 27 एक ऐसी व्यवस्था प्रदान करती है, जिसके द्वारा माध्यस्थम् अधिकरण या विवाद का कोई पक्ष (माध्यस्थम् अधिकरण के अनुमोदन से) साक्ष्य लेने में न्यायालय की सहायता ले सकता है। दिलचस्प बात यह है कि यह मध्यस्थता अधिनियम के दुर्लभ प्रावधानों में से एक है, जो मध्यस्थता अधिनियम के प्रावधानों द्वारा शासित मध्यस्थता कार्यवाही में अदालत के हस्तक्षेप/सहायता की अनुमति देता है।ऐसी स्थितियां हो सकती हैं, जब पक्षकार साक्ष्य चरण के दौरान आर्बिट्रल...
कैसे होता है मध्यस्थता कार्यवाही का संचालन?
मध्यस्थता का उपयोग पक्षों के बीच मामलों को निपटाने के लिए किया जाता है जब उनके बीच कोई विवाद होता है। मध्यस्थ कार्यवाही का संचालन मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के तहत आता है। माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम 1996 का अध्याय पाँच माध्यस्थम् कार्यवाही के संचालन से संबंधित है। मध्यस्थता के लिए कुछ महत्वपूर्ण पूर्वापेक्षाएँ हैं। वह एक मध्यस्थता समझौता हो सकता है, जो अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रदान किया गया है। मध्यस्थता समझौता लिखित होना चाहिए और दोनों पक्षों को समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए। पूर्व...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 96: आदेश 20 नियम 8, 9, 10 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आलेख के अंतर्गत नियम 8, 9 व 10 पर सागर्भित टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-8 जहां न्यायाधीश ने डिक्री पर हस्ताक्षर करने से पूर्व अपना पद रिक्त कर दिया है वहां प्रक्रिया-जहां न्यायाधीश ने निर्णय सुनाने के पश्चात् किन्तु डिक्री पर हस्ताक्षर किए बिना अपना पद रिक्त कर दिया है वहां ऐसे निर्णय के अनुसार तैयार की गई डिक्री पर उत्तरवर्ती या यदि उस न्यायालय का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है तो ऐसे किसी न्यायालय का...
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908 आदेश भाग 95: आदेश 20 नियम 6, 6(क), 6(ख) के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश के नियम 6 के अंतर्गत डिक्री की अंतर्वस्तु के संबंध में प्रावधान किए गए हैं। न्यायालय अपने अपने निर्णय के साथ डिक्री भी जारी करता है,उक्त डिक्री की अंतर्वस्तु क्या होगी यह नियम 6 के माध्यम से स्पष्ट किया गया है। इस आलेख के अंतर्गत नियम 6, 6क एवं 6ख पर विवेचन प्रस्तुत किया जा रहा है।नियम-6 डिक्री की अन्तर्वस्तु (1) डिक्री निर्णय के अनुरूप होगी, उसमें वाद का संख्यांक, [पक्षकारों के नाम और वर्णन, उनके...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 94: आदेश 20 नियम 5 व 5क के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश के नियम 5 में स्पष्ट किया गया है कि न्यायालय इस विवाधक पर अपना विनिश्चय देगा। इस आलेख के अंतर्गत नियम 5 व नियम 5क पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-5 न्यायालय हर एक विवाद्यक पर अपने विनिश्चय का कथन करेगा-उन वादों में, जिनमें विवाद्यकों की विरचना की गई है, जब तक कि विवाद्यकों में से किसी एक या अधिक का निष्कर्ष वाद के विनिश्चय के लिए पर्याप्त न हो, न्यायालय हरेक पृथक विवाद्यक पर अपना निष्कर्ष या...
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश भाग 93: आदेश 20 नियम 4 के प्रावधान
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908(Civil Procedure Code,1908) का आदेश 20 निर्णय और डिक्री है। इस आदेश के नियम 3 में लघुवाद न्यायलयों के निर्णय के संबंध में प्रावधान किए गए हैं, इस आलेख के अंतर्गत नियम 4 पर टिप्पणी प्रस्तुत की जा रही है।नियम-4 लघुवाद न्यायालयों के निर्णय- (1) लघुवाद न्यायालयों के निर्णयों में अवधार्य प्रश्नों और उनके विनिश्चय से अधिक और कुछ अन्तर्विष्ट होना आवश्यक नहीं है।(2) अन्य न्यायालयों के निर्णय-अन्य न्यायालयों के निर्णयों के मामले का संक्षिप्त कथन, अवधार्य प्रश्न, उनका विनिश्चय...















