हिमाचल हाईकोर्ट

RTE Act के तहत विद्यालय प्रबंधन समिति वैधानिक निकाय, वित्तीय अनियमितताओं की वसूली किसी शिक्षक से नहीं की जा सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
RTE Act के तहत विद्यालय प्रबंधन समिति वैधानिक निकाय, वित्तीय अनियमितताओं की वसूली किसी शिक्षक से नहीं की जा सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 21 के तहत विद्यालय प्रबंधन समिति वैधानिक निकाय है और वित्तीय अनियमितताओं की वसूली किसी एक शिक्षक पर नहीं थोपी जा सकती।कोर्ट ने आगे टिप्पणी की कि प्रबंधन समिति ही सामूहिक रूप से सरकारी अनुदानों की निगरानी करती है, इसलिए अन्य सदस्यों को शामिल किए बिना केवल सदस्य पर वसूली का दायित्व डालना, प्राकृतिक न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस रंजन शर्मा ने टिप्पणी की:"शिक्षा का...

“साली” शब्द अभद्र गाली है, लेकिन जानबूझकर अपमान नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने धारा 504 IPC की सजा रद्द की
“साली” शब्द अभद्र गाली है, लेकिन जानबूझकर अपमान नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने धारा 504 IPC की सजा रद्द की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ “साली” शब्द का इस्तेमाल, भले ही वह अभद्र गाली हो, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504 के तहत “जानबूझकर अपमान” नहीं माना जा सकता — जब तक कि वह व्यक्ति को शांति भंग करने के लिए उकसाए या ऐसी संभावना उत्पन्न करे।जस्टिस राकेश कंठला ने टिप्पणी की — “वर्तमान मामले में 'साली' शब्द का प्रयोग अभद्र गाली के रूप में किया गया है। लेकिन पीड़िता या सूचनाकर्ता ने यह नहीं कहा कि इस शब्द या इन गालियों ने उसे शांति भंग करने के लिए उकसाया।” कोर्ट ने कहा, “धारा 504 का...

राज्य ऊर्जा निदेशालय नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्रों के लिए मान्यता को अस्वीकार नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
राज्य ऊर्जा निदेशालय नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्रों के लिए मान्यता को अस्वीकार नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि ऊर्जा निदेशालय को नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र प्रणाली के तहत मान्यता के लिए आवेदन को अस्वीकार करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि ऐसे निर्णय केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा नामित केंद्रीय एजेंसी के विशेष अधिकार क्षेत्र में आते हैं।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की:"नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन में लगी कोई उत्पादन कंपनी पंजीकरण के लिए आवेदन करने के योग्य है या नहीं... इसका निर्णय केंद्रीय एजेंसी द्वारा किया जाना है, न कि राज्य एजेंसी द्वारा।"याचिकाकर्ता...

बीमारी के कारण अनुपस्थिति के कारण सीमा पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी कठोर और अनुचित: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
बीमारी के कारण अनुपस्थिति के कारण सीमा पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी "कठोर और अनुचित": हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि कथित रूप से भाग जाने के कारण भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कांस्टेबल की बर्खास्तगी मनमाना और अनुचित थी, खासकर तब जब उसकी अनुपस्थिति चिकित्सा कारणों से थी और उसने 18 वर्षों से अधिक समय तक बेदाग सेवा की।जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की:"याचिकाकर्ता ने 18 वर्षों से अधिक समय तक बेदाग सेवा की थी और अधिकारियों को अपनी बीमारी के बारे में बार-बार सूचित किया। इसलिए न्यायालय ने उसकी बर्खास्तगी को कठोर और पूरी तरह से अनुचित पाया।"1998 में याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्राकृतिक जलमार्ग पर अवैध सड़क निर्माण का आरोप लगाने वाली याचिका पर जवाब मांगा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्राकृतिक जलमार्ग पर अवैध सड़क निर्माण का आरोप लगाने वाली याचिका पर जवाब मांगा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्राकृतिक जलमार्ग पर अवैध सड़क निर्माण का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर राज्य के अधिकारियों से जवाब मांगा।जस्टिस ज्योत्सना रेवाल दुआ ने कांगड़ा के उपायुक्त सहित हिमाचल प्रदेश राज्य के अधिकारियों को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर के लिए निर्धारित की।कांगड़ा जिले के जालेरा गाँव के निवासी रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल संदेश कुमार ने "गैर मुमकिन खड्ड" के जीर्णोद्धार की मांग करते हुए रिट याचिका दायर की- यह एक प्राकृतिक जलमार्ग है जो पौंग बांध (महाराणा प्रताप सागर)...

मंदिर में पूजा का अधिकार छीना नहीं जा सकता; राज्य को आस्था और सार्वजनिक व्यवस्था में संतुलन बनाना होगा: हिमाचल हाईकोर्ट
मंदिर में पूजा का अधिकार छीना नहीं जा सकता; राज्य को आस्था और सार्वजनिक व्यवस्था में संतुलन बनाना होगा: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पूरी समुदाय को उनके देवी-देवता के मंदिर में पूजा करने से रोकना उनके संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, जो अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है।अदालत ने कहा कि इस तरह के अधिकार केवल सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य के आधार पर ही सीमित किए जा सकते हैं, और वह भी उचित और अनुपातिक उपायों के माध्यम से। जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा,“कुछ व्यक्तियों के अवैध कार्य यह आधार नहीं बन सकते कि व्यापक जनता के धार्मिक स्वतंत्रता, आस्था, पूजा...

मोटर वाहन दुर्घटना मामले में पंजीकृत मालिक ही जिम्मेदार, कानूनी हस्तांतरण पूरा होने तक दायित्व बरकरार: हिमाचल हाईकोर्ट
मोटर वाहन दुर्घटना मामले में पंजीकृत मालिक ही जिम्मेदार, कानूनी हस्तांतरण पूरा होने तक दायित्व बरकरार: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि वाहन के स्वामित्व का औपचारिक हस्तांतरण मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 50 के तहत पूरा होने तक पंजीकृत वाहन मालिक ही दुर्घटना के मामलों में कानूनी रूप से उत्तरदायी बना रहेगा। भले ही दुर्घटना से पहले बिक्री समझौता निष्पादित किया जा चुका हो।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर की एकल पीठ ने इस सिद्धांत को दोहराया,"मोटर वाहन अधिनियम की धारा 50 यह प्रावधान करती है कि जहां MV अधिनियम के तहत पंजीकृत किसी मोटर वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित किया जाता है, वहां...

मंदिर के दान का सरकारी योजनाओं में उपयोग भक्तों के विश्वास से धोखा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मंदिर के दान का सरकारी योजनाओं में उपयोग भक्तों के विश्वास से धोखा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि मंदिरों में श्रद्धालु जो धन दान करते हैं, वह केवल देवी-देवताओं की देखभाल मंदिर के रखरखाव और धार्मिक कार्यों के लिए ही इस्तेमाल होना चाहिए।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर के दान को राज्य के सामान्य राजस्व या सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में खर्च करना भक्तों के अटूट विश्वास को धोखा देना है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस राकेश कैंथला की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"मंदिर के कोष का हर रुपया मंदिर के धार्मिक उद्देश्य या धर्मार्थ कार्यों के लिए ही उपयोग...

HP Excise Act | अवैध शराब रखने पर लाइसेंस निलंबन जुर्माना अदा करने के बाद हटाया जा सकता है: हाईकोर्ट
HP Excise Act | अवैध शराब रखने पर लाइसेंस निलंबन जुर्माना अदा करने के बाद हटाया जा सकता है: हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि आबकारी अधिनियम की धारा 66(2) के तहत यदि लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन या शुल्क का भुगतान न करने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जाता है तो जुर्माना अदा करने के बाद निलंबन को बाद में रद्द किया जा सकता है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने टिप्पणी की:"...धारा 29 के खंड (क), (ख) या (ग) के तहत लाइसेंस रद्द या निलंबित किए जाने की स्थिति में ऐसा रद्दीकरण या निलंबन जुर्माना अदा करने के बाद रद्द या छोड़ा जा सकता है... इसलिए निलंबन... समझौता योग्य...

अनुमत समय के भीतर आवास परियोजना की सक्रिय प्रगति, किरायेदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम के तहत पर्याप्त अनुपालन: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
अनुमत समय के भीतर आवास परियोजना की सक्रिय प्रगति, किरायेदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम के तहत पर्याप्त अनुपालन: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जब हिमाचल प्रदेश किरायेदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के तहत अनुमति दी जाती है तो कानून केवल निर्धारित समय के भीतर इच्छित उद्देश्य के लिए भूमि का उपयोग करने की अपेक्षा करता है, न कि पूरी परियोजना को पूरा करने की।अदालत ने टिप्पणी की,"विधानमंडल ने जानबूझकर "परियोजना पूरी करें" के बजाय "उपयोग में लाना" वाक्यांश का प्रयोग किया, जो दर्शाता है कि अनुमत समय के भीतर सक्रिय प्रगति पर्याप्त अनुपालन है।"राज्य के तर्क को खारिज करते हुए जस्टिस अजय मोहन गोयल ने...

दूसरी महिला से बेटी का जन्म पति के अवैध संबंध को साबित करता है, पत्नी का अलग रहना जायज़: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
दूसरी महिला से बेटी का जन्म पति के अवैध संबंध को साबित करता है, पत्नी का अलग रहना जायज़: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि दूसरी महिला से बेटी का जन्म स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पति का अपनी पहली पत्नी से विवाहित रहते हुए भी उसके साथ संबंध है। न्यायालय ने कहा कि इस आचरण ने पत्नी को अलग रहने के लिए मजबूर किया, इसलिए उस पर परित्याग का आरोप नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने टिप्पणी की:"बेटी का जन्म... स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि या तो अपीलकर्ता पहले से ही किसी के साथ संबंध में था या उसके बाद संबंध विकसित हुए... प्रतिवादी को अलग रहने के लिए मजबूर किया गया।"याचिकाकर्ता देश...

केवल पट्टे के विकल्प के साथ सेल एग्रीमेंट, मकान मालिक-किरायेदार संबंध समाप्त नहीं करता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
केवल पट्टे के विकल्प के साथ सेल एग्रीमेंट, मकान मालिक-किरायेदार संबंध समाप्त नहीं करता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जब सेल एग्रीमेंट में संपत्ति को बेचने या पट्टे पर देने का विकल्प होता है तो मकान मालिक-किरायेदार संबंध बना रहता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 54 के अनुसार,"सेल एग्रीमेंट क्रेता के पक्ष में कोई स्वामित्व स्थापित नहीं करता, क्योंकि यह केवल विक्रय समझौता है, न कि संपत्ति का विक्रय या हस्तांतरण, जो विक्रय समझौते का विषय है।"जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने टिप्पणी की:"यदि यह केवल सेल एग्रीमेंट होता तो यह अनुमान लगाने की संभावना थी कि...

अकेले व्यक्ति के नाम पर किरायेदारी होने पर फर्म द्वारा किराया चुकाने मात्र से किरायेदारी का अधिकार नहीं मिलता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
अकेले व्यक्ति के नाम पर किरायेदारी होने पर फर्म द्वारा किराया चुकाने मात्र से किरायेदारी का अधिकार नहीं मिलता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किरायेदारी किसी अकेले व्यक्ति के नाम पर है तो साझेदारी फर्म द्वारा किराया चुकाने मात्र से फर्म को किरायेदारी का अधिकार नहीं मिल जाता, जब तक कि फर्म के नाम पर कोई वैध किरायेदारी नहीं हो।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की,"हो सकता है कि किसी साझेदारी फर्म ने कुछ भुगतान किया हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उक्त साझेदारी फर्म स्वचालित रूप से किरायेदार बन गई।"यह विवाद 1995 में शुरू हुआ, जब सहकारिता सोसायटी ने हिमाचल प्रदेश पब्लिक...

बीमा कंपनी मुआवज़ा देने से इनकार करने के लिए छिपे या अज्ञात प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं कर सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
बीमा कंपनी मुआवज़ा देने से इनकार करने के लिए छिपे या अज्ञात प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं कर सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई बीमा कंपनी मुआवज़ा देने से इनकार करने के लिए उन प्रावधानों का सहारा नहीं ले सकती, जो समझौते पर हस्ताक्षर करते समय बीमित व्यक्ति को नहीं बताए गए।सद्भावना के सिद्धांत पर ज़ोर देते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनी का यह कर्तव्य है कि वह बीमित व्यक्ति को सभी प्रावधानों के बारे में सूचित करे।ब्लू पेंसिल सिद्धांत (जो आपत्तिजनक प्रावधान को शुरू से ही अमान्य घोषित कर देता है) को लागू करते हुए और टेक्सको मार्केटिंग (प्रा.) लिमिटेड बनाम टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस...

पिता बच्चों के वयस्क होने के बाद उन्हें दिए गए अतिरिक्त भरण-पोषण भत्ते की वापसी की मांग नहीं कर सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
पिता बच्चों के वयस्क होने के बाद उन्हें दिए गए अतिरिक्त भरण-पोषण भत्ते की वापसी की मांग नहीं कर सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पिता अपने बच्चों के वयस्क होने के बाद उन्हें दिए गए भरण-पोषण भत्ते की वापसी की मांग नहीं कर सकता, क्योंकि उनकी शिक्षा के लिए उनका समर्थन करना उनका नैतिक कर्तव्य है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने टिप्पणी की:"...एक पिता होने के नाते भले ही उनका कोई कानूनी कर्तव्य न हो, लेकिन एक पिता के रूप में उनका नैतिक दायित्व और कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को भरण-पोषण सुनिश्चित करें, खासकर जब वे अपनी शिक्षा पूरी करने के कगार पर हों, क्योंकि बच्चों...

पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोमोशन के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री के बराबर नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोमोशन के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री के बराबर नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा को पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री के समान नहीं माना जा सकता और ऐसे में मेडिकल एजुकेशन सर्विस रूल्स के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर प्रोमोशन का दावा डिप्लोमा धारक नहीं कर सकते।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस सुशील कु्करेजा की खंडपीठ ने कहा कि 1999 के हिमाचल प्रदेश मेडिकल एजुकेशन सर्विस रूल्स में कहीं भी पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा का उल्लेख नहीं है। नियमों में पोस्ट-ग्रेजुएशन शब्द का आशय केवल पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री से ही लिया जाएगा।मामले में...

पीड़िता और आरोपी के बीच शत्रुतापूर्ण संबंधों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन आवश्यक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ मामले में बरी करने का फैसला बरकरार रखा
पीड़िता और आरोपी के बीच शत्रुतापूर्ण संबंधों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन आवश्यक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ मामले में बरी करने का फैसला बरकरार रखा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के मामले में आरोपी को बरी करने का फैसला बरकरार रखते हुए कहा कि जब पीड़िता ने कहा कि उसके आरोपी के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं। वह उससे बातचीत नहीं करती थी, तो उसकी गवाही में और अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।जस्टिस राकेश कैंथला ने कहा:"सूचना देने वाली महिला ने स्वीकार किया कि उसके आरोपी के साथ शत्रुतापूर्ण संबंध थे। वह आरोपी से बातचीत नहीं करती थी। इसलिए उसकी गवाही को पूरी सावधानी और सतर्कता से देखा जाना आवश्यक है, खासकर पुलिस को मामले की सूचना देने में हुई...

उप-किरायेदार उप-किराएदारी के आधार पर बेदखली याचिका में आवश्यक पक्ष नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
उप-किरायेदार उप-किराएदारी के आधार पर बेदखली याचिका में आवश्यक पक्ष नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि यदि उप-किरायेदार मकान मालिक या हित-पूर्ववर्ती के अधीन प्रत्यक्ष किरायेदारी स्थापित करने में विफल रहता है तो किरायेदार के विरुद्ध पारित बेदखली आदेश उस पर भी बाध्यकारी होगा।जस्टिस सत्येन वैद्य ने टिप्पणी की:"उप-किरायेदार उप-किराएदारी के आधार पर बेदखली याचिका में आवश्यक पक्ष नहीं है। हालांकि, चूंकि इस मामले में मकान मालिक ने स्वयं उप-किरायेदार को पक्षकार बनाया है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उप-किरायेदार पीड़ित पक्ष नहीं है।"यह विवाद तब उत्पन्न हुआ, जब मकान मालिक...

कुशल कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए MGNREGA निधि का उपयोग नियमितीकरण से इनकार को उचित नहीं ठहरा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
कुशल कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए MGNREGA निधि का उपयोग नियमितीकरण से इनकार को उचित नहीं ठहरा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि MGNREGA केवल अकुशल शारीरिक श्रम के लिए बनाया गया है। इसका उपयोग कंप्यूटर ऑपरेटरों जैसी कुशल भूमिकाओं को नियमितीकरण से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता।अदालत ने पाया कि राज्य ने स्वीकृत पदों के बावजूद कुशल सेवाओं के भुगतान के लिए मनरेगा निधि का गलत उपयोग किया।राज्य के तर्क को खारिज करते हुए जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की:"अकुशल शारीरिक श्रम का अर्थ है कोई भी शारीरिक कार्य, जिसे कोई भी वयस्क व्यक्ति बिना विशेष प्रशिक्षण के कर सकता है। याचिकाकर्ता कुशल कंप्यूटर...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल के बच्चे की हत्या के मामले में दोषियों की मृत्युदंड की सजा कम की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल के बच्चे की हत्या के मामले में दोषियों की मृत्युदंड की सजा कम की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 2014 के युग गुप्ता हत्याकांड में चंदर शर्मा (26) और विक्रांत बख्शी (22) को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा कम करते हुए निर्देश दिया कि वे "अपनी अंतिम सांस तक" आजीवन कारावास की सजा काटेंगे।अदालत ने कहा,"...हमारे लिए इस धारणा पर आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है कि दोषी ने युग के साथ क्रूरता से व्यवहार किया, जिससे मृत्युदंड की कठोर सजा देना उचित हो... यह दलील कि आरोपी ने बच्चे को जिंदा टैंक में फेंक दिया था, रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों से समर्थित नहीं है।"अदालत ने सह-अभियुक्त तेजिंदर...