हाईकोर्ट
यौन उत्पीड़न मामले में नौकरी से निकाली गई कर्मचारी को राहत: गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में होगी फिर से बहाली”
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी की महिला कर्मचारी को बड़ी राहत देते हुए उनका सेवा समाप्ति आदेश रद्द किया। अदालत ने माना कि महिला को केवल इसलिए बार-बार टर्मिनेट किया गया, क्योंकि उन्होंने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।जस्टिस मंजु रानी चौहान ने आदेश देते हुए कहा कि यह साफ़ तौर पर अनावश्यक उत्पीड़न का मामला है, क्योंकि सभी कार्रवाई केवल शिकायत दर्ज करने के बाद ही शुरू हुईं।उन्होंने टिप्पणी की,“रजिस्ट्रार आज तक यूनिवर्सिटी में सेवा दे रहे हैं, जबकि...
समय पर नगर निकाय चुनाव न कराना लोकतंत्र के खिलाफ: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को लगाई फटकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने शहरी निकायों में समय पर चुनाव न कराने पर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि यह देरी संविधान में निहित लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती है।जस्टिस अनुप कुमार धाण्ड की एकल पीठ ने उन याचिकाओं को खारिज करते हुए टिप्पणी की, जो पूर्व सरपंचों द्वारा दायर की गई थीं। इन सरपंचों को उनकी पंचायतों के नगरपालिकाओं में विलय के बाद चेयरपर्सन नियुक्त किया गया था। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग और सरकार ने पांच वर्ष की निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले...
हमारा क्या?: पशु यौन हिंसा पर खामोश भारतीय दंड संहिता
पिछले कुछ हफ़्तों में आवारा कुत्तों के 'खतरे' के मुद्दे पर सोशल मीडिया पर हुए आक्रोश को देखते हुए, कई यूज़र्स ने बेज़ुबानों के विभिन्न संघर्षों को उजागर किया है, जिसमें एक मादा आवारा कुत्ते के साथ एक आदमी द्वारा बलात्कार का एक विचलित करने वाला वीडियो भी शामिल है, जो वायरल हो गया। यह जॉर्ज ऑरवेल के एनिमल फ़ार्म से लिए गए प्रसिद्ध उद्धरण की याद दिलाता है -"सभी जानवर समान हैं, लेकिन कुछ जानवर दूसरों से ज़्यादा समान हैं"ऑरवेल के इस तीखे व्यंग्य का उद्देश्य पुस्तक में शक्ति के द्वैत को उजागर करना था,...
दोराहे पर अंतर्राष्ट्रीय न्याय
युद्ध की राख से जन्मा अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्याय नूर्नबर्ग में एक साहसिक प्रतिज्ञा के साथ शुरू हुआ: कोई भी कानून से ऊपर नहीं होगा। समय के साथ समय बदलता गया और आईसीसी तथा तदर्थ ट्रिब्यूनल वैश्विक जवाबदेही के ऐतिहासिक उदाहरण बन गए। लेकिन क्या अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्याय न्याय प्रदान करने में, या भू-राजनीति के आधार पर चुनिंदा रूप से कानून लागू करने में से मिसाल बने, अभी भी एक प्रश्न है। कमजोर देशों के नेताओं के अभियोगों की गिरफ्तारी से लेकर शक्तिशाली देशों के खिलाफ अपने गिरफ्तारी वारंट को लागू...
UAPA मामलों में सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकते, NIA Act का इस्तेमाल कर वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कोई वैधानिक मंच उपलब्ध है तो कोई भी अपीलकर्ता राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम (NIA Act) की धारा 21 का हवाला देकर सीधे हाई कोर्ट में अपील नहीं कर सकता। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि UAPA में संपत्ति की जब्ती से लेकर संबंधित प्राधिकरण द्वारा निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया प्रदान की गई है।जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की खंडपीठ ने आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों में इस्तेमाल...
यौन सामग्री फारवर्ड करने के आरोपी युवक को सशर्त जमानत, हाईकोर्ट ने 3 साल सोशल मीडिया से दूर रहने को कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने और सोशल मीडिया पर महिला को डराने-धमकाने के आरोपी 19 वर्षीय युवक को जमानत दी। हालांकि कोर्ट ने एक अनूठी शर्त भी लगाई कि आरोपी अगले तीन साल तक किसी भी रूप में अपने या किसी फर्जी नाम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेगा।जस्टिस अशोक कुमार जैन ने कहा कि अन्य परिस्थितियों और याचिकाकर्ता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, जो एक कॉलेज का स्टूडेंट है, जमानत दी जा सकती है। हालांकि यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त शर्तें लगाई गईं ताकि आरोपी की...
दिल्ली हाईकोर्ट में तिहाड़ जेल से अफ़ज़ल गुरु और मक़बूल भट्ट की कब्रें हटाने की PIL दायर
दिल्ली हाईकोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर की गई है, जिसमें तिहाड़ जेल, दिल्ली से आतंकवाद संबंधी अपराधों के लिए फांसी पाए मोहम्मद मक़बूल भट्ट और मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु की कब्रों को हटाने की मांग की गई है। वैकल्पिक रूप से, यह भी प्रार्थना की गई है कि उनके अवशेषों को कानून के अनुसार किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, “ताकि आतंकवाद की महिमा फैलने और जेल परिसर के दुरुपयोग को रोका जा सके।”याचिका, जो “विश्व वैदिक सनातन संघ” के माध्यम से दायर की गई है, में कहा गया है कि राज्य...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेटी की भरण-पोषण की लड़ाई में पिता की आय के सत्यापन का आदेश दिया
इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक युवती की दुर्दशा पर गहरा दुःख व्यक्त किया, जो अपने पिता से भरण-पोषण के लिए बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाने को मजबूर है।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ, मुंबई में ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रही अपनी बेटी के खिलाफ एक पिता द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।खंडपीठ ने टिप्पणी की,"यह हमारे लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है कि एक बेटी अपने पिता से भरण-पोषण पाने के लिए संघर्ष कर रही है। अपीलकर्ता-पिता ने प्रतिवादी-बेटी के खिलाफ इस...
पतियों पर भरण-पोषण का बोझ डालने के लिए शिक्षित पत्नियां जानबूझकर काम करने से बचती हैं, यह सामान्यीकरण 'अनुचित': उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब तक आय या कमाई की वास्तविक संभावनाओं का स्पष्ट भौतिक प्रमाण न हो, तब तक यह सामान्यीकरण 'अनुचित' होगा कि शिक्षित पत्नियां जानबूझकर काम करने से बचती हैं ताकि अपने पतियों पर भरण-पोषण का बोझ डाल सकें।जस्टिस गौरीशंकर सतपथी की पीठ ने एक पति द्वारा उसके विरुद्ध पारित भरण-पोषण आदेश के विरुद्ध दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की:"इसके अलावा, यह सभी मामलों में सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं हो सकता कि उच्च योग्यता वाली पत्नी जानबूझकर काम करने से बचती है...
गिरोह के सदस्य के खिलाफ FIR का 'संज्ञान' MCOCA लगाने के लिए पर्याप्त, दोषसिद्धि आवश्यक नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति के खिलाफ 'गिरोह के सदस्य' के रूप में दर्ज दो या अधिक FIR का संज्ञान लेता है तो कठोर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 लागू किया जा सकता है और ऐसी कोई पूर्व शर्त नहीं है कि ऐसी FIR के परिणामस्वरूप दोषसिद्धि हो।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह टिप्पणी मकोका के तहत 6 साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में बंद एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे 2018 में हत्या की साजिश रचने के आरोप...
कोडीन-आधारित कफ सिरप का अनधिकृत कब्ज़ा NDPS Act के अंतर्गत आता है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने दोहराया कि NDPS Act के तहत ज़मानत एक कठोर अपवाद है, खासकर कोडीन-आधारित कफ सिरप की व्यावसायिक मात्रा से जुड़े मामलों में।जस्टिस जितेंद्र कुमार ने कहा,"ज़मानत का अस्वीकार करना एक नियम है और इसे देना एक अपवाद है।"उन्होंने दोहराया कि कोडीन-आधारित कफ सिरप का अनधिकृत कब्ज़ा, चाहे उसकी सांद्रता 2.5% से कम क्यों न हो, व्यावसायिक मात्रा में होने पर NDPS Act के दायरे में आता है और NDPS Act की धारा 37 के तहत ज़मानत नियम के बजाय एक अपवाद है।याचिकाकर्ता और सह-आरोपी को NDPS Act की धारा 20 और...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 साल बाद बलात्कार के मामले में व्यक्ति को बरी किया, दिया यह तर्क
दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता के 'जाली' जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर नाबालिग से बलात्कार के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराने वाले ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने "अपीलकर्ता को दोषी ठहराने में स्पष्ट रूप से गलती की", जबकि यह दर्ज किया गया कि उसकी माँ द्वारा नाबालिग होने का दावा करने के लिए पेश किया गया जन्म प्रमाण पत्र 'जाली' था।पीठ ने MCD के जन्म रजिस्टर का हवाला दिया, जो वर्ष 1996 का है, जब पीड़िता के जन्म का दावा किया गया। कहा कि MCD के रिकॉर्ड...
अभियुक्त के विरुद्ध फरारी उद्घोषणा जारी होने पर भी अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार्य: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने माना कि दंड प्रक्रिया संहिता (BNSS) की धारा 82 (फरार व्यक्ति के लिए उद्घोषणा) और 83 (फरार व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की) के तहत कार्यवाही अग्रिम ज़मानत याचिका दायर करने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाती।बता दें, BNSS की धारा 82 में कहा गया कि यदि किसी अदालत को यह विश्वास करने का कारण है (चाहे साक्ष्य लेने के बाद हो या नहीं) कि कोई व्यक्ति, जिसके विरुद्ध उसके द्वारा वारंट जारी किया गया, फरार हो गया या खुद को छिपा रहा है ताकि ऐसे वारंट को निष्पादित न किया जा सके तो ऐसा अदालत लिखित...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना किसी स्पष्ट कारण के आदेश पारित करने पर ट्रायल कोर्ट की खिंचाई की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पक्षकार द्वारा पक्षकारों के प्रतिस्थापन (सीपीसी के आदेश 1 नियम 10 के तहत) सहित कई आवेदनों को पक्षकार और उसके वकील की अनुपस्थिति के आधार पर खारिज करते हुए बिना किसी स्पष्ट कारण के आदेश पारित करने के लिए ट्रायल कोर्ट की कड़ी आलोचना की।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने बिना किसी स्पष्ट कारण के आदेश पारित करके "प्रथम दृष्टया अवैधता" की, जो न्यायिक कर्तव्य से विमुख होने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।याचिका में ट्रायल कोर्ट के 21 अप्रैल, 2025 के आदेश को चुनौती दी...
विवाह में प्रेमी/प्रेमिका के दखल पर पति/पत्नी केस कर सकते हैं : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी जीवनसाथी का प्रेमी/प्रेमिका जानबूझकर और गलत तरीके से विवाह में हस्तक्षेप करता है, तो दूसरा जीवनसाथी उसके खिलाफ हर्जाने का सिविल मुकदमा दायर कर सकता है। कोर्ट ने “Alienation of Affection” की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि ऐसा दावा सिविल कोर्ट में किया जा सकता है, न कि फैमिली कोर्ट में।कोर्ट ने माना कि सिविल कार्रवाई तभी टिकाऊ होगी जब वादी साबित करे कि (i) प्रतिवादी का आचरण जानबूझकर और गलत था तथा उसने वैवाहिक रिश्ते में हस्तक्षेप किया, (ii) इस आचरण से...
आरोप-पत्र जारी न होने तक लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाही के आधार पर निलंबन तब तक नहीं बढ़ाया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने के आधार पर निलंबन को वैध रूप से तब तक नहीं बढ़ाया जा सकता, जब तक कि आरोप-पत्र जारी न कर दिया गया हो। इस गलत आधार पर किया गया विस्तार अमान्य है, जिससे कर्मचारी को बहाली का अधिकार मिल जाता है।पृष्ठभूमि तथ्ययाचिकाकर्ता को केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम 10(1)(क) के तहत 28 फरवरी, 2025 के आदेश द्वारा निलंबित कर दिया गया था। उन्हें इस आधार पर...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ज़िम्मेदार नागरिकों से अनाथालयों और वृद्धाश्रमों का सामाजिक लेखा-परीक्षण करने का आग्रह किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार (19 सितंबर) को सामाजिक लेखा-परीक्षण की अवधारणा के विकास और प्रभावी कार्यान्वयन की वकालत करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।अदालत एक रिट याचिका खारिज करने को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता ने अपने वकील के उपस्थित न होने के कारण पदोन्नति की मांग की थी।अपीलकर्ता ने दावा किया कि उसकी रिट याचिका 2011 से लंबित है। इसको 21 जुलाई, 2025 को सिंगल जज द्वारा अभियोजन पक्ष के अभाव में खारिज कर दी गई, क्योंकि उसके वकील मामले में उपस्थित नहीं हुए।...
भर्ती नियमों में संशोधन न होने तक पद का पुनर्नामांकन किसी अन्य संवर्ग में विलय के बराबर नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने कहा कि किसी पद का पुनर्नामांकन मात्र किसी अन्य संवर्ग में विलय के बराबर नहीं है; वास्तविक विलय के लिए सेवा नियमों में संशोधन आवश्यक है। ऐसे संशोधन के बिना वेतनमान या संवर्ग लाभों में समानता का दावा नहीं किया जा सकता।पृष्ठभूमि तथ्ययाचिकाकर्ता को चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित राजकीय संग्रहालय एवं कला दीर्घा में गाइड के पद पर नियुक्त किया गया। चंडीगढ़ प्रशासन ने कर्मचारियों को बेहतर करियर की संभावनाएं प्रदान करने...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी की आजीवन सजा निलंबित की, 10 पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा निलंबित की। अदालत ने यह देखते हुए कि वह 10 साल से अधिक समय तक हिरासत में रह चुका है और उसके दो सह-आरोपियों, जिन्होंने इतनी ही अवधि हिरासत में बिताई, उसको पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है।अदालत ने अपीलकर्ता को 10 फलदार/नीम या पीपल के पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का भी निर्देश दिया।अदालत महेश शर्मा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने 2021 के ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी,...
SC/ST Act | कोई ठोस अपराध नहीं पाया जाता है तो अग्रिम ज़मानत देने पर कोई रोक नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि उन मामलों में अग्रिम ज़मानत देने पर रोक लागू नहीं होगी, जहां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 3(2)(v) के तहत अपराध का आरोप लगाया गया हो, बशर्ते कि प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष हो कि 10 वर्ष के कारावास से दंडनीय कोई ठोस अपराध नहीं किया गया।जस्टिस गोपीनाथ पी. ने कहा:"दूसरे शब्दों में, ऐसे मामलों में जहां आरोप यह है कि SC/ST Act की धारा 3(2)(v) के तहत कोई अपराध किया गया और जब यह न्यायालय प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष निकालता है कि 10 वर्ष या उससे...



















