हाईकोर्ट
'केवल अनुबंध की जानकारी या उससे होने वाले आकस्मिक लाभों की संभावना, निजता स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अनुबंध या उससे होने वाले आकस्मिक लाभों की जानकारी मात्र से अनुबंध की निजता स्थापित नहीं हो सकती या तीसरे पक्ष के विरुद्ध प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान नहीं किए जा सकते। अदालत ने निर्णय दिया कि प्रत्यक्ष संविदात्मक संबंध के अभाव में, कोई वाद-कारण उत्पन्न नहीं होता।जस्टिस कमल खता अमेय रियल्टी एंड कंस्ट्रक्शन एलएलपी (प्रतिवादी नंबर 9) द्वारा दायर अंतरिम आवेदन पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें श्री कंस्ट्रक्शन कंपनी (वादी) द्वारा दायर वाद को खारिज करने का अनुरोध किया गया था।...
S. 319 CrPC | अतिरिक्त अभियुक्तों को केवल मुकदमे में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही बुलाया जा सकता है, जांच सामग्री के आधार पर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 319 के तहत अतिरिक्त अभियुक्तों को बुलाने की ट्रायल कोर्ट की शक्ति मुकदमे के दौरान उसके समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों तक ही सीमित है और जांच के दौरान एकत्रित सामग्री के आधार पर इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने चंदौली के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा तीन पुनर्विचारकर्ताओं को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 323, 504, 506 और 427 के तहत मुकदमे का सामना करने के लिए बुलाने का आदेश रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।संक्षेप में...
हाईकोर्ट ने विध्वंस का सामना कर रही संभल की रायन बुजुर्ग मस्जिद को अंतरिम राहत देने से किया इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पेशल सुनवाई में संभल की रायन बुजुर्ग मस्जिद को अंतरिम राहत देने से इनकार किया, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए विध्वंस नोटिस का सामना करना पड़ रहा है।जस्टिस दिनेश पाठक की पीठ ने मस्जिद प्रबंधन द्वारा दायर उस याचिका को वापस ले लिया, जिसमें असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी/तहसीलदार, संभल द्वारा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत कार्यवाही में पारित 2 सितंबर, 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।शुरुआत में याचिकाकर्ताओं के वकील ने 2 सितंबर के आदेश की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार विदेशी नागरिक को ज़मानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में चार साल से ज़्यादा समय से जेल में बंद विदेशी नागरिक को ज़मानत दी।ऐसा करते हुए जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि जांच अधिकारी ने क्रॉस एक्जामिनेशन के दौरान ख़ुद स्वीकार किया कि ज़ब्त किए गए पदार्थ को सैंपल लेने से पहले मिलाया गया, जिससे यह पता लगाना असंभव हो गया कि टेस्ट के लिए भेजे गए नमूने किस पैकेट से आए या उनका वज़न कितना था।पीठ ने कहा,"इस प्रकार, टेस्ट किए गए सैंपल्स के प्रमाण पर संदेह है, जिन्हें कुल मिलाकर व्यावसायिक मात्रा के रूप में...
S.148 NI Act | अपीलीय कोर्ट को न्यूनतम 20% मुआवज़ा राशि जमा करने का निर्देश देने का 'एकमात्र विवेकाधिकार': गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 148 के अंतर्गत अपीलीय कोर्ट को चेक अनादर के लिए दोषसिद्धि को चुनौती देने वाले व्यक्ति को परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुआवज़े की राशि का 20% जमा करने का निर्देश देने का पूर्ण विवेकाधिकार है।NI Act की धारा 148 दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील लंबित रहने तक भुगतान का आदेश देने की अपीलीय कोर्ट की शक्ति से संबंधित है। इस प्रावधान में कहा गया कि NI Act की धारा 138 के अंतर्गत चेक अनादर के लिए दोषसिद्धि को चुनौती देने वाले चेक जारीकर्ता...
धोखाधड़ी के आरोपों और DRT में लंबित कार्यवाही से मध्यस्थता पर रोक नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट का फ़ैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के दायरे पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक FIR दर्ज होने या ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) में कार्यवाही लंबित होने से विवादों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित करने पर कोई रोक नहीं लगती है।जस्टिस अद्वैत एम. सेथना की पीठ ने मध्यस्थता अधिनियम, 1996 की धारा 11 के तहत दायर आवेदन स्वीकार किया और मंगल क्रेडिट एंड फिनकॉर्प लिमिटेड और उल्का चंद्रशेखर नायर के बीच ऋण विवादों के समाधान के लिए पूर्व चीफ जस्टिस नरेश एच. पाटिल को एकमात्र मध्यस्थ...
'अनधिकृत कॉलोनी' विकसित करने के लिए धोखाधड़ी की FIR दर्ज कराने वाली महिला को हाईकोर्ट से मिली अग्रिम ज़मानत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सागर जिले में बिना आवश्यक अनुमति के अनधिकृत कॉलोनी विकसित करने और प्लॉट बेचने की आरोपी महिला को अग्रिम ज़मानत दी।अदालत ने आवेदक को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने और जांच अधिकारी द्वारा निर्देशित तिथि और समय पर उपस्थित होने का निर्देश दिया। महिला पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 292-सी (अवैध कॉलोनी निर्माण) नगर निगम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।आवेदक के वकील ने दलील दी कि नगर निगम प्राधिकरण ने एक झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया...
सार्वजनिक हित में दी गई अनिवार्य रिटायरमेंट दंड नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी की समयपूर्व रिटायरमेंट को सही ठहराया
गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में न्यायिक अधिकारी को दी गई समयपूर्व रिटायरमेंट को बरकरार रखते हुए यह स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हित या प्रशासनिक हित में दी गई अनिवार्य अथवा समयपूर्व रिटायरमेंट को दंड नहीं माना जा सकता।यह आदेश जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस एल.एस. पिरजादा की खंडपीठ ने पारित किया। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व न्यायिक अधिकारी ने 2016 की अधिसूचना को चुनौती दी, जिसके तहत उन्हें 53 वर्ष की आयु में सार्वजनिक हित में सेवा से समयपूर्व रिटायरमेंट किया गया।खंडपीठ ने अपने...
छठी अनुसूची: जनजातीय स्वायत्तता की ढाल और लद्दाख की गूंजती मांग
भारत का संविधान अपनी विविधता और समावेशिता में अद्वितीय, एक जीवंत दस्तावेज है, जो देश के विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक भूगोल की ज़रूरतों के अनुरूप ढलने की क्षमता रखता है। इसी समावेशी भावना की एक मजबूत अभिव्यक्ति है संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule)। यह अनुसूची मुख्यतः देश के पूर्वोत्तर राज्यों में रहने वाले जनजातीय समुदायों को स्वायत्तता प्रदान करने, उनकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने और स्थानीय संसाधनों पर उनके अधिकार को सुनिश्चित करने का एक संवैधानिक ढांचा है। यह केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था...
गिरफ्तारी अपमान लाती है, स्थायी दाग छोड़ती है: अवैध गिरफ्तारी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार पर 1 लाख का जुर्माना लगाया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में महाराष्ट्र सरकार पर 1 लाख का जुर्माना लगाते हुए कहा कि एक कर्नाटक निवासी व्यक्ति को गलत धाराओं में फंसाकर अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया और 20 दिनों तक जेल में रखा गया, जो कानून का गंभीर दुरुपयोग है।जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस संदीश पाटिल की खंडपीठ ने पाया कि बांद्रा पुलिस थाने के इंस्पेक्टर प्रदीप केरकर और उपनिरीक्षक कपिल शिरसाठ ने अपने सीनियर अधिकारियों से अनुमति लिए बिना ही भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) जोड़ दी...
प्रेमालाप के बाद शादी से इनकार विवाह का वादा तोड़ना नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को दी ज़मानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्टशिप यानी विवाह से पहले के परिचय या संबंध के बाद अगर कोई व्यक्ति सोच-समझकर शादी से इनकार करता है तो उसे विवाह का वादा तोड़ना नहीं माना जा सकता।जस्टिस अरुण मोंगा ने यह टिप्पणी ऐसे मामले में आरोपी को ज़मानत देते हुए की, जिस पर महिला के साथ विवाह के झूठे वादे पर यौन संबंध बनाने का आरोप था।अदालत ने कहा,“यह एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला प्रतीत होता है, जहां दो वयस्क आपसी सहमति से विवाह की संभावना तलाशने के लिए रिश्ते में आए। हालांकि, एक-दूसरे को बेहतर जानने के बाद एक पक्ष ने...
हर लेन-देन से मेल खाना जरूरी नहीं, कुल विदेशी मुद्रा लाभ साबित हो तो सामूहिक FIRC पर्याप्त: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया कि विदेशी आय प्रमाणपत्र (Foreign Inward Remittance Certificate - FIRC) को हर निर्यात लेन-देन से मेल खाना जरूरी नहीं है। यदि किसी निर्यातक द्वारा समग्र रूप से प्राप्त विदेशी मुद्रा का लाभ पूरी तरह सिद्ध किया जा सके, तो एक निर्धारित अवधि का FIRC भी मान्य होगा।FIRC बैंक द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाणपत्र होता है, जो विदेशों से प्राप्त भुगतान का साक्ष्य प्रदान करता है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने कहा,“FIRC को हर लेन-देन से...
लोकतंत्र को कमजोर करने वाला कदम: केरल हाईकोर्ट में BCI के 2400% रजिस्ट्रेशन फीस वृद्धि के खिलाफ याचिका
केरल हाईकोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा राज्य बार काउंसिल चुनावों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 5,000 से बढ़ाकर 1,25,000 करने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। यह वृद्धि करीब 2400% की बताई गई।यह याचिका एडवोकेट राजेश विजयन द्वारा दायर की गई, जो 1996 में वकील के रूप में नामांकित हुए और 2019 से केरल बार काउंसिल के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला मनमाना, अवैध, असंगत और अनुपातहीन है तथा यह एडवोकेट्स एक्ट 1961 और बार काउंसिल ऑफ केरल इलेक्शन रूल्स 1979 का उल्लंघन करता...
'सार्वजनिक भूमि हड़पने का आम तरीका': दक्षिण मुंबई में झुग्गी पुनर्वास के लिए 33 एकड़ सरकारी ज़मीन के आवंटन पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में दक्षिण मुंबई के पॉश इलाके कफ परेड और कोलाबा में झुग्गीवासियों द्वारा अतिक्रमण की गई लगभग 33 एकड़ सरकारी ज़मीन को 65,000 झुग्गियों के पुनर्विकास और पुनर्वास की आड़ में बेचने के राज्य सरकार के प्रयास पर सवाल उठाया।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ यह देखकर हैरान रह गई कि झुग्गीवासियों ने सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण कर लिया और अब उन्होंने एक सोसाइटी का गठन किया और झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) के तहत पुनर्वास भवन के निर्माण के लिए डेवलपर को नियुक्त...
पुलिस व्यवस्था में AI: विनियमन का मुद्दा तैयार करना
भारत में कई पुलिस बल अपराध की रोकथाम, पता लगाने और जांच करने, अपराधियों को पकड़ने और यातायात संचालन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों को अपना रहे हैं। उदाहरण के लिए, विशाखापत्तनम पुलिस ने हाल ही में प्रमुख यातायात चौराहों पर एआई-संचालित स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरों के साथ-साथ चेहरे की पहचान वाले कैमरे लगाने की योजना की घोषणा की है। इन तकनीकों का उद्देश्य यातायात नियमों के उल्लंघनों की पहचान और प्रवर्तन में सुधार के साथ-साथ आपराधिक...
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17: उद्धरण चिह्नों में 'अस्पृश्यता'
भारत का संविधान अपनी विशिष्टता के साथ बनाया गया, जहां संस्थापक सदस्य सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों को लिखने का विकल्प चुनते हैं। दुनिया भर के विभिन्न संविधानों ने भारतीय संविधान के निर्माण को प्रेरित किया होगा, हालांकि, शब्दों का चयन, शैली और प्रारूपण में विशिष्टता भारत के लिए अद्वितीय रही है। इसका एक उदाहरण अस्पृश्यता से संबंधित प्रावधान को शामिल करना है। संविधान के अनुच्छेद 17 में कहा गया:"अस्पृश्यता" का उन्मूलन किया जाता है और किसी भी रूप में इसका पालन निषिद्ध है। "अस्पृश्यता" से...
अधिनियम के विपरीत नियम: भारतीय EZZ नियम, 2025 में मत्स्य पालन के सतत दोहन के मसौदे में दंड संबंधी प्रावधानों का विश्लेषण
परिचयक्या कोई प्रत्यायोजित विधान किसी अपराध का सृजन कर सकता है या दंड निर्धारित कर सकता है? साथ ही, क्या वह दंड के निर्णय की प्रक्रियाएं इस प्रकार निर्धारित कर सकता है जो मूल कानून में प्रदत्त अपराधों, उनकी जांच और मुकदमे की योजना के विपरीत हो? ये ऐसे प्रश्न हैं जो भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र (आईजेडजेड) नियम, 2025 (जिसे आगे 'मसौदा नियम 2025' कहा जाएगा) के मसौदे को पढ़ते ही मन में आते हैं, जिसे हाल ही में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रकाशित...
संभल के रयान बुज़ुर्ग गांव की मस्जिद प्रबंधन ने राज्य सरकार के विध्वंस नोटिस के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया
संभल की रयान बुज़ुर्ग मस्जिद के प्रबंधन ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए विध्वंस नोटिस को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।जस्टिस दिनेश पाठक की स्पेशल बेंच ने मामले की सुनवाई की। अदालत 29 सितंबर से अवकाश पर है।मस्जिद प्रबंधन ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत कार्यवाही में सक्षम प्राधिकारी द्वारा पारित 2 सितंबर के आदेश को चुनौती दी।प्रशासन ने हाल ही में मस्जिद को यह दावा करते हुए नोटिस दिया कि यह गाँव में खाद के गड्ढे/तालाब की ज़मीन पर बनी है।...
AI Tools यूज़ करके सेलिब्रिटी वॉइस का अनधिकृत उपयोग अधिकारों का उल्लंघन: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आशा भोसले को राहत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि बिना सहमति के किसी भी आवाज़ को सेलिब्रिटी की आवाज़ में बदलने की अनुमति देने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स उपलब्ध कराना व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है।जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर प्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोसले द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई कर रहे थे। आशा भोसले ने उन कंपनियों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिन पर AI-आधारित एप्लिकेशन विकसित करने और पेश करने का आरोप है, जिन्होंने गाने और अन्य सामग्री बनाने के लिए उनकी आवाज़ का क्लोन बनाया। इन एप्लिकेशन ने...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी की SBI द्वारा उनके लोन खाते को "धोखाधड़ी" घोषित करने के खिलाफ याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के उस आदेश को खारिज करने से इनकार कर दिया, जिसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस के लोन खाते और इसके अध्यक्ष अनिल अंबानी को "धोखाधड़ी (Fraud)" के रूप में वर्गीकृत किया गया था।जस्टिस रेवती मोहित-डेरे और डॉ. नीला गोखले की डिवीजन बेंच ने यह आदेश सुनाया। ध्यान देने योग्य है कि अंबानी और उनकी कंपनी के खाते को "धोखाधड़ी" के रूप में 13 जून 2025 को आरबीआई के मास्टर डायरेक्शन्स ऑन फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट और SBI की आंतरिक नीति के तहत वर्गीकृत किया गया था। ...



















