हाईकोर्ट

व्हाट्सएप मैसेज पर न्यायिक अधिकारी पर लगाया राजद्रोह का आरोप, हाईकोर्ट ने तय किए अवमानना के आरोप
व्हाट्सएप मैसेज पर न्यायिक अधिकारी पर लगाया राजद्रोह का आरोप, हाईकोर्ट ने तय किए अवमानना के आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​के आरोप तय किए, जो प्रथम दृष्टया वकीलों के बीच एक व्हाट्सएप मैसेज प्रसारित करने का दोषी पाया गया, जिसमें बस्ती में तैनात एडिशनल जिला जज पर फर्जी और जाली आदेश पत्र लिखने के लिए रिश्वत लेने और देशद्रोह करने का आरोप लगाया गया।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि कथित अवमाननाकर्ता (कृष्ण कुमार पांडे) पर न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 की धारा 2(सी) के अंतर्गत अदालत की प्रतिष्ठा को...

Section 336(2) Municipalities Act | ट्रांसफर ऑर्डर के लिए अधिकारी की सहमति आवश्यक नहीं, प्रतिनियुक्ति से भिन्न: राजस्थान हाईकोर्ट
Section 336(2) Municipalities Act | ट्रांसफर ऑर्डर के लिए अधिकारी की सहमति आवश्यक नहीं, प्रतिनियुक्ति से भिन्न: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 336(2) के अंतर्गत ट्रांसफर ऑर्डर प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ट्रांसफर नहीं माना जा सकता, क्योंकि इस प्रावधान में अधिकारी की सहमति का प्रावधान नहीं है, जो प्रतिनियुक्ति के लिए आवश्यक है।अदालत ने कहा कि धारा 336(2) के अंतर्गत आदेश जारी होने के बाद अधिकारी/कर्मचारी के पास स्थानांतरित स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता।बता दें, धारा 336 किसी अधिकारी या सरकारी कर्मचारी के नगर पालिका से दूसरी नगर पालिका में...

7 साल की उम्र में सबसे कम उम्र का सर्जन, 12 साल की उम्र में IIT: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने CBSE की याचिका पर विचार करते हुए प्रतिभाशाली बच्चों का हवाला दिया
'7 साल की उम्र में सबसे कम उम्र का सर्जन, 12 साल की उम्र में IIT': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने CBSE की याचिका पर विचार करते हुए प्रतिभाशाली बच्चों का हवाला दिया

क्लास 9 में 10 साल के एक बच्चे को दिए गए अस्थायी एडमिशन के खिलाफ CBSE की अपील पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (6 अक्टूबर) को असाधारण प्रतिभाओं का संज्ञान लिया और 7 साल की उम्र में सबसे कम उम्र का सर्जन बनने वाले एक बच्चे और 12 साल की उम्र में IIT में पढ़ने वाले एक बच्चे का उदाहरण दिया।इस प्रकार, अदालत ने असाधारण प्रतिभा के मामलों में कठोर आयु सीमा लगाने के औचित्य पर सवाल उठाया और केंद्र सरकार को संबंधित मंत्रालय से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस...

पीड़िता का आरोपी से परिचित होना और स्वेच्छा से उसके कमरे में जाना, उसे यौन उत्पीड़न के लिए ज़िम्मेदार ठहराने का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
पीड़िता का आरोपी से परिचित होना और स्वेच्छा से उसके कमरे में जाना, उसे यौन उत्पीड़न के लिए ज़िम्मेदार ठहराने का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला का आरोपी से परिचित होना, उसे आरोपी द्वारा उसके साथ किए गए कथित यौन उत्पीड़न के लिए ज़िम्मेदार ठहराने का कोई आधार नहीं है।जस्टिस अमित महाजन ने कहा,"सिर्फ़ इसलिए कि पीड़िता आरोपी को जानती थी या उसके साथ उसके मधुर संबंध थे, उसे यौन उत्पीड़न के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।"अदालत एक पत्रकार और जेएनयू की पीएचडी स्टूडेंट शिकायतकर्ता द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें बलात्कार के मामले में आरोपी को...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने घरेलू टूर्नामेंट खेलने के इच्छुक OCI क्रिकेटरों को अंतरिम राहत देने से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने घरेलू टूर्नामेंट खेलने के इच्छुक OCI क्रिकेटरों को अंतरिम राहत देने से इनकार किया

यह देखते हुए कि OCI कार्डधारकों को भारत में घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंटों में खेलने की अनुमति देना भारतीय नागरिकों की कीमत पर होगा, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय प्रवासी नागरिकों (OCI) के एक समूह को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के उस प्रस्ताव को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें ऐसे टूर्नामेंटों में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया।जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस अद्वैत एम सेठना की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट मनमानी का मामला नहीं बनाया या...

डिजिटल धोखाधड़ी के मामले बढ़े, अपराधियों ने कानून से बचने के लिए तकनीक का किया दुरुपयोग: दिल्ली हाईकोर्ट
डिजिटल धोखाधड़ी के मामले बढ़े, अपराधियों ने कानून से बचने के लिए तकनीक का किया दुरुपयोग: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और फ्रॉड के मामले में आरोपी को पूर्व गिरफ्तारी जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि डिजिटल फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं और तकनीक का दुरुपयोग अपराधियों द्वारा कानून से बचने के लिए किया जा रहा है।जस्टिस अमित महाजन ने कहा, “यह मामले गंभीर डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े हैं, जिसमें जटिल तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करके भोले-भाले पीड़ितों को ठगा गया। ऐसे अपराध बढ़ रहे हैं और इन्हें पकड़ना कठिन है क्योंकि तकनीक का गलत इस्तेमाल करके अपराधी कानून को चकमा देते हैं। जांच एजेंसी का काम...

अवैध हिरासत आदेश को मंज़ूरी देने पर MP हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा, जुर्माने की चेतावनी
अवैध हिरासत आदेश को मंज़ूरी देने पर MP हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा, जुर्माने की चेतावनी

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के प्रति कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। यह याचिका बेटे की अवैध हिरासत से संबंधित थी। कोर्ट ने पाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत पारित हिरासत आदेश में तथ्यात्मक गलतियां होने के बावजूद राज्य सरकार ने उसे मंज़ूरी दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार ने बिना किसी विवेक के इस्तेमाल के आदेश को अनुमोदित किया।जस्टिस विवेक अग्रवाल और अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अगर राज्य सरकार आदेश को पढ़ने की...

बार एसोसिएशन के सदस्यों को हटाने को चुनौती देने वाली राज्य बार काउंसिल के समक्ष याचिका सुनवाई योग्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बार एसोसिएशन के सदस्यों को हटाने को चुनौती देने वाली राज्य बार काउंसिल के समक्ष याचिका सुनवाई योग्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि एक बार एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा अपने अवैध निष्कासन के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य बार काउंसिल के समक्ष दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने नरेश कुमार मिश्रा और तीन अन्य द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिन्हें एकीकृत बार एसोसिएशन, माटी, कानपुर देहात की आम सभा के सदस्यों के पद से हटा दिया गया।याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश राज्य बार काउंसिल (प्रतिवादी नंबर 1) द्वारा...

सीलबंद संपत्ति से छेड़छाड़ और विलंब के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने 25 लाख का भारी जुर्माना लगाया
सीलबंद संपत्ति से छेड़छाड़ और विलंब के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने 25 लाख का भारी जुर्माना लगाया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया कि कोई भी अधिभोगी (Occupant) जो कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त किरायेदार नहीं है। उसे मालिक की अनुमति के बिना परिसर में किसी भी तरह के तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने या सौंपने का कोई हक़, शीर्षक या हित नहीं है।जस्टिस कमल खाता ने ऑटो क्रेडिट कॉर्पोरेशन और रेखा प्रकाश जैन के आचरण पर गंभीर संज्ञान लिया। इन दोनों ने सील की गई संपत्ति में हस्तक्षेप करने और वसीयत संबंधी कार्यवाही में देरी करने की कोशिश की। कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के लिए...

इलाहाबाद हाईकोर्ट में गांधी जयंती समारोह, सीनियर जज ने महात्मा के दूरदर्शी कानूनी फैसलों पर ज़ोर दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट में गांधी जयंती समारोह, सीनियर जज ने महात्मा के दूरदर्शी कानूनी फैसलों पर ज़ोर दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गरिमापूर्ण समारोह के साथ गाँधी जयंती मनाई, जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर लखनऊ बेंच के माननीय सीनियर जज रजिस्ट्री के अधिकारी और हाईकोर्ट के कर्मचारी उपस्थित रहे।लखनऊ बेंच के सीनियर जज मिस्टर राजन रॉय ने समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम की शुरुआत जस्टिस रॉय द्वारा महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसके बाद राष्ट्रीय गान गाया गया।अपने संबोधन में जस्टिस रॉय ने गाँधीवादी दर्शन की...

जज द्वारा स्थगन देने या संबंधित शिकायत समेकित करने से इनकार करना मामला ट्रांसफर का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
जज द्वारा स्थगन देने या संबंधित शिकायत समेकित करने से इनकार करना मामला ट्रांसफर का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी जज द्वारा मांगी गई तारीखों पर स्थगन देने या संबंधित शिकायत को समेकित करने से इनकार करना मामले को किसी अन्य जज को ट्रांसफर करने का आधार नहीं है।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा, "समय-निर्धारण केस प्रबंधन का एक पहलू है और जब तक यह दुर्भावना से प्रेरित न हो, तब तक यह पक्षपात की उचित आशंका को जन्म नहीं दे सकता।"कोर्ट ने चेक बाउंसिंग के तीन मामलों का सामना कर रहे व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को 10,000 रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर दिया, जिसमें शिकायत को प्रथम श्रेणी...

राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: पति की गैरमौजूदगी में मां द्वारा नोटिस ठुकराने के आधार पर पत्नी को दिया गया एकतरफा तलाक अमान्य
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: पति की गैरमौजूदगी में मां द्वारा नोटिस ठुकराने के आधार पर पत्नी को दिया गया एकतरफा तलाक अमान्य

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर न्यायालय का नोटिस स्वयं संबंधित व्यक्ति या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ठुकराया जाता है तो उसे कानूनी रूप से वैध अस्वीकार नहीं माना जा सकता।हाईकोर्ट की यह टिप्पणी उस मामले में आई, जिसमें फैमिली कोर्ट ने पत्नी को यह मानते हुए एकपक्षीय तलाक (एक्स-पार्टी डिवोर्स) दे दिया कि पति को भेजा गया नोटिस उसकी मां ने ठुकरा दिया था।जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ पति की अपील पर सुनवाई कर रही थी। पति ने...

सोशल मीडिया पर जजों को भी नहीं बख्शा जा रहा, उनके आदेशों के लिए ट्रोल किया जा रहा: हाईकोर्ट के जज की मौखिक टिप्पणी
सोशल मीडिया पर जजों को भी नहीं बख्शा जा रहा, उनके आदेशों के लिए ट्रोल किया जा रहा: हाईकोर्ट के जज की मौखिक टिप्पणी

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन सेनहतिलकुमार ने सोमवार (5 अक्टूबर) को मौखिक टिप्पणी की कि सोशल मीडिया पर जजों को भी नहीं बख्शा जा रहा और उनके द्वारा पारित आदेशों के लिए अक्सर उन्हें ट्रोल किया जाता है।उन्होंने कहा कि कभी-कभी जजों के अतीत और उनके परिवारों को भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना दिया जाता है।जज ने मौखिक टिप्पणी की,"सोशल मीडिया में किसे बख्शा जा रहा है, जजों को भी ट्रोल किया जा रहा है। दरअसल व्यक्तिगत रूप से हमारे द्वारा पारित कुछ आदेशों के लिए हमें भी ट्रोल किया जा रहा है। अतीत को भी...

प्राथमिक दृष्टि में अपराध का उल्लेख संज्ञान नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- FIR दर्ज करने के निर्देश मात्र से मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया
प्राथमिक दृष्टि में अपराध का उल्लेख संज्ञान नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- FIR दर्ज करने के निर्देश मात्र से मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि मजिस्ट्रेट किसी निजी शिकायत पर केवल यह उल्लेख करता है कि प्राथमिक दृष्टि में संज्ञेय अपराध बनता है। पुलिस को FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश देता है तो इसे अपराध का संज्ञान लेना नहीं कहा जा सकता।जस्टिस मिलिंद रमेश फडके की सिंगल बेंच ने कहा कि ऐसा आदेश दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 156(3) के अंतर्गत आता है, न कि CrPC की धारा 200 के तहत संज्ञान लेने के दायरे में।अदालत ने कहा,“मजिस्ट्रेट के आदेश से यह स्पष्ट है कि उन्होंने केवल यह कहा कि प्राथमिक...

सांभर का मांस खाने का आरोप: आरोपी से बरामद मांस का कोई सीधा संबंध नहीं, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दी जमानत
सांभर का मांस खाने का आरोप: आरोपी से बरामद मांस का कोई सीधा संबंध नहीं, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दी जमानत

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को ज़मानत दी, जिस पर आरोप था कि उसने नागौद के पीडब्ल्यूडी विश्रामगृह में सांभर हिरण का मांस पकाकर खाया।अदालत ने पाया कि वन विभाग आरोपी और बरामद मांस के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं कर सका, और फॉरेंसिक रिपोर्ट (FSL) अभी लंबित है।जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने केस डायरी का अवलोकन करते हुए कहा कि वन अधिकारियों को “गुप्त सूचना” मिली थी कि कुछ लोग विश्रामगृह में सांभर का मांस पका रहे हैं परंतु “इस सूचना के अलावा आज तक वन विभाग आरोपी को बरामद मांस से...

राजस्थान हाईकोर्ट ने फोरम शॉपिंग के लिए वादियों की कड़ी आलोचना की, ₹1 लाख का जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने "फोरम शॉपिंग" के लिए वादियों की कड़ी आलोचना की, ₹1 लाख का जुर्माना लगाया

"फोरम शॉपिंग" की प्रथा को गंभीरता से लेते हुए और इसे बेहद बदनाम बताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने इसके लिए कई याचिकाकर्ताओं पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया।अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें कुछ संस्थानों ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से आगे के लिए बी.एससी. नर्सिंग कोर्स में काउंसलिंग के लिए पात्र संस्थानों की सूची में अपना नाम शामिल करने की मांग की।जस्टिस समीर जैन फोरम शॉपिंग के एक जैसे मुद्दे पर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जिनमें क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र न्यायालय की जयपुर पीठ के समक्ष होने...

ZP Election Rules 1994 | COVID के दौरान वर्चुअल उपस्थिति में याचिका का वर्चुअल रूप से दाखिल होना नियम 4(3) का पर्याप्त अनुपालन: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ZP Election Rules 1994 | COVID के दौरान वर्चुअल उपस्थिति में याचिका का वर्चुअल रूप से दाखिल होना नियम 4(3) का पर्याप्त अनुपालन: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि यदि कोई चुनाव याचिका याचिकाकर्ता द्वारा स्वयं ई-फाइल की जाती है और COVID-19 के दौरान याचिका प्रस्तुत करते समय याचिकाकर्ता अपने वकील के साथ कोर्ट के समक्ष वर्चुअल रूप से उपस्थित होता है तो यह उत्तर प्रदेश जिला पंचायत (सदस्यता से संबंधित चुनावी विवादों का निपटारा) नियम, 1994 के नियम 4(3) का 'पर्याप्त अनुपालन' माना जाएगा, जिसके अनुसार चुनाव याचिका व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत की जानी आवश्यक है।जस्टिस मनीष कुमार निगम की पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता ने स्वयं अपनी ई-मेल आईडी...

पिता बच्चों के वयस्क होने के बाद उन्हें दिए गए अतिरिक्त भरण-पोषण भत्ते की वापसी की मांग नहीं कर सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
पिता बच्चों के वयस्क होने के बाद उन्हें दिए गए अतिरिक्त भरण-पोषण भत्ते की वापसी की मांग नहीं कर सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पिता अपने बच्चों के वयस्क होने के बाद उन्हें दिए गए भरण-पोषण भत्ते की वापसी की मांग नहीं कर सकता, क्योंकि उनकी शिक्षा के लिए उनका समर्थन करना उनका नैतिक कर्तव्य है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने टिप्पणी की:"...एक पिता होने के नाते भले ही उनका कोई कानूनी कर्तव्य न हो, लेकिन एक पिता के रूप में उनका नैतिक दायित्व और कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को भरण-पोषण सुनिश्चित करें, खासकर जब वे अपनी शिक्षा पूरी करने के कगार पर हों, क्योंकि बच्चों...