हाईकोर्ट

यदि एकपक्षीय तलाक डिक्री के अस्तित्व में रहते हुए दूसरी शादी की जाती है, जिसे बाद में रद्द कर दिया जाता है तो द्विविवाह का कोई अपराध नहीं माना जाएगा: केरल हाईकोर्ट
यदि एकपक्षीय तलाक डिक्री के अस्तित्व में रहते हुए दूसरी शादी की जाती है, जिसे बाद में रद्द कर दिया जाता है तो द्विविवाह का कोई अपराध नहीं माना जाएगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने निर्धारित किया कि पहली शादी से तलाक की एकपक्षीय डिक्री के संचालन के दौरान दूसरी शादी करने के लिए IPC की धारा 494 के तहत कोई दंडात्मक परिणाम नहीं मिलेगा भले ही एकपक्षीय डिक्री को बाद की तारीख में रद्द कर दिया गया हो।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि तलाक की एकपक्षीय डिक्री के संचालन के कारण जब दूसरी शादी हुई, तब पक्षों के बीच कोई कानूनी विवाह नहीं था भले ही इसे बाद में रद्द कर दिया गया हो।न्यायालय ने इस प्रकार कहा,"क्या पिछली शादी के तलाक के एकपक्षीय डिक्री के संचालन के दौरान किया...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 साल के बच्चे की कस्टडी पिता को सौंपी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और भारत में समायोजित न हो पाने के कारण बच्चे को वापस अमेरिका ले जाने की अनुमति दी
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 साल के बच्चे की कस्टडी पिता को सौंपी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और भारत में समायोजित न हो पाने के कारण बच्चे को वापस अमेरिका ले जाने की अनुमति दी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इंटरनेशनल चाइल्ड कस्टडी के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसले में चार वर्षीय बच्चे की कस्टडी उसके पिता को दे दी है, जिससे बच्चे को अपने प्राकृतिक अभिभावक/मां के साथ भारत में रहने के बजाय संयुक्त राज्य अमेरिका लौटने की अनुमति मिल गई है।यह मामला अमेरिकी नागरिक श्रीनिवास रामिनेनी से जुड़ा है, जिन्होंने अपने नाबालिग बेटे गौतम की कस्टडी के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। माता-पिता के बीच वैवाहिक कलह के बीच बच्चे को उसकी मां मार्च 2023 में भारत ले आई थी।जस्टिस यू दुर्गा...

मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की मौत की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।एक्टिंग चीफ जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस मोहम्मद शफीक की खंडपीठ ने एडवोकेट रामकुमार आदित्यन द्वारा दायर याचिका पर अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने प्रतिवादी अधिकारियों से याचिका पर गौर करने और अदालत में वापस आने को कहा।अपनी याचिका में आदित्यन ने कहा कि जयललिता की मौत की सच्चाई का पता लगाने के लिए उनकी मृत्यु के 8 साल बाद भी उन्हें याचिका दायर...

आर्य समाज/रजिस्ट्रार के प्रमाण-पत्र से हिंदू विवाह सिद्ध नहीं होता, सप्तपदी या अन्य संस्कार जरूर दर्शाए जाने चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
आर्य समाज/रजिस्ट्रार के प्रमाण-पत्र से हिंदू विवाह सिद्ध नहीं होता, सप्तपदी या अन्य संस्कार जरूर दर्शाए जाने चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि आर्य समाज मंदिर या हिंदू विवाह रजिस्ट्रार द्वारा जारी विवाह प्रमाण-पत्र अपने आप में पक्षों के बीच विवाह को सिद्ध नहीं करता। यह माना गया कि विवाह के तथ्य का दावा करने वाले को यह दर्शाने वाले साक्ष्य/गवाह प्रस्तुत करने चाहिए कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत हिंदू विवाह की सप्तपदी और अन्य संस्कार और रीति-रिवाज किए गए थे।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा,“ऋग्वेद' के अनुसार हिंदू विवाह में सप्तपदी करने पर, सातवां चरण (सप्तपदी) पूरा...

राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से व्यापक जनहित पर अधिक जोर देने की आवश्यकता नहीं, स्थानीय लोगों के हितों पर भी विचार किया जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से व्यापक जनहित पर अधिक जोर देने की आवश्यकता नहीं, स्थानीय लोगों के हितों पर भी विचार किया जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि व्यापक जनहित के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के महत्व पर अधिक जोर नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि आम हित को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने के लिए किसी विशेष इलाके के लोगों के हितों पर विचार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मलप्पुरम जिले के निवासियों ने छह लेन राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 66 (NH66) की एक विशिष्ट श्रृंखला पर एक वाहन अंडरपास के निर्माण के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, ताकि इलाके के निवासियों की सड़क के दूसरी ओर तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।जस्टिस एके...

Right To Relief Lost: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 1978 से भूमि अधिग्रहण कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को 44 साल बाद खारिज किया
Right To Relief Lost: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 1978 से भूमि अधिग्रहण कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को 44 साल बाद खारिज किया

यह देखते हुए कि "कानूनी कार्रवाई जारी रखने के लिए 44 साल का समय बहुत लंबा है। इतने लंबे समय के बीत जाने के बाद राहत पाने का अधिकार खत्म (Right To Relief Lost) हो जाता है," कर्नाटक हाईकोर्ट ने वर्ष 1978 में शुरू की गई और पूरी की गई भूमि अधिग्रहण कार्यवाही पर सवाल उठाने वाले अपीलकर्ता द्वारा दायर की गई अपील खारिज की।चीफ जस्टिस एन वी अंजारिया और जस्टिस के वी अरविंद की खंडपीठ ने विनोद कुमार के द्वारा दायर की गई अपील खारिज कर दी। अपीलकर्ता ने विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा शुरू की गई कार्यवाही से...

हिंदू देवता उस जमीन को जागीर के रूप में नहीं रख सकते, जिस पर काश्तकार द्वारा या उसके माध्यम से खेती की गई हो: राजस्थान हाईकोर्ट
हिंदू देवता उस जमीन को 'जागीर' के रूप में नहीं रख सकते, जिस पर काश्तकार द्वारा या उसके माध्यम से खेती की गई हो: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने पुष्टि की है कि राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्ग्रहण अधिनियम, 1952 के अनुसार, हिंदू मूर्तियां (देवता) केवल तभी जागीर के रूप में भूमि रख सकती हैं, जब ऐसी भूमि पर शेबैत/पुजारी द्वारा स्वयं या उनके द्वारा रखे गए भाड़े के मजदूर या नौकर के माध्यम से खेती की जाती है, ताकि अधिनियम के तहत पुनर्ग्रहण/अधिग्रहण से उसे बचाया जा सके। कोर्ट ने कहा,यदि भूमि काश्तकार को खेती के लिए दी गई थी या काश्तकार के माध्यम से खेती की गई थी, तो यह काश्तकार की खातेदारी बन जाती है, जिस पर काश्तकार...

शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन रिलेशनशिप में रहना पुलिस कर्मियों के लिए अनुचित: झारखंड हाईकोर्ट ने कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखा
शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन रिलेशनशिप में रहना पुलिस कर्मियों के लिए 'अनुचित': झारखंड हाईकोर्ट ने कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखा

झारखंड हाईकोर्ट ने एक पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी को सही ठहराया है, जो शादीशुदा होने के बावजूद दूसरी महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में था। न्यायालय ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी के लिए ऐसा व्यवहार अनुचित है और यह उसकी सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले नियमों का उल्लंघन करता है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एसएन पाठक ने फैसला सुनाया, "यह एक पुलिस कर्मी के लिए अनुचित है जो अपनी पत्नी के अलावा किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में था और यह उन नियमों का उल्लंघन है, जिनके तहत याचिकाकर्ता की...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने छुट्टियों और आधिकारिक काम के कारण निवारक निरोध के खिलाफ़ प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने में देरी के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने छुट्टियों और आधिकारिक काम के कारण निवारक निरोध के खिलाफ़ प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने में देरी के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने निवारक निरोध आदेश के तहत हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति को तत्काल रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि नागरिक के मौलिक अधिकारों को कम करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्परता के साथ काम करना चाहिए। जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने साधु पवार नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर विचार करते हुए कहा कि उन्होंने 25 जनवरी, 2024 को निवारक निरोध के खिलाफ अपना अभ्यावेदन भेजा था और अधिकारियों ने एक महीने से अधिक समय बाद यानी 26 फरवरी, 2024 को इस पर फैसला...

हाईकोर्ट पत्नी को भरण-पोषण मांगने के लिए उचित मंच चुनने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
हाईकोर्ट पत्नी को भरण-पोषण मांगने के लिए उचित मंच चुनने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब पति ने तलाक की कार्यवाही शुरू कर दी है, तो यह पत्नी का अधिकार है कि वह घरेलू हिंसा की कार्यवाही के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट या फैमिली कोर्ट में गुजारा भत्ता और राहत मांगे, जबकि पति ने पहले ही तलाक की कार्यवाही शुरू कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट को पति द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही को फैमिली कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए दायर आवेदनों पर विचार नहीं करना चाहिए।सिंगल जज जस्टिस अरुण पेडनेकर ने एक पति द्वारा दायर विविध आवेदन को...

अवैध, मनमाना और असंवैधानिक: राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना जांच के सेवा से बर्खास्त कांस्टेबल को राहत दी
अवैध, मनमाना और असंवैधानिक: राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना जांच के सेवा से बर्खास्त कांस्टेबल को राहत दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 की धारा 19 (ii) के तहत पुलिस अधीक्षक द्वारा पारित आदेश को पूरी तरह से अवैध, मनमाना और असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया है। नियमों के नियम 19 (ii) में प्रावधान है कि जहां अनुशासनात्मक प्राधिकारी को लगता है कि नियमों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना उचित रूप से व्यावहारिक नहीं है, तो वह जांच करने की आवश्यकता को समाप्त करते हुए ऐसे आदेश पारित कर सकता है, जो उसे उचित लगे।जस्टिस गणेश राम मीना की पीठ एक कांस्टेबल...

S. 233 CrPC | अभियुक्त को साक्ष्य प्रस्तुत करने के अधिकार से वंचित करना निष्पक्ष सुनवाई से वंचित करने के समान: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
S. 233 CrPC | अभियुक्त को साक्ष्य प्रस्तुत करने के अधिकार से वंचित करना निष्पक्ष सुनवाई से वंचित करने के समान: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अभियुक्त को साक्ष्य प्रस्तुत करने के अधिकार से वंचित करना निष्पक्ष सुनवाई से वंचित करने के समान है। इस आदेश ने फास्ट ट्रैक कोर्ट पोक्सो, श्रीनगर के पहले के फैसले को पलट दिया, जिसमें बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने के अभियुक्त के आवेदन को खारिज कर दिया गया था।अपने फैसले में जस्टिस जावेद इकबाल वानी ने सीआरपीसी की धारा 233 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि यदि किसी अभियुक्त को धारा 232 के तहत बरी नहीं किया जाता है तो उसे अपना बचाव प्रस्तुत करने और साक्ष्य...

केवल एक म्यूजिक कंपनी के लिए गाने का एग्रीमेंट करना अनुचित: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शहनाज गिल को राहत दी
केवल एक म्यूजिक कंपनी के लिए गाने का एग्रीमेंट करना अनुचित: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शहनाज गिल को राहत दी

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि गायिका शहनाज़ गिल को केवल एक संगीत कंपनी के लिए गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है, जिसके साथ उन्होंने 2019 में अनुबंध किया था।हाईकोर्ट ने कहा कि ये शर्तें "अनुचित" हैं और उनमें समान सौदेबाजी की शक्ति का अभाव है। गिल ने टीवी शो बिग बॉस में प्रवेश करने से पहले 2019 में सिमरन म्यूज़िक कंपनी के साथ "जल्दबाजी में" अनुबंध किया था और शर्तों के अनुसार उन्हें किसी अन्य कंपनी के लिए गाने...

अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करके नियुक्त कर्मचारियों को सुनवाई के बिना हटाया जा सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करके नियुक्त कर्मचारियों को सुनवाई के बिना हटाया जा सकता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करके नियुक्त कर्मचारियों को सुनवाई का अवसर दिए बिना हटाया जा सकता है।विभिन्न नगर समितियों द्वारा नियुक्त कर्मचारियों को बिना किसी विज्ञापन नोटिस जारी किए हटाने के मामले को बरकरार रखते हुए जस्टिस जावेद इकबाल वानी ने कहा,“यदि प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किया होता या उन्हें हटाने से पहले सुनवाई का अवसर दिया होता, तो उपरोक्त स्वीकृत तथ्यों के आधार पर ऐसा नोटिस जारी करने या याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए विलंबित याचिका महत्वपूर्ण देरी का हवाला देते हुए खारिज की
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए विलंबित याचिका महत्वपूर्ण देरी का हवाला देते हुए खारिज की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग करने वाली याचिका खारिज करते हुए हाल ही में दोहराया कि परिवार के सदस्य की मृत्यु के इतने लंबे समय बाद अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं किया जा सकता।यह निर्णय उस मामले में पारित किया गया, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी, जो लोक निर्माण विभाग, उत्तराखंड में कार्यभार संभाल रहे थे, जिनका 13 दिसंबर 2000 को निधन हो गया।अनुकंपा नियुक्ति देने के पीछे कल्याणकारी राज्य की मंशा पर जोर देते हुए जस्टिस मनोज कुमार...

आरोपी को एफआईआर दर्ज होने से पहले सुनवाई का अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
आरोपी को एफआईआर दर्ज होने से पहले सुनवाई का अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि कोई आरोपी एफआईआर दर्ज होने से पहले सुनवाई के अधिकार का दावा नहीं कर सकता। इसलिए इस आधार पर एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती कि अपराध दर्ज होने से पहले आरोपी की सुनवाई नहीं की गई।जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की पीठ ने अभिषेक पांडे नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उक्त याचिका में स्कूल में जबरन घुसने और स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोपों पर उसके खिलाफ दर्ज दो एफआईआर को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता आरोपी ने तर्क दिया कि पुलिस को अपराध...

पटना हाईकोर्ट ने गलत प्रारंभिक प्रश्नों के कारण जिला जज भर्ती मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की याचिका खारिज की
पटना हाईकोर्ट ने गलत प्रारंभिक प्रश्नों के कारण जिला जज भर्ती मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की याचिका खारिज की

पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार (12 जुलाई) को बिहार जिला जज (एडमिशन स्तर) भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को राहत देने से इनकार किया, जिसमें अभ्यर्थियों ने गलत प्रश्नों के कारण मुख्य परीक्षा के लिए उनकी उम्मीदवारी पर विचार करने के लिए चयन प्राधिकारी को निर्देश देने में न्यायालय की सहभागिता मांगी थी।अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में आए गलत प्रश्नों के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके कारण वे मुख्य परीक्षा के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर...

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी केवल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने से संबंधित है, भौतिक दस्तावेजों से नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी केवल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने से संबंधित है, भौतिक दस्तावेजों से नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया

झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 65-बी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत करने पर लागू होती है, भौतिक दस्तावेजों पर नहीं।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा,"भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 मुख्य रूप से उसमें उल्लिखित शर्तों की उपलब्धता के आधार पर दस्तावेज़ को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में मानने के उद्देश्य से है। अधिनियम की धारा 65-बी इलेक्ट्रॉनिक सामान को साक्ष्य के रूप में मानने के उद्देश्य से है। धारा 65-बी के प्रावधानों में से एक विशेष रूप से धारा 65-बी(4) के...