हाईकोर्ट
परिसीमा अवधि को बिना यह दर्ज किए प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय नहीं किया जा सकता कि यह कानून और तथ्य का मिश्रित प्रश्न है या नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एम.एस. कार्णिक की बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने माना कि मध्यस्थ को परिसीमा अवधि के मुद्दे को बिना यह दर्ज किए प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करने की अनुमति नहीं है कि क्या यह कानून और तथ्य का मिश्रित प्रश्न है, जिसके लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।इसने आगे कहा कि यदि ऐसा निष्कर्ष दर्ज नहीं किया जाता और फिर भी मुद्दे को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय किया जाता है तो भारतीय कानून की मौलिक नीति के उल्लंघन के आधार पर मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (Arbitration...
अभियुक्त को इस आधार पर निरोधात्मक हिरासत में नहीं रखा जा सकता कि उसे जमानत पर रिहा करने से जनता का विश्वास प्रभावित होता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस तथ्य के आधार पर कि किसी व्यक्ति को न्यायालय से जमानत मिल गई, निरोधात्मक हिरासत लगाने का आधार नहीं हो सकता कि उसे जमानत पर रिहा करने से जनता के विश्वास पर प्रभाव पड़ेगा।प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि चूंकि उक्त मामले में निरोधक हिरासत में लिया गया व्यक्ति जमानत पाने में “सफल” रहा, इसलिए सामान्य कानून अपर्याप्त साबित हुआ।जस्टिस राजेश सेखरी की पीठ ने कहा कि किसी अपराध में शामिल अभियुक्त को सक्षम न्यायालय से जमानत पर रिहा करने का अधिकार है। यदि वह जमानत के लिए...
समान नागरिक संहिता की आवश्यकता : कर्नाटक हाईकोर्ट ने संघ और राज्य सरकार से UCC बनाने का आग्रह किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने संसद और राज्य विधानसभाओं से अनुरोध किया कि वे समान नागरिक संहिता (UCC) पर कानून बनाने के लिए हर संभव प्रयास करें ताकि भारत के संविधान की प्रस्तावना में निहित सिद्धांतों के उद्देश्य को सही मायने में प्राप्त किया जा सके।एकल जज जस्टिस हंचेट संजीव कुमार ने कहा,"भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता पर कानून बनाने से भारत के संविधान की प्रस्तावना में निहित उद्देश्य और आकांक्षाएं पूरी होंगी, जिससे एक सच्चा धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य, राष्ट्र की एकता,...
यातायात में वृद्धि के दावों पर कॉलोनी में क्लिनिक को शामिल करने वाली लेआउट योजना रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार, कहा- 'शीघ्र मेडिकल सर्विस मौलिक अधिकार'
पंजाब एंड हरियाणा हाीकोर्ट ने एक सेक्टर की लेआउट योजना रद्द करने से इनकार किया, जिसमें आसपास के क्षेत्र में एक डॉक्टर का क्लिनिक शामिल है, यह देखते हुए कि शीघ्र मेडिकल सेवाएं प्राप्त करना एक मौलिक अधिकार है।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने कहा,"जब क्लिनिक स्थलों पर प्रदान की जाने वाली परामर्श सेवाओं का लाभ बुजुर्ग लोगों, सीनियर सिटीजन या दिव्यांग लोगों द्वारा उठाया जा सकता है, खासकर जब वे अनुपस्थित हों तो उन्हें ओपीडी परामर्श प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती...
अधिकारी पिछले वर्षों के खाली पदों के आधार पर सीनियरिटी का दावा नहीं कर सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया कि प्रशासनिक अधिकारी पिछली वर्षों की खाली पड़ी पदों के आधार पर वरिष्ठता (Seniority) का दावा नहीं कर सकते। सेवा में पदोन्नति की वास्तविक तिथि ही पदक्रम (Hierarchy) निर्धारित करने का एकमात्र मान्य आधार है।जस्टिस रजनेश ओसवाल और जस्टिस संजय धर की खंडपीठ ने 1992 और 1999 बैच के जम्मू और कश्मीर प्रशासनिक सेवा (JKAS) अधिकारियों से जुड़ी वरिष्ठता संबंधी याचिकाओं को खारिज करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के फैसले को...
कर्मचारी को गलत तरीके से दिए गए SRO लाभ की वसूली वेतन से राशि निकालकर नहीं की जा सकती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि विभाग द्वारा स्व-नियामक संगठन (SRO) योजना के तहत कर्मचारी को बिना किसी धोखाधड़ी या गलत बयानी के गलत तरीके से लाभ दिया जाता है तो विभाग को किसी भी समय कर्मचारी या पेंशनभोगी के वेतन से इसे वसूलने की स्वतंत्रता नहीं है।प्रतिवादी की रिटायरमेंट के बाद सेवा पुस्तिका देखने पर अपीलकर्ता विभाग को पता चला कि उसे SRO 149/1973 के तहत गलत तरीके से लाभ दिया गया, जिसे निरस्त कर दिया गया और विभाग ने उसके वेतन से इसे वसूलना शुरू कर दिया।चीफ जस्टिस ताशी राबस्तान, जस्टिस एमए...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कस्टम द्वारा आयातित कीवी फल की अवैध जब्ती पर ₹50 लाख का मुआवजा दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारत में आयात किए जा रहे कीवी फल की बड़ी मात्रा की खेप को गलत तरीके से और अवैध रूप से रोके रखने के लिए कस्टम विभाग की आलोचना की और 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया।न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को नीति बनाने का सुझाव भी दिया, जिससे जांच लैब, शिपिंग कंपनियां और कस्टम अधिकारी "मिलकर काम करें और ऐसा माहौल बनाया जाए, जिससे आयातित माल जल्द से जल्द जनता तक पहुंचे।"89,420 किलोग्राम कीवी की खेप को रिलीज में देरी और कस्टम विभाग के "ढीले रवैये" के कारण नष्ट कर दिया गया।जस्टिस...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसकी ज़मीन 1962 से हरियाणा सरकार ने मनमाने ढंग से अधिग्रहण के लिए लक्षित किया था
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसकी भूमि को हरियाणा सरकार ने 1962 से "मनमाने और भेदभावपूर्ण" तरीके से अधिग्रहण के लिए लक्षित किया था। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी ने कहा, "प्रमुख डोमेन की शक्ति का दुरुपयोग हो रहा है, साथ ही दुर्भावना से काम लिया जा रहा है, और भेदभाव और मनमानी के दोषों से भी संक्रमित हो रहा है.."न्यायालय ने कहा कि सरकार ने 1962 से याचिकाकर्ता की भूमि अधिग्रहण करने के लिए लगातार लेकिन असफल प्रयास किए हैं,...
'काला जादू अधिनियम वैध धार्मिक प्रथाओं को बाहर करता है': बॉम्बे हाईकोर्ट ने काले जादू का प्रचार करने के आरोपी स्वामी को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
महाराष्ट्र काला जादू अधिनियम के तहत एक आरोपी को बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य मानव बलि या धोखाधड़ी वाले अनुष्ठानों जैसी हानिकारक प्रथाओं पर अंकुश लगाना है, न कि वैध धार्मिक प्रथाओं पर। जस्टिस आर.एन. लड्ढा ने कहा, "काला जादू अधिनियम हानिकारक प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए बनाया गया था, जो व्यक्तियों और समाज के लिए गंभीर जोखिम पैदा करते हैं, जिसमें मानव बलि, धोखाधड़ी वाले अनुष्ठान और मनोवैज्ञानिक शोषण शामिल हैं; और यह स्पष्ट रूप से वैध धार्मिक...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चीन से MBBS पूरा करने वाले स्टूडेंट की इंटर्नशिप अवधि तीन साल तक बढ़ाने के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल स्टूडेंट की याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया, जिसने चीनी यूनिवर्सिटी से MBBS की पढ़ाई पूरी की है।स्टूडेंट ने एमपी मेडिकल काउंसिल द्वारा MBBS स्टूडेंट के लिए इंटर्नशिप की अवधि दो साल से बढ़ाकर तीन साल करने के आदेश को चुनौती दी है।जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने अपने आदेश में राज्य निदेशक चिकित्सा शिक्षा, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और एमपी मेडिकल काउंसिल को नोटिस जारी किया और याचिका को एक अन्य याचिका के साथ 24 अप्रैल को सूचीबद्ध किया।याचिका...
मस्जिद में नमाज़ न पढ़ने देने की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से मांगा जवाब
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्रालय से सवाल किया कि जब जबलपुर की रिड्ज़ रोड स्थित मस्जिद नूर में आम मुस्लिम नागरिकों को नमाज़ पढ़ने से रोका जा रहा है तो ऐसा क्यों हो रहा है, जबकि मंदिर और चर्च में आम जनता को पूजा-पाठ की अनुमति है?चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने कहा,“उत्तरदाता यह स्पष्ट करें कि क्या आम नागरिकों को मंदिर और चर्च में पूजा करने की अनुमति है और यदि हाँ, तो फिर मुस्लिम समुदाय के नागरिकों को मस्जिद नूर में नमाज़ पढ़ने से...
दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चों की संरक्षकता और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए आवेदनों पर विचार करने के निर्देश जारी किए
दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चों की सम्पत्तियों के संरक्षण और संरक्षकता के लिए आवेदनों पर विचार करने के लिए न्यायालयों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देश जारी किए।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि परिस्थितियों के शिकार असहाय बच्चों के मामले को न्यायालयों द्वारा करुणा के साथ निपटाया जाना चाहिए और सहानुभूतिपूर्ण रवैया और दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।न्यायालय ने कहा,"न्यायालय नाबालिगों की सम्पत्तियों के संरक्षण के लिए उत्साही संरक्षक हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए कि सम्पत्तियों...
अमान्य विवाह से पैदा हुए बच्चे हिंदू पिता की पैतृक और स्व-अर्जित संपत्ति के उत्तराधिकारी: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना कि दूसरे/ अमान्य विवाह से पैदा हुए बच्चे न केवल स्व-अर्जित बल्कि अपने पिता की पैतृक संपत्ति के भी उत्तराधिकारी हैं, क्योंकि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA) की धारा 16 अमान्य विवाह से पैदा हुए बच्चों को वैधता प्रदान करती है और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (HSA) वैध बच्चों को वर्ग-I वारिस के रूप में माता-पिता की स्व अर्जित संपत्ति के उत्तराधिकारी होने का अधिकार देता है।अवैध/अमान्य विवाह से पैदा हुए बच्चों के उत्तराधिकार के अधिकार के बारे में कानून की स्थिति को स्पष्ट...
कलकत्ता हाईकोर्ट राम नवमी पर 'शोभा यात्रा' निकालने की अनुमति दी, 500 लोगों की उपस्थिति की सीमा तय की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'अंजनी पुत्र सेना' की याचिका स्वीकार की, जिसमें कोलकाता में राम नवमी के अवसर पर 'शोभा यात्रा उत्सव' निकालने की मांग की गई थी।जस्टिस तीर्थंकर घोष ने आयोजकों पर कई शर्तें लगाने के बाद याचिका स्वीकार की, जिसमें रैली में 500 लोगों की उपस्थिति की सीमा तय करना और रैली के समय को सीमित करना शामिल है।याचिकाकर्ता 'अंजनी पुत्र सेना' भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत एक ट्रस्ट है, जिसका उद्देश्य 'श्री राम नवमी शोभा यात्रा उत्सव' नामक रैली आयोजित करना है।उन्होंने पुलिस अधिकारियों से...
माता-पिता की कस्टडी लड़ाई में बच्चा अक्सर अनजाने में शिकार बनता है, कोर्ट को दोनों पक्षों के दावों का मूल्यांकन सावधानी से करना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पिता की उस याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने अपने बच्चे की कस्टडी मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि पहले फैमिली कोर्ट में दोनों पक्षों की सहमति से बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी गई।मुख्य बिंदुजस्टिस संजीव जे ठाकोर ने कहा कि बच्चों को उनके माता-पिता के प्रेम, देखभाल और सुरक्षा का अधिकार है। कोर्ट को हमेशा बच्चे के हित को सर्वोपरि मानते हुए फैसला करना चाहिए।कोर्ट ने वॉशिंगटन के पूर्व सहायक सचिव वेड हॉर्न के कथन का उल्लेख किया,"बच्चों को उन फैसलों का शिकार नहीं बनना चाहिए, जो...
आरोपी की दोष या बेगुनाही साबित करने वाले सबूत देरी के कारण नहीं ठुकराए जा सकते: दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतिम दलीलों में DNA टेस्ट की मंजूरी दी
एक दशक पुराने हत्या के मामले में अंतिम बहस के चरण में DNA टेस्ट के लिए आवेदन को स्वीकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि न्याय के हित में देरी के आधार पर स्वतंत्र साक्ष्य अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, विशेष रूप से हत्या जैसे गंभीर अपराधों में।यह देखा गया कि यदि साक्ष्य आरोपी के दोष या निर्दोषता को निर्धारित करने में मदद कर सकते हैं तो ऐसे आवेदन को अनुमति दी जानी चाहिए।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने नोट किया,“वर्तमान मामले में मुकदमा समाप्त हो सकता है और मामला अंतिम बहस के चरण में हो सकता...
विकिपीडिया अपने प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित सामग्री के लिए ज़िम्मेदार, केवल इंटरमीडियरी होने का दावा नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि विकिपीडिया केवल यह कहकर कि वह इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) है, अपने प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित सामग्री से पल्ला नहीं झाड़ सकता और उस पर प्रकाशित बयानों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा,“प्रतिवादी संख्या 1 (विकिपीडिया) स्वयं को एक विश्वकोश के रूप में प्रस्तुत करता है और आम लोग इसके वेबपेजों पर दिए गए बयानों को सच्चाई मान लेते हैं। ऐसे में प्रतिवादी संख्या 1 की जिम्मेदारी और अधिक हो जाती है।”कोर्ट ने आगे कहा,“यह न्यायालय मानता है कि...
झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली विभाग को त्योहारों के दौरान बिजली न काटने को कहा, जुलूस में शामिल होने वालों को ओवरहेड टेंशन लाइनों से बचाने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया
स्वतः संज्ञान लेते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (संक्षेप में JBVNL) को त्योहारों के मौसम में पड़ोस की बिजली आपूर्ति न काटने का निर्देश दिया।सीजे एम.एस. रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने 1 अप्रैल को रांची में सरहुल उत्सव के दौरान बिजली कटौती की शिकायत करने वाली याचिका पर ये निर्देश पारित किए।इस बात पर कोई विवाद नहीं हो सकता कि आज की दुनिया में बिजली आपूर्ति एक आवश्यक सेवा है। गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है ऐसे में JBVNL द्वारा बिजली आपूर्ति बंद करने से शहर के...
केवल इसलिए कि माता या पिता में से कोई एक जनजातीय नहीं है, बच्चे को अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र से वंचित नहीं किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट की पोर्ट ब्लेयर सर्किट बेंच ने एक NEET उम्मीदवार की मदद की, जिसे आगामी प्रवेश परीक्षा के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया, जबकि अधिकारियों द्वारा उसे ST प्रमाण पत्र के लिए पात्र माना गया।जस्टिस अनिरुद्ध रॉय ने कहा,"इस विषय पर कानून यह निर्धारित करता है कि किसी व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति माना जा सकता है या नहीं, यह तय करने के लिए कई तथ्यों पर विचार करना आवश्यक है। केवल इस आधार पर कि माता या पिता में से कोई एक गैर-जनजातीय है, किसी को ST प्रमाण पत्र से वंचित...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल पर अत्यधिक पेशेवर फीस लेने के आरोप वाली याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में याचिका खारिज की, जिसमें यह आरोप लगाया गया कि राज्य के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने कुछ मामलों में पेश होने के लिए अत्यधिक पेशेवर फीस ली और उन्हें भुगतान किया गया, जिनमें एक ऐसा मामला भी शामिल था, जिसमें एडवोकेट जनरल ने राज्य नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ओर से पेशी दी।इस याचिका में यह दावा किया गया कि यह भुगतान सरकार के उस निर्देश के बावजूद किया गया जिसमें कहा गया कि सरकारी विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले लॉ अधिकारियों को अलग से कोई फीस देने की आवश्यकता नहीं...



















