कार्ति चिदंबरम ने CBI की भ्रष्टाचार संबंधी ताजा FIR रद्द करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

Amir Ahmad

28 Jan 2025 4:30 PM IST

  • कार्ति चिदंबरम ने CBI की भ्रष्टाचार संबंधी ताजा FIR रद्द करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

    कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किए गए भ्रष्टाचार के ताजा मामला रद्द करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में उन पर शराब बनाने वाली कंपनी डियाजियो स्कॉटलैंड को व्हिस्की की ड्यूटी-फ्री बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के मामले में कथित तौर पर राहत देने का आरोप है।

    चिदंबरम ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120बी के साथ 420 और 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 8, 9 और 13(2) के साथ 13(1)(डी) के तहत दर्ज FIR रद्द करने की मांग की।

    यह याचिका एडवोकेट अक्षत गुप्ता के माध्यम से दायर की गई।

    चिदंबरम ने कहा कि 2018 में दर्ज की गई प्रारंभिक जांच के बाद पिछले साल दिसंबर में CBI इंस्पेक्टर द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि उन्हें CBI द्वारा प्रारंभिक जांच में शामिल होने के लिए कभी नहीं बुलाया गया। उनके खिलाफ आरोपों के संबंध में अपना रुख स्पष्ट करने का कोई अवसर नहीं दिया गया।

    याचिका में कहा गया,

    "7 साल की लंबी प्रारंभिक जांच के बावजूद, किसी भी लोक सेवक की पहचान नहीं की गई और न ही आरोपित FIR में उसका नाम है, जिस पर याचिकाकर्ता पर पीसी अधिनियम, 1988 की धारा 8 के तहत उल्लिखित भ्रष्ट या अवैध तरीकों से या पीसी अधिनियम की धारा 9 के तहत निर्दिष्ट व्यक्तिगत प्रभाव के माध्यम से प्रभावित करने का आरोप है।"

    इसमें कहा गया की FIR दर्ज करने में बहुत देरी हुई है, क्योंकि आरोप वर्ष 2004-2010 के बीच की अवधि से संबंधित हैं, जबकि FIR 2025 में यानी 20 साल बाद दर्ज की गई। चिदंबरम ने दलील दी कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उन्होंने किसी व्यक्ति से रिश्वत या अवैध लाभ की मांग की या स्वीकार किया। इसलिए पीसी अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता।

    याचिका में कहा गया,

    "जहां तक ​​याचिकाकर्ता का सवाल है, पीसी अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(डी) लागू नहीं होती, क्योंकि उक्त अपराध केवल लोक सेवक द्वारा ही किया जा सकता है, जबकि याचिकाकर्ता कथित अपराध के समय लोक सेवक नहीं था।"

    इस महीने की शुरुआत में ट्रायल कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि 12 जनवरी को देश लौटने पर मामले की जांच में शामिल होने के बाद अगर चिदंबरम की गिरफ्तारी की जरूरत पड़ती है तो उन्हें तीन दिन पहले लिखित नोटिस दिया जाए।

    ट्रायल कोर्ट ने विदेश यात्रा पर गए चिदंबरम को निर्देश दिया कि वे भारत लौटने पर जांच में शामिल हों और कानून के अनुसार जब भी जरूरत हो, इस प्रक्रिया में सहयोग करें।

    FIR में आरोप लगाया गया कि डियाजियो स्कॉटलैंड और सिकोइया कैपिटल्स ने एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को संदिग्ध तरीके से फंड ट्रांसफर किया, जो कार्ति पी चिदंबरम और उनके करीबी सहयोगी एस भास्कररमन द्वारा नियंत्रित एक इकाई है।

    FIR के अनुसार भारत पर्यटन विकास निगम, जिसका भारत में आयातित शुल्क मुक्त शराब की बिक्री पर एकाधिकार था, ने भारत में डियाजियो समूह के शुल्क मुक्त उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। FIR में आरोप लगाया गया कि प्रतिबंध हटाने के लिए डियाजियो स्कॉटलैंड ने कार्ति पी चिदंबरम से संपर्क किया और डियाजियो स्कॉटलैंड के साथ फर्जी अनुबंध करने के बाद परामर्श शुल्क की आड़ में उनकी कंपनी द्वारा 15,000 अमेरिकी डॉलर प्राप्त किए गए।

    FIR के अनुसार यह राशि कार्ति पी चिदंबरम को ड्यूटी-फ्री शराब की बिक्री के लिए डियाजियो स्कॉटलैंड पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने के लिए लोक सेवकों को प्रभावित करने के लिए दी गई, न कि किसी परामर्श कार्य के लिए।

    केस टाइटल: कार्ति पी. चिदंबरम बनाम CBI

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