पक्षों के सबमिशन पर कोई अनावश्यक रिपोर्टिंग नहीं: Open AI के खिलाफ ANI के कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे में दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
28 Jan 2025 10:55 AM

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को संकेत दिया कि समाचार एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI) द्वारा Open AI इंक के खिलाफ दायर कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे में शामिल पक्षों द्वारा दायर सबमिशन पर मीडिया द्वारा कोई "अनावश्यक रिपोर्टिंग" नहीं की जाएगी, जिसने चैटजीपीटी की स्थापना की।
ANI ने Open AI पर अपने मूल समाचार सामग्री का अनधिकृत रूप से उपयोग करने का आरोप लगाया।
Open AI की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अमित सिब्बल द्वारा फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स द्वारा दायर हस्तक्षेप आवेदन और Open AI के उसी पर जवाब के आधार पर विभिन्न समाचार रिपोर्टों की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित करने के बाद यह घटनाक्रम हुआ।
स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जस्टिस अमित बंसल ने मौखिक रूप से कहा,
"मैं यही संकेत दे रहा हूं। कम से कम पक्षों के सबमिशन पर कोई अनावश्यक रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए।"
सुनवाई के दौरान न्यायालय को सूचित किया गया कि डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) और फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स द्वारा मुकदमे में दो हस्तक्षेप आवेदन दायर किए गए। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स द्वारा दायर हस्तक्षेप आवेदन का कड़ा विरोध करते हुए सिब्बल ने कहा कि Open AI ने उक्त आवेदन का विरोध करते हुए जवाब दाखिल किया।
उन्होंने कहा कि फेडरेशन ने हस्तक्षेप आवेदन दाखिल करने को अधिकृत करने वाला कोई संकल्प दाखिल नहीं किया। सिब्बल ने फिर विभिन्न समाचार रिपोर्टों का हवाला दिया। कहा कि Open AI का जवाब और हस्तक्षेप आवेदन दाखिल करने की सूचना पहले ही प्रेस को जारी कर दी गई।
सिब्बल Open AI को भारत में वैश्विक पुस्तक प्रकाशकों से नए कॉपीराइट मामले का सामना करना पड़ रहा है। Open AI ने भारतीय न्यायालय से कॉपीराइट लड़ाई में पुस्तक प्रकाशकों की चुनौती खारिज करने के लिए कहा टाइटल वाले समाचार लेखों का जिक्र कर रहे थे। सिब्बल ने कहा कि हमने हस्तक्षेप का जवाब दाखिल किया जवाब मीडिया को जारी किया गया।
इस पर जस्टिस बंसल ने फेडरेशन के वकील से कहा,
“आपने यह सब प्रेस में क्यों डाला? यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”
सिब्बल ने कहा कि फेडरेशन के पास न तो विषय वस्तु पर कोई कॉपीराइट होने का कोई दावा है, न ही उसके पास हस्तक्षेप आवेदन दायर करने के लिए अपने सदस्यों से उचित प्राधिकरण है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन को कॉपीराइट सामग्री के किसी भी स्वामी द्वारा अधिकृत नहीं किया गया।
इस पर ANI की ओर से पेश हुए एडवोकेट सिद्धांत कुमार ने कहा कि जहां तक कॉपीराइट धारकों का सवाल है, न्यायालय के लिए इस मुद्दे पर विचारों में विविधता महत्वपूर्ण है।
सिब्बल ने मुकदमे के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर भी आपत्ति जताई और कहा कि यहां न्यायालय के पास इस मुद्दे पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि Open AI के उपयोग की शर्तों के अनुसार यदि विवाद प्रतिक्रिया से संबंधित है तो यह या तो अनिवार्य मध्यस्थता में जाता है या उल्लंघन के मामलों में तब विशेष अधिकार क्षेत्र कैलिफोर्निया के न्यायालयों के पास होता है जो कैलिफोर्निया के कानून द्वारा शासित होंगे।
DNPA की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि एसोसिएशन ANI के मामले का समर्थन कर रहा है, लेकिन हस्तक्षेप केवल कानूनी प्रस्तुतियों तक ही सीमित रहेगा।
अदालत ने दो हस्तक्षेप आवेदनों में नोटिस जारी किया और Open AI को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि वह हस्तक्षेप आवेदन की अनुमति देता है तो मुकदमे का दायरा नहीं बढ़ाया जाएगा। हस्तक्षेपकर्ता केवल कानूनी मुद्दों पर प्रस्तुतियाँ देने तक ही सीमित रहेंगे।
इसने आगे कहा कि ANI के अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर सुनवाई करते समय क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर Open AI की आपत्ति पर विचार किया जाएगा।
इस मामले की सुनवाई अब 21 फरवरी, 11 मार्च और 18 मार्च को दोपहर 2:30 बजे होगी। न्यायालय पहले एमिक्स क्यूरी एडवोकेट आदर्श रामानुजन और डॉ. अरुल जॉर्ज स्कारिया (नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में विधि के प्रोफेसर) की सुनवाई करेगा, उसके बाद ANI, Open AI और हस्तक्षेपकर्ताओं की दलीलें सुनेगा।
मुकदमे में सम्मन पिछले साल नवंबर में जारी किए गए।
Open AI अमेरिकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अनुसंधान संगठन है जिसका मुख्यालय कैलिफोर्निया में है। मस्क ने 2015 मे Open AI की सह-स्थापना की और 2018 में कंपनी छोड़ दी। Open AI ने चैटजीपीटी की स्थापना की, जो जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट है। Chat GPT के खिलाफ भारत में यह पहला मुकदमा है।
ANI ने आरोप लगाया कि Open AI द्वारा इसकी मूल समाचार सामग्री का व्यावसायिक लाभ के लिए शोषण किया जा रहा है।
ANI के मुकदमे में आरोप लगाया गया कि Chat GPT वास्तविक समय के आधार पर उपयोगकर्ताओं के प्रश्नों के उत्तर में ANI की मूल सामग्री को हूबहू पुन: प्रस्तुत करता है।
ANI का मामला यह है कि Chat GPT उसे ऐसे बयानों और समाचारों का श्रेय दे रहा है, जो कभी घटित ही नहीं हुए।
यह कहा गया कि ऐसे उदाहरण जिन्हें मतिभ्रम के रूप में जाना जाता है। समाचार एजेंसी की प्रतिष्ठा और फर्जी खबरों के प्रसार के लिए वास्तविक खतरा पैदा करते हैंजिससे सार्वजनिक अव्यवस्था हो सकती है।
केस टाइटल: ANI मीडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम Open AI इंक और अन्य।