हाईकोर्ट
गंभीर बीमारी से जूझ रहे आजीवन कारावास भुगत रहे दोषी को राहत, राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दी जमानत
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे दोषी को बड़ी राहत देते हुए उसकी सजा निलंबित कर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। दोषी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी गिलियन-बारे सिंड्रोम से पीड़ित है। हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था को मानवीय गरिमा से अलग नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में मानवता तथा संवैधानिक मूल्यों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा कि केवल बीमारी के आधार पर सजा निलंबित नहीं की जा सकती, लेकिन जब कोई...
अप्रवासन संबंधी अनिश्चितता के बीच बच्चे को भारत लाने की अनुमति रद्द, पिता अमेरिका में ही मुलाकात का अधिकार इस्तेमाल करें: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में फैमिली कोर्ट के उस फैसले में संशोधन कर दिया जिसमें अमेरिका में रह रहे एक नाबालिग बच्चे को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भारत लाने की अनुमति दी गई थी। हाइकोर्ट ने कहा कि बच्चे के हित और कल्याण को देखते हुए पिता को अमेरिका में ही मुलाकात और अभिरक्षा का अधिकार इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि बच्चे की अप्रवासन स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।जस्टिस तेजस करिया और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने कहा कि यदि बच्चा भारत आता है और बाद में अमेरिका लौटने में आव्रजन...
तबादले से नाराज़ कर्मचारी द्वारा कार्यालय में पुलिस लाना और बाहरी अधिकारियों से शिकायत करना कदाचार: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत स्थानांतरित किया जाता है और वह इसके विरोध में पुलिस के पास शिकायत कर कार्यालय में पुलिसकर्मियों को लेकर आता है, तो यह कदाचार की श्रेणी में आता है। अदालत ने यह भी कहा कि सेवा संबंधी विवादों को लेकर नियोक्ता के खिलाफ विभिन्न बाहरी और असंबंधित प्राधिकरणों के समक्ष गंभीर आरोप लगाना भी कदाचार माना जा सकता है।जस्टिस संदीप मार्ने ने 18 जून को दिए अपने आदेश में अभ्युदय सहकारी बैंक लिमिटेड की...
मॉडल आचार संहिता के दौरान दिल्ली मेट्रो में राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक वैध: हाईकोर्ट ने चुनौती खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव के दौरान लागू मॉडल आचार संहिता के समय दिल्ली मेट्रो की ट्रेनों और स्टेशनों पर राजनीतिक विज्ञापनों पर चुनाव आयोग द्वारा लगाई गई रोक को वैध ठहराया। अदालत ने कहा कि यह प्रतिबंध उचित है, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के बड़े सार्वजनिक हित की पूर्ति करता है तथा विज्ञापन एजेंसियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने इस संबंध में विज्ञापन एजेंसियों की अपील खारिज की। ये एजेंसियां दिल्ली मेट्रो...
बरी होने के बाद जब्ती आदेश नहीं रह सकता प्रभावी, संपत्ति की जब्ती नागरिक अधिकारों पर गंभीर असर डालती है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि जब किसी आरोपी को सक्षम अदालत आपराधिक मामले में बरी कर देती है तो मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 47ए के तहत कलेक्टर द्वारा पारित जब्ती आदेश स्वतंत्र रूप से प्रभावी नहीं रह सकता। अदालत ने कहा कि संपत्ति की जब्ती नागरिक के संवैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों पर गंभीर प्रभाव डालती है, इसलिए आरोप सिद्ध न होने की स्थिति में ऐसे आदेश को जारी रखना कानूनसम्मत नहीं है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने भिंड कलेक्टर द्वारा 22 जनवरी 2025...
भूमि अधिग्रहण मुआवजा तय करने में अदालतें धारा 26 के मानकों से बंधी नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण मामलों में मुआवजा बढ़ाने से संबंधित संदर्भ याचिकाओं पर निर्णय करते समय अदालतें या प्राधिकरण, उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता अधिकार, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 की धारा 26 में निर्धारित बाजार मूल्य के मानकों से बाध्य नहीं हैं।जस्टिस हरकेश मनुजा ने स्पष्ट किया कि धारा 26 में दिए गए मानक केवल कलेक्टर के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। ये अदालतों या प्राधिकरणों की स्वतंत्र न्यायिक शक्ति को सीमित नहीं कर...
खाद्य नमूने की केंद्रीय प्रयोगशाला से जांच के अधिकार की जानकारी न देना अभियोजन को अवैध बनाता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी आरोपी को खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 की धारा 13(2) के तहत उपलब्ध उसके वैधानिक अधिकार की जानकारी नहीं दी जाती, तो पूरा अभियोजन ही प्रभावित हो जाता है। अदालत ने कहा कि आरोपी को यह बताना अनिवार्य है कि वह खाद्य नमूने की जांच केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला से कराने का आवेदन कर सकता है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए दो आरोपियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई...
कॉपीराइट शिकायत पर गीत हटाना वैध, फेसबुक की कार्रवाई बरकरार: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फेसबुक पेज से सामग्री हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि कॉपीराइट धारक की शिकायत मिलने के बाद मंच ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के अनुसार कार्रवाई की थी। इसलिए गीत हटाने में कोई अवैधता नहीं है।जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता को यह जानकारी दे दी गई कि उसके पेज से एक गीत इसलिए हटाया गया, क्योंकि उसे कॉपीराइट स्वामी की अनुमति के बिना अपलोड किया गया।...
हालातों की पूरी कड़ी के बिना सिर्फ़ 'आखिरी बार साथ देखे जाने' के आधार पर सज़ा नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1986 के मर्डर केस में आरोपी को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1986 के मर्डर केस में उम्रकैद की सज़ा पाए एक व्यक्ति (अपील करने वाले अकेले जीवित व्यक्ति) को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि "आखिरी बार साथ देखे जाने" की थ्योरी "बहुत कमज़ोर सबूत" है और सिर्फ़ इसके आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने कहा कि अदालतों को यह पक्का करना चाहिए कि 'हालात से जुड़े सबूत' (circumstantial evidence) और घटनाओं की कड़ी इस तरह पूरी हो कि वे सिर्फ़ आरोपी के दोषी होने की ओर इशारा करें, और आरोपी के...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी वकील की 'कलंकपूर्ण' बर्खास्तगी रद्द की, कहा - सही प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिवपुरी ज़िला अदालत के एडिशनल सरकारी वकील/एडवोकेट की बर्खास्तगी का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि न तो कोई नियमित विभागीय जांच की गई और न ही कोई चार्जशीट जारी की गई; बल्कि सीधे बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया, जो कलंकपूर्ण, अस्पष्ट, बिना कारण बताए और बिना तर्क के था। [2026 LiveLaw (MP) 221]जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कहा:"ऊपर की गई चर्चा से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता को कोई चार्जशीट जारी नहीं की गई और न ही कोई नियमित विभागीय जांच की गई। विवादित आदेश...
CJI के लंदन दौरे पर फर्जी पोस्टों के खिलाफ केंद्र कर सकता है कार्रवाई: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) कई जजों और केंद्रीय मंत्रियों के लंदन में आयोजित कथित बैडमिंटन प्रतियोगिता में भाग लेने संबंधी फर्जी और भ्रामक पोस्टों के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत सामाजिक माध्यम मंचों को आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।जस्टिस तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ भारतीय बैडमिंटन संघ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने...
प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य से अपराध साबित हो जाए तो मकसद का महत्व कम हो जाता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी अपराध की घटना प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की विश्वसनीय गवाही से साबित हो जाती है तो केवल इस आधार पर अभियोजन का मामला खारिज नहीं किया जा सकता कि अपराध का मकसद सिद्ध नहीं हुआ या उसके बारे में कुछ संदेह है।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए वर्ष 2015 में बाराबंकी में एक प्रमुख आश्रम प्रमुख की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए हरेराम चौधरी की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी। अभियोजन के अनुसार, घटना 15 और 16 मई 2015 की...
केंद्र सरकार के पास पूरा प्लेटफॉर्म बंद करने का अधिकार, केवल सामग्री हटाने तक सीमित नहीं धारा 69ए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने मैसेजिंग मंच टेलीग्राम की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69ए के तहत केंद्र सरकार के पास केवल किसी विशेष सामग्री को हटाने ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पूरे मध्यस्थ मंच को अस्थायी रूप से अवरुद्ध करने की भी शक्ति है।जस्टिस तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि अधिनियम में "सूचना" की परिभाषा बहुत व्यापक है, जिसमें कोड, कंप्यूटर प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर भी शामिल हैं। इसलिए किसी अनुप्रयोग या डिजिटल मंच को इस परिभाषा से बाहर नहीं रखा जा...
काला हिरण फिल्म पर रोक की मांग: सलमान खान की याचिका पर 1 जुलाई को सुनवाई, फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर सलमान खान की उस याचिका पर सुनवाई 1 जुलाई तक के लिए स्थगित की, जिसमें उन्होंने अपनी कथित जीवन घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की। फिलहाल अदालत ने कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया।अवकाशकालीन पीठ की जस्टिस मधु जैन ने निर्देश दिया कि याचिका और उससे संबंधित सभी दस्तावेजों की पूर्ण प्रति फिल्म निर्माता पक्ष को उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद मामले को 1 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।सुनवाई के दौरान एक्टर...
बेहतर कब्जे का अधिकार साबित करने वाला व्यक्ति संपत्ति वापस पाने का हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति पर दूसरे पक्ष की तुलना में बेहतर कब्जे का अधिकार (Better Possessory Title) साबित कर देता है, तो वह उस संपत्ति का कब्जा वापस पाने का हकदार होगा, बशर्ते वर्तमान कब्जाधारी अपने कब्जे के लिए कोई वैध या बेहतर अधिकार साबित न कर सके।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने यह टिप्पणी एक संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने लैटिन सिद्धांत “Possessio contra omnes valet praeter eum cui ius sit possessionis” का हवाला देते हुए कहा कि कब्जा पूरी...
53 दिन की अवैध कैद पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: तहसीलदार पर व्यक्तिगत रूप से 2 लाख का जुर्माना, जांच के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने HIV संक्रमित व्यक्ति को रिहाई के आदेश के बावजूद 53 दिनों तक अवैध रूप से जेल में रखने के मामले में राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए संबंधित तहसीलदार पर व्यक्तिगत रूप से 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के भी आदेश दिए।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने इस घटना को शैतानी कृत्य करार देते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि मानवीय पीड़ा के प्रति ऐसी असंवेदनशीलता है जो अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देती है।अदालत ने...
एक बार खारिज होकर अंतिम रूप ले चुकी डिम्ड कन्वेयंस अर्जी दोबारा दाखिल नहीं की जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र ओनरशिप फ्लैट्स अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि डिम्ड कन्वेयंस के लिए दायर की गई पहली अर्जी खारिज हो चुकी हो और उस आदेश को चुनौती न दिए जाने के कारण वह अंतिम रूप ले चुका हो, तो उसी राहत के लिए दूसरी अर्जी दाखिल नहीं की जा सकती।अदालत ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी के पास अपने ही आदेश की समीक्षा या पुनर्विचार करने की कोई अंतर्निहित शक्ति नहीं है। जब तक कानून में ऐसी शक्ति स्पष्ट रूप से प्रदान न की गई हो, तब तक पहले से तय हो चुके मुद्दे को...
BREAKING| दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-UG परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर प्रतिबंध सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को टेलीग्राम की याचिका खारिज की, जिसमें 21 जून को होने वाली NEET-UG दोबारा परीक्षा से पहले पेपर लीक को रोकने के लिए 22 जून तक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी गई थी।आदेश सुनाते हुए जस्टिस तेजस करिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्लेटफॉर्म तक पहुंच को सीमित करने के लिए इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (IT Act) की धारा 69A के तहत अपनाई गई प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त किया। बेंच ने कारण न बताए जाने के आधार पर दी गई चुनौती खारिज की।कोर्ट ने...
ज्यूडिशियल रिमांड के बाद गिरफ्तारी के आधार न बताए जाने पर भी 'हेबियस कॉर्पस' नहीं दिया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार ज्यूडिशियल रिमांड के आदेश जारी होने के बाद गिरफ्तारी को इस आधार पर चुनौती देने के लिए 'हेबियस कॉर्पस' की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए। ऐसा तब भी है जब नियमों का यह पालन न करना संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 के तहत अनिवार्य संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का उल्लंघन हो। [2026 LiveLaw (Raj) 249]जस्टिस उमा शंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की डिवीजन बेंच ने...
महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट के तहत मंज़ूरी रद्द करना सिर्फ़ धोखाधड़ी साबित होने पर ही मुमकिन: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 36(1) के तहत दी गई मंज़ूरी को धारा 36(2) के तहत तभी रद्द किया जा सकता है, जब यह साबित हो जाए कि मंज़ूरी धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने या ज़रूरी तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई। कोर्ट ने कहा कि धारा 36(2) के तहत अधिकार क्षेत्र अपील वाला नहीं है और यह चैरिटी कमिश्नर को लेन-देन का नया मूल्यांकन करने या मूल मंज़ूरी की सही-गलत होने पर फिर से विचार करने की इजाज़त नहीं देता, सिर्फ़ इसलिए कि उसी जानकारी के आधार पर कोई दूसरा नज़रिया भी हो सकता...




















