हाईकोर्ट
हरियाणा में नेशनल हेल्थ मिशन के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी मिलेगा 7वें वेतन आयोग का फ़ायदा: हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि नेशनल हेल्थ मिशन (NHM), हरियाणा के तहत कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी 7वें वेतन आयोग के फ़ायदों के हकदार हैं। कोर्ट ने माना कि एक बार जब राज्य ने सोच-समझकर एक व्यवस्थित वेतन ढांचा अपनाया और पहले के वेतन आयोगों के फ़ायदे दिए तो वह मनमाने ढंग से समानता से इनकार नहीं कर सकता। [2026 LiveLaw (PH) 206]।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"राज्य से एक आदर्श नियोक्ता (model employer) के तौर पर, निष्पक्षता, पारदर्शिता और एकरूपता के साथ काम करने की उम्मीद की जाती है।...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीने के पानी के संकट पर महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई, कहा - एक प्रगतिशील राज्य बहाने नहीं बना सकता
आज़ादी के 75 साल बाद भी अगर किसी नागरिक को पीने का साफ़ पानी उपलब्ध कराने के लिए राज्य को निर्देश देने की मांग को लेकर संवैधानिक अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़े तो ऐसे हालात में महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य की ओर से राहत न देने के लिए बहाने नहीं सुने जा सकते। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार (22 जून) को यह टिप्पणी की, क्योंकि राज्य के कई हिस्सों में पीने का पानी नहीं मिल रहा है।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की डिवीज़न बेंच ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वे मंगलवार (23 जून) तक राज्य के सभी...
अध्ययन अवकाश पर रहने के दौरान किसी कर्मचारी का ट्रांसफर किया जा सकता है: म.प्र. हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अध्ययन अवकाश (Study Leave) पर रहने के दौरान किसी कर्मचारी का स्थानांतरण किया जा सकता है। [2026 लाइव लॉ (एमपी) 224]द्वितीय श्रेणी कर्मचारी की अपील को खारिज करते हुए जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने कहा;"...यह न्यायालय स्पष्ट रूप से निष्कर्ष निकालता है कि ऐसा कोई कानून या नीति नहीं है, जो यह निर्धारित करती हो कि किसी व्यक्ति को अध्ययन अवकाश के दौरान स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। इसलिए स्थानांतरण आदेश को इस आधार पर गलत नहीं ठहराया जा...
पैसेंजर ट्रेन में बम धमाका रेलवे एक्ट के तहत 'हादसा', रेलवे मुआवज़ा देने के लिए ज़िम्मेदाक: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पैसेंजर ट्रेन में बम धमाके के पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए भारत सरकार (यूनियन ऑफ़ इंडिया) की ज़िम्मेदारी बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटना रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 124 के तहत "हादसे" की परिभाषा में आती है। [2026 LiveLaw (PH) 204]जस्टिस पंकज जैन ने कहा,"एक बार यह तय हो जाने के बाद कि ट्रेन में आग या धमाका 'हादसे' की परिभाषा में आता है तो भारत सरकार ट्रेन/रेलवे स्टेशन पर बम धमाके से हुई मौत के लिए मुआवज़ा देने की अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती।" कोर्ट ने भारत...
एमपी में शादी करने वाली महिला सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए अपने मूल राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर निर्भर नहीं रह सकती: हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला को उस राज्य में आरक्षण का लाभ मिल सकता है, जहां उसकी शादी हुई है, बशर्ते वह उस राज्य के सक्षम अधिकारी से जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करे और उसे प्राप्त करे। [2026 LiveLaw (MP) 223]जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने आगे स्पष्ट किया कि महिला को उसके मूल राज्य द्वारा मूल रूप से जारी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किसी अन्य राज्य में आरक्षण पाने के लिए नहीं किया जा सकता है।बेंच ने कहा:"यदि किसी लड़की की जाति को दोनों राज्यों में आरक्षण का लाभ पाने के लिए अधिसूचित किया...
9 साल जेल में बिताने के बाद रेप आरोपी को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 साल की पीड़िता के बयान में विरोधाभास का हवाला देते हुए किया बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को बरी किया, जिसने 8 साल की बच्ची के साथ रेप और POCSO Act के तहत अपराध करने के आरोप में 9 साल से ज़्यादा जेल में बिताए।नाबालिग पीड़िता के बयान में विरोधाभास और बदलाव, उसके पिता के व्यवहार और मामले की पुष्टि करने वाले मेडिकल सबूतों की कमी को देखते हुए जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के 2019 के उस फैसले को रद्द किया, जिसमें आरोपी को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।बेंच ने अपने फैसले में कहा,"पुष्टि करने वाले ठोस...
बैंक अकाउंट फ्रीज मामले में TMC को राहत नहीं: कलकत्ता हाइकोर्ट ने आपात सुनवाई से किया इनकार
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) को अपने तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने मामले पर आपात सुनवाई की मांग स्वीकार करने से इनकार करते हुए पार्टी को नियमित प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करने और सभी पक्षों को नोटिस देने का निर्देश दिया।मामले का उल्लेख सोमवार को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट किशोर दत्ता ने किया। उन्होंने अदालत से तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि पार्टी के तीन बैंक खातों में...
राम मंदिर चंदा चोरी विवाद: जांच की मांग वाली याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और कीमती वस्तुओं के कथित गबन के आरोपों की जांच की मांग करने वाली दो जनहित याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया।जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की अवकाशकालीन खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मामले में तत्काल सुनवाई की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार पहले ही जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर चुकी है।पहली जनहित याचिका वकील मोहित अशोक ने दायर की। इसमें मंदिर में प्राप्त नकद, सोना और...
तृणमूल नेताओं पर हमलों के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची पार्टी, हिंसा और सार्वजनिक अपमान पर जताई चिंता
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने अपने सांसदों, विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों तथा सार्वजनिक अपमान की घटनाओं को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया कि राज्य में उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है।सोमवार को सीनियर एडवोकेट सिरसान्या बंद्योपाध्याय ने कार्यवाहक मुख्य जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इसकी तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत...
जुए के मामले में 100 रुपये का जुर्माना 'नैतिक अधमता' नहीं, नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राजस्थान सार्वजनिक जुआ अध्यादेश के तहत किसी व्यक्ति पर केवल जुर्माना लगाए जाने को 'नैतिक अधमता' (मोरल टरपिट्यूड) नहीं माना जा सकता। ऐसे आधार पर किसी पात्र अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी को किसी मामले में दोषी ठहराया गया हो तो केवल उसी आधार पर यांत्रिक तरीके से नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। नियुक्ति प्राधिकारी का दायित्व है कि वह यह जांच करे कि संबंधित अपराध...
प्रोटेस्ट याचिका के आधार पर ही फाइनल रिपोर्ट खारिज नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दुष्कर्म मामले में राजश्तान हाईकोर्ट ने रद्द किया संज्ञान आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट केवल प्रोटेस्ट याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस की नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर अपराधों का संज्ञान नहीं ले सकता। ऐसा करने से पहले उसे जांच के दौरान एकत्र किए गए समस्त साक्ष्यों और सामग्री पर सार्थक विचार करना होगा तथा जांच अधिकारी के निष्कर्षों से असहमति के स्पष्ट कारण दर्ज करने होंगे।जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने दुष्कर्म के एक मामले में दो आरोपियों के खिलाफ लिए गए संज्ञान को रद्द करते हुए कहा कि संबंधित...
प्रिवेंटिव डिटेंशन और संविधान: UAPA, NSA और MCOCA के साथ कानूनी समझ-बूझ के पचास साल
मामले के केंद्र में मौजूद संवैधानिक विरोधाभाससंविधान सभा की बहसों के शब्दों में कहें तो भारत एक ऐसा गणतंत्र है जिसने अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को संवैधानिक रूप दिया। युद्ध के बाद की दुनिया में किसी भी अन्य उदार लोकतंत्र ने अपने मूल दस्तावेज़ में एहतियाती हिरासत को इतने स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया। भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(3) से 22(7) तक एक सावधानीपूर्वक सीमित दायरा बनाया गया, जिसमें राज्य किसी व्यक्ति को बिना किसी आरोप, बिना मुकदमे और आपराधिक प्रक्रिया के सामान्य सुरक्षा उपायों के बिना...
न्याय के दरवाज़े पर खड़ा सिपाही
भारतीय कानूनी ढांचे में अर्धसैनिक बलों के सर्विस से जुड़े विवादों को सुलझाने के तरीके में एक खास संरचनात्मक कमी है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के कॉन्स्टेबल बख्शीश अहमद का मामला इसका एक मुख्य उदाहरण है; उन्हें 2022 में नारायणपुर, मालदा में तैनाती के दौरान नौकरी से निकाल दिया गया। जब अहमद ने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देने के लिए 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया तो डिवीज़न बेंच ने उनकी रिट याचिका खारिज की।यह खारिज करना न तो मामले की असल खूबियों पर आधारित था और न ही अधिकार क्षेत्र...
जज द्वारा बनाई गई 'इंट्रा-कोर्ट अपील' का खतरा
एक संवैधानिक लोकतंत्र में सुप्रीम कोर्ट का सम्मान इसलिए किया जाता है, क्योंकि वह संस्थागत रूप से अनुशासित है, न कि इसलिए कि वह कभी गलती नहीं करता। उसकी शक्ति केवल प्रतिक्रिया देने की नहीं है; बल्कि कानून के अनुसार निर्णय लेने की है। इसीलिए सोशल मीडिया पर मचे हंगामे के कारण कोर्ट का अपने ही आदेशों पर दोबारा विचार करने, उन्हें बेअसर करने या प्रभावी ढंग से फिर से खोलने का कोई भी बढ़ता हुआ चलन गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। मुद्दा यह नहीं है कि कोर्ट खुद को सुधार सकता है या नहीं। वह निश्चित रूप से...
CrPC की धारा 200 और 202 के तहत मौखिक बयान प्रोटेस्ट पिटीशन में ज़रूरी बातों की कमी को पूरा नहीं कर सकते, जिससे आरोप पर शक पैदा होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
CrPC की धारा 200 और 202 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली जांच के दायरे पर एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रोटेस्ट पिटीशन में छूटी हुई ज़रूरी बातें आमतौर पर बाद में शिकायतकर्ता और गवाहों के मौखिक बयानों से नहीं जोड़ी जा सकतीं।बेंच ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा जांच/पूछताछ के दौरान पहली बार ऐसी बातें सामने लाना एक बड़ा बदलाव माना जाता है और इससे आरोप की सच्चाई पर "गंभीर संदेह" पैदा होता है।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने हत्या के मामले में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन...
दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: जजों और कानून मंत्री के लंदन बैडमिंटन कार्यक्रम में जाने की फर्जी खबर हटाई जाए
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को ऑनलाइन फर्जी समाचार सामग्री को हटाने का निर्देश दिया, जिसमें दावा किया गया था कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों और केंद्रीय कानून मंत्रियों ने 7 जून, 2026 को लंदन में आयोजित बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लिया था, यह मानते हुए कि यह सामग्री न्यायपालिका और अन्य संस्थानों के लिए "प्रथम दृष्टया झूठी, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक" है।न्यायालय ने जनता के सदस्यों को किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सर्च इंजन, वेब-होस्टिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल मीडिया...
कोर्ट के आदेश के पालन में लिए गए फ़ैसले की वैधता की जांच अवमानना की कार्यवाही में नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर से कहा है कि कोर्ट के निर्देश के पालन में लिए गए किसी प्रशासनिक फ़ैसले की वैधता या सही होने की जांच अवमानना की कार्यवाही में नहीं की जा सकती।जस्टिस तेजस करिया ने कॉलेज की अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए यह बात कही। कॉलेज ने आरोप लगाया कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने उसके B.Ed. कॉलेज परिसर को दूसरी जगह ले जाने के लंबे समय से लंबित आवेदन पर फ़ैसला करने के पहले के निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया।याचिकाकर्ता ने बताया कि उसे 2005 में NCTE से हर साल 100...
विभागीय जांच से जानबूझकर दूर रहने वाला कर्मचारी बाद में प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
विभागीय जांच से जानबूझकर दूर रहने वाला कर्मचारी बाद में प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की एक उपनिरीक्षक को सेवा से बर्खास्त किए जाने के आदेश को बरकरार रखते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि जो कर्मचारी विभागीय जांच में जानबूझकर शामिल नहीं होता, वह बाद में एकतरफा कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताकर चुनौती नहीं दे सकता।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने अधिकारी की...
पुलिस की बर्बरता नहीं रुकी तो कानून का राज खत्म हो जाएगा, पुलिस 'नाजी जर्मनी' जैसी बन सकती है: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कथित पुलिस हिरासत में यातना के एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बक्सर जिले के मुरार थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस की ऐसी बर्बरता पर अंकुश नहीं लगाया गया तो कानून का शासन और नागरिकों के जीवन एवं स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी, तथा पुलिस का स्वरूप "नाजी जर्मनी" की पुलिस जैसा हो सकता है।जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुरार थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी...
राजनीतिक पहचान नहीं, कानून और प्रक्रिया के आधार पर परखी जाए प्रशासनिक कार्रवाई: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी प्रशासनिक निर्णय की वैधता का परीक्षण संबंधित कानून और अपनाई गई प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि उस व्यक्ति की राजनीतिक पहचान के आधार पर जिसने मामले को अधिकारियों के संज्ञान में लाया हो। अदालत ने कहा कि केवल इस कारण कोई प्रशासनिक निर्णय अवैध या मनमाना नहीं माना जा सकता कि उसके पीछे सत्तारूढ़ दल के किसी स्थानीय नेता का प्रतिनिधित्व या अनुरोध रहा हो।जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह टिप्पणी फालोदी जिले में नए राजस्व गांव खीचन विस्तार के गठन को चुनौती देने...




















