हाईकोर्ट

नाबालिग छात्र अपने विकास के दौर में होते हैं, स्कूलों को उनको निकालने के बजाय सुधार के उपाय अपनाने चाहिए: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी छात्र को स्कूल से निकालने के मामले में प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले (Unaided) स्कूल के खिलाफ रिट याचिका दायर की जा सकती है, क्योंकि शिक्षा देते समय एक शिक्षण संस्थान सार्वजनिक काम (Public Function) करता है।जस्टिस हरीश कुमार की सिंगल जज बेंच ने कहा कि हालांकि शिक्षण संस्थानों में अनुशासन ज़रूरी है, लेकिन स्कूलों को यह भी याद रखना चाहिए कि नाबालिग छात्र अपनी ज़िंदगी के बनने-बिगड़ने वाले दौर (Formative Stage) में होते हैं। अगर गलत व्यवहार को सुधारा जा सकता है तो आम तौर...

POCSO में भी बेगुनाही की धारणा खत्म नहीं होती: पटना हाईकोर्ट ने 20 साल की सजा पाए व्यक्ति को किया बरी
पटना हाईकोर्ट ने POCSO मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 20 साल की सजा पाए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि POCSO Act की धाराएं 29 और 30 अभियोजन को अपराध के बुनियादी तथ्य साबित करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करतीं। जब अभियोजन अपराध के मूल तथ्यों को ही साबित करने में विफल रहता है, तब इन कानूनी धारणाओं के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रखी जा सकती।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रमेश चंद्र मालवीय की खंडपीठ ने कहा कि POCSO Act के तहत मामला होने मात्र से आरोपी के निर्दोष होने की धारणा...

POCSO में भी बेगुनाही की धारणा खत्म नहीं होती: पटना हाईकोर्ट ने 20 साल की सजा पाए व्यक्ति को किया बरी
पटना हाईकोर्ट ने POCSO मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 20 साल की सजा पाए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि POCSO Act की धाराएं 29 और 30 अभियोजन को अपराध के बुनियादी तथ्य साबित करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करतीं। जब अभियोजन अपराध के मूल तथ्यों को ही साबित करने में विफल रहता है, तब इन कानूनी धारणाओं के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रखी जा सकती।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रमेश चंद्र मालवीय की खंडपीठ ने कहा कि POCSO Act के तहत मामला होने मात्र से आरोपी के निर्दोष होने की धारणा...

यूपी के 2021 किरायेदारी कानून के प्रमुख प्रावधान रद्द, 1972 का कानून जरूरत के अनुसार फिर होगा लागू
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के किरायेदारी कानून को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के कई प्रमुख प्रावधानों को रद्द किया। कोर्ट ने किराए में संशोधन, किराया निर्धारण और मकान खाली कराने से जुड़े प्रावधानों को संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से असंगत पाया।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने 16 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 2021 के कानून की धारा 8, 9 और 10 तथा किराया प्राधिकारी के आदेश से बेदखली से संबंधित...

अलग रहने के बाद कुछ दिन साथ रहना क्रूरता की माफी नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तलाक बरकरार रखा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के अलग रहने के बाद कुछ मौकों पर दोबारा साथ रहना अपने आप में वैवाहिक क्रूरता को माफ करने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। खासकर तब जब बाद में संबंधित पक्ष का क्रूर व्यवहार फिर दोहराया गया हो।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ ने पति को मानसिक क्रूरता के आधार पर दी गई तलाक की डिक्री को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज की।मामले में दोनों का विवाह वर्ष 2009 में हुआ था और वे करीब पांच वर्ष तक साथ रहे। दिसंबर 2014 से दोनों अलग...

शादी का झांसा देकर मुवक्किल से दुष्कर्म का आरोप: वकील को अग्रिम जमानत से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर अपनी मुवक्किल से दुष्कर्म करने के आरोपी वकील को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने जांच के दौरान सामने आए होटल के अभिलेख, पीड़िता के माता-पिता और दोस्तों के बयान तथा FIR समेत अन्य सामग्री को देखते हुए राहत देने से इनकार किया।अभियोजन के अनुसार पीड़िता कानूनी सलाह लेने के लिए आरोपी वकील के संपर्क में आई थी। आरोप है कि वकील ने खुद को अविवाहित बताते हुए उससे शादी का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में पीड़िता ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया...

क्या लॉ डिपार्टमेंट का JDA के लॉ ऑफिसर पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं? राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर आरोपपत्रों पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण में तैनात लॉ ऑफिसर के खिलाफ विधि एवं विधिक कार्य विभाग की ओर से शुरू की गई विभागीय कार्रवाई के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस अनूरूप सिंघी की पीठ ने अधिकारी के खिलाफ जारी दो आरोपपत्रों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर भी रोक लगाई।मामला नरेंद्र कुमार आर्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने विधि एवं विधिक कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से 30 जुलाई 2026 को जारी किए गए दोनों आरोपपत्रों को चुनौती दी।याचिकाकर्ता की ओर...

STF हिरासत में मौत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच का दिया आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने STF की हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के मामले में न्यायिक जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह निर्देश पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर मौत से पहले लगी चोटों (antemortem injuries) का उल्लेख पाए जाने के बाद दिया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मामले की जांच CBI या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग की गई थी।कोर्ट ने पाया कि मृतक की मौत STF की हिरासत में हुई थी और परिवार ने आरोप लगाया था कि...

कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर हाईकोर्ट सख्त, UP DGP को व्यक्तिगत रूप से किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की ओर से कोर्ट के आदेशों का पालन करने में कथित लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (UP DGP) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने DGP से पूछा कि आखिर पुलिस अधिकारी इन दिनों कोर्ट के आदेशों का पालन करने में क्यों हिचक रहे हैं।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने हत्या के आरोप से जुड़े मामले में पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।मामले में कोर्ट ने 16 जुलाई 2026 को राज्य...

X ने दिल्ली हाईकोर्ट को दी जानकारी: सौरव दास का पता बताने वाली पोस्ट हटाई गईं
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सौरव दास का कथित आवासीय पता उजागर करने वाली पोस्ट प्लेटफॉर्म से हटा दी गई। यह जानकारी दास की ओर से पत्रकार और टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा तथा कुछ समाचार पोर्टलों के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान दी गई।जस्टिस सचिन दत्ता ने सौरव दास की ओर से दायर मुकदमे पर प्रतिवादियों को समन जारी किए और अंतरिम राहत की मांग वाली अर्जी पर भी नोटिस जारी किया।दास की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अखिल सिब्बल ने आरोप...

SI-ASI पर विभागीय कार्रवाई और वेतनवृद्धि रोकने का अधिकार एसपी के पास: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक को सब इंस्पेक्टर और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने, संयुक्त जांच कराने और वेतनवृद्धि रोकने जैसी सजा देने का अधिकार है।जस्टिस दीपक खोट की पीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस विनियम के विनियम 221 के तहत पुलिस अधीक्षक को यह अधिकार प्राप्त है।यह मामला पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर वर्ष 1983 में सेवा शुरू करने वाले लज्जा शंकर मिश्रा से जुड़ा था। वह आगे चलकर इंस्पेक्टर और फिर डिप्टी पुलिस अधीक्षक के...

धार्मिक जुलूस निकालने का अधिकार पूर्ण नहीं, कानून-व्यवस्था के लिए उचित पाबंदी लगा सकता है राज्य: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने महाबीरी जुलूस को लेकर दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक जुलूस निकालने का अधिकार संविधान के तहत संरक्षित है लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है।सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य उचित प्रतिबंध लगा सकता है।जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ ने सीवान जिले में महाबीरी जुलूस को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।याचिकाकर्ता सीवान के हथौरा गांव स्थित अखाड़ा नंबर-1 के श्रद्धालु हैं। उन्होंने पारंपरिक मार्ग से महाबीरी जुलूस निकालने की अनुमति देने और इसमें...

राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: एडवोकेट क्लर्क का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, इंटर्न के लिए भी ड्रेस कोड
राजस्थान हाईकोर्ट ने एडवोकेट क्लर्कों के प्रवेश, रजिस्ट्रेशन और आचरण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत निर्देश जारी किए।जस्टिस रवि चिरानिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी व्यक्ति को एडवोकेट क्लर्क के रूप में कोर्ट परिसर में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही लॉ इंटर्न और कोर्ट की कार्यवाही देखने आने वाले छात्रों के लिए भी ड्रेस कोड और पहचान संबंधी नियम तय किए गए।मामला कोर्ट के संज्ञान में आई उन घटनाओं के बाद आया, जिनमें कुछ एडवोकेट क्लर्क निर्धारित स्थान के बजाय...

26 साल का कानूनी विवाद: अगर पहले का फैसला अधूरा रहा हो तो 'रेस ज्यूडिकाटा' लागू नहीं होगा- एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि CPC की धारा 11 के तहत 'रेस ज्यूडिकाटा' का सिद्धांत वहां लागू नहीं होगा जहां विचार के लिए भेजी गई कार्यवाही बिना फैसले के रह गई और मामले का निपटारा अधूरा रहा। [2026 LiveLaw (MP) 339]अपीलकर्ता को नगर निगम के राजस्व विभाग में दिहाड़ी कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया गया, लेकिन उसकी सेवाएं 'गैर-कानूनी' तरीके से खत्म कर दी गईं। 1999 में हाईकोर्ट में दायर उसकी रिट याचिका पर मामले को विचार के लिए कलेक्टर के पास वापस भेजा गया, लेकिन उन्होंने आज तक मामले का निपटारा नहीं...

जज को कॉल पर प्रभावित करने और धमकाने की कोशिश? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीनियर IAS ऑफिसर के व्यवहार को क्रिमिनल कंटेम्प्ट के लिए भेजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीनियर IAS ऑफिसर और देवी पाटन मंडल कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल के व्यवहार को क्रिमिनल कंटेम्प्ट के मामलों को देखने वाली कोर्ट को भेज दिया, क्योंकि एक ज्यूडिशियल ऑफिसर ने आरोप लगाया कि कमिश्नर ने एक पेंडिंग सिविल केस के सिलसिले में उन्हें फोन कॉल पर प्रभावित करने और धमकाने की कोशिश की थी।जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी की बेंच ने कहा कि कथित टेलीफोन पर हुई बातचीत के टोन और भाषा से "सीधा ऐसा आभास होता है कि कोर्ट के प्रेसाइडिंग ऑफिसर को प्रभावित करने की कोशिश की गई"।कोर्ट ने इसे...

राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर क्राइम के मामलों में बैंक अकाउंट को पूरी तरह फ्रीज़ करने से निपटने के लिए गाइडलाइंस जारी कीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में जांच एजेंसियों, बैंकों और अन्य अधिकारियों के लिए साइबर क्राइम के मामलों में बैंक अकाउंट को "बिना सोचे-समझे" फ्रीज़ करने से निपटने के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं। इसका मकसद न केवल प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है, बल्कि "बेगुनाह नागरिकों" की सुरक्षा भी करना है।जस्टिस आनंद शर्मा 105 याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहे थे, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने कथित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के संबंध में जांच एजेंसियों द्वारा जारी सूचनाओं के आधार पर अपने बैंक अकाउंट को...

क्या 'संस्कृति' के आधार पर सरकारी कार्यक्रमों में धार्मिक रीति-रिवाजों को सही ठहराया जा सकता है? भूमि पूजन समारोहों की संवैधानिक दृष्टिकोण
भारत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के शिलान्यास या उद्घाटन समारोहों से पहले भूमि पूजन, हवन, नारियल फोड़ने, वैदिक मंत्रोच्चार और अन्य हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों में प्रधानमंत्री, न्यायाधीशों, मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और मंत्रियों जैसे सरकारी और संवैधानिक पदाधिकारियों की भागीदारी इतनी आम हो गई है कि इस पर शायद ही कभी गंभीर संवैधानिक जांच होती है। चाहे राजमार्गों, पुलों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, विधायी भवनों, सरकारी कार्यालयों या यहां तक कि अदालती परिसरों की आधारशिला रखने का मामला हो, इन...

FIR में नाम होना मात्र दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 40 साल पुराने हत्या मामले में दो आरोपियों को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब चार दशक पुराने हत्या मामले में दो आरोपियों नागेंद्र और जुगेंद्र को बरी करते हुए कहा कि केवल FIR में नाम होना, बिना किसी विशिष्ट भूमिका या विश्वसनीय साक्ष्य के, दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकता।जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की पीठ ने दोनों की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया। दोनों आरोपी उन आठ आरोपियों में शामिल थे, जिन्हें IPC की धाराओं 147, 148, 302/149, 325/149 और 323/149 के तहत दोषी ठहराया गया था।...

20 से ज़्यादा बार ट्रायल कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए जांच अधिकारी, विचाराधीन कैदी ने जेल में बिताये 6 साल: दिल्ली हाईकोर्ट ने जताया अफ़सोस
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वह जांच अधिकारियों (IOs) को संवेदनशील बनाएं ताकि वे लंबित मामलों को तेज़ी से निपटाने में समय पर सहयोग करें, खासकर उन मामलों में जहां आरोपी लंबे समय से हिरासत में हैं। [2026 LiveLaw (Del) 781]जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यह आदेश दो आरोपियों को ज़मानत देते हुए पारित किया, जो 2020 के हत्या के मामले में लगभग छह साल से जेल में बंद थे।कोर्ट ने ट्रायल की धीमी गति और इस तथ्य पर ध्यान दिया कि जांच अधिकारी (IO) 20 से ज़्यादा बार कार्यवाही में...

संविधान के बाद बनी असंवैधानिक सेवा नियमावली के आधार पर हुई बर्खास्तगी टिक नहीं सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब चार दशक पुराने बैंक कर्मचारी की बर्खास्तगी के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान लागू होने के बाद बनाई गई ऐसी सेवा नियमावली, जिसे अदालत असंवैधानिक घोषित कर चुकी है, शुरुआत से ही शून्य मानी जाएगी। उसके आधार पर की गई बर्खास्तगी भी कानूनी रूप से कायम नहीं रह सकती।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने गोरखपुर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के एक क्लर्क की वर्ष 1983 में हुई बर्खास्तगी रद्द की।अदालत ने कहा कि जिस नियम के आधार पर कर्मचारी को...
