हाईकोर्ट

CPF विकल्प चुनने के बाद CCS नियमों के तहत पेंशन का दावा करने के लिए इसे बदला नहीं जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
CPF विकल्प चुनने के बाद CCS नियमों के तहत पेंशन का दावा करने के लिए इसे बदला नहीं जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

जस्टिस संजीव नरूला की अध्यक्षता वाली दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने फैसला सुनाया कि कोई भी कर्मचारी जिसने CPF योजना के तहत बने रहने का विकल्प चुना है, वह बाद में CCS पेंशन नियमों के तहत पेंशन लाभों का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि 'मानित रूपांतरण' (Deemed Conversion) केवल वहीं लागू होता है जहाँ कोई विकल्प नहीं चुना गया।पृष्ठभूमि के तथ्ययाचिकाकर्ता एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल (EIC) और एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन एजेंसियों (EIAs) के पूर्व कर्मचारियों का एक समूह हैं। उन्होंने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम,...

पदोन्नति के लिए कर्मचारियों से सीधे संवाद की जगह सार्वजनिक विज्ञापन नहीं ले सकता: झारखंड हाईकोर्ट
पदोन्नति के लिए कर्मचारियों से सीधे संवाद की जगह सार्वजनिक विज्ञापन नहीं ले सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीज़न बेंच ने यह फ़ैसला दिया कि विभागीय ज़रूरतों के लिए कर्मचारियों से सीधे संवाद की जगह सार्वजनिक विज्ञापन नहीं ले सकते, और बिना उचित सूचना के योग्य कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित करना मनमाना है। आगे यह भी कहा गया कि प्रभावित कर्मचारी उस तारीख से पिछली तारीख से पदोन्नति के हकदार हैं, जिस तारीख को उनके जूनियर कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई।पृष्ठभूमि के तथ्यये कर्मचारी झारखंड सरकार के सड़क निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर...

BSF के कॉम्बैट पदों पर तैनात जवान 57 साल की उम्र में रिटायर होंगे, 60 साल की सिविलियन रिटायरमेंट उम्र का दावा नहीं कर सकते - दिल्ली हाईकोर्ट
BSF के कॉम्बैट पदों पर तैनात जवान 57 साल की उम्र में रिटायर होंगे, 60 साल की सिविलियन रिटायरमेंट उम्र का दावा नहीं कर सकते - दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षेतर्पाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने फैसला सुनाया कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) में किसी कॉम्बैट पद पर दोबारा नियुक्त किया गया कोई पूर्व सैनिक, जो उस कॉम्बैट कैडर के लाभों का आनंद लेता है, BSF की 57 साल की वैधानिक रिटायरमेंट उम्र के अधीन होगा, न कि सिविलियन पदों पर लागू 60 साल की रिटायरमेंट उम्र के।पृष्ठभूमि के तथ्यप्रतिवादी को 31 अगस्त, 1990 को भारतीय वायु सेना से सेवामुक्त कर दिया गया। इसके बाद 13 दिसंबर, 1991 को उसे BSF की एयर विंग में सब-इंस्पेक्टर...

फर्जी गैंगरेप केस में फंसाने और हिरासत में प्रताड़ना: वकील व पुलिसकर्मी की सजा बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट
फर्जी गैंगरेप केस में फंसाने और हिरासत में प्रताड़ना: वकील व पुलिसकर्मी की सजा बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वकील और पुलिसकर्मी की सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा कि पद और अधिकार का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश जाना चाहिए।जस्टिस चन्द्रशेखरन सुधा ने कहा कि अदालतें ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरत सकतीं, जहां वकील और पुलिस जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने अधिकारों का दुरुपयोग करें।मामला क्या था?मृतक सुशील गुलाटी को 2000 में एक फर्जी गैंगरेप केस में फंसाया गया था। बाद में डीएनए जांच में यह साबित हुआ कि अपराध किसी अन्य व्यक्ति ने किया था, जिसके बाद गुलाटी को बरी कर...

ईरानी मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर की वापसी की मांग, बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका
ईरानी मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर की वापसी की मांग, बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल कर ओमान तट पर ईरानी मिसाइल हमले में मारे गए भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर को भारत लाने की मांग की गई है।याचिका अमरतलाल गोकलाल सोलंकी द्वारा दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि उनके पुत्र दिक्षित सोलंकी जहाज “MKD Vyom” पर इंजन रूम में ऑइलर के रूप में कार्यरत थे। 1 मार्च को जहाज के ऑपरेशंस मैनेजर कैप्टन सैडलर रिबेरो ने परिवार को बताया कि मिसाइल हमले में उनके बेटे घायल हो गए और जहाज में छेद होने के कारण लापता हो गए।याचिका में कहा गया है कि बाद में जानकारी दी...

एपस्टीन फाइल्स केस: हरदीप पुरी की बेटी के मानहानि केस में रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा एक्टिविस्ट
एपस्टीन फाइल्स केस: हरदीप पुरी की बेटी के मानहानि केस में रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा एक्टिविस्ट

रायपुर के सोशल एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट में रोक लगाने वाले आदेश को चुनौती दी। इस आदेश में उन्हें और कई अन्य लोगों को उन पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया गया, जिनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को अमेरिकी फाइनेंसर और बच्चों के यौन शोषण के दोषी जेफरी एपस्टीन से जोड़ा गया।इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच करेगी।इसे "मुकदमे से पहले का एकतरफ़ा रोक आदेश" बताते हुए शुक्ला ने अपनी अपील में कहा कि उन्होंने जो जानकारी...

पार्टियां सिंगल जज के सामने यह मान लेने के बाद कि मामला किसी बाध्यकारी मिसाल के दायरे में आता है, इंट्रा-कोर्ट अपील में उन मुद्दों को दोबारा नहीं उठा सकतीं: पटना हाईकोर्ट
पार्टियां सिंगल जज के सामने यह मान लेने के बाद कि मामला किसी बाध्यकारी मिसाल के दायरे में आता है, इंट्रा-कोर्ट अपील में उन मुद्दों को दोबारा नहीं उठा सकतीं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि एक बार जब पार्टियाँ सिंगल जज के सामने यह मान लेती हैं कि कोई मुद्दा किसी बाध्यकारी मिसाल से पहले ही तय हो चुका है तो वे बाद में इंट्रा-कोर्ट अपील में उसी मुद्दे को दोबारा नहीं उठा सकतीं; कोर्ट ने इस बात को दोहराया कि किसी फैसले में दर्ज बयान पार्टियों पर बाध्यकारी होते हैं।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की डिवीज़न बेंच CWJC नंबर 14725/2023 में एक सिंगल जज द्वारा 08.04.2024 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही...

उचित सहायता नहीं मिल रही: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी पैनल वाले वकीलों द्वारा दी जा रही अपर्याप्त सहायता पर चिंता जताई
'उचित सहायता नहीं मिल रही': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी पैनल वाले वकीलों द्वारा दी जा रही अपर्याप्त सहायता पर चिंता जताई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार के पैनल में शामिल वकीलों द्वारा दी जा रही अपर्याप्त सहायता पर चिंता व्यक्त की।U.P. Minor Minerals (Concession) Rules, 1963 के तहत बिना किसी कारण बताओ नोटिस के वसूली से जुड़े एक मामले में, जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस देवेंद्र सिंह-I की बेंच ने यह टिप्पणी की:“हम एडवोकेट जनरल-सह-राज्य विधि अधिकारी के कार्यालय में मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। इसका कारण यह है कि कार्यालय का कामकाज इतने निचले स्तर पर पहुंच गया है कि अदालतों को उचित सहायता...

छोटी टाइपिंग गलती पर पेट्रोल पंप आवंटन रद्द करना गलत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BPCL को फटकारा
छोटी टाइपिंग गलती पर पेट्रोल पंप आवंटन रद्द करना गलत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BPCL को फटकारा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि केवल टाइपिंग की मामूली गलती के आधार पर पेट्रोल पंप का आवंटन रद्द करना न सिर्फ अनुचित है बल्कि कानूनन भी गलत है।इसके साथ ही अदालत ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किया गया आवंटन रद्द करने का फैसला निरस्त किया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आवेदक ने लेटर ऑफ इंटेंट मिलने के बाद भारी निवेश कर दिया हो तब इस तरह का निर्णय पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।मामले के अनुसार भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन...

NBW पर IO को सस्पेंड करना भारी पड़ा: हाईकोर्ट ने बस्ती SP को दी अवमानना की चेतावनी
NBW पर IO को सस्पेंड करना भारी पड़ा: हाईकोर्ट ने बस्ती SP को दी अवमानना की चेतावनी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती के पुलिस अधीक्षक द्वारा एक जांच अधिकारी को निलंबित किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना करार दिया।बता दें, यह मामला उस समय सामने आया, जब जांच अधिकारी ने आरोपियों की पेशी सुनिश्चित कराने के लिए गैर-जमानती वारंट प्राप्त किया था।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि एसपी द्वारा जारी निलंबन आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2, बस्ती के आदेश की अवहेलना जैसा प्रतीत होता है। मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी के आवेदन पर...

बर्न सुविधाओं के बिना स्वास्थ्य का अधिकार महज दिखावा: झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, 120 दिन में हर जिले में बर्न यूनिट अनिवार्य
बर्न सुविधाओं के बिना स्वास्थ्य का अधिकार महज दिखावा: झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, 120 दिन में हर जिले में बर्न यूनिट अनिवार्य

झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग अग्निकांड मामले की सुनवाई करते हुए राज्य में बर्न केयर सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि यदि राज्य में आधुनिक बर्न उपचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिला स्वास्थ्य का अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाता है।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो हजारीबाग में मिट्टी तेल से लगी आग की घटना से जुड़ी थी। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई थी और कई गंभीर रूप से झुलस...

खांसी की दवा वाले मामलों में NDPS Act का लगातार दुरुपयोग: पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जमानत मंजूर
खांसी की दवा वाले मामलों में NDPS Act का लगातार दुरुपयोग: पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जमानत मंजूर

पटना हाईकोर्ट ने खांसी की दवा से जुड़े मामलों में NDPS Act के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि पुलिस इस कानून का लगातार दुरुपयोग कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित सीमा के भीतर कोडीन युक्त कफ सिरप के मामले NDPS Act के तहत नहीं बल्कि औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत आते हैं।जस्टिस अशोक कुमार पांडेय जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता को मानसी थाना कांड संख्या 218/2025 में आरोपी बनाया गया। प्रारंभ में मामला बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज हुआ...

बीमारी का बहाना बनाकर दूसरी अदालत में पेश हुआ वकील, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 20 हजार का जुर्माना
बीमारी का बहाना बनाकर दूसरी अदालत में पेश हुआ वकील, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 20 हजार का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश करने वाले वकील पर सख्त रुख अपनाते हुए 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वकील ने एक मामले में बीमारी का पर्चा भेजकर अनुपस्थित रहने की सूचना दी, जबकि उसी दिन वह दूसरी अदालत में पेश हो रहा था।जस्टिस गौतम चौधरी ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित वकील ने न केवल बीमारी का गलत बहाना बनाया बल्कि यह भी नहीं बताया कि आवेदकों को पहले ही एक अन्य मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिल चुकी है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“वकील का आचरण यह...

30 जून को रिटायरमेंट, 1 ​​जुलाई के सालाना इंक्रीमेंट में रुकावट नहीं- दिल्ली हाईकोर्ट
30 जून को रिटायरमेंट, 1 ​​जुलाई के सालाना इंक्रीमेंट में रुकावट नहीं- दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने फैसला सुनाया कि 30 जून को रिटायर होने वाला सरकारी कर्मचारी 1 जुलाई को मिलने वाले इंक्रीमेंट का हकदार है, क्योंकि यह इंक्रीमेंट रिटायरमेंट से पहले पूरी की गई सेवा के साल के लिए अर्जित किया जाता है। इसे सिर्फ इसलिए नकारा नहीं जा सकता कि यह रिटायरमेंट के बाद देय होता है।पृष्ठभूमि के तथ्यकर्मचारी (प्रतिवादी) नॉर्दर्न रेलवे, नई दिल्ली में A.F.A. के तौर पर काम कर रहा था। वह 30 जून 2021 को सेवा से रिटायर हो गया। उसका सालाना...

बालीग बेटों की कमाने की क्षमता पत्नी के स्वतंत्र और स्थायी गुज़ारा भत्ता के अधिकार को खत्म नहीं करती: राजस्थान हाईकोर्ट
बालीग बेटों की कमाने की क्षमता पत्नी के 'स्वतंत्र' और स्थायी गुज़ारा भत्ता के अधिकार को खत्म नहीं करती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि तलाकशुदा पत्नी का स्थायी गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार एक 'स्वतंत्र' और 'अलग' अधिकार है, जिसे सिर्फ़ इसलिए कम या खत्म नहीं किया जा सकता कि उसके बेटे बालीग हैं और कमाते हैं।यह साफ़ करते हुए कि ये बातें ज़्यादा से ज़्यादा गुज़ारा भत्ते की रकम पर असर डाल सकती हैं, लेकिन पत्नी के बुनियादी अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं, कोर्ट ने कहा:"...बेटों का बालीग होना और उनकी कमाने की क्षमता, भले ही कानूनी तौर पर मायने रखती हो, लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25...