हाईकोर्ट

बिहार का शराब कानून झारखंड में लागू नहीं, वाहन जब्ती मामले में हाईकोर्ट ने आदेश किया रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 बिहार राज्य का कानून है और इसे झारखंड में चल रही कार्यवाही पर लागू नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने शराब की कथित अवैध ढुलाई के मामले में वाहन छोड़ने से इनकार करते हुए बिहार के कानून पर भरोसा करने के सत्र अदालत के आदेश को गंभीर कानूनी त्रुटि माना।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच वाणिज्यिक पिकअप वाहन के मालिक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वाहन को पिंड्राजोरा थाना कांड संख्या 18/2026 में जब्त किया गया। आरोप था कि वाहन से...

निजामुद्दीन मरकज जाने पर दर्ज केस रद्द: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- अनुमान और आशंका के आधार पर आरोपी बनाया गया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी के दौरान दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन मरकज में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की पूरी कार्यवाही रद्द की। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपियों को कोरोना संक्रमण की आशंका के आधार पर दर्ज कराए गए मामले में अनुमान और धारणा के आधार पर झूठा फंसाया गया।जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी ने फैजान और एक अन्य आरोपी की ओर से दाखिल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका स्वीकार करते हुए जौनपुर के अपर मुख्य न्यायिक...

कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- वंदे मातरम् गाना अनिवार्य नहीं, 2 अंतरों के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार

कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को हाईकोर्ट में कहा कि राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का गायन अनिवार्य नहीं है। सरकार ने राज्य के सरकारी समारोहों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो अंतरे गाने के निर्देश वाले अपने आदेश का बचाव करते हुए यह दलील दी।हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर फिलहाल कोई फैसला नहीं दिया और राष्ट्रीय गीत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के परिणाम का इंतजार करने का निर्देश दिया। जस्टिस अनु शिवरामन और जस्टिस टीपी विवेकानंद की खंडपीठ राज्य...

नंदीग्राम उपचुनाव: हाईकोर्ट ने राज्य से कहा- कांग्रेस उम्मीदवार को चुनाव लड़ने दें, बशर्ते जमानत मिले

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान से जुड़े पुराने मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी दर्ज की। राज्य ने बताया कि 2007 की घटनाओं से जुड़े छह मामलों में से पांच बंद किए जा चुके हैं और शेष एक मामले में मिलन प्रधान आरोपी नहीं हैं।मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने चुनाव में प्रधान की भागीदारी का मुद्दा उठने पर राज्य से मौखिक रूप से कहा, “उन्हें चुनाव लड़ने दें। बशर्ते उन्हें जमानत मिल जाए।” प्रधान ने अपने...

अतिरिक्त जमीन की बिक्री एक बार शून्य घोषित हो गई तो रद्दीकरण कानून से दोबारा वैध नहीं हो सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि शहरी भूमि सीमा एवं विनियमन अधिनियम, 1976 के तहत अतिरिक्त घोषित जमीन की ऐसी बिक्री, जिसे कानून के तहत शून्य माना गया हो, शहरी भूमि सीमा एवं विनियमन निरसन अधिनियम, 1999 के लागू होने से दोबारा वैध नहीं हो सकती।कोर्ट ने कहा कि 1976 के कानून के तहत जिस समय जमीन का हस्तांतरण हुआ, उस समय यदि वह कानूनन शून्य था तो 1999 का निरसन कानून उस बिक्री को दोबारा जीवित नहीं कर सकता। जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने कहा कि 1976 के अधिनियम...

पेंशन, ग्रेच्युटी और पीएफ को अपराध की आय माना जा सकता है या नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट अब इस अहम कानूनी सवाल पर सुनवाई करेगा कि क्या पेंशन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, अवकाश नकदीकरण और वैधानिक रिटायरमेंट लाभ से बनाई गई सावधि जमा को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 'अपराध की आय' माना जा सकता है, जबकि इनका किसी अनुसूचित अपराध से जुड़ी आपराधिक गतिविधि के साथ सीधा संबंध न हो।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने संतोष कुमार गुप्ता और अन्य व्यक्ति की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने धन शोधन निवारण अधिनियम अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा चार अपीलों...

12 साल पुराने भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को आखिरी मौका: राजस्थान हाईकोर्ट ने 25 पेड़ लगाने की शर्त पर साक्ष्य पेश करने की अनुमति दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 साल से लंबित भूमि अधिग्रहण मामले में महिला को अपना साक्ष्य पेश करने का आखिरी अवसर दिया। हाईकोर्ट ने यह राहत इस शर्त पर दी कि महिला 10 हजार रुपये जूनियर अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा करेगी और सार्वजनिक स्थान पर छायादार 25 पेड़ लगाएगी।जस्टिस अनूप कुमार की पीठ के समक्ष यह याचिका दायर की गई, जिसमें जयपुर के वरिष्ठ सिविल जज द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत महिला को साक्ष्य पेश करने की अनुमति नहीं दी गई।मामला लंबे समय से लंबित होने को देखते हुए हाईकोर्ट ने...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने धार्मिक जुलूसों से होने वाले शोर-शराबे का स्वत:संज्ञान लिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले शोर-शराबे के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की डिवीज़न बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को यह बताने का आदेश दिया कि उसने धार्मिक जुलूसों के दौरान डीजे (DJ) से होने वाले शोर-शराबे को रोकने के लिए क्या कदम उठाए।बेंच ने गौर किया कि गणेश चतुर्थी के मौजूदा त्योहार के दौरान, डीजे आधी रात के बाद भी बज रहे हैं, जिससे निवासियों को शोर-शराबे की समस्या हो रही...

मोबाइल वीडियो में ₹300 की रिश्वत मांगने का सबूत: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस को धमकाने के आरोपी के खिलाफ मामला रद्द किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 353, 504 और 506 के तहत आरोपी व्यक्ति के खिलाफ़ चार्जशीट रद्द की। कोर्ट ने पाया कि मोबाइल फ़ोन फुटेज और WhatsApp बातचीत से पहली नज़र में यह पता चलता है कि शिकायतकर्ता पुलिस कॉन्स्टेबल ने उसका ड्राइविंग लाइसेंस लौटाने के बदले उससे ₹300 की मांग की। कोर्ट ने कहा कि इसके बाद आरोपी पर आपराधिक धमकी का झूठा मामला थोपा गया, और अभियोजन पक्ष की कहानी को "पूरी तरह से अविश्वसनीय" और "झूठी और मनगढ़ंत" पाया।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव आपराधिक अर्जी पर सुनवाई कर...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 दिन की गैर-कानूनी हिरासत के लिए ₹50,000 का मुआवज़ा दिया, गलती मानने के लिए पुलिस की तारीफ़ की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते राज्य सरकार को एक व्यक्ति को ₹50,000 का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। इस व्यक्ति को संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पहले 15 अगस्त से 19 अगस्त, 2026 तक गैर-कानूनी रूप से पुलिस हिरासत में रखा गया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कमलेश कुमार की 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर यह आदेश दिया। कुमार ने आरोप लगाया कि 15 अगस्त को दो हथियारबंद पुलिसकर्मियों ने उन्हें उनकी मेडिकल शॉप से ​​गैर-कानूनी तरीके से उठाया था।संक्षेप में...

कोऑपरेटिव सोसाइटी के बंटवारे से डेलीगेट्स का दर्जा खत्म, पुराना नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर बनाए रखने से योग्यता बरकरार नहीं रहती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब यूपी कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1965 की धारा 126 के तहत किसी कोऑपरेटिव सोसाइटी का बंटवारा होता है तो मूल सोसाइटी भी एक नई कॉर्पोरेट बॉडी बन जाती है, भले ही उसे अपना पुराना नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर बनाए रखने की इजाज़त दी गई हो।कोर्ट ने कहा कि ऐसे बंटवारे के बाद मूल सोसाइटी के डेलीगेट्स, यूपी कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ रूल्स, 1968 के नियम 87(ix) के तहत डेलीगेट नहीं रह जाते और नियम 453(1)(h) के तहत डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक की मैनेजमेंट कमिटी के सदस्य के तौर पर बने नहीं रह...

अगर मुद्दे एक जैसे हों और फ़ैसला करने के लिए कॉमन सबूत काफ़ी हों, तो सिविल मुकदमों को एक साथ मिलाया जा सकता है: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल मुकदमों को तभी एक साथ मिलाया जा सकता है जब उनमें शामिल मुद्दे एक जैसे हों और उन मुद्दों पर फ़ैसला करने के लिए कॉमन सबूत काफ़ी हों। [2026 LiveLaw (MP) 379]मुकदमों को एक साथ मिलाने की अर्ज़ी को खारिज करने वाले आदेश को चुनौती देने वाली रिविज़न याचिका खारिज करते हुए जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने कहा:"इस तरह, दो मुकदमों को एक साथ मिलाया जा सकता है और मिलाया जाना चाहिए, जब उनमें शामिल मुद्दे एक जैसे हों (भले ही बिल्कुल एक न हों) और दोनों मुकदमों के लिए रिकॉर्ड किए...

स्क्रूटनी कमिटी के जाति प्रमाण पत्र अमान्य किए जाने के बाद अपील खारिज होने के 30 दिनों तक उससे मिलने वाले लाभ वापस नहीं लिए जा सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र के आधार पर दिए गए लाभ तब तक वापस नहीं लिए जा सकते, जब तक कि स्क्रूटनी कमिटी द्वारा उसे अमान्य किए जाने के खिलाफ की गई अपील खारिज होने के 30 दिन पूरे न हो जाएं। कोर्ट ने 'महाराष्ट्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जनजाति, खानाबदोश जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेष पिछड़ा वर्ग (जाति प्रमाण पत्र जारी करने और सत्यापन का विनियमन) अधिनियम, 2000' की धारा 10(5) का हवाला देते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को दिए गए लाभ तब तक वापस नहीं लिए जा सकते, जब...

बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के कब्ज़ा देने का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाज़ियाबाद के गुलमोहर ग्रीन्स के निरीक्षण का आदेश दिया

हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाज़ियाबाद के गुलमोहर ग्रीन्स के निरीक्षण और वहां की असल स्थिति की जांच के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए। यहां बिल्डर ने गाज़ियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी से कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए बिना ही फ्लैट का कब्ज़ा दे दिया।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की बेंच ने वकील संजय कुमार ओम और प्रखर कुमार श्रीवास्तव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया। उन्हें साइट पर जाकर प्रोजेक्ट की स्थिति और फ्लैट मालिकों के पास फ्लैट के कब्ज़े के बारे में सही जानकारी देने को कहा...

बढ़ती गंदगी से बॉम्बे हाईकोर्ट नाराज, सार्वजनिक जगहों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई का दिया निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) को निर्देश दिया कि वह सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर कचरा और गंदगी जमा होने से रोकने या उसे साफ करने में नाकाम रहने वाले वार्ड अधिकारियों और उनके मातहत अधिकारियों की जवाबदेही तय करें। कोर्ट ने नगर निगम से यह भी कहा कि वह अवैध रूप से कचरा फेंकने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), MMC Act और पर्यावरण कानूनों के तहत मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू करे।जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की डिवीजन बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई...

उनमें SC/ST लोगों को परेशान करने की मानसिकता है: पटना हाईकोर्ट ने स्कॉलर के खिलाफ हटाई डीएम की टिप्पणी

पटना हाईकोर्ट ने अर्ध-न्यायिक अधिकारियों को मुकदमेबाजी करने वालों के खिलाफ व्यक्तिगत, अप्रासंगिक या पक्षपाती टिप्पणियां करने के खिलाफ चेतावनी दी। यह चेतावनी तब दी गई जब जिला मजिस्ट्रेट ने एक संस्कृत विद्वान के बारे में कहा कि उनमें SC/ST समुदाय के लोगों को "परेशान करने की मानसिकता" है।जस्टिस आलोक कुमार की सिंगल जज डॉ. देव नारायण झा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत जिला मजिस्ट्रेट-सह-द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी द्वारा उनके...

कार्यस्थल पर कर्मचारियों को सांता क्लॉज की टोपी पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों को सांता क्लॉज की लाल टोपी पहनने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की जबरदस्ती अलग-अलग धर्म और आस्था रखने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और विश्वास का पालन करने की स्वतंत्रता है।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी विक्रम सिंह उर्फ विश्व विक्रम सिंह की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए की। अर्जी में उन्होंने आगरा के सदर बाजार थाने में दर्ज FIR से जुड़ी...

पत्नी की सिर्फ यह इच्छा कि पति घरजमाई बनकर रहे, क्रूरता नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की केवल यह इच्छा कि उसका पति उसके मायके में घरजमाई बनकर रहे, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक मांगने के लिए वैवाहिक क्रूरता नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका खारिज करने का फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए उसकी अपील भी खारिज की।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ पति की ओर से दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। पति ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1) (AI) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने...

शिकायतकर्ता आरोपी को जबरन नार्को टेस्ट कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई शिकायतकर्ता ऐसे आरोपी को नार्को एनालिसिस टेस्ट कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, जिसने स्पष्ट रूप से इस टेस्ट के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया हो।जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने कहा कि नार्को टेस्ट के लिए सहमति उस व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत और गैर-परित्याज्य सुरक्षा है, जिस पर यह परीक्षण किया जाना है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई आरोपी खुद आवेदन देकर भी नार्को टेस्ट कराने का ऐसा अटल अधिकार नहीं रखता, जिसे हर स्थिति में लागू कराया जा सके, तो किसी तीसरे पक्ष यानी...