हाईकोर्ट
अवैध खनन मामले में जज को प्रभावित करने का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP MLA के खिलाफ शुरू की आपराधिक अवमानना की कार्रवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार (02 अप्रैल) को अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से BJP विधायक संजय पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करे। विधायक पर अवैध खनन से जुड़े एक मामले में मौजूदा जज से अनुचित तरीके से संपर्क करने का आरोप है।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया,"रजिस्ट्री मिस्टर संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना याचिका दर्ज करे और इस आपराधिक अवमानना...
'डोमिनो इफ़ेक्ट शुरू हो जाएगा': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पद अलॉट होने के बाद सरकारी परीक्षा में उम्मीदवार की पसंद बदलने की याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को उम्मीदवार की याचिका खारिज की, जिसमें उसने 2024 के संयुक्त भर्ती टेस्ट में पद के लिए अपनी पसंद बदलने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी एक उम्मीदवार को अपनी पसंद पहली से बदलकर 36वीं करने की इजाज़त दी गई तो इससे 'डोमिनो इफ़ेक्ट' शुरू हो जाएगा, जिससे पूरे राज्य में पदों के बंटवारे का सिस्टम बिगड़ जाएगा।कोर्ट ने कहा कि इससे तीसरे पक्षों के पहले से मिले अधिकारों का भी उल्लंघन होगा।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया:"अगर यह कोर्ट...
वकील को अलॉट हुए चैंबर पर एसोसिएट उस चैंबर को इस्तेमाल करने का पक्का अधिकार नहीं मांग सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई वकील, जो किसी चैंबर का इस्तेमाल सिर्फ़ मूल अलॉटी (जिसे चैंबर अलॉट हुआ था) के एसोसिएट के तौर पर कर रहा है, उसे उस जगह पर कोई पक्का अधिकार नहीं मिल जाता, क्योंकि वह सिर्फ़ "इजाज़त से इस्तेमाल करने वाला" (Permissive User) है।जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव वकील अंजू तंवर की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में उन्होंने साकेत कोर्ट्स की चैंबर अलॉटमेंट कमेटी (CAC) के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें चैंबर खाली करने का निर्देश दिया गया।कोर्ट ने पाया कि चैंबर दो...
धर्म-परिवर्तन, पुनर्धर्म-परिवर्तन और जाति: 1950 के आदेश के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा कब समाप्त या बहाल होता है?- व्याख्या
20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया कि एक पादरी, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था, अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रहा। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म का दावा करने वालों के अलावा किसी भी व्यक्ति को अनुसूचित जाति समुदाय (चिंथडा और बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य ) का सदस्य नहीं माना जा सकता है।धर्मांतरण भारत में सबसे विवादास्पद विषयों में से एक है, फिर भी यह एक सामाजिक वास्तविकता बनी हुई।फैसले की पृष्ठभूमि में, यह पीस...
ज़मीन वन भूमि नहीं पाई गई: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 'सैन्य धाम' युद्ध स्मारक के निर्माण के खिलाफ PIL खारिज की
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने देहरादून में 'सैन्य धाम' नाम के युद्ध स्मारक के निर्माण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) खारिज की। कोर्ट ने यह फैसला देते हुए कहा कि राजस्व और वन अधिकारियों द्वारा किए गए एक संयुक्त सर्वेक्षण में यह ज़मीन वन भूमि नहीं पाई गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब सक्षम अधिकारियों ने ज़मीन का निरीक्षण कर यह प्रमाणित कर दिया कि यह वन भूमि का हिस्सा नहीं है तो याचिका में उठाई गई चुनौती का मूल आधार ही खत्म हो जाता है, जिससे यह आधार कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं रह जाता।जस्टिस मनोज...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक माँ को अपनी नाबालिग बेटी का संपत्ति में हिस्सा बेचने की अनुमति दी, बताई यह वजह
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक माँ को अपनी नाबालिग बेटी का संपत्ति में हिस्सा बेचने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह फ़ैसला उस माँ की उन मुश्किलों को देखते हुए लिया, जो उसे अपने मौजूदा घर से 600 किलोमीटर दूर स्थित ज़मीन के टुकड़े की देखभाल करने में आ रही थीं।ऐसा करते हुए कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट आदेश का रद्द किया, जिसने पहले ऐसी अनुमति देने से इनकार कर दिया था।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने यह टिप्पणी की:"केस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि ज़मीन अपील करने वालों के मौजूदा घर से 600 किलोमीटर दूर है और उसका...
सक्षम व्यक्ति बेरोज़गारी का बहाना बनाकर भरण-पोषण से बच नहीं सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बेरोज़गारी का महज़ बहाना किसी सक्षम और योग्य व्यक्ति को CrPC की धारा 125 के तहत अपने नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने इस सिद्धांत को दोहराया कि एक सक्षम व्यक्ति के बारे में यह माना जाता है कि उसमें कमाने की क्षमता है। साथ ही जानबूझकर की गई या बिना सबूत वाली बेरोज़गारी का इस्तेमाल कानूनी ज़िम्मेदारी से बचने के लिए नहीं किया जा सकता। इस सिद्धांत को लागू करते हुए कोर्ट ने दो नाबालिग बच्चों को दिए गए भरण-पोषण में दखल देने...
OBC आरक्षण कोटा में बढ़ोतरी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 27 अप्रैल से सुनवाई शुरू करेगा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि 2019 के उस अध्यादेश से जुड़े सभी मामलों को, जिसमें OBC आरक्षण कोटा बढ़ाया गया, 27 अप्रैल, 2026 से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।यह विवाद राज्य सरकार द्वारा मार्च 2019 में पारित एक अध्यादेश से शुरू हुआ, जिसमें पोस्टग्रेजुएट मेडिकल दाखिलों में OBC आरक्षण को बढ़ाया गया। इससे पहले, OBC श्रेणी के लिए आरक्षण 14% था, जिसे बढ़ाकर 27% कर दिया गया।इस बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप, कुल आरक्षण 50% की उस सीमा से अधिक हो गया, जो सुप्रीम कोर्ट ने 'इंद्रा...
बिना मंजूरी सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा अमान्य: पटना हाईकोर्ट ने वन अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही रद्द की
पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बिना पूर्व स्वीकृति के शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही शुरुआत से ही अवैध होती है। अदालत ने वन विभाग के एक रेंज अधिकारी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।मामला एक शिकायत से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि अधिकारी ने ट्रैक्टर रोककर मारपीट की 25 हजार रुपये की मांग की और मोबाइल छीन लिया। ट्रायल कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए समन जारी किया।याचिकाकर्ता...
जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था लगातार समीक्षा के दायरे में रहे: दिल्ली हाईकोर्ट, स्वतः संज्ञान मामला बंद
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी की सभी जिला अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस इन व्यवस्थाओं को जारी रखे और समय-समय पर उनकी समीक्षा भी करे। इसके साथ ही अदालत ने स्वतः संज्ञान से शुरू किए गए मामले को समाप्त किया।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय, जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस नितिन वासुदेवो सांबरे की पूर्ण पीठ ने यह आदेश पारित किया।अदालत ने निर्देश दिया,“जिला अदालतों में लागू की गई सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी और पुलिस अधिकारी संबंधित जिला एवं सेशन जजों के साथ मिलकर इसकी...
हनी-ट्रैप वसूली गिरोह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी पुलिस को जांच और कड़ी निगरानी के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मेरठ जोन में संचालित कथित हनी-ट्रैप और ब्लैकमेल गिरोह की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को इस पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया।जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस तरून सक्सेनाकी खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के गिरोह का अस्तित्व, जो महिलाओं के जरिए लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल करता है, समाज की “गंभीर रूप से चिंताजनक स्थिति” को दर्शाता है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस तरह के अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो एक...
शराब नीति मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत अन्य को ED की 'प्रतिकूल टिप्पणियों' के खिलाफ याचिका पर जवाब देने का अंतिम मौका दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं Arvind Kejriwal, Manish Sisodia सहित अन्य आरोपियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया।जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने निर्देश दिया कि सभी प्रतिवादी एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करें, अन्यथा उनका जवाब दाखिल करने का अधिकार समाप्त कर दिया जाएगा।सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कोर्ट को बताया कि अब तक केवल विनोद चौहान ने ही जवाब दाखिल किया है, जबकि एक अन्य व्यक्ति ने जवाब दाखिल...
अपील/रिवीजन में संशोधन पर Order VI Rule 17 का प्रावधान सख्ती से लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश VI नियम 17 का वह प्रावधान, जो ट्रायल शुरू होने के बाद संशोधन पर रोक लगाता है, अपील और पुनरीक्षण (revision) कार्यवाही में सख्ती से लागू नहीं होता।जस्टिस योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि यह प्रावधान मूल रूप से सिविल मुकदमों (trial) में pleadings के संशोधन को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है, ताकि साक्ष्य शुरू होने के बाद देरी से बदलाव कर प्रक्रिया को प्रभावित न किया जा सके। इसलिए इसे अपील या पुनरीक्षण...
BCD चुनाव में दखल से हाईकोर्ट का इनकार, कहा- मतों के मिलान के बाद ही घोषित होंगे नतीजे
दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) चुनाव 2026 की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम तभी घोषित किए जाएंगे जब सभी मतों और बैलेट का मिलान पूरा हो जाएगा।जस्टिस अमित बंसल ने यह टिप्पणी उन 9 उम्मीदवारों की याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिन्होंने मतदान और मतगणना के आंकड़ों में कथित अंतर का मुद्दा उठाया था।BCD चुनाव 21 से 23 फरवरी के बीच आयोजित हुए थे जिनकी निगरानी रिटायरमेंट जस्टिस तलवंत सिंह द्वारा की जा रही है, जिन्हें रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया...
रिश्वत में दोषी कर्मचारी पर विभागीय जांच जरूरी नहीं, बर्खास्तगी बरकरार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि रिश्वत के मामले में दोषसिद्ध सरकारी कर्मचारी के खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं होती। अदालत ने एक पूर्व सरकारी कर्मचारी की सेवा से बर्खास्तगी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में पूरा अवसर मिल चुका हो और उसे दोषी ठहराया जा चुका हो, तो उसी तथ्यों पर दोबारा विभागीय जांच कराना सार्वजनिक हित और प्रशासनिक दक्षता के विपरीत होगा।मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता को...
शनिवार को काम नहीं करेंगे वकील: दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि उसके सदस्य हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को छुट्टी पर रहेंगे। यह निर्णय उस व्यवस्था के विरोध में लिया गया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने इन शनिवारों को कार्य दिवस घोषित किया।बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में कहा कि हाईकोर्ट से कई बार इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया लेकिन कोई बदलाव नहीं किया गया। इसके बाद कार्यकारिणी समिति ने यह कदम उठाया।प्रस्ताव के अनुसार वकीलों ने शनिवार की सुनवाई से जुड़ी कई...
माता-पिता की जिम्मेदारी के नाम पर पत्नी की उपेक्षा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ा भरण-पोषण बरकरार रखा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति की अपने माता-पिता और भाई-बहनों के प्रति जिम्मेदारियां उसे अपनी पत्नी के भरण-पोषण के प्राथमिक दायित्व से मुक्त नहीं कर सकतीं।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने एक रेलवे कर्मचारी द्वारा दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।मामले में फैमिली कोर्ट इटावा ने पत्नी के लिए मासिक भरण-पोषण राशि 3500 रुपये से बढ़ाकर 8000 रुपये और नाबालिग पुत्र के लिए 1500 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये की थी।पति ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी...
DNA रिपोर्ट नेगेटिव होने पर भी पीड़िता का बयान सर्वोपरि: यौन उत्पीड़न के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसे अन्य मेडिकल सबूतों से समर्थन मिलता है, तो केवल 'नेगेटिव' डीएनए (DNA) रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब अभियोजन पक्ष गवाही के माध्यम से अपराध सिद्ध कर देता है, तो DNA रिपोर्ट का मिलान न होना मामले को कमजोर नहीं करता।मामले की पृष्ठभूमियह फैसला जस्टिस प्रांजल दास की एकल पीठ ने सुनाया। मामला एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़ा है जिसके साथ उस समय बलात्कार किया गया...
100 से अधिक मामलों में आरोपी को हर बार पेशी के लिए लाना बोझिल: राजस्थान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की दी अनुमति
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जिन मामलों में किसी आरोपी के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज हों, वहां हर बार शारीरिक रूप से अदालत में पेश करना न केवल पुलिस व्यवस्था पर बोझ डालता है बल्कि सरकारी खर्च भी बढ़ाता है। ऐसे मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी एक व्यवहारिक और प्रभावी विकल्प है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने 100 से अधिक FIR का सामना कर रहे आरोपियों को सभी मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि जब आरोपी की पहचान विवादित...
वैवाहिक बलात्कार भले अपराध नहीं, लेकिन प्रेम संबंध में जबरन संबंध अपराध—FIR रद्द करने से इनकार: गौहाटी हाईकोर्ट
गौहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि प्रेम संबंध (love relationship) होने से बलात्कार के अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती। अदालत ने कहा कि यदि महिला की इच्छा के विरुद्ध जबरन शारीरिक संबंध बनाया जाता है, तो वह आपराधिक कृत्य ही रहेगा।जस्टिस प्रांजल दास की पीठ एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO अधिनियम की धारा 4 के तहत दर्ज अपराधों से जुड़ा है।मामले...



















