हाईकोर्ट

बार एसोसिएशन की सदस्यता स्वैच्छिक है, वकील को प्रैक्टिस करने से नहीं रोका जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट ने BCI के नियम को सीमित किया
बार एसोसिएशन की सदस्यता स्वैच्छिक है, वकील को प्रैक्टिस करने से नहीं रोका जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट ने BCI के नियम को सीमित किया

तेलंगाना हाईकोर्ट ने 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015' के नियम 6 को सीमित करते हुए कहा कि वकीलों के लिए बार एसोसिएशन की सदस्यता अनिवार्य नहीं की जा सकती और सदस्यता न होने पर किसी वकील को कानून की प्रैक्टिस करने से रोका या अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। [2026 LiveLaw (Tel) 86]जस्टिस एन. तुकारामजी की सिंगल जज बेंच ने कहा:“नियम 6 की व्याख्या या उसे लागू इस तरह से नहीं किया जा सकता कि बार एसोसिएशन की सदस्यता अनिवार्य हो जाए या प्रैक्टिस करने के अधिकार पर...

नामर्दी के आरोपों को गलत साबित करने के लिए पत्नी के नार्को, पॉलीग्राफ और DNA टेस्ट की मांग: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की पति की अर्ज़ी
नामर्दी के आरोपों को गलत साबित करने के लिए पत्नी के नार्को, पॉलीग्राफ और DNA टेस्ट की मांग: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की पति की अर्ज़ी

राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की उस अर्ज़ी को खारिज करने का फैसला सही ठहराया, जिसमें उसने अपनी और अपनी पत्नी की संयुक्त मेडिकल जांच की मांग की थी, ताकि पत्नी द्वारा तलाक की अर्ज़ी में लगाए गए शारीरिक अक्षमता और नामर्दी के आरोपों को गलत साबित किया जा सके। [2026 LiveLaw (Raj) 248]जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने कहा कि पहली बात तो यह कि अर्ज़ी कार्यवाही के बहुत बाद के चरण में दायर की गई। दूसरी बात, याचिकाकर्ता कथित यौन अक्षमता या नामर्दी के मुद्दे के लिए नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट, DNA टेस्ट आदि की...

TMC के बागी गुट के पास सबसे ज़्यादा संख्या बल: हाईकोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में रिताब्रत बनर्जी की नियुक्ति को सही ठहराया
"TMC के बागी गुट के पास सबसे ज़्यादा संख्या बल": हाईकोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में रिताब्रत बनर्जी की नियुक्ति को सही ठहराया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को अंतरिम राहत देने से इनकार किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर विरोधी गुट के नेता रिताब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी। कोर्ट ने कहा कि रोक (इंजंक्शन) लगाने के लिए कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। (2026 LiveLaw (Cal) 251)जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) विधायक दल के बहुमत ने स्पीकर के सामने विरोधी दावेदार का समर्थन किया। साथ ही चट्टोपाध्याय जिस...

पगड़ी देने से किरायेदारी कभी खत्म न होने वाली नहीं बन जाती, मकान-मालिक अब भी बेदखली की मांग कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
'पगड़ी' देने से किरायेदारी कभी खत्म न होने वाली नहीं बन जाती, मकान-मालिक अब भी बेदखली की मांग कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किरायेदार द्वारा 'पगड़ी' (लंबे समय तक किरायेदारी के अधिकार पाने के लिए एक बार में दी जाने वाली रकम) का भुगतान करने से किरायेदारी कभी खत्म न होने वाली नहीं बन जाती और इससे मकान-मालिक और किरायेदार के बीच के बुनियादी रिश्ते में कोई बदलाव नहीं आता।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा एक दुकान से जुड़े विवाद की सुनवाई कर रही थीं, जिसे 1 जनवरी, 2001 के किराये के समझौते के तहत अपीलकर्ता को किराये पर दिया गया।अपीलकर्ता का दावा था कि किराये के समझौते के अलावा, दोनों पक्षों ने समझौता ज्ञापन...

कानूनी वारिस, मृतक ट्रस्टी द्वारा रिप्रेजेंटेटिव कैपेसिटी में दायर मुकदमे को आगे नहीं बढ़ा सकते; यह अधिकार जीवित ट्रस्टी के पास होता है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
कानूनी वारिस, मृतक ट्रस्टी द्वारा 'रिप्रेजेंटेटिव कैपेसिटी' में दायर मुकदमे को आगे नहीं बढ़ा सकते; यह अधिकार जीवित ट्रस्टी के पास होता है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक ट्रस्टी के कानूनी वारिसों को उस मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए पक्षकार नहीं बनाया जा सकता, जिसे ट्रस्टी ने 'रिप्रेजेंटेटिव कैपेसिटी' (प्रतिनिधि के तौर पर) में दायर किया। कोर्ट ने दोहराया कि ऐसे मुकदमे को आगे बढ़ाने का अधिकार केवल जीवित या विधिवत नियुक्त ट्रस्टियों के पास होता है। [2026 LiveLaw (PH) 200]।जस्टिस विकास बहल ने रिवीजन याचिका खारिज की, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें मृतक वादी के कानूनी वारिस को प्रतिस्थापित (substitution)...

हाईकोर्ट जज के तौर पर मिली ग्रेच्युटी, लोकायुक्त के तौर पर सेवा के लिए अलग ग्रेच्युटी पाने में रुकावट नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
हाईकोर्ट जज के तौर पर मिली ग्रेच्युटी, लोकायुक्त के तौर पर सेवा के लिए अलग ग्रेच्युटी पाने में रुकावट नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अपनी सेवाओं के लिए ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं और यह हाईकोर्ट जज के तौर पर मिलने वाले फायदों से अलग है। [2026 LiveLaw (MP) 218]तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की डिवीजन बेंच ने कहा,"...याचिकाकर्ता क्रमशः लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त के तौर पर दी गई सेवा के लिए 'डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी' (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी) का लाभ पाने के हकदार हैं, भले ही उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज का पद संभालने के कारण...

एम्बेसडर होटल ने पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट के तहत केंद्र के बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
एम्बेसडर होटल ने 'पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट' के तहत केंद्र के बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

एम्बेसडर होटल के मालिक ने 'पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट' के तहत जारी बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। यह नोटिस दशकों पुराने मामले में अपीलीय अदालत के उस फैसले के तुरंत बाद जारी किया गया, जिसमें केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया गया। अदालत ने माना कि मालिक ने संबंधित प्रॉपर्टी पर पब्लिक होटल बनाकर और चलाकर सरकारी ग्रांट (अनुदान) की शर्तों का उल्लंघन किया।होटल के मालिक 'सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड' ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर तीस हजारी कोर्ट (सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट) के...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन को सही ठहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन को सही ठहराया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर की एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन को चुनौती देने वाली दो रिट याचिकाओं को खारिज किया। कोर्ट ने पाया कि फिजिकल (हाथ से) स्वतंत्र मूल्यांकन से मिले अंकों में कोई खास अंतर नहीं था। [2026 LiveLaw (MP) 217]एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और टेक्नोलॉजी पार्टनर 'माइंड लॉजिक्स इन्फ्रा' (Mindlogicx Infra) को सिस्टम की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कुछ उपाय सुझाए:"सिंबल (चिह्न),...

किशोरावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने POCSO मामले में उम्रकैद की सज़ा घटाकर 10 साल की
किशोरावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने POCSO मामले में उम्रकैद की सज़ा घटाकर 10 साल की

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि रोमांटिक रिश्तों से जुड़े मामलों में सज़ा तय करते समय किशोरावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलावों का असर एक अहम बात हो सकती है, भले ही POCSO Act के तहत सहमति या रोमांटिक रिश्ता कोई बचाव का आधार न हो।जस्टिस आनंद वेंकटेश और जस्टिस केके रामकृष्णन की बेंच ने दोषी की उम्रकैद की सज़ा को घटाकर 10 साल की कठोर कैद में बदल दिया; अपराध करते समय दोषी की उम्र मुश्किल से 19 साल थी।कोर्ट ने कहा,"आरोपी पीड़िता को लंबे समय से जानता था... आरोपी और पीड़िता के बीच रिश्ते को देखते हुए यह...

कर्मचारी के हस्ताक्षरित वेतन पुनर्गठन पत्र से ऊपर नहीं हो सकता कंपनी का आंतरिक पत्राचार: दिल्ली हाईकोर्ट
कर्मचारी के हस्ताक्षरित वेतन पुनर्गठन पत्र से ऊपर नहीं हो सकता कंपनी का आंतरिक पत्राचार: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कंपनी के भीतर होने वाला आंतरिक पत्राचार किसी कर्मचारी द्वारा हस्ताक्षरित वेतन पुनर्गठन पत्र की स्पष्ट शर्तों को निष्प्रभावी नहीं कर सकता।अदालत ने पूर्व कर्मचारी की अपील खारिज की, जिसमें उसने कथित रूप से रोके गए वेतन और क्षतिपूर्ति बोनस की वसूली की मांग की थी।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने निचली अदालत द्वारा वसूली वाद खारिज किए जाने का निर्णय बरकरार रखते हुए कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर सकी कि कंपनी ने कम किए गए वेतन के हिस्से को भविष्य में...

जिलाधिकारी के हस्ताक्षर बिना राशन दुकान लाइसेंस रद्द करने का आदेश अमान्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
जिलाधिकारी के हस्ताक्षर बिना राशन दुकान लाइसेंस रद्द करने का आदेश अमान्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि यदि उचित मूल्य दुकान (राशन दुकान) का लाइसेंस रद्द करने वाले आदेश पर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं तो ऐसा आदेश कानून की नजर में टिक नहीं सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी अन्य अधिकारी द्वारा आदेश की सूचना भेज देने से उसे जिलाधिकारी का वैध आदेश नहीं माना जा सकता। जस्टिस पंकज पुरोहित की पीठ एक राशन दुकान संचालक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता ने 19 नवंबर 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जरिए उसकी उचित मूल्य दुकान का...

सिर्फ हस्ताक्षर से इनकार करने भर से जालसाजी साबित नहीं हो सकती, विशेषज्ञ राय जरूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट
सिर्फ हस्ताक्षर से इनकार करने भर से जालसाजी साबित नहीं हो सकती, विशेषज्ञ राय जरूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति द्वारा अपने हस्ताक्षरों से इनकार कर देने मात्र के आधार पर जालसाजी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि जालसाजी का आरोप गंभीर नागरिक और आपराधिक परिणाम उत्पन्न करता है, इसलिए ऐसे निष्कर्ष केवल अनुमान या एकतरफा दावों के आधार पर नहीं दिए जा सकते। जस्टिस पंकज पुरोहित की पीठ एक उचित मूल्य दुकान संचालक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में ग्राम सभा के उस प्रस्ताव, जिला मजिस्ट्रेट के आदेश और अपीलीय...

दिव्यांगों के अधिकारों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता जरूरी, सेवा विवाद होने पर भी जनहित याचिका सुनवाई योग्य: झारखंड हाईकोर्ट
दिव्यांगों के अधिकारों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता जरूरी, सेवा विवाद होने पर भी जनहित याचिका सुनवाई योग्य: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में सामान्य सेवा विवादों पर लागू प्रतिबंध के बावजूद जनहित याचिका पर विचार किया जा सकता है।अदालत ने कहा कि दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दों को "विशेष संवेदनशीलता" के साथ देखा जाना चाहिए। चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्ष 2018 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई, जिसके तहत भर्ती प्रक्रियाओं में दिव्यांगता प्रमाणपत्र...

दोषसिद्धि जरूरी नहीं, आदतन अपराधी होने के उचित आधार पर खोली जा सकती है हिस्ट्रीशीट: राजस्थान हाईकोर्ट
दोषसिद्धि जरूरी नहीं, आदतन अपराधी होने के उचित आधार पर खोली जा सकती है हिस्ट्रीशीट: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस नियम, 1965 के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने या दोबारा सक्रिय करने के लिए पूर्व दोषसिद्धि (सजा) अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि पुलिस के पास यह मानने के उचित आधार हैं कि कोई व्यक्ति आदतन अपराध करने का आदी है, तो उसके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोली जा सकती है।जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस नियमों में प्रयुक्त "आदतन अपराधी" की व्याख्या राजस्थान आदतन अपराधी अधिनियम, 1953 से नहीं ली जा सकती। अधिनियम के तहत...

25% वकील कोटा विवाद: जिला जज भर्ती में न्यायिक अधिकारियों की एंट्री को चुनौती, बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा मामला
25% वकील कोटा विवाद: जिला जज भर्ती में न्यायिक अधिकारियों की एंट्री को चुनौती, बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा मामला

महाराष्ट्र में जिला जज पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। प्रैक्टिस कर रहे वकीलों के एक समूह ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि बार से सीधे भर्ती के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत कोटे में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को शामिल करने की अनुमति देकर भर्ती नियमों का उल्लंघन किया गया।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उच्च न्यायिक सेवा में भर्ती के लिए तीन अलग-अलग माध्यम निर्धारित हैं। इनमें 50 प्रतिशत पद पदोन्नति से, 25 प्रतिशत पद सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से...

हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित
हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित

चर्चित हनीमून मर्डर केस में मेघालय हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।करीब 10 दिनों तक चली विस्तृत सुनवाई के बाद जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकलपीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा। सोनम रघुवंशी अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है। उसे इस वर्ष अप्रैल में शिलांग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत से जमानत मिली थी।निचली अदालत ने जमानत देते हुए कहा था कि पुलिस ने गिरफ्तारी के आधारों की सही जानकारी सोनम को नहीं दी, जिससे...

किरायेदारी पाने के लिए मृत किरायेदार के साथ रहना जरूरी नहीं, वारिस को मिलेगा अधिकार: बॉम्बे हाईकोर्ट
किरायेदारी पाने के लिए मृत किरायेदार के साथ रहना जरूरी नहीं, वारिस को मिलेगा अधिकार: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मृत किरायेदार की किरायेदारी विरासत में पाने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वारिस उसकी मृत्यु के समय उसके साथ रह रहा हो।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किरायेदार की मृत्यु के समय उसके साथ कोई पारिवारिक सदस्य निवास नहीं कर रहा था तो उसके किसी भी वैध वारिस को किरायेदार के रूप में मान्यता दी जा सकती है। जस्टिस एम. एम. साठये ने यह फैसला पारसी पंचायत फंड्स एंड प्रॉपर्टीज, बॉम्बे द्वारा दायर याचिका पर सुनाया।मामला एक फ्लैट की किरायेदारी से जुड़ा है। मूल...

नाबालिग से दुष्कर्म मामलों में जमानत सुनवाई पीड़ित की गैरहाजिरी में भी हो सकती है, यदि उसे नोटिस दिया गया हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
नाबालिग से दुष्कर्म मामलों में जमानत सुनवाई पीड़ित की गैरहाजिरी में भी हो सकती है, यदि उसे नोटिस दिया गया हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483(2) की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया। अदालत ने कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म जैसे मामलों में जमानत अर्जी पर सुनवाई केवल इसलिए नहीं रोकी जा सकती, क्योंकि पीड़ित या शिकायतकर्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, बशर्ते उसे सुनवाई की सूचना विधिवत दे दी गई हो।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर देना है। इसके बाद अदालत में उपस्थित होना या न होना उसकी अपनी इच्छा पर निर्भर करता...