हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या की जांच पूरी करने के लिए झूठे गवाह थोपने पर पुलिस की कड़ी आलोचना की, डीजीपी को उचित जांच के लिए दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या की जांच पूरी करने के लिए झूठे गवाह थोपने पर पुलिस की कड़ी आलोचना की, डीजीपी को उचित जांच के लिए दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया

2021 के एक हत्या के मामले में दो लोगों की दोषसिद्धि रद्द करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस अधिकारियों ने जांच की निष्पक्षता बनाए रखे बिना जांच पूरी करने के अपने उत्साह में एक झूठे गवाह को थोप दिया।राज्य में जांच की बेईमानी स्थिति पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने मध्य प्रदेश के पुलिस डायरेक्टर जनरल (DGP) को उचित जांच के लिए उचित दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही DGP को संबंधित जांच अधिकारी और वर्तमान मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जाँच दर्ज करने...

प्रक्रिया पेटेंट विवाद में शुरुआती चरण में भी प्रतिवादी से निर्माण प्रक्रिया का खुलासा मांगा जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
प्रक्रिया पेटेंट विवाद में शुरुआती चरण में भी प्रतिवादी से निर्माण प्रक्रिया का खुलासा मांगा जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया कि पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 104A को वाद के प्रारंभिक चरण में भी लागू किया जा सकता है, जब पेटेंटधारी यह मांग करता है कि प्रतिवादी अपनी निर्माण प्रक्रिया का खुलासा करे। कोर्ट ने कहा कि इस धारा के प्रयोग को केवल मुकदमे के अंतिम निर्णय तक सीमित नहीं किया जा सकता, खासकर जब वादी एक अंतरिम आवेदन के माध्यम से यह जानकारी मांग रहा हो।मामले में एफ. हॉफमैन-ला रोश एजी और अन्य, जो रोश समूह का हिस्सा हैं, ने ब्रेस्ट कैंसर के उपचार में प्रयुक्त अपनी पेटेंट दवा 'पर्टुज़ुमैब'...

मात्र स्कूल सर्टिफिकेट से ही तय नहीं हो सकती अपहरण पीड़िता की आयु: राजस्थान हाईकोर्ट
मात्र स्कूल सर्टिफिकेट से ही तय नहीं हो सकती अपहरण पीड़िता की आयु: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को नाबालिग लड़की के अपहरण के आरोप से बरी करने के निचली अदालत का फैसला बरकरार रखते हुए कहा कि मात्र स्कूल द्वारा जारी सर्टिफिकेट यदि उसके पीछे कोई ठोस दस्तावेज या साक्ष्य न हो, तो वह किसी पीड़िता की आयु निर्धारित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।कोर्ट ने कहा कि स्कूल सर्टिफिकेट केवल उस स्थिति में स्वीकार्य हो सकता है, जब वह स्कॉलरशिप रजिस्ट्रेशन में दर्ज प्रविष्टियों पर आधारित हो और वह प्रविष्टियां एडमिशन फॉर्म में माता-पिता द्वारा दर्ज जानकारी पर आधारित हों। लेकिन इस...

धारा 17-A का संरक्षण भ्रष्ट अधिकारियों के लिए ढाल नहीं बन सकता यदि ऑडियो/वीडियो में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हो: राजस्थान हाईकोर्ट
धारा 17-A का संरक्षण भ्रष्ट अधिकारियों के लिए ढाल नहीं बन सकता यदि ऑडियो/वीडियो में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हो: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोप में ऑडियो या वीडियो जैसे प्रथम दृष्टया इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं तो केवल धारा 17-A, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पूर्वानुमति न मिलने के आधार पर उसके विरुद्ध अभियोजन न चलाना न्याय का उपहास होगा।धारा 17-A के अनुसार यदि कोई अपराध किसी सरकारी अधिकारी द्वारा अपने पद का दायित्व निभाते हुए किसी निर्णय या सिफारिश से संबंधित हो तो उस पर जांच या पूछताछ से पहले सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक है। हालांकि यदि व्यक्ति को...

गांजा की बरामदगी कॉमर्शियल लेवल से केवल थोड़ा अधिक, NDPS Act की धारा 37 की कड़ी शर्तें लागू नहीं होतीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत दी
गांजा की बरामदगी कॉमर्शियल लेवल से केवल थोड़ा अधिक, NDPS Act की धारा 37 की कड़ी शर्तें लागू नहीं होतीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह माना कि अगर किसी आरोपी से बरामद मादक पदार्थ की मात्रा NDPS Act के तहत निर्धारित कॉमर्शियल लेवल से केवल थोड़ी अधिक हो, तो धारा 37 की कठोर शर्तें सख्ती से लागू नहीं होतीं।इस मामले में आवेदक को 21.508 किलोग्राम गांजा के साथ पकड़ा गया था। NDPS Act की धारा 37 के तहत जमानत तभी दी जा सकती है, जब आरोपी यह साबित करे कि उसके दोषी होने की कोई ठोस संभावना नहीं है और यदि उसे जमानत दी जाती है तो वह फिर से अपराध नहीं करेगा।जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा,“आवेदक से कथित रूप से बरामद गांजा की...

साइबर ठगी मामले में ट्रायल कोर्ट की अनुचित नरमी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सख्त, कहा- सीनियर सिटीजन की फरियाद को अनदेखा करना चिंता का विषय
साइबर ठगी मामले में ट्रायल कोर्ट की अनुचित नरमी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सख्त, कहा- सीनियर सिटीजन की फरियाद को अनदेखा करना चिंता का विषय

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यशैली पर सख्त नाराज़गी जताते हुए कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में इस तरह की ढिलाई न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करती है। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उस परिस्थिति पर चिंता जताई, जिसमें एक 76 वर्षीय रिटायर सेना अधिकारी को चार वर्षों से न्याय के लिए अमृतसर से मोहाली की अदालतों में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं लेकिन अब तक केवल दो ही गवाहों की गवाही हो पाई।जस्टिस एन.एस. शेखावत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का रवैया न केवल अभियुक्तों के प्रति...

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 2(2) आदिवासी महिलाओं के लिए पिता की संपत्ति पर दावा करने में बाधा: राजस्थान हाईकोर्ट ने संशोधन का सुझाव दिया
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 2(2) आदिवासी महिलाओं के लिए पिता की संपत्ति पर दावा करने में बाधा: राजस्थान हाईकोर्ट ने संशोधन का सुझाव दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब गैर-अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों की बेटियां पिता की संपत्ति में समान हिस्से की हकदार हैं तो ST समुदाय की बेटियों को समान अधिकार से वंचित करने का कोई कारण नहीं है।हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 2 अधिनियम के लागू होने का दायरा निर्धारित करती है। उक्त धारा 2(2) यह प्रावधान करती है कि अधिनियम में निहित कोई भी बात संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (25) के अर्थ में किसी भी अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर लागू नहीं होगी, जब तक कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना...

किसी व्यक्ति को न्यायालय जाने से धमकाना सबसे गंभीर आपराधिक अवमानना: इलाहाबाद हाईकोर्ट
किसी व्यक्ति को न्यायालय जाने से धमकाना सबसे गंभीर आपराधिक अवमानना: इलाहाबाद हाईकोर्ट

यह देखते हुए कि कोई भी व्यक्ति किसी व्यक्ति को न्यायालय जाने से नहीं धमका सकता इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस तरह के हस्तक्षेप को न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली सबसे बड़ी बाधा बताया और इसलिए इसे सबसे गंभीर आपराधिक अवमानना माना।जस्टिस जे.जे. मुनीर की पीठ ने यह टिप्पणी अमित सिंह परिहार द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें फतेहपुर जिले के एक गांव में सरकारी पेड़ों की अवैध कटाई और चोरी का आरोप लगाया गया था।मुख्यतः 31 जुलाई, 2025 को दायर पूरक हलफनामे में याचिकाकर्ता ने...

वकीलों की हड़ताल पर मामला स्थगित करना अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SDM को जारी किया कारण बताओ नोटिस
वकीलों की हड़ताल पर मामला स्थगित करना अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SDM को जारी किया कारण बताओ नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते सप्ताह अलीगढ़ में एक उप-जिलाधिकारी (SDM) को उस समय फटकार लगाई, जब उन्होंने स्थानीय बार एसोसिएशन की हड़ताल के आह्वान के चलते मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।जस्टिस जे.जे. मुनीर की एकल पीठ ने कहा कि बार एसोसिएशन के इस प्रकार के आह्वान को स्वीकार करना न्यायिक अधिकारी के आचरण में कदाचार की श्रेणी में आ सकता है। इसके चलते उस अधिकारी को पद से हटाने तक की अनुशंसा की जा सकती है।कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की...

मेधावी स्टूडेंट इस तरह के व्यवहार के हकदार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मेरिट सर्टिफिकेट देने से इनकार करने पर स्कूल बोर्ड पर 25,000 का जुर्माना लगाया
मेधावी स्टूडेंट इस तरह के व्यवहार के हकदार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मेरिट सर्टिफिकेट देने से इनकार करने पर स्कूल बोर्ड पर 25,000 का जुर्माना लगाया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी उम्मीदवार के अंक बढ़ने के बाद उसे मेरिट सर्टिफिकेट जारी करना स्कूल शिक्षा बोर्ड का कर्तव्य है और वह इसकी ज़िम्मेदारी स्कूल प्रशासन पर नहीं डाल सकता।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की,"याचिकाकर्ता को केवल उन आधारों पर मनमाने ढंग से मेरिट सर्टिफिकेट देने से इनकार नहीं किया जा सकता, जैसा कि प्रतिवादी-बोर्ड ने अपने जवाब में प्रचारित किया। मेधावी स्टूडेंट इस तरह के व्यवहार के हकदार नहीं हैं। उसकी उत्कृष्टता को पुरस्कृत करने के बजाय...

S.223 BNSS | शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज किए बिना अभियुक्त को नोटिस जारी नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
S.223 BNSS | 'शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज किए बिना अभियुक्त को नोटिस जारी नहीं किया जा सकता': इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया कि कोई भी मजिस्ट्रेट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत किसी संभावित अभियुक्त को शिकायतकर्ता और गवाहों, यदि कोई हो, के बयान दर्ज किए बिना नोटिस जारी नहीं कर सकता।जस्टिस रजनीश कुमार की पीठ ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय, लखनऊ द्वारा इस प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए अभियुक्त (आवेदक-राकेश कुमार चतुर्वेदी) को जारी किए गए नोटिस को रद्द कर दिया।न्यायालय ने पाया कि विवादित नोटिस शिकायतकर्ता या गवाहों का शपथ पत्र दर्ज किए...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सहकर्मी की पत्नी और नाबालिग भतीजी को परेशान करने के आरोपी तीन पुलिसकर्मियों को आसान सजा देने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सहकर्मी की पत्नी और नाबालिग भतीजी को परेशान करने के आरोपी तीन पुलिसकर्मियों को 'आसान' सजा देने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ही परिवार के तीन दिल्ली पुलिस कर्मियों को एक सहकर्मी की पत्नी और 6 साल की भतीजी के साथ यौन अपराध करने के जुर्म में नरमी बरतने से इनकार किया।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा,"दोषी का आचरण जिद्दी था, वह अक्सर सड़क पर खड़ा होकर शिकायतकर्ता और उसकी भतीजी को देखकर अपने कपड़े उतार देता था। दिल्ली पुलिस में कार्यरत दोषी के इस कृत्य को न तो माफ किया जा सकता है और न ही नजरअंदाज किया जा सकता है। एक पुलिस अधिकारी होने के नाते वह कानून का पालन करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के...

Panchayat Polls | फर्जी या वास्तविक वोट? ऐसे विवादों का निपटारा केवल चुनाव याचिका में ही हो सकता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
Panchayat Polls | फर्जी या वास्तविक वोट? ऐसे विवादों का निपटारा केवल चुनाव याचिका में ही हो सकता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

पिछले हफ़्ते उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायत चुनावों में फ़र्ज़ी मतदान से जुड़े आरोप तथ्य पर सवाल उठाते हैं और इन पर केवल चुनाव याचिका में ही फैसला हो सकता है।जस्टिस रवींद्र मैठाणी की पीठ ने 'हाथ-पर-हाथ धरे' रहने का रुख़ अपनाते हुए विशेष मतदान केंद्र में डाले गए वोटों को रद्द करने और 'फर्जी' वोट बनवाने के 'भ्रष्ट' तरीके में शामिल दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ स्वतंत्र जाँच की मांग वाली रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।संक्षेप में मामलायह रिट याचिका राजेंद्र सिंह चौहान द्वारा दायर की गई...

Maintenance Case| पत्नी अपने पति की वास्तविक आय/संपत्ति का पता लगाने के लिए बैंक अधिकारियों को गवाह के तौर पर बुलाने की मांग कर सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
Maintenance Case| पत्नी अपने पति की वास्तविक आय/संपत्ति का पता लगाने के लिए बैंक अधिकारियों को गवाह के तौर पर बुलाने की मांग कर सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

यह देखते हुए कि पतियों द्वारा अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए अपनी वास्तविक आय को छिपाना असामान्य नहीं है, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी अपने पति की वास्तविक आय/संपत्ति के बारे में अपने दावों की पुष्टि के लिए बैंक अधिकारियों सहित गवाहों को बुलाने के लिए बैंक अधिकारियों को गवाह के तौर पर बुलाने की मांग कर सकती है।जस्टिस रविंदर डुडेजा ने याचिकाकर्ता-पत्नी की याचिका स्वीकार की, जिसमें फैमिली कोर्ट ने प्रतिवादी-पति की वास्तविक आय के संबंध में अपने दावों की पुष्टि के लिए बैंक...

केवल जन-आक्रोश और मीडिया कवरेज अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में ज़मानत खारिज की
केवल जन-आक्रोश और मीडिया कवरेज अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में ज़मानत खारिज की

POCSO मामले में व्यक्ति को ज़मानत देने से इनकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल जन आक्रोश और घटना की मीडिया कवरेज अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकती।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा,"केवल जन आक्रोश और घटना की मीडिया कवरेज से अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती।"भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 302 (हत्या), 363 (अपहरण) और 201 (साक्ष्य मिटाना) और POCSO Act की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत अपराधों के लिए 2016 में FIR दर्ज की गई थी।आरोप है कि आरोपी ने 8 साल की बच्ची के साथ बलात्कार किया,...

गैर-जमानती अपराध से जुड़े शिकायत मामले में केवल समन जारी होने पर अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
गैर-जमानती अपराध से जुड़े शिकायत मामले में केवल समन जारी होने पर अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत अग्रिम ज़मानत के दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि गैर-ज़मानती अपराध के आरोप से जुड़े किसी शिकायत मामले में केवल समन जारी होने पर अग्रिम ज़मानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि ऐसे मामले में पुलिस द्वारा बिना वारंट के गिरफ़्तारी की कोई आशंका नहीं होती।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने कहा,"...जब ज़मानती वारंट जारी किया जाता है तो हालांकि अभियुक्त को ज़मानती वारंट के अनुसरण में गिरफ़्तारी का डर हो सकता है, लेकिन उसे ज़मानत...

सेवा में आने से पहले दो बच्चे हुए हों तो तीसरे बच्चे पर मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं: हिमाचल हाईकोर्ट
सेवा में आने से पहले दो बच्चे हुए हों तो तीसरे बच्चे पर मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की दो संतानें उसकी सेवा में आने से पहले जन्मी हों और तीसरी संतान सेवा में आने के बाद हो, तो ऐसी स्थिति में केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972 के नियम 43(1) के तहत मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने टिप्पणी की: "याचिकाकर्ता ने सेवा में आने से पहले दो बच्चों को जन्म दिया था, लेकिन तीसरे बच्चे के लिए, जो सेवा में रहते हुए पैदा हुआ, पहली बार मातृत्व अवकाश की मांग की गई है। यदि ऐसा है, तो याचिकाकर्ता...

पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान भेजी गई महिला को वापस लौटने की अनुमति: केंद्र ने जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट को बताया
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान भेजी गई महिला को वापस लौटने की अनुमति: केंद्र ने जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट को बताया

जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक रक्षंदा राशिद को नया विज़िटर वीज़ा दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को ध्यान में रखते हुए दो अपीलों का निस्तारण कर दिया है। रक्षंदा को इस साल की शुरुआत में पहलगाम आतंकी घटना के बाद वीज़ा रद्द किए जाने के चलते देश से बाहर भेज दिया गया था।चीफ जस्टिस अरुण पाली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दी गई यह सूचना दर्ज की कि रक्षंदा राशिद को विज़िटर वीज़ा दिए जाने पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया...

नाबालिग से शादी अवैध, बलात्कार के अपराध को पवित्र करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
नाबालिग से शादी अवैध, बलात्कार के अपराध को 'पवित्र' करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि चूंकि नाबालिग से विवाह भारतीय कानून के तहत कानूनी रूप से अमान्य है, इसलिए बलात्कार के अपराध को "साफ़" करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जस्टिस संजीव नरूला ने कहा, "इसके अलावा, नाबालिग से विवाह न केवल भारतीय कानून के तहत अमान्य है, बल्कि बलात्कार के अपराध की प्रयोज्यता निर्धारित करने के उद्देश्य से भी अप्रासंगिक है, जब अभियोक्ता सहमति देने की उम्र से कम हो। दूसरे शब्दों में, इस संदर्भ में, कथित विवाह कानूनी रूप से अमान्य है और इसे वैधानिक बलात्कार के रूप...