हाईकोर्ट
FIR में पीड़िता के एससी होने के कारण अपराध होने का उल्लेख न होने पर SC/ST Act की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि जब FIR में यह उल्लेख न हो कि पीड़िता के खिलाफ अपराध, इस मामले में बलात्कार, इसलिए किया गया, क्योंकि वह अनुसूचित जाति समुदाय से है तो SC/ST Act की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, जो अग्रिम जमानत देने पर रोक लगाती है।जस्टिस वीरेंद्र सिंह:"प्रश्नाधीन FIR में इस तथ्य के संबंध में कोई संदर्भ नहीं है कि पीड़िता के साथ कथित तौर पर इस आधार पर बलात्कार किया गया कि वह अनुसूचित जाति समुदाय से है। यदि SC/ST Act की सामग्री के संबंध में कोई संदर्भ नहीं...
मंगोलपुरी मस्जिद के पास आधी रात में कथित तोड़फोड़ पर अवमानना याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (25 जून) को मंगोलपुरी इलाके की एक मस्जिद के आसपास हाल ही में हु तोड़फोड़ कार्रवाई के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर MCD को नोटिस जारी किया।जस्टिस रेनू भटनागर ने नगर निगम को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।याचिकाकर्ता मंगोलपुरी मोहम्मदी जामा मस्जिद और मदरसा अनवारुल उलूम वेलफेयर एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि नवंबर, 2024 के कोर्ट के आदेश के बावजूद बिना किसी सीमांकन के तोड़फोड़ की गई।नवंबर, 2024 में जस्टिस संजीव नरूला ने MCD को आदेश दिया था कि याचिकाकर्ताओं को...
हाईकोर्ट ने असम सरकार से गुवाहाटी में आउटडोर विज्ञापन को विनियमित करने वाले 2017 दिशानिर्देशों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में असम सरकार से 'गुवाहाटी आउटडोर विज्ञापन नीति दिशानिर्देश, 2017' के संशोधित संस्करण के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस (कार्यवाहक) लानुसुंगकुम जमीर और जस्टिस मानस रंजन पाठक की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने अभी तक अंतिम 'गुवाहाटी आउटडोर विज्ञापन पुलिस दिशानिर्देश, 2017' को अधिसूचित नहीं किया है।वर्तमान याचिकाकर्ता ने इससे पहले वर्ष 2016 में एक जनहित याचिका दायर कर हाईकोर्ट का दरवाजा...
मध्यस्थता खंड के कारण CPC की धारा 8 के तहत आवेदन दाखिल किए जाने तक शिकायत को खारिज नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने माना कि यदि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 8 के तहत उचित आवेदन दायर किया जाता है, तो न्यायालय को पक्षों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित करना चाहिए और कानून द्वारा वर्जित होने के कारण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) के आदेश VII नियम 11 (डी) के तहत शिकायत को खारिज कर सकता है। हालांकि, यदि ऐसा कोई आवेदन दायर नहीं किया जाता है और मध्यस्थता के लिए संदर्भ के लिए कोई प्रार्थना नहीं की जाती है, तो मध्यस्थता खंड का अस्तित्व ही आदेश VII नियम...
वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम उन अचल संपत्तियों पर लागू होता है जो वास्तव में और विशेष रूप से व्यापार और वाणिज्य के लिए उपयोग की जाती हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी विवाद को वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 के अधिकार क्षेत्र में आने के लिए संबंधित अचल संपत्ति का "वास्तव में उपयोग" तथा "विशेष रूप से व्यापार और वाणिज्य के उद्देश्य से उपयोग" किया जाना चाहिए। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की पीठ ने कहा,इस प्रकार, अचल संपत्ति से संबंधित विवाद स्वयं में वाणिज्यिक विवाद नहीं हो सकता है। लेकिन यह वाणिज्यिक विवाद बन जाता है, यदि यह वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम की धारा 2(1) (सी) के उप-खंड (vii) अर्थात "व्यापार या वाणिज्य में...
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO Act के तहत गिरफ्तार महिला को उसके नवजात शिशु की देखभाल के लिए 90 दिनों की अंतरिम जमानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में लगभग छह महीने से जेल में बंद महिला को अंतरिम रिहाई का आदेश दिया ताकि वह अपने नवजात शिशु की देखभाल कर सके।महिला को पिछले साल 12 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उस समय वह गर्भवती थी और 12 मई को हिरासत में उसने लड़के को जन्म दिया।इस बीच उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363/366/370/376/354ए, POCSO Act की धारा 4/6 और किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) 2015 की धारा 81 के तहत आरोप पत्र दायर किया गया।महिला ने दावा किया कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया और उसने रिहा...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग रिश्तेदार से बलात्कार करने वाले व्यक्ति की मौत की सजा को कम किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (25 जून) को 12 साल की नाबालिग लड़की से बलात्कार के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को कम कर दिया। न्यायालय ने यह देखते हुए मौत की सजा कम कर दी कि दोषी की उम्र 24 साल है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, सिवाय एक हत्या के मामले के, जिस पर अपील चल रही है। हालांकि, पीठ ने उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा कि "सभी परिस्थितियों की श्रृंखला अपीलकर्ता के अपराध की ओर इशारा करती है, किसी और की नहीं। इसलिए, जहां तक दोषसिद्धि का सवाल है, उसे बरकरार रखा जाना चाहिए और इसके...
पत्नी को गोली मारने के आरोपी को जमानत, बेटे-बेटी समेत अहम गवाह मुकर गए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने अपनी पत्नी की हत्या करने के आरोपी एक व्यक्ति को नियमित जमानत देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उसे अपराध से जोड़ने वाला कोई ठोस या विश्वसनीय सबूत पेश करने में विफल रहा है।जस्टिस राजेश सेखरी की पीठ ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि 'कोई सबूत नहीं' के ऐसे मामलों में अदालत समग्र दृष्टिकोण अपनाने और स्वतंत्रता के पक्ष में विवेक का प्रयोग करने के लिए बाध्य हैं। यह मामला आरोपी की पत्नी की कथित गोली मारकर हत्या से संबंधित है, अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि व्यक्ति ने उसे...
लोक निधि का उपयोग कर्मचारियों के कल्याण के लिए नहीं किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट की पीठ ने माना है कि चिकित्सा या टर्मिनल लाभों के लिए आधिकारिक परिसमापक स्थापना शुल्क खाते से धन का उपयोग करना आम तौर पर अस्वीकार्य है, क्योंकि ये धन परिसमापन प्रक्रिया से संबंधित प्रशासनिक और परिचालन लागतों के लिए निर्धारित किए जाते हैं - जैसे कि कानूनी शुल्क, प्रकाशन व्यय, और कार्यालय ओवरहेड्स - कर्मचारी कल्याण या लाभ नहीं।मामले की पृष्ठभूमि: वर्तमान आवेदन कंपनी (न्यायालय) नियम, 1959 के नियम 308 और 309 के तहत कलकत्ता में उच्च न्यायालय के आधिकारिक परिसमापक के कार्यालय में...
करियर में प्रगति हर व्यक्ति का अधिकार, NOC या इस्तीफा मनमाने ढंग से नकारा नहीं जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि एक अनिच्छुक कर्मचारी को केवल कर्मचारियों की कमी के आधार पर सेवा में बने रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है; प्रत्येक व्यक्ति को कैरियर की प्रगति का मौलिक अधिकार है, और इस्तीफे या एनओसी के अनुरोध को मनमाने ढंग से अस्वीकार नहीं किया जा सकता है, खासकर जब आवेदक कोर्स पूरा करने के बाद पांच साल तक सुपर स्पेशलिस्ट के रूप में राज्य की सेवा करने के लिए तैयार हो।मामले की पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, चंबा में जनरल...
“सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी के साथ न्यायपालिका की आलोचना जनता का भरोसा घटाती है”: विदाई भाषण में जस्टिस पी.बी. सुरेश
जस्टिस पीबी सुरेश कुमार, जो 30 जून को केरल हाईकोर्ट से रिटायर होने वाले हैं, ने सोशल मीडिया पोस्ट या टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त की, जिसमें न्यायपालिका, जजों या निर्णयों की आलोचना की गई है, बिना संदर्भ दिए या मुद्दे की जानकारी के बिना।उन्होनें ने कहा कि कई बार ये टिप्पणियां कानून की बुनियादी समझ के बिना धारणाओं के आधार पर की जाती हैं। उन्होनें ने व्यक्त किया कि इस तरह की टिप्पणियों से संस्था में जनता का विश्वास खत्म होता है। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्यवश, ऐसी टिप्पणियों से जनता का विश्वास कम हुआ है...
कानूनी विरोधाभास: भारत में ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाण पत्र और पैन कार्ड मान्यता
भारत में ट्रांसजेंडर अधिकारों में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय विकास हुआ है, जिसमें लिंग विविधता की बढ़ती मान्यता और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से कानूनी सुधार शामिल हैं। 2014 में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ एक ऐतिहासिक क्षण आया, जिसने ट्रांसजेंडर लोगों को "तीसरे लिंग" के रूप में मान्यता दी और संविधान के तहत उनके मौलिक अधिकारों की पुष्टि की। तब से, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 सहित...
वकीलों को प्रवर्तन निदेशालय के समन
14.06.2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस (पूर्व में रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस) द्वारा रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की पूर्व चेयरपर्सन रश्मि सलूजा को दिए गए कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना (ईएसओपी) की जांच के संबंध में वरिष्ठ वकील अरविंद दातार को पीएमएलए धारा 50 के तहत समन जारी किया। एससीएओआरए, मद्रास बार एसोसिएशन, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन और एससीबीए अध्यक्ष तथा कई अन्य वरिष्ठ वकीलों द्वारा दिए गए बयान में ईडी द्वारा इस कृत्य की कड़े शब्दों में...
2025 AIBE: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रश्नों को हटाने के बाद उत्तीर्ण अंकों में कमी की मांग करने वाली उम्मीदवार की जनहित याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (24 जून) को 2025 अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) के परिणामों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की। इस याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को वैध प्रश्नों की संख्या के अनुपात में न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों को कम करने और परिणाम पुनः प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।यह याचिका एक उम्मीदवार द्वारा दायर की गई थी, जो परीक्षा में उपस्थित हुआ था और उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उसने जनहित याचिका दायर कर मांग की कि 2025 AIBE के परिणामों को अन्यायपूर्ण,...
अनिश्चित अवधि के लिए विदेश में रहने वाले नागरिक FERA के तहत 'भारत से बाहर रहने वाले व्यक्ति' के अंतर्गत आते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि जब परिस्थितियां संकेत देती हैं कि कोई भारतीय नागरिक अनिश्चित अवधि के लिए विदेश में रहने का इरादा रखता है तो इसके विपरीत साबित करने का भार उस व्यक्ति पर है, जिसके भारत में रहने का मामला चल रहा है। श्रॉफ परिवार के सदस्यों द्वारा दायर अपीलों का बैच खारिज करते हुए न्यायालय ने भारतीय कंपनी के शेयरों में अनधिकृत लेनदेन से संबंधित FERA प्रावधानों के उल्लंघन के लिए दंड को बरकरार रखा।जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि अपीलकर्ता इस धारणा का...
वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से आयु निर्धारित होने पर कर्मचारी की जन्मतिथि में सुधार की अनुमति नहीं दी जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनिरुद्ध रॉय की पीठ ने माना कि जब वैधानिक प्रक्रिया का उचित तरीके से पालन किया गया हो तो कोई भी प्रक्रियागत त्रुटि या कानून का गलत इस्तेमाल वास्तविक या लिपिकीय गलती नहीं मानी जाती। वर्तमान मामले में चूंकि याचिकाकर्ता की आयु उसकी नियुक्ति के समय लागू नियमों के अनुसार निर्धारित की गई, इसलिए जन्मतिथि में सुधार के उसके अनुरोध को अस्वीकार करना अवैध नहीं माना जा सकता।संक्षिप्त तथ्य:याचिकाकर्ता दामोदर घाटी निगम (DVC) के ग्रुप सी कर्मचारी हैं, जिन्हें 19 जून, 1995 को एक...
हाईकोर्ट की ऑनलाइन सुनवाई के दौरान पेश आया अजीब वाकिया, टॉयलेट सीट पर बैठा नजर आया पक्षकार
गुजरात हाईकोर्ट की एकल पीठ के समक्ष पिछले सप्ताह ऑनलाइन सुनवाई के दौरान एक शख्स टॉयलेट सीट पर बैठा हुआ नजर आया। यह घटना उस वक्त हुई जब जस्टिस निरज़ार एस देसाई 20 जून को चेक बाउंस मामले में FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।यूट्यूब पर उपलब्ध वीडियो में दिखता है कि वह व्यक्ति बाद में बाथरूम से बाहर निकलता है और फिर किसी अन्य कमरे में बैठ जाता है।बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति FIR में मूल शिकायतकर्ता है। FIR के आरोपी पक्षों ने हाईकोर्ट में आपसी समझौते के आधार पर FIR रद्द करने की मांग की...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों पर लगी रोक हटाई, नए आरक्षण नियमों के खिलाफ याचिकाओं पर राज्य से जवाब मांगा
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में राज्य में पंचायत चुनावों से संबंधित सभी कार्यवाही पर लगी रोक हटा दी।बता दें, इससे पहले 23 जून को चीफ जस्टिस जी नरेंद्र और जस्टिस आलोक मेहरा की खंडपीठ ने चुनावों पर रोक लगाते हुए कहा था कि राज्य सरकार नए प्रस्तावित रोटेशन-आधारित आरक्षण नियमों के बारे में गजट अधिसूचना जारी करने में विफल रही है।यह अंतरिम आदेश तब आया जब पीठ मौजूदा आरक्षण रोटेशन नीति को खत्म करने और तत्काल प्रभाव से नई नीति लागू करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर...
अमेरिका जाते समय लापता 9 भारतीयों का सुराग नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने बंद की जनहित याचिका
गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार (27 जून) को उस जनहित याचिका (PIL) की कार्यवाही समाप्त कर दी, जो 9 भारतीय नागरिकों की गुमशुदगी को लेकर दायर की गई थी। ये सभी दिसंबर, 2022 में डोमिनिका से अमेरिका की ओर रवाना हुए थे और तभी से लापता हैं। कोर्ट को सूचित किया गया कि भारतीय दूतावासों और केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल सका।चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की खंडपीठ ने कहा,"याचिकाकर्ता के सीनियर वकील यतीन ओझा ने बताया कि इस मामले में अब और कुछ नहीं किया जा सकता।...
मकान विध्वंश पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों को ढहाया घर फिर से बनाने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में बागपत जिले के कलेक्टर उपजिलाधिकारी और तहसीलदार पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने अंतरिम स्थगन आदेश के बावजूद एक महिला का मकान ढहा दिया। कोर्ट ने कहा कि राज्य के कार्यकारी अधिकारी विशेष रूप से पुलिस और सिविल प्रशासन के अधिकारी न्यायिक आदेशों की अवहेलना कर गर्व महसूस करते हैं।जस्टिस जे.जे. मुनीर की एकल पीठ ने टिप्पणी की,"ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य के कार्यकारी अधिकारियों खासकर पुलिस और सिविल प्रशासन में न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने में एक तरह का गर्व महसूस...




















