हाईकोर्ट

साक्ष्य के लिए ई-साक्ष्य का इस्तेमाल करें, पुलिस BNSS के डिजिटल नियम अपनाए: केरल हाईकोर्ट
साक्ष्य के लिए 'ई-साक्ष्य' का इस्तेमाल करें, पुलिस BNSS के डिजिटल नियम अपनाए: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया है कि वह 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023' के अनुरूप अपनी जांच प्रक्रियाओं में त्वरित और व्यापक सुधार करे। कोर्ट ने हत्या जैसे गंभीर अपराधों में फूलप्रूफ जांच की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि पुलिस को अपनी जांच क्षमताओं को आधुनिक प्रशिक्षण, अपडेटेड प्रोटोकॉल और फॉरेंसिक तकनीक में रणनीतिक निवेश के माध्यम से उन्नत करना चाहिए।जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की पीठ ने यह टिप्पणी एक हत्या के मामले में आरोपी को बरी...

ट्रायल कोर्ट के जजों को ट्रांसफर के  बाद आरक्षित मामलों में दो-तीन सप्ताह के भीतर आदेश सुनाना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट
ट्रायल कोर्ट के जजों को ट्रांसफर के बाद आरक्षित मामलों में दो-तीन सप्ताह के भीतर आदेश सुनाना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी की निचली अदालतों के सभी न्यायाधीश अपने स्थानांतरण के बाद दो या तीन सप्ताह के भीतर आरक्षित मामलों में आदेश या निर्णय सुनाएंगे और उन्हें बाद के न्यायाधीश के समक्ष पुनर्विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा। जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा, "पीठासीन अधिकारी ऐसे सभी मामलों में पहले से तय तिथि पर या, अधिक से अधिक, स्थानांतरण की तिथि से 2-3 सप्ताह के भीतर, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, और स्थानांतरण सूची में संलग्न टिप्पणियों के अनुसार...

जिला न्यायपालिका को पंगु बनाने का कोई अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की सामूहिक छुट्टी को अवैध बताया, निर्देश जारी किए
जिला न्यायपालिका को 'पंगु' बनाने का कोई अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की सामूहिक छुट्टी को अवैध बताया, निर्देश जारी किए

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की अधीनस्थ अदालतों में कार्यरत कर्मचारियों की हड़ताल पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे अवैध और अनुचित बताते हुए उन्हें 25 जुलाई तक काम पर लौटने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि न्यायालय कर्मचारियों की कैडर संख्या में बदलाव के मुद्दे पर सरकार पहले से ही विचार कर रही है, लेकिन राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ ने उच्च न्यायालय के महापंजीयक के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसे अनुशासनहीनता का गंभीर मामला बताया है।जस्टिस अशोक कुमार जैन ने...

ज़मानत नियम है, जेल अपवाद: उड़ीसा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में ईडी के उप निदेशक चिंतन रघुवंशी को ज़मानत दी
'ज़मानत नियम है, जेल अपवाद': उड़ीसा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में ईडी के उप निदेशक चिंतन रघुवंशी को ज़मानत दी

उड़ीसा हाईकोर्ट ने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के उप निदेशक चिंतन रघुवंशी को ज़मानत दे दी है। उन पर एक प्रवर्तन मामले में एक अभियुक्त (यहां शिकायतकर्ता) को राहत देने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। ज़मानत देते समय, जस्टिस गौरीशंकर सतपथी की पीठ ने इस तथ्य पर भी विचार किया कि याचिकाकर्ता ने अंतरिम ज़मानत पर रहते हुए अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया है, और इस तथ्य पर भी कि निकट भविष्य में मुक़दमा शुरू होने की संभावना कम है।"अभी जांच चल रही है, लेकिन...

क्या देश पुलिस राज की ओर बढ़ रहा है? मद्रास हाईकोर्ट ने विधायक और एडीजीपी से जुड़े अपहरण मामले में धीमी गति से चल रही जांच की आलोचना की
क्या देश 'पुलिस राज' की ओर बढ़ रहा है? मद्रास हाईकोर्ट ने विधायक और एडीजीपी से जुड़े अपहरण मामले में धीमी गति से चल रही जांच की आलोचना की

मद्रास हाईकोर्ट ने कथित तौर पर विधायक 'पूवई' जगनमूर्ति और एडीजीपी एचएम जयराम से जुड़े एक अपहरण मामले में चल रही धीमी गति की जांच की आलोचना की है। न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन ने टिप्पणी की कि यह कोई सामान्य मामला नहीं है जिसे पक्षों के बीच समझौते के आधार पर बंद किया जा सके, बल्कि यह अपराध करने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का एक उत्कृष्ट मामला है।अदालत ने कहा कि यह घटना और उसके बाद की घटनाएं आम लोगों के जीवन और स्वतंत्रता के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा करेंगी और लोगों के मन में यह उचित आशंका पैदा...

झारखंड हाईकोर्ट ने BJP सांसद ढुल्लू महतो की संपत्ति की SIT जांच की मांग वाली PIL खारिज की
झारखंड हाईकोर्ट ने BJP सांसद ढुल्लू महतो की संपत्ति की SIT जांच की मांग वाली PIL खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद से भाजपा सांसद ढुल्लू महतो के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्ति के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और ज‌स्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ ने कहा कि याचिका विचारणीय नहीं है और कहा कि इसी तरह के आरोपों की पहले ही जांच की जा चुकी है और उन्हें वास्तविक जनहित का मामला न मानते हुए खारिज कर दिया गया है।अपने फैसले में, न्यायालय ने कहा, "अतः, इस न्यायालय का यह विचार है कि एक...

वकीलों को अदालत की कार्यवाही में सहयोग करना चाहिए, व्यवधान नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुवक्किल की ज़मानत खारिज होने के बाद हंगामा करने वाले वकील को फटकार लगाई
वकीलों को अदालत की कार्यवाही में सहयोग करना चाहिए, व्यवधान नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुवक्किल की ज़मानत खारिज होने के बाद हंगामा करने वाले वकील को फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक वकील के आचरण की कड़ी निंदा की, जिसने अपने मुवक्किल की दूसरी ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद अदालत कक्ष में हंगामा किया और कार्यवाही में बाधा डाली।जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने न्यायालय में वकीलों की दोहरी ज़िम्मेदारियों पर ज़ोर दियाअदालत कक्ष में एक सम्मानजनक और अनुकूल माहौल बनाए रखना और साथ ही अपने मुवक्किलों के हितों का पूरी लगन से प्रतिनिधित्व करना।न्यायालय ने आगे कहा कि वकीलों को अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डालने के बजाय उसकी सहायता करनी चाहिए...

मानव स्वास्थ्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों की बीट के दुष्प्रभावों की चर्चा की ; कबूतरखानों को गिराने पर रोक जारी रहेगी
'मानव स्वास्थ्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं': बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों की बीट के दुष्प्रभावों की चर्चा की ; 'कबूतरखानों' को गिराने पर रोक जारी रहेगी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (24 जुलाई ) को मुंबई में कबूतरखानों को गिराने के बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के फैसले के पक्ष और विपक्ष में दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने सुनवाई के दरमियान कहा कि अगर कबूतरों के प्रजनन और उन्हें कबूतरखानों में इकट्ठा करने से कोई खतरा है या ऐसे खतरे की संभावना है तो यह निश्चित रूप से गंभीर सामाजिक चिंता का विषय है।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कबूतरों और कबूतरों की बीट से मनुष्यों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का संज्ञान लिया, जो...

बलिया एसपी ने खेद व्यक्त किया, सुधारात्मक कदम उठाए; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा अदालत आदेश को FIR मानने का अध्याय बंद किया
बलिया एसपी ने खेद व्यक्त किया, सुधारात्मक कदम उठाए; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा अदालत आदेश को FIR मानने का अध्याय बंद किया

हाईकोर्ट के आदेश की हूबहू नकल करके लिखित FIR दर्ज करने से जुड़े विवाद का पटाक्षेप करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 जुलाई को अपने पूर्व निर्देशों का पर्याप्त अनुपालन पाया और मामले के इस हिस्से को स्थगित करने का फैसला किया।बता दें, मामला एक स्कूल कर्मचारी की नियुक्ति में कथित हेराफेरी और मूल सेवा पुस्तिका के संदिग्ध गायब होने से संबंधित था। बलिया पुलिस ने कानून के अनुसार कार्यवाही करने के बजाय सीधे तौर पर अदालत के 29 मई के आदेश को ही लिखित प्राथमिकी मान लिया।इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने 3 जुलाई...

BREAKING- S.138 NI Act | 20,000 रुपये से अधिक के नकद ऋण के लिए चेक अनादर का मामला वैध स्पष्टीकरण के बिना मान्य नहीं: केरल हाईकोर्ट
BREAKING- S.138 NI Act | 20,000 रुपये से अधिक के नकद ऋण के लिए चेक अनादर का मामला वैध स्पष्टीकरण के बिना मान्य नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक निर्णय पारित किया, जिसमें कहा गया कि आयकर अधिनियम, 1961 (IT Act) का उल्लंघन करते हुए बीस हज़ार रुपये से अधिक के नकद लेनदेन से उत्पन्न ऋण को तब तक कानूनी रूप से प्रवर्तनीय ऋण नहीं माना जा सकता जब तक कि उसके लिए कोई वैध स्पष्टीकरण न हो।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने स्पष्ट किया कि फिर भी, परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 138 के तहत अपराध के आरोपी व्यक्ति को ऐसे लेनदेन को साक्ष्य के रूप में चुनौती देनी होगी और NI Act की धारा 139 के तहत अनुमान का खंडन करना...

पैरोल या फर्लो पर रिहाई के दौरान दोषी को आत्मसमर्पण की तारीख का लिखित नोट दें: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया
पैरोल या फर्लो पर रिहाई के दौरान दोषी को आत्मसमर्पण की तारीख का लिखित नोट दें: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी के जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि पैरोल या फर्लो पर रिहाई के समय दोषी की पावती लेने के बाद उसे आत्मसमर्पण की तारीख का लिखित नोट सौंप दिया जाए ताकि किसी भी तरह की अस्पष्टता न हो।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि कई मामलों में यह देखा गया कि अशिक्षा और अज्ञानता के कारण पैरोल या फर्लो पर रिहा किया गया दोषी समय पर आत्मसमर्पण नहीं कर पाता और देरी से आत्मसमर्पण करने पर उसे सजा हो जाती है।न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में जेल अधिकारियों को...

पंजाब पुलिस द्वारा कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ की CBI जांच की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की
पंजाब पुलिस द्वारा कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ की CBI जांच की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा वापस ली गई उस याचिका खारिज किया, जिसमें पंजाब पुलिस द्वारा कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ की सीबीआई जांच की मांग की गई थी।कथित तौर पर पुलिस दल वही था, जिस पर कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ और उनके बेटे पर हमला करने का आरोप था।जस्टिस संजय वशिष्ठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ता का मृतक से कोई संबंध नहीं है और कहा कि वर्तमान याचिका दायर करने का उसके पास कोई अधिकार नहीं है।न्यायालय ने तदनुसार याचिकाकर्ता को सुझाव दिया कि या तो वह याचिका वापस ले ले...

NDPS Act | अदालत में उन याचिकाओं की बाढ़ आ गई है, जिनमें अभियुक्तों को दूसरों से बरामदगी के मामले में FIR में शामिल किया गया, हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग के संदेह में पंजाब से जवाब मांगा
NDPS Act | अदालत में उन याचिकाओं की बाढ़ आ गई है, जिनमें अभियुक्तों को दूसरों से बरामदगी के मामले में FIR में शामिल किया गया, हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग के संदेह में पंजाब से जवाब मांगा

ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिनमें अभियुक्तों से व्यक्तिगत रूप से कोई प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं होने के बावजूद FIR में शामिल किया गया, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट (NDPS Act) के संदिग्ध दुरुपयोग पर पंजाब सरकार से जवाब मांगा।अदालत ने व्यावसायिक मात्रा से संबंधित एक मादक पदार्थ मामले में अंतरिम-अग्रिम जमानत प्रदान की।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"यह न्यायालय भी मानता है कि पिछले लगभग एक महीने से इसी तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं,...

क्या फैमिली कोर्ट को दत्तक-पत्र की वैधता तय करने का अधिकार है? पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
क्या फैमिली कोर्ट को दत्तक-पत्र की वैधता तय करने का अधिकार है? पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट के तहत स्थापित फैमिली कोर्ट को दत्तक-पत्र की वैधता तय करने का अधिकार नहीं है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा,"संसद ने अपनी विवेकाधिकार से फैमिली कोर्ट को दत्तक-पत्र से संबंधित मामलों पर निर्णय देने का अधिकार नहीं दिया, जबकि स्पष्ट रूप से उसने अन्य बातों के साथ-साथ उप-धारा (1) स्पष्टीकरण (छ) के तहत निर्दिष्ट मामलों में ऐसे न्यायालयों को अधिकार प्रदान किया, जो किसी व्यक्ति की संरक्षकता या किसी नाबालिग की अभिरक्षा...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को कमजोर वर्गों के स्टूडेंट्स के लिए सीटें आरक्षित करने की मांग वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को कमजोर वर्गों के स्टूडेंट्स के लिए सीटें आरक्षित करने की मांग वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें "गुप्त उद्देश्य" से एक नियम को शामिल करने की CBI जांच की मांग की गई, जो कथित तौर पर निजी स्कूलों को कमजोर वर्गों के स्टूडेंट्स के लिए सीटें आरक्षित करने से छूट देता है।पंजाब सरकार ने पंजाब शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 का नियम 7(4) लागू किया था, जिसके कारण पंजाब के कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधान के अनुसार निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में एडमिशन नहीं मिल पा रहा...

प्रशासनिक निर्णयों में त्रुटि के लिए कठोरतम दंड नहीं दिया जाना चाहिए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट कर्मचारी की पूर्वव्यापी बर्खास्तगी रद्द की
प्रशासनिक निर्णयों में त्रुटि के लिए कठोरतम दंड नहीं दिया जाना चाहिए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट कर्मचारी की पूर्वव्यापी बर्खास्तगी रद्द की

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट के बाद अधिकारी की पूर्वव्यापी बर्खास्तगी पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि दी गई सजा कथित चूक की प्रकृति के अनुरूप नहीं थी।याचिकाकर्ता जो लगभग तीन दशकों की बेदाग सेवा वाला एक बैंक अधिकारी था, को अस्थायी ओवरड्राफ्ट (TOD) स्वीकृत करने से संबंधित विभागीय जाँच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने कहा,"अनुशासन में निष्पक्षता होनी चाहिए, जो जानबूझकर या लापरवाही से किया गया कार्य नहीं बल्कि प्रशासनिक निर्णय में त्रुटि प्रतीत होता है,...

पत्नी के रंग और खाना बनाने की क्षमता पर तंज कसना उच्च स्तर की प्रताड़ना नहीं, आत्महत्या के लिए उकसावा या क्रूरता नहीं मानी जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
पत्नी के रंग और खाना बनाने की क्षमता पर तंज कसना उच्च स्तर की प्रताड़ना नहीं, आत्महत्या के लिए उकसावा या क्रूरता नहीं मानी जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में 27 साल पुराने मामले में एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि यदि कोई महिला आत्महत्या कर ले, तो उसके रंग-रूप या खाना बनाने की क्षमता को लेकर उसे ताना देना इस हद तक की प्रताड़ना नहीं मानी जा सकती कि उस पर धारा 498-A (दांपत्य प्रताड़ना) और धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) लगाई जाए।जस्टिस श्रीराम मोडक की एकल पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता पति द्वारा अपनी पत्नी को उसके गहरे रंग को लेकर और ससुर द्वारा उसके भोजन पकाने के तरीके को लेकर ताने देना भले ही प्रताड़ना हो सकता है, लेकिन...