हाईकोर्ट

Income Tax | ‌फिक्‍स्ड डिपॉजिट पर ब्याज, व्यवसाय से जुड़े TDS रिफंड धारा 80IA कटौती के लिए योग्य: बॉम्बे हाईकोर्ट
Income Tax | ‌फिक्‍स्ड डिपॉजिट पर ब्याज, व्यवसाय से जुड़े TDS रिफंड धारा 80IA कटौती के लिए योग्य: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि सावधि जमा पर ब्याज, व्यवसाय से जुड़े टीडीएस रिफंड आयकर अधिनियम की धारा 80IA के तहत कटौती के योग्य हैं। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80IA बुनियादी ढांचा, बिजली और दूरसंचार जैसे कुछ क्षेत्रों में संचालित व्यवसायों के लिए कर प्रोत्साहन प्रदान करती है।जस्टिस बीपी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पी पूनीवाला ने कहा कि करदाता के पात्र व्यवसाय को जारी रखने के उद्देश्य से सावधि जमा रखना अनिवार्य है। सावधि जमा रखना बेकार पड़ी अतिरिक्त धनराशि को जमा करने के लिए नहीं है। यह इस तथ्य से...

कर्नाटक हाईकोर्ट सितंबर में सुनेगा विजय माल्या की याचिका, किंगफिशर कर्ज वसूली की जानकारी मांगी
कर्नाटक हाईकोर्ट सितंबर में सुनेगा विजय माल्या की याचिका, किंगफिशर कर्ज वसूली की जानकारी मांगी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या और यूनाइटेड ब्रेवरीज होल्डिंग्स लिमिटेड के निदेशक दलजीत महल की सितंबर में दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया, जिसमें संबंधित बैंकों को उनके, यूबीएचएल और अन्य प्रमाणपत्र देनदारों द्वारा बकाया राशि पर खातों का विवरण प्रदान करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।याचिका में मांग की गई है कि ऋण वसूली न्यायाधिकरण द्वारा जारी संशोधित वसूली प्रमाण पत्र दिनांक 10.04.2017 के बाद से समय-समय पर अर्जित ब्याज को ध्यान में रखते हुए और समय-समय पर...

आपराधिक मामले में बरी होने पर विभिन्न आरोपों पर CrPF नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई पर रोक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
आपराधिक मामले में बरी होने पर विभिन्न आरोपों पर CrPF नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई पर रोक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने कहा कि सीआरपीएफ नियम, 1955 का नियम 27(गगग) लागू नहीं होता क्योंकि विभागीय जांच हथियारों के दुरुपयोग पर आधारित थी, जो हत्या के आपराधिक आरोप से अलग थी, और किसी आपराधिक मामले में बरी होना अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक नहीं लगाता। पीठ ने आगे स्पष्ट किया कि नियम 27(ग) के तहत प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य नहीं है, और उसकी अनुपस्थिति जांच को तब तक निष्प्रभावी नहीं बनाती जब तक कि जांच अधिकारी अभियोजक के रूप...

पति का होम लोन और मां-बाप की ज़िम्मेदारी भी ध्यान में रखी जाए: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुज़ारा भत्ता घटाया
पति का होम लोन और मां-बाप की ज़िम्मेदारी भी ध्यान में रखी जाए: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुज़ारा भत्ता घटाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में कहा कि पत्नी और बच्चे को गुज़ारा भत्ता तय करते समय पति की आर्थिक ज़िम्मेदारियों जैसे होम लोन की किस्त और माता-पिता की देखभाल को भी ध्यान में रखना होगा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने यह टिप्पणी उस समय की जब उसने फैमिली कोर्ट द्वारा तय किए गए 25,000 प्रति माह गुज़ारा भत्ता को घटाकर 17,500 प्रति माह कर दिया।पति की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उसकी असली आय 36,000 है, जबकि फैमिली कोर्ट ने इसे गलत तरीके से 70,000 मान लिया। उसने बताया कि वह 11,000...

अवैध संबंध साबित करने के लिए कोर्ट मंगवा सकता है मोबाइल लोकेशन : दिल्ली हाईकोर्ट
अवैध संबंध साबित करने के लिए कोर्ट मंगवा सकता है मोबाइल लोकेशन : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में अगर पति-पत्नी के बीच व्यभिचार का आरोप लगता है तो अदालत मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मंगवाने का आदेश दे सकती है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने साफ किया कि ऐसे मामलों में सबूत अक्सर परिस्थितिजन्य होते हैं। यानी होटल में ठहरना लगातार बातचीत या मोबाइल लोकेशन जैसे तथ्य अदालत के लिए अहम हो सकते हैं।कोर्ट ने कहा,"ऐसा डेटा सीधे विवाद से जुड़ा है और इसे फिशिंग इन्क्वायरी नहीं कहा जा सकता। बशर्ते कि यह केवल...

व्यभिचार के आधार पर तलाक की मांग करते समय जीवनसाथी के कथित प्रेमी को पक्षकार बनाना अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट
व्यभिचार के आधार पर तलाक की मांग करते समय जीवनसाथी के कथित प्रेमी को पक्षकार बनाना अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि व्यभिचार के आधार पर तलाक की मांग करते समय जीवनसाथी के कथित प्रेमी को पक्षकार बनाना न केवल आवश्यक है, बल्कि अनिवार्य भी है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा,"ऐसी (तलाक) याचिकाओं को नियंत्रित करने वाले प्रक्रियात्मक ढांचे के अनुसार, कथित वैवाहिक अपराध (व्यभिचार) का पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है, जिसमें कथित रूप से शामिल व्यक्ति की पहचान भी शामिल है। न्यायालयों ने न्यायनिर्णयन में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे व्यक्ति को...

भर्ती प्रक्रिया में पात्रता के लिए किसी संगठन के लिए काम करना, उसमें काम करने के समान नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
भर्ती प्रक्रिया में पात्रता के लिए किसी संगठन के लिए काम करना, उसमें काम करने के समान नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी संगठन के लिए काम करना, किसी संगठन में काम करने के समान नहीं माना जा सकता और भर्ती नियमों की व्याख्या करते समय 'रोज़गार' और 'पैनल में शामिल' को अलग-अलग माना जाना चाहिए।जस्टिस मनोज जैन ने भारतीय मानक ब्यूरो में सहायक निदेशक (विधि) की याचिका पर विचार करते हुए कहा,"निस्संदेह, विज्ञापन में दिए गए मुख्य शब्द केंद्र/राज्य उपक्रम में संबंधित क्षेत्र में 'तीन वर्ष' का अनुभव हैं। मैं उपरोक्त मानदंडों में प्रयुक्त शब्द "में" पर ज़ोर देना चाहूंगा। कोई व्यक्ति न्यायालय के समक्ष...

अमेरिकी गांजा भारतीय गांजे से ज़्यादा महंगा होने से NDPS Act के तहत दोषसिद्धि नहीं बढ़ती: दिल्ली हाईकोर्ट
'अमेरिकी गांजा' 'भारतीय गांजे' से ज़्यादा महंगा होने से NDPS Act के तहत दोषसिद्धि नहीं बढ़ती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि "सिर्फ़ इसलिए कि अमेरिकी गांजा भारतीय गांजे से ज़्यादा महंगा है, अमेरिकी गांजा में दोषसिद्धि नहीं बढ़ती।"जस्टिस गिरीश कठपालिया ने NDPS Act के आरोपी की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।याचिकाकर्ता को 871 ग्राम गांजा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जो कि एक छोटी मात्रा था।उसकी ज़मानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के पास से अमेरिकी गांजा बरामद किया गया, जो भारतीय गांजे से कहीं ज़्यादा महंगा है।इस तर्क को खारिज करते हुए...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारत-पाक युद्ध में घायल हुए सैनिक को दिव्यांगता लाभ देने से इनकार करने पर केंद्र सरकार की निंदा की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारत-पाक युद्ध में घायल हुए सैनिक को दिव्यांगता लाभ देने से इनकार करने पर केंद्र सरकार की निंदा की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में विस्फोट के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए सैनिक को दिव्यांगता लाभ देने से इनकार करने पर केंद्र सरकार की आलोचना की।न्यायालय ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के उस आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, जिसके तहत मृतक सैनिक की पत्नी को पेंशन लाभ प्रदान किया गया।शाम सिंह को पाकिस्तान की ओर से आए एक बम के उनके पास फटने से चोटें आईं और हमले के कारण उनकी आँखों की रोशनी चली गई। उन्हें लगी यह चोट न तो सैन्य सेवा के कारण थी और न ही...

वसीयत की प्रति के साथ प्रोबेट प्रदान करना वैध निष्पादन का निर्णायक प्रमाण: झारखंड हाईकोर्ट
'वसीयत की प्रति के साथ प्रोबेट प्रदान करना वैध निष्पादन का निर्णायक प्रमाण': झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने माना कि एक बार वसीयत की प्रति के साथ प्रोबेट प्रदान कर दिए जाने पर यह निष्पादक की नियुक्ति और वसीयत के वैध निष्पादन को निर्णायक रूप से सिद्ध कर देता है। न्यायालय ने दोहराया कि प्रोबेट कार्यवाही में निर्धारण का एकमात्र मुद्दा वसीयत की वास्तविकता और उचित निष्पादन है, न कि संपत्ति के स्वामित्व या अस्तित्व से संबंधित प्रश्न।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 276 सहपठित धारा 300 के तहत बीरेन पोद्दार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें...

सरकारी कर्मचारी का तबादला केवल विधायक की सिफारिश पर किए जाने से अवैध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
सरकारी कर्मचारी का तबादला केवल विधायक की सिफारिश पर किए जाने से अवैध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण केवल विधान सभा सदस्य (विधायक) के कहने या उसकी सिफ़ारिश पर किए जाने से अमान्य नहीं होगा। जस्टिस एसजी पंडित और जस्टिस केवी अरविंद की खंडपीठ ने तहसीलदार एस वेंकटेशप्पा द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही।उन्होंने कर्नाटक प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें प्रतिवादी संख्या 4 के स्थानांतरण और उनकी जगह 31.12.2024 की अधिसूचना के तहत नियुक्ति के आदेश को रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।यह...

S. 91 CrPC | अभियुक्त को अपने खिलाफ अपराध सिद्ध करने वाले साक्ष्य पेश करने के लिए समन नहीं किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
S. 91 CrPC | अभियुक्त को अपने खिलाफ अपराध सिद्ध करने वाले साक्ष्य पेश करने के लिए समन नहीं किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि किसी अभियुक्त को CrPC की धारा 91 के तहत अपने विरुद्ध कोई भी आपत्तिजनक सामग्री प्रस्तुत करने के लिए समन नहीं किया जा सकता, जिसका इस्तेमाल मुकदमे में उसके विरुद्ध किया जा सकता है। जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने कहा,"इस न्यायालय को ऐसा प्रतीत होता है कि बार से उद्धृत कई कथित निर्णयों से यह पता चलता है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 को अधिनियमित करते समय विधायी मंशा कभी यह नहीं थी कि न्यायालय किसी अभियुक्त को कोई भी आपत्तिजनक सामग्री प्रस्तुत करने के लिए समन कर सके जिसका...

बिहार पुलिस भर्ती: 17 साल बाद उच्च योग्यता के बावजूद पद से वंचित 252 उम्मीदवारों को हाईकोर्ट से राहत
बिहार पुलिस भर्ती: 17 साल बाद उच्च योग्यता के बावजूद पद से वंचित 252 उम्मीदवारों को हाईकोर्ट से राहत

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 2004 के एक विज्ञापन के तहत बिहार पुलिस में 252 उम्मीदवारों को उप-निरीक्षक के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि पहले से नियुक्त 133 उम्मीदवारों से अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति देने से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल ने यह फैसला उन असफल उम्मीदवारों द्वारा दायर तीन रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए सुनाया, जिन्होंने शारीरिक और लिखित दोनों परीक्षाएं...

नाबालिग लड़की का 18+ होने का दावा या आधार कार्ड में उसे बालिग दिखाने से पोक्सो एक्ट के तहत आरोपी के मामले में मदद नहीं मिलती: HP हाईकोर्ट
नाबालिग लड़की का 18+ होने का दावा या आधार कार्ड में उसे बालिग दिखाने से पोक्सो एक्ट के तहत आरोपी के मामले में मदद नहीं मिलती: HP हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी नाबालिग लड़की द्वारा खुद को 18 वर्ष से अधिक उम्र का दिखाना या आधार कार्ड में उसे बालिग दर्शाना, पोक्सो अधिनियम के तहत आरोपों का सामना कर रहे आरोपी की मदद नहीं कर सकता। इस प्रकार, जस्टिस राकेश कैंथला की पीठ ने एक आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी, जिस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363 और 376 तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत अपराधों का आरोप है।संक्षेप में, पीड़िता के पिता ने 20 मई, 2024 को आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप...

पुलिस के पास पसंद या नापसंद के आधार पर हिस्ट्रीशीट खोलने की कोई निरंकुश शक्ति नहीं, उचित संदेह के लिए ठोस सामग्री आवश्यक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पुलिस के पास पसंद या नापसंद के आधार पर हिस्ट्रीशीट खोलने की कोई निरंकुश शक्ति नहीं, उचित संदेह के लिए ठोस सामग्री आवश्यक: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस किसी व्यक्ति की पसंद या नापसंद के आधार पर उसके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने में 'अनियंत्रित' और 'अनैतिक' शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकती है, और उचित संदेह पैदा करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सामग्री की आवश्यकता होती है। न्यायालय ने विशेष रूप से कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस विनियमावली के नियम 228 और 240 पुलिस को इसका इस तरह इस्तेमाल करने का कोई अधिकार नहीं देते हैं जिससे नागरिक की मौलिक स्वतंत्रता का हनन हो।न्यायालय ने आगे कहा कि पुलिस के पास निगरानी रजिस्टर में...

हैबियस कॉर्पस याचिका अभिभावक कानून के तहत कस्टडी का विकल्प नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
हैबियस कॉर्पस याचिका अभिभावक कानून के तहत कस्टडी का विकल्प नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम जैसे संरक्षकता कानूनों के तहत हिरासत की कार्यवाही के विकल्प के रूप में काम नहीं कर सकती है। इसने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय केवल तभी हस्तक्षेप कर सकता है जब यह अवैधता का स्पष्ट मामला हो।जस्टिस सुमित गोयल ने कहा,"नाबालिग बच्चे की हिरासत के मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट जारी करने का हाईकोर्ट का अधिकार क्षेत्र बुनियादी क्षेत्राधिकार तथ्य पर आधारित है, अर्थात्, नाबालिग बच्चे की कस्टडी स्पष्ट...