दिल्ली हाईकोर्ट

सिविल लगने वाले आपराधिक मामलों में भी समन जारी होने से पहले सबूत पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि भले ही कोई मजिस्ट्रेट CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का आदेश देने से मना कर दे, फिर भी शिकायतकर्ता को आम तौर पर शिकायत को "पूरी तरह से सिविल" प्रकृति का बताकर खारिज करने से पहले समन जारी होने से पहले सबूत पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए।जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट के सिविल उल्लंघन और अपराध के बीच की "विभाजन रेखा" अक्सर "बहुत पतली" होती है> इसलिए शिकायतकर्ता को सबूतों के ज़रिए कथित आपराधिक अपराध को साबित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।कोर्ट...

न्यायिक समीक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालतें टेंडर की शर्तों में नदारद काल्पनिक प्रावधान को अपनी तरफ से नहीं जोड़ सकतीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सार्वजनिक ठेकों में पात्रता से जुड़े विवादों की जांच करते समय अदालतें टेंडर की शर्तों में नदारद किसी "काल्पनिक प्रावधान" को अपनी तरफ से नहीं जोड़ सकतीं।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने यह स्पष्ट किया कि जब टेंडर में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होता, जिसके तहत किसी निलंबित या बीच में छोड़े गए काम को पूरा हुआ मान लिया जाए—सिर्फ इसलिए कि काम छोड़ने की वजह सरकार थी—तो अदालतें टेंडर की शर्तों को फिर से लिखकर ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकाल...

एक बार प्रोबेट मिल जाने के बाद धारा 68 के तहत वसीयत को दोबारा साबित करने की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि एक बार किसी वसीयत के संबंध में प्रोबेट मिल जाने के बाद भारतीय साक्ष्य अधिनियम की (Indian Evidence Act) धारा 68 के तहत बाद की सिविल कार्यवाही में उस दस्तावेज़ को दोबारा साबित करने की ज़रूरत नहीं होती।धारा 68 में यह प्रावधान है कि यदि किसी दस्तावेज़ को कानून के अनुसार अटेस्ट (साक्षी द्वारा प्रमाणित) किया जाना ज़रूरी है (जैसे वसीयत या दान पत्र), तो उसे अदालत में तब तक सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसे निष्पादित किए जाने को साबित करने के लिए...

नेताओं पर अवमानना कार्रवाई पार्टी की मान्यता खत्म करने का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने AAP के खिलाफ याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी राजनेता के आचरण से अदालत की गरिमा, अधिकार या प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है तो उसके लिए अवमानना कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है लेकिन केवल इसी आधार पर किसी राजनीतिक दल की मान्यता समाप्त नहीं की जा सकती।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने आम आदमी पार्टी (AAP) की मान्यता रद्द करने और उसके नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज करते हुए यह...

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट्स पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, पत्रकार सौरव दास और AAP नेता गोपाल राय को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पत्रकार सौरव दास और AAP नेता गोपाल राय को नोटिस जारी किया। यह नोटिस उस याचिका पर जारी हुआ है जिसमें जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित अवमाननापूर्ण पोस्ट साझा करने का आरोप लगाया गया है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुडेजा की खंडपीठ ने मामले को पहले से लंबित स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना मामले के साथ जोड़ते हुए 4 अगस्त को सुनवाई तय की है। अदालत ने रजिस्ट्री को याचिका में शामिल सोशल मीडिया सामग्री सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया।याचिका में...

सिर्फ मुंबई ऑफिस का पता लिख देने से नहीं बदलेगा कोर्ट का अधिकार क्षेत्र, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- जहां विवाद का हिस्सा पैदा हुआ, वहीं चलेगा मुकदमा

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल चालान (Invoices) और एयरवे बिल पर मुंबई स्थित प्रशासनिक कार्यालय का पता दर्ज होने मात्र से दिल्ली की अदालतों का क्षेत्राधिकार समाप्त नहीं हो जाता, खासकर तब जब प्रतिवादी कंपनी का पंजीकृत कार्यालय दिल्ली में स्थित हो और विवाद से जुड़ा कुछ कारण दिल्ली में उत्पन्न हुआ हो।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने यह फैसला GAC लॉजिस्टिक्स द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए सुनाया। कंपनी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें क्षेत्राधिकार...

जमानत अर्जी पर फैसला देने के बाद कोर्ट पुलिसवालों के खिलाफ जांच का आदेश नहीं दे सकता, न ही उसकी निगरानी कर सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब ट्रायल कोर्ट बेल अर्जी पर फैसला दे देता है तो उसका काम खत्म हो जाता है (Functus Officio) और वह जांच में कथित देरी को लेकर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच का निर्देश देकर या उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणियां करके मामले की निगरानी जारी नहीं रख सकता।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह टिप्पणी पुलिस इंस्पेक्टर और अन्य पुलिस अधिकारी द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए की। इन याचिकाओं में एक POCSO मामले में एडिशनल सेशंस जज (ASJ) द्वारा जारी निर्देशों को चुनौती दी गई।यह...

अनुकंपा नियुक्ति सार्वजनिक रोज़गार का वैकल्पिक तरीका नहीं बन सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति को सार्वजनिक रोज़गार के वैकल्पिक तरीके या किसी मृत कर्मचारी के परिवार के लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक पुनर्वास के साधन के तौर पर नहीं देखा जा सकता।जस्टिस शैल जैन ने यह टिप्पणी BSES यमुना पावर लिमिटेड की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की। इस याचिका में कंपनी ने इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी को एक मृत कर्मचारी के बेटे को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया।कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के 2014 का...

राजनीतिक आलोचना पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की याचिका पर सुरक्षित रखा फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने की मांग की थी।चड्ढा का आरोप है कि कुछ पोस्टों में यह दिखाने की कोशिश की गई कि उन्होंने पैसों के लिए खुद को बेच दिया। जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन का नहीं बल्कि एक राजनीतिक निर्णय की आलोचना का प्रतीत होता है।अदालत ने कहा,“दूसरे मामलों से अलग यहां...

बहू को स्थायी वैकल्पिक आवास का अधिकार नहीं, कानून केवल साझा घर में रहने का हक देता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 और माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007 में बहू को स्थायी वैकल्पिक आवास देने का कोई प्रावधान नहीं है। कानून केवल साझा घर में रहने के अधिकार को मान्यता देता है।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह टिप्पणी एक बुजुर्ग दंपति की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। 76 और 73 वर्षीय दंपति ने उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अपीलीय प्राधिकारी ने उन्हें अपनी बहू और पोते-पोतियों के लिए स्थायी वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का...

सामाजिक दबाव में युवती ने बदला बयान, सहमति से बने अंतरधार्मिक संबंध को अपराध नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2004 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि युवती आरोपी के साथ अपनी इच्छा से गई थी, उसने विशेष विवाह अधिनियम के तहत उससे शादी की थी और बाद में सामाजिक तथा पारिवारिक दबाव के कारण अपना रुख बदल लिया।जस्टिस विमल कुमार यादव ने कहा कि भारतीय समाज आज भी धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर गहरे विभाजन से ग्रस्त है, जहां युवाओं के लिए अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनना बेहद कठिन बना हुआ है।अदालत ने कहा,“यदि समाज द्वारा तय सीमाओं को तोड़ा जाता...

POCSO Act के तहत युवा वयस्कों के बीच यौन संबंधों के लिए वास्तविक सहमति को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि हालांकि POCSO Act के तहत सहमति कानूनी तौर पर मायने नहीं रखती, लेकिन युवा वयस्कों के बीच ऐसे संबंधों को, जिनमें यौन संबंध के लिए "वास्तविक सहमति" शामिल हो, ज़मानत याचिकाओं पर विचार करते समय अलग नज़रिए से देखा जाना चाहिए।जस्टिस प्रतीक जालान ने यह टिप्पणी तब की, जब वे 19 साल के एक स्टूडेंट को अग्रिम ज़मानत दे रहे थे। इस स्टूडेंट पर अपनी 12वीं कक्षा की सहपाठी की आत्महत्या से हुई मौत के मामले में आरोपी होने का आरोप था।कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,"हालांकि POCSO...

फर्जी विश्वविद्यालयों पर सख्ती जरूरी, भविष्य में AI संस्थानों का भी खतरा : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने देशभर में तेजी से बढ़ रहे फर्जी उच्च शिक्षण संस्थानों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से पूछा कि ऐसे संस्थानों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर में फर्जी विश्वविद्यालयों के बढ़ते जाल और नियामक संस्थाओं की कथित विफलता का मुद्दा उठाया गया।अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से कहा कि वह शिक्षा...

ब्लैकलिस्टिंग पर अंतरिम राहत मिलने से टेंडर में पूरी जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं मिलता : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कंपनी को ब्लैकलिस्टिंग आदेश पर अंतरिम राहत मिल जाने का यह मतलब नहीं है कि वह टेंडर प्रक्रिया में उससे जुड़ी जानकारी छिपा सकती है।अदालत ने स्पष्ट किया कि बोलीदाता पर सभी तथ्यों का स्पष्ट और ईमानदार खुलासा करने की जिम्मेदारी बनी रहती है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एम/एस वेलोसिस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज की।कंपनी ने नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज इंकॉरपोरेटेड द्वारा जारी निविदा में तकनीकी रूप से...

धुरंधर में सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दिखाने के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और CBFC को फैसला लेने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' को लेकर उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को फैसला लेने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित प्राधिकरणों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।याचिका दीपक कुमार ने दायर की थी जो राष्ट्रीय राजधानी में सशस्त्र सीमा बल में हेड कांस्टेबल (संचार) के पद पर तैनात हैं।दीपक कुमार ने अदालत...

कानूनी स्थिति जाने बिना FIR दर्ज कराने की याचिका दायर करना दुर्भाग्यपूर्ण : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील की कड़ी आलोचना की। अदालत ने कहा कि स्थापित कानूनी स्थिति की जांच किए बिना ऐसी याचिका दायर करना दुर्भाग्यपूर्ण है।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने आशानंद सैनी द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में FIR दर्ज करने, जांच को पुलिस उपायुक्त (सतर्कता) की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की मांग की गई।सुनवाई की...

अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR पर रोक हटाई गई, हाइकोर्ट का सेशन कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर लगी रोक रद्द की। यह मामला न्यूज़लॉन्ड्री की संपादकीय निदेशक मनीषा पांडे द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अभिजीत अय्यर मित्रा ने सोशल मीडिया पर उनके और अन्य महिला कर्मचारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट को वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद कारण सहित नया आदेश पारित किया...

जस्टिस एसके शर्मा के कोर्ट का बहिष्कार करने पर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग

दिल्ली हाईकोर्ट में PIL दायर की गई, जिसमें AAP नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को कोई भी चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग की गई। यह मांग दिल्ली आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार करने और कथित तौर पर सोशल मीडिया पर उनकी मानहानि करने के कारण की गई।सतीश कुमार अग्रवाल नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को आम आदमी पार्टी का पंजीकरण रद्द करने का निर्देश देने की भी मांग की गई।इस मामले...