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राष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलीमठ को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया
राष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति रवि विजयकुमार मलीमठ को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया

न्यायमूर्ति रवि मलीमथ को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इस संबंध में सोमवार (28 जून) को केंद्र ने एक जुलाई से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 के अनुसार) के रूप में नियुक्ति करने को लेकर अधिसूचना जारी की।हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति मलीमथ, हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति लिंगप्पा नारायण स्वामी के सेवानिवृत्त होने के परिणामस्वरूप उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के...

राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों के बकाया वेतन का मामला- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री से बकाया भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तुरंत बैठक बुलाने का अनुरोध किया
राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों के बकाया वेतन का मामला- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री से बकाया भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तुरंत बैठक बुलाने का अनुरोध किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शनिवार की विशेष सुनवाई में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से अनुरोध किया कि राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों को वेतन का बकाया भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तुरंत बैठक बुलाएं, जिसका पिछले पांच माह से भुगतान नहीं हो रहा है। आगे कहा कि राज्य को एकदम धीमे तरीके से काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि,"त्रासदियों और संकट के समय राज्य केवल वादों से भरा एक गड़गड़ाहट कर रहा है कि यह लोगों के...

बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल ने सीजेआई को पत्र लिखकर कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को हटाने की मांग की
बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल ने सीजेआई को पत्र लिखकर कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को हटाने की मांग की

बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को एक पत्र लिखकर कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को हटाने के लिए कहा है।पत्र में कहा गया है,"जस्टिस बिंदल एक पक्षपातपूर्ण, अनुचित और पक्षपाती जज हैं। उनका हाईकोर्ट में बने रहना न्याय के निष्पक्ष वितरण में हस्तक्षेप करता है।"पत्र में कहा गया है कि न्यायमूर्ति बिंदल ने पीड़ित पक्षों को सुनवाई का मौका दिए बिना एक निश्चित राजनीतिक व्यवस्था के सदस्यों के पक्ष में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा पारित जमानत के अंतरिम...

पहली नजर  में उसका व्यवहार सामान्य नहीं दिख रहा: दिल्ली हाईकोर्ट ने 498ए के मामले में पिता को महिला की अंतरिम कस्टडी सौंपी
''पहली नजर में उसका व्यवहार सामान्य नहीं दिख रहा'': दिल्ली हाईकोर्ट ने 498ए के मामले में पिता को महिला की अंतरिम कस्टडी सौंपी

एक हैबियस कार्पस याचिका पर विचार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने उस महिला की अंतरिम कस्टडी उसके पिता को सौंप दी है, जिसे कथित तौर पर उसके पति और ससुराल वालों ने मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया है। आरोप है कि इस प्रताड़ना के कारण महिला की आंशिक याददाश्त चली गई है और वह पूरी तरह से बोल भी नहीं पा रही है। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में उसका व्यवहार सामान्य नहीं लगता है। न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महिला से बातचीत करने के बाद...

लिव-इन-रिलेशनशिप कोई नई घटना नहीं, लेकिन समाज ऐसे रिश्तों को भौंहें चढ़ाए बिना स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
''लिव-इन-रिलेशनशिप कोई नई घटना नहीं, लेकिन समाज ऐसे रिश्तों को भौंहें चढ़ाए बिना स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं'': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले एक कपल को सुरक्षा प्रदान करते हुए कहा कि,''लिव-इन-रिलेशनशिप आजकल कोई नई घटना नहीं है, लेकिन समाज इतना विकसित नहीं हुआ है कि वह इस तरह के रिश्तों पर भौंहें चढ़ाए बिना ही इनको स्वीकार कर ले।'' जस्टिस राजेश भारद्वाज की एकल पीठ क्रमशः 18 और 19 वर्ष की आयु के एक लड़के और लड़की द्वारा दायर की गई सुरक्षा याचिका पर विचार कर रही थी, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर मिले थे और एक-दूसरे से शादी करना चाहते हैं। यह देखते हुए कि दोनों...

विदेशी अधिनियम या किसी अन्य कानून के उल्लंघन के मामले में विदेशी नागरिक को प्रत्यर्पित करने के आदेश देने का अधिकार मजिस्ट्रेट को नहीं है : तेलंगाना हाईकोर्ट
विदेशी अधिनियम या किसी अन्य कानून के उल्लंघन के मामले में विदेशी नागरिक को प्रत्यर्पित करने के आदेश देने का अधिकार मजिस्ट्रेट को नहीं है : तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने विदेशी नागरिक के संबंध में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी दो प्रत्यर्पण आदेशों को निरस्त करते हुए कहा है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत मजिस्ट्रेट को विदेशी अधिनियम या अन्य प्रकार के कानून के उल्लंघन की स्थिति में विदेशी नागरिक को प्रत्यर्पित करने के आदेश देने का अधिकार नहीं है।न्यायमूर्ति के लक्ष्मण की एकल बेंच ने इस प्रकार कहा :"जैसा कि उपर कहा गया है, मजिस्ट्रेट के पास संबंधित अधिनियम या किसी अन्य कानून के प्रावधानों के उल्लंघन के मामले में भी किसी विदेशी नागरिक के...

अपनी मर्ज़ी से जीवन जिएं, गुजरात हाईकोर्ट ने उस जोड़े को साथ रहने की अनुमति दी, जिसे तलाक के लिए मजबूर किया गया
"अपनी मर्ज़ी से जीवन जिएं", गुजरात हाईकोर्ट ने उस जोड़े को साथ रहने की अनुमति दी, जिसे तलाक के लिए मजबूर किया गया

गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक अंतर्जातीय जोड़े को फिर से मिलाया, जिसे साल 2017 में शादी के दो सप्ताह के भीतर तलाक के लिए इसलिए मजबूर किया गया था, क्योंकि महिला के परिवार ने उनके रिश्ते को मंजूरी नहीं दी थी।न्यायमूर्ति आरएम छाया और न्यायमूर्ति निरजार देसाई की पीठ पेशे से डॉक्टर हितेंद्रकुमार रणछोड़जी ठाकोर की बंदी प्रत्यक्षीकरण ( Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने 26 वर्षीय नर्स रिंकुबेन को पेश करने की मांग की थी।कोर्ट को बताया गया कि रिंकूबेन की शादी याचिकाकर्ता ठाकोर से...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
लिव-इन रिलेशन-''लड़की की बुनियादी जरूरतों का ख्याल रखें, गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करें'': मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुरूष को निर्देश दिया; पैरा लीगल वालंटियर उनके आवास का दौरा करें

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक 18 वर्षीय लड़की के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की इच्छा रखने वाले एक व्यक्ति को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वह न केवल उसकी बुनियादी जरूरतों का बल्कि लड़की की सुख-सुविधाओं का भी ध्यान रखे ताकि वह गरिमापूर्ण जीवन जी पाए। न्यायमूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति आनंद पाठक की खंडपीठ उस व्यक्ति की हैबियस कार्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने आरोप लगाया था कि कार्पस/ लड़की ने दिसंबर, 2020 में अपने माता-पिता का घर छोड़ दिया था क्योंकि कार्पस के पिता उसे...

स्कूटर चलाते हुए वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में पेश हुआ वकील, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी बात सुनने से इनकार किया
स्कूटर चलाते हुए वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में पेश हुआ वकील, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी बात सुनने से इनकार किया

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक मामले में पेश एक वकील की सुनवाई से इनकार कर दिया क्योंकि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मोड के जर‌िए अदालत के समक्ष हो रही सुनवाई में स्कूटर चला रहा था। ज‌स्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी की खंडपीठ ने वकील को भविष्य में सावधान रहने को कहा और भविष्य में इस कृत्य को न दोहराने की सलाह दी।कोर्ट ने आदेश में कहा, "याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने स्कूटर पर सवारी करते हुए अदालत को संबोधित करने की कोशिश की। इसलिए, अदालत ने उसे सुनने से इनकार कर...

CrPC की धारा 41ए के तहत पुलिस की ओर से नोटिस जारी होने के बाद भी अग्रिम जमानत की याचिका सुनवाई योग्य : कर्नाटक उच्च न्यायालय
CrPC की धारा 41ए के तहत पुलिस की ओर से नोटिस जारी होने के बाद भी अग्रिम जमानत की याचिका सुनवाई योग्य : कर्नाटक उच्च न्यायालय

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि CrPC की धारा 41ए के तहत पेशी का नोटिस जारी होने के बाद भी गिरफ्तारी की आशंका हमेशा बनी रहती है और ऐसी परिस्थिति में न्यायालय CrPC की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत के आवेदन से बच नहीं सकते हैं।जस्टिस शिवशंकर अमरानवर की सिंगल बेंच ने रामप्पा @ रमेश की अग्रिम जमानत के लिए दायर याचिका की अनुमति देते हुए कहा, "एक व्यक्ति को दो स्थितियों में गिरफ्तार होने की आशंका होती है: - पहला जब उसे संहिता की धारा 41 ए (1) के तहत 'नोटिस' जारी किया जाता है और दूसरा, 'नोटिस' की...

क्या पुलिस आरोपी का पक्ष ले रही है?: झारखंड हाईकोर्ट ने चार्जशीट में पीड़िता को गवाह नहीं बनाने पर अधिकारियों को फटकार लगाई
''क्या पुलिस आरोपी का पक्ष ले रही है?'': झारखंड हाईकोर्ट ने चार्जशीट में पीड़िता को गवाह नहीं बनाने पर अधिकारियों को फटकार लगाई

झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को न्यायिक आदेशों की अवहेलना और कर्तव्य का पालन न करने के मामले में संबंधित जांच अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति आनंद सेन 13 वर्षीय नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न से संबंधित एक मामले में जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। संबंधित मामले में नाबालिग पीड़िता को कई न्यायिक आदेशों के बावजूद न तो चार्जशीट में गवाह बनाया गया और न ही अदालत के समक्ष पेश किया गया। अपराध की गंभीरता को देखते हुए,जांच अधिकारी द्वारा नाबालिग पीड़िता को आरोप पत्र में गवाह न बनाने पर अपनी पीड़ा...

कानून बनाने वालों की अंतरात्मा को झकझोरने के लिए और कितनी निर्भयाओं को बलिदान देना पड़ेगा?: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रेप केस में 15 साल के लड़के को जमानत देने से इनकार किया
''कानून बनाने वालों की अंतरात्मा को झकझोरने के लिए और कितनी निर्भयाओं को बलिदान देना पड़ेगा?'': मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रेप केस में 15 साल के लड़के को जमानत देने से इनकार किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस 15 वर्षीय किशोर को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर लगभग 10-11 वर्ष की आयु की नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया गया है और इस घटना के बाद नाबालिग को काफी लंबे समय तक रक्तस्राव हुआ था। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की खंडपीठ ने कहा कि बलात्कार का अपराध, दैहिक प्रकृति का होने के कारण, तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि किसी व्यक्ति को इसका विशिष्ट ज्ञान न हो। इसी के साथ पीठ ने परिवीक्षाधीन अधिकारी के उस अवलोकन से सहमत होने से इनकार कर दिया कि बलात्कार का...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए निर्धारित अधिकतम दरों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए निर्धारित अधिकतम दरों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया अवलोकन करने के बाद राज्य सरकार को प्राइवेट अस्पतालों में COVID-19 के इलाज के लिए उसके द्वारा निर्धारित अधिकतम दरों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति मनश रंजन पाठक की खंडपीठ ने आदेश दिया:"..प्रथम दृष्टया यह थोड़ा ऊंची प्रतीत होता है। हम केवल राज्य सरकार को निर्देश दे सकते हैं कि वह सभी हितधारकों को सुनने के बाद सिंगल केबिन की दर सहित इन कीमतों पर पुनर्विचार कर सकती है।"यह निर्देश तब आया जब न्यायालय मुद्दों को...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने COVID-19 रोगियों के इलाज के खर्च, वैक्सीन का आवंटन और उसकी कीमत, पीड़ितों के परिजनों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने COVID-19 रोगियों के इलाज के खर्च, वैक्सीन का आवंटन और उसकी कीमत, पीड़ितों के परिजनों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल (Chief Justice Rajesh Bindal) और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी (Justice Arijit Banerjee) की खंडपीठ जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई कर थी, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार की COVID-19 प्रबंधन नीति पर जवाब मांगा गया है।याचिका में अदालत से राज्य सरकार को महामारी और आने वाली तीसरी लहर से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए किए गए उपायों पर निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से राज्य को कई पहल सुनिश्चित करने का निर्देश देने का आग्रह किया है जिसमें प्राथमिकता...

यह राज्य के साधन के अन्यायपूर्ण संवर्धन का किताबी उदाहरण है: मद्रास हाईकोर्ट ने बीएसएनएल को 20 वर्षों तक भूमि का उपयोग ना करने पर फटकार लगाई
"यह राज्य के साधन के अन्यायपूर्ण संवर्धन का किताबी उदाहरण है": मद्रास हाईकोर्ट ने बीएसएनएल को 20 वर्षों तक भूमि का उपयोग ना करने पर फटकार लगाई

मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को बीएसएनएल को एएस मारीमुथु की संपत्ति को केवल एक रुपये की मामूली राशि का भुगतान करके हड़पने पर फटकार लगाई।जस्टिस एन आनंद वेंकटेश की खंडपीठ ने कहा, "यह रिट याचिका एक किताबी उदाहरण है कि कैसे राज्य के एक साधन ने खुद को अन्यायपूर्ण रूप से समृद्ध करने का प्रयास किया है और इस प्रकार याचिकाकर्ता से संबंधित संपत्ति को केवल एक रुपये की मामूली राशि का भुगतान करके.....हड़प लिया है।"कोर्ट का मामलाअदालत याचिकाकर्ता मारीमुथी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने बीएसएनएल को एक...

दिद्दा कॉपीराइट मामला- ऐतिहासिक तथ्यों का कभी कॉपीराइट नहीं किया जा सकता: कंगना रनौत एफआईआर रद्द कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची
दिद्दा कॉपीराइट मामला- ऐतिहासिक तथ्यों का कभी कॉपीराइट नहीं किया जा सकता: कंगना रनौत एफआईआर रद्द कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची

अभिनेत्री कंगना रनौत और उनके भाई ने लेखक आशीष कौल की निजी शिकायत पर दीद्दा कॉपीराइट विवाद में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है।कौल ज़ी नेटवर्क के पूर्व कार्यकारी और दीद्दा: द वॉरियर क्वीन ऑफ़ कश्मीर पुस्तक के लेखक हैं।संविधान के अनुच्छेद 226, 227 और सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका में रनौत ने आरोप लगाया कि उन्हें और तीन अन्य को कौल द्वारा आपराधिक कार्यवाही में दुर्भावना से घसीटा गया है, क्योंकि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।आगे रनौत...

Lawyer Not Wearing Neck-Band During Virtual Hearing
"बेहद दुर्भाग्यपूर्ण", उड़ीसा हाईकोर्ट ने अनावश्यक रूप से सुनवाई स्थगित करने के लिए अनुपस्थित वकील पर पांच हजार रूपये का जुर्माना लगाया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक वकील पर पांच हजार रूपये का जुर्माना लगाया। दरअसल, इस मामले के लिए एक विशेष तारीख तय होने के बावजूद वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग मोड में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का वकील अनुपस्थित रहा था।मुख्य न्यायाधीश डॉ एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति एस के पाणिग्रही की खंडपीठ ने अधिवक्ता संजत दास पर जुर्माना लगाया, जो अपने मामले के दौरान अनुपस्थित थे और अपने सहयोगी को निर्देश दिया कि वे अदालत को सूचित करें कि वह अदालत में उपस्थित होने में असमर्थ हैं।कोर्ट ने कहा कि, "कोर्ट इसकी सराहना...

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म न्याय: द जस्टिस पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'न्याय: द जस्टिस' पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के पिता कृष्ण किशोर सिंह द्वारा दायर फिल्म निर्माताओं द्वारा अभिनेता के नाम, कैरिकेचर के उपयोग करने और उनके जीवन पर बनी फिल्म "न्याय: द जस्टिस" की ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने से रोक लगाने वाली मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने प्रतिवादियों से जवाब मांगा और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की।यह आदेश तब आया जब पीठ ने अपीलकर्ता पिता की...