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बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की क्लोन प्रतियां उपलब्ध कराए जाने तक ट्रायल पर रोक लगाने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

भीमा कोरेगांव - एल्गर परिषद मामले में आरोपी ने मुकदमे पर रोक लगाने या आरोप तय करने को तब तक टालने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है जब तक कि जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की क्लोन प्रतियां उपलब्ध नहीं करा दी जाती हैं।आरोपी सुधा भारद्वाज और पत्रकार गौतम नवलखा ने नौ अगस्त को 15 आरोपियों के खिलाफ विशेष एनआईए अदालत के समक्ष राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा मसौदा आरोप प्रस्तुत करने के बाद कोर्ट से मांग की है।एनआईए ने उच्च न्यायालय के समक्ष एक मौखिक बयान दिया कि वह 25 अगस्त को सुनवाई के...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट – 'बच्चे को समर्पण करने वाले माता-पिता की पहचान सुनिश्चित करना': कर्नाटक हाईकोर्ट ने सीडब्ल्यूसी के लिए दिशानिर्देश जारी किए

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को बाल कल्याण समितियों द्वारा माता-पिता/अभिभावक द्वारा समिति को बच्चे के समर्पण के मामलों में पालन की जाने वाली जांच और परामर्श की प्रक्रिया प्रदान करने के लिए जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) एक्ट, 2015 की धारा 110 (2) के तहत नियम बनाने की शक्तियों का प्रयोग करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रक्रिया को यथासंभव शीघ्रता से और किसी भी स्थिति में आज से 3 महीने की अवधि के भीतर निर्धारित किया जाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश अभय ओका...

धारा 319 CrPC के तहत शक्ति का प्रयोग: जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड किए गए साक्ष्य को प्राथमिकता दी जाएगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
धारा 319 CrPC के तहत शक्ति का प्रयोग: "जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड किए गए साक्ष्य को प्राथमिकता दी जाएगी": इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि CrPC की धारा 319 के तहत शक्ति के प्रयोग के ‌लिए, सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा रिकॉर्ड किए गए साक्ष्य को जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री से अधिक दी प्रधानता दी जाएगी।जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा, " संहिता की धारा 319 के तहत शक्तियों के प्रयोग के उद्देश्य से जांच के दौरान जांच अधिकारी द्वारा एकत्र की गई सामग्री पर भरोसा करते हुए जो तर्क दिया गया है, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है ।"धारा 319 CrPC के बारे मेंउल्लेखनीय है कि आपराधिक प्रक्रिया...

नागरिकों की सुरक्षा दांव पर, अधिकारियों को यह पता होना चाहिए कि राज्य का क्षेत्राधिकार कहां समाप्त होता है : गुजरात हाईकोर्ट ने क्षेत्राधिकार पर एसडीएम को फटकार लगाई
"नागरिकों की सुरक्षा दांव पर, अधिकारियों को यह पता होना चाहिए कि राज्य का क्षेत्राधिकार कहां समाप्त होता है" : गुजरात हाईकोर्ट ने क्षेत्राधिकार पर एसडीएम को फटकार लगाई

गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र शासित प्रदेशों (गुजरात राज्य के अधिकार क्षेत्र के बाहर) से लोगों को बाहर निकालकर नागरिकों की स्वतंत्रता का अतिक्रमण करने के लिए राज्य के अधिकारियों को फटकार लगाई।इन लोगों पर राज्य का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।न्यायमूर्ति परेश उपाध्याय की खंडपीठ गुजरात के कई जिलों और दमन और दादरा नगर हवेली के केंद्र शासित प्रदेशों से उप-मंडल मजिस्ट्रेट, नवसारी, पूर्व याचिकाकर्ता सागर भामारे द्वारा दो साल की अवधि के लिए पारित आदेश को चुनौती दे रही याचिका पर सुनवाई कर रही...

अवैध रूप से रह रहे विदेशी प्रवासियों के लिए डिटेंशन सेंटर: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को निर्माण पूरा करने, बंदियों को स्थानांतरित करने के लिए 45 दिन का समय दिया
अवैध रूप से रह रहे विदेशी प्रवासियों के लिए डिटेंशन सेंटर: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को निर्माण पूरा करने, बंदियों को स्थानांतरित करने के लिए 45 दिन का समय दिया

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी प्रवासियों की डिटेंशन से संबंधित एक याचिका में असम सरकार को मटिया, गोलपारा में एक डिटेंशन सेंटर का निर्माण पूरा करने और उसके बाद बंदियों को स्थानांतरित करने के लिए 45 दिनों का समय दिया।न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराणा ने असम सरकार, गृह और राजनीतिक विभाग के सचिव को भी 30 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई के लिए पोस्ट करते हुए 45 दिनों के अंत में निर्माण की स्थिति के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।विकास संथानु बोरठाकुर, अबंती दत्ता,...

केरल हाईकोर्ट
विवाद में एक पक्षकार मध्यस्थ को नामित नहीं कर सकता, भले ही मध्यस्थता समझौता इसकी अनुमति देता हो: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता समझौते के लिए न तो एक पक्षकार और न ही इसके द्वारा नामित व्यक्ति को मध्यस्थ नामित किया जा सकता है, भले ही समझौता स्पष्ट रूप से इसकी अनुमति देता हो।न्यायालय ने इस धारणा के साथ मध्यस्थता खंड की शर्तों की अवहेलना की, जिस हद तक उसने पट्टेदार (प्रतिवादी) को मध्यस्थ को नामित करने की अनुमति दी, जब पक्षकार सर्वसम्मति से नामांकित व्यक्ति तक पहुंचने में विफल रहीं।बेंच ने कहा कि,"वर्ष 2016 में अधिनियम में संशोधन के बाद, जिसके माध्यम से उप-धारा (5) को धारा 12 में डाला गया,...

हनी ट्रैप: दिल्ली हाईकोर्ट ने उस महिला को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिसने बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराने की धमकी दी थी
हनी ट्रैप: दिल्ली हाईकोर्ट ने उस महिला को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिसने बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराने की धमकी दी थी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। महिला ने कथित तौर पर एक पुरुष को धमकी दी थी कि अगर वह दो लाख रुपए की मांग को पूरा करने में विफल रहता है तो वह उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करा देगी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह हन‌ी ट्रैप का मामला है।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद महिला आरोपी की अग्रिम याचिका पर विचार कर रहे थे, जिसके खिलाफ आईपीसी की धारा 328 (अपराध करने के इरादे से जहर आदि से घायल करना), 389 (व्यक्ति को अपराध के आरोप का भय दिखाकर जबरन वसूली करना) और 34...

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा के दौरान असम भाग कर आए लोगों को अस्थायी राहत प्रदान की गई; वे अपने घर वापस लौट चुके हैं: राज्य सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट से जनहित याचिका को बंद करने का आग्रह किया
'पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा के दौरान असम भाग कर आए लोगों को अस्थायी राहत प्रदान की गई; वे अपने घर वापस लौट चुके हैं': राज्य सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट से जनहित याचिका को बंद करने का आग्रह किया

असम राज्य सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट को सूचित किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा के दौरान असम भाग कर आए 70 विस्थापित व्यक्तियों को COVID-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जिला प्रशासन द्वारा अस्थायी आश्रय, भोजन और दवाएं प्रदान की गईं।राज्य ने यह भी बताया कि प्रभावित लोग अब अपने घरों को वापस चले गए हैं और चूंकि असम में अब कोई आमद नहीं है, इसलिए इस संबंध में स्थापित जनहित याचिका को बंद किया जा सकता है।अभिजीत सरमा और रवि चेड्डीलाल द्वारा दायर उक्त जनहित याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव...

वसीयत के न‌िष्पादन को साबित करने के लिए मुंशी के परीक्षण की जरूरत नहींः गुजरात हाईकोर्ट
वसीयत के न‌िष्पादन को साबित करने के लिए मुंशी के परीक्षण की जरूरत नहींः गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने माना है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 68 के प्रावधानों के मुताबिक, वसीयत के मुशी के परीक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि कानून के लिए कम से कम एक गवाह की परीक्षा की आवश्यकता है।1872 के अधिनियम की धारा 68 के अनुसार, कानून द्वारा आवश्यक दस्तावेज के निष्पादन का प्रमाण प्रमाणित हो। यदि किसी दस्तावेज को प्रमाणित करने के लिए कानून द्वारा आवश्यक है, तो इसे साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा जब तक कि कम से कम एक साक्ष्य गवाह को इसके निष्पादन को साबित करने...

मद्रास हाईकोर्ट ने पिता द्वारा ज़बरदस्ती अलग की गई महिला और उसके पार्टनर ट्रांसमैन को फिर से साथ रहने की अनुमति दी
मद्रास हाईकोर्ट ने पिता द्वारा ज़बरदस्ती अलग की गई महिला और उसके पार्टनर ट्रांसमैन को फिर से साथ रहने की अनुमति दी

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने पिछले हफ्ते अपने 23 वर्षीय प्रेमी रेवती को उसके पिता की गैरकानूनी अधिरक्षा से रिहा करने का निर्देश देकर ट्रांसमैन और उसके प्रेमी को फिर से मिला दिया।अदालत याचिकाकर्ता ट्रांसमैन द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर फैसला सुना रही थी।इस याचिका में उसके प्रेमी ने रेवती के पिता पर उसे अवैध रूप से अधिरक्षा में रखने का आरोप लगाया गया था। तदनुसार, उसने अपने प्रेमी को आज़ाद कराने के लिए अदालत की अनुमति मांगी थी।न्यायमूर्ति वी. भारतीदासन और न्यायमूर्ति जे. निशा बानो...

कोर्ट का हर एक मिनट कीमती है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित अपील के बारे में सूचित करने में विफलता के लिए पचास हजार रूपये का जुर्माना लगाया
'कोर्ट का हर एक मिनट कीमती है': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित अपील के बारे में सूचित करने में विफलता के लिए पचास हजार रूपये का जुर्माना लगाया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने हाल ही में एक मामले में याचिकाकर्ता पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। दरअसल, याचिकाकर्ता ने याचिका को वापस लेने के लिए कोर्ट से मांग की थी। कोर्ट ने यह कहते हुए याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित अपील के बारे में कोर्ट को सूचित नहीं किया था।न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति अनिल वर्मा की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट में समानांतर कार्यवाही के बारे में अदालत को सूचित करने में याचिकाकर्ता की विफलता की निंदा की...

15 साल की लड़की के साथ छेड़छाड़ का मामला लापरवाही और असंवेदनशील तरीके से निपटाया गया: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया
"15 साल की लड़की के साथ छेड़छाड़ का मामला लापरवाही और असंवेदनशील तरीके से निपटाया गया": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 साल की लड़की के साथ छेड़छाड़ के मामले में लापरवाही और संवेदनहीनता बरतने पर पुलिस विभाग को जमकर फटकार लगाई है। जस्टिस राजबीर सिंह की खंडपीठ ने चित्रकूट जिले के पुलिस अधीक्षक को दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और एक महीने के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।अदालत आवेदक द्वारा धारा 305, 341, 376D IPC और धारा 4 POCSO अधिनियम और 3 (2) (V) SC/ST अधिनियम के तहत दर्ज आपराधिक मामले में दायर जमानत...

आरोपी यह दावा नहीं कर सकता कि उसके इकबालिया बयान को केवल कुछ अपराधों के लिए माना जाए और दूसरों के लिए नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
आरोपी यह दावा नहीं कर सकता कि उसके इकबालिया बयान को केवल कुछ अपराधों के लिए माना जाए और दूसरों के लिए नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक महत्वपूर्ण अवलोकन में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह माना कि जब किसी घटना या घटनाओं के सेट के संबंध में समग्र रूप से दोषसिद्ध किया जाता है तो आरोपी बाद में यह दावा नहीं कर सकता है कि उसके द्वारा दिए गए इकबालिया बयान पर केवल कुछ अपराधों के संबंध में विचार किया जाना चाहिए और दूसरों के लिए नहीं।जस्टिस अजय त्यागी की खंडपीठ अपीलकर्ता-आरोपी की एक दलील पर विचार कर रही थी कि उसे उसकी स्वीकारोक्ति के आधार पर धारा 413 IPC के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि निचली अदालत ने धारा 411 IPC के तहत...

एनजीटी ने ओडिशा सरकार को दो महीने के भीतर एलीफेंट कॉरीडोर के संबंध में अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया
एनजीटी ने ओडिशा सरकार को दो महीने के भीतर एलीफेंट कॉरीडोर के संबंध में अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, ईस्ट ज़ोन बेंच, कोलकाता ने ओडिशा राज्य सरकार को एशियन नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (एएनसीएफ) द्वारा पहचाने गए एलीफेंट कॉरीडोर के संदर्भ में एक अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया।ट्रिब्यूनल ने अपने निर्देश में एलीफेंट कॉरीडोर के कार्यान्वयन के लिए समय-रेखा पर कार्य योजना को सूचित करने को कहा।यह कार्य योजना दो महीने की अवधि के भीतर एएनसीएफ द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार लागू होनी।न्यायमूर्ति बी. अमित स्टालेकर और विशेषज्ञ सदस्य सैबल दासगुप्ता ने यह निर्देश वाइल्डलाइफ सोसाइटी ऑफ...

कोर्ट में मौजूद वकील ने स्थगन की मांग करते हुए बीमारी की पर्ची भेजी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन को सदस्यों के अनुचित व्यवहार के बारे में सूचित करने के निर्देश दिए
कोर्ट में मौजूद वकील ने स्थगन की मांग करते हुए बीमारी की पर्ची भेजी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन को सदस्यों के 'अनुचित व्यवहार' के बारे में सूचित करने के निर्देश दिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक वकील (याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील) के व्यवहार की निंदा की, जिसने अदालत परिसर के भीतर मौजूद होने के बावजूद एक मामले में स्थगन की मांग करते हुए अदालत में अपनी बीमारी की पर्ची भेजी।जिन परिस्थितियों में बीमारी की पर्ची भेजी गई थी, उसे देखते हुए न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने उन्हें अदालत के समक्ष बुलाया और उनसे प्रश्न पूछा गया कि क्या वह इस मामले में अदालत के समक्ष पेश हो रहे हैं।वकील ने इसके जवाब में कहा कि वह इस मामले में पेश होता और आगे कहा कि वह अदालत...

दिल्ली हाईकोर्ट
COVID-19: दिल्ली हाईकोर्ट 31 अगस्त से और जिला न्यायालय 24 अगस्त से सीमित फीजिकल हियरिंग फिर से शुरू करेगा

दिल्ली हाईकोर्ट के फुल कोर्ट ने अपने पहले के कार्यक्रम को स्थगित करते हुए क्रमशः 31 अगस्त और 24 अगस्त से हाईकोर्ट के साथ-साथ जिला न्यायालयों में सीमित फिजिकल सुनवाई फिर से शुरू करने का प्रस्ताव पास लिया है।गुरुवार को जारी कार्यालय आदेश न्यायालय द्वारा जारी पहले के आदेश को संशोधित करता है। पहले के आदेश में कहा गया था कि दिल्ली हाईकोर्ट के साथ-साथ जिला न्यायालयों में शारीरिक सुनवाई क्रमशः 6 सितंबर और 31 अगस्त से प्रतिबंधित तरीके से फिर से शुरू की जाएगी।कार्यालय द्वारा जारी आदेश में हाईकोर्ट के...

गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 बल, लालच या धोखाधड़ी के बिना किए गए अंतर-धार्मिक विवाहों पर लागू नहीं होगा: गुजरात उच्च न्यायालय
गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 बल, लालच या धोखाधड़ी के बिना किए गए अंतर-धार्मिक विवाहों पर लागू नहीं होगा: गुजरात उच्च न्यायालय

गुजरात उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 के प्रावधान उन अंतर-धार्मिक विवाहों पर लागू नहीं होंगे, जो बिना बल, प्रलोभन या कपटपूर्ण तरीके से होते हैं।चीफ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बीरेन वैष्णव ने उन अंतर-धार्मिक विवाह के पक्षों की रक्षा के लिए यह अंतरिम आदेश पारित किया, जिन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा।"प्रारंभिक प्रस्तुतियां और दलीलें दर्ज करने के बाद, हमने निम्नानुसार निर्देश दिया है। इसलिए हमारी राय है कि...

भविष्य में बच्‍ची को स्वस्थ पारस्परिक संबंधों को विकसित करने से रोक सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट ने बास्केटबॉल कोच को कथित यौन उत्पीड़न के मामले में जमानत से इनकार किया
"भविष्य में बच्‍ची को स्वस्थ पारस्परिक संबंधों को विकसित करने से रोक सकता है": दिल्ली हाईकोर्ट ने बास्केटबॉल कोच को कथित यौन उत्पीड़न के मामले में जमानत से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक 57 वर्षीय बास्केटबॉल कोच को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर 13 वर्षीय लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि जीवन के शुरुआती चरण में विश्वासघात बच्चे को भविष्य में स्वस्थ पारस्परिक संबंध विकसित करने से रोक सकता है।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, "बच्ची की भलाई पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए, जिसका मानसिक स्थिति कमजोर, संवेदनशील और विकासशील अवस्था में है। बचपन के यौन शोषण के दीर्घकालिक प्रभाव होते हैं, कई बार दुर्गम होते हैं।""इसलिए, यौन हमला...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत गोंड उप-जातियों को नामित करने के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत गोंड उप-जातियों को नामित करने के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस आदेश को रद्द किया, जिसके तहत दो गोंड उप-जातियों - नायक और ओझा को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की श्रेणी में नामित किया गया था।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार-चतुर्थ की खंडपीठ ने कहा कि यूपी सरकार को गोंड जाति या उसके पर्यायवाची / उपजाति नायक और ओझा को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में नामित करने की अनुमति नहीं है।संक्षेप में मामलाजाति को अनुसूचित जनजातियों की श्रेणी में आने की अधिसूचना जारी करने की शक्ति भारत के...