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गुजरात हाईकोर्ट
'स्वतंत्रता का दुरुपयोग या जमानत शर्तों का उल्लंघन नहीं': गुजरात हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द करने से संबंधित कानून की व्याख्या की

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) के जस्टिस आशुतोष शास्त्री की खंडपीठ ने हाल ही में जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने नोट किया कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ है या आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ स्वतंत्रता के दुरुपयोग का मामला नहीं बनाया जा सकता।आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 114, 34 और 120 (बी) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए 20 एफआई दर्ज की गई थीं। इन एफआई में मुख्य आरोपी व्यक्ति विकास सहकारी बैंक लिमिटेड ('आवेदक बैंक')...

Gujarat High Court
'कोई सकारात्मक सामग्री नहीं': गुजरात हाईकोर्ट ने पुलिस की बर्बरता के झूठे आरोपों से जुड़े मामले में अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने से इनकार किया

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने आवेदक द्वारा अपनी बहन (नाबालिग) के माध्यम से अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 10 के तहत दायर एक झूठे आवेदन को खारिज करते हुए कहा,"यह सामान्य कानून है कि अवमानना की कार्यवाही शुरू करना एक गंभीर कदम है, इसे नियमित तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। जब तक कोई निश्चित सामग्री और स्पष्ट मामला नहीं बनता, यह कोर्ट अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने से इनकार कर देगा।"यहां आवेदक ने डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनी बहन और खुद द्वारा सहन...

दिल्ली हाईकोर्ट में नौ एडवोकेट न्यायाधीश के रूप में नियुक्त, जजों की संख्या बढ़कर 44 हुई
दिल्ली हाईकोर्ट में नौ एडवोकेट न्यायाधीश के रूप में नियुक्त, जजों की संख्या बढ़कर 44 हुई

केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नौ अधिवक्ताओं की नियुक्ति की पुष्टि की है, जिससे दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 44 हो गई है। इस संबंध में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट किया,"भारत के संविधान के तहत प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित वकीलों को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाता है। मैं उन सभी को शुभकामनाएं देता हूं।"निम्नलिखित नाम हैं:- सुश्री तारा वितस्ता गंजु- श्रीमती मिनी पुष्करण - श्री विकास महाजन - श्री तुषार राव...

तलाकशुदा मुस्लिम महिला अपनी जरूरत पूरी करने के लिए सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण पोषण की हकदार : इलाहाबाद हाईकोर्ट
तलाकशुदा मुस्लिम महिला अपनी जरूरत पूरी करने के लिए सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण पोषण की हकदार : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि एक मुस्लिम महिला अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार है। जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने आगे कहा कि जहां पत्नी कहती है कि उसे खुद को और अपनी बेटी के भरण पोषण में बहुत कठिनाइयां हैं, जबकि उसके पति की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी है, पत्नी पति से भरण पोषण प्राप्त करने की हकदार होगी।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (अर्शिया रिज़वी) अपनी बेटी के साथ प्रधान न्यायाधीश / एडीजे, परिवार न्यायालय, लखनऊ...

कदाचार की शिकायत पर ब्रिटिश काउंसिल लाइब्रेरी कर्मचारियों के खिलाफ आईसीसीआर जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कदाचार की शिकायत पर ब्रिटिश काउंसिल लाइब्रेरी कर्मचारियों के खिलाफ आईसीसीआर जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) द्वारा नियुक्त और ब्रिटिश काउंसिल लाइब्रेरी में रखा गया व्यक्ति, ब्रिटिश काउंसिल लाइब्रेरी का कर्मचारी है और यह कदाचार की शिकायत पर कर्मचारी के खिलाफ जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।जस्टिस पीएस दिनेश कुमार और ज‌स्टिस एमजी उमा ने आईसीसीआर की याचिका को स्वीकार करते हुए और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के आदेश को रद्द करते हुए कहा, "इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में, हमारे विचार में, कैट की जांच कि आईसीसीआर...

मुंबई कोर्ट ने ऐसी सुविधाओं का उपयोग करने वाली महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक शौचालयों के बाहर महिला सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति का सुझाव दिया
मुंबई कोर्ट ने ऐसी सुविधाओं का उपयोग करने वाली महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक शौचालयों के बाहर महिला सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति का सुझाव दिया

मुंबई में यौन अपराधों से बच्चों की विशेष सुरक्षा (पोक्सो) कोर्ट ने सार्वजनिक शौचालयों के बाहर महिला सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति की सिफारिश की, जो ऐसी सुविधाओं का उपयोग करने वाली महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होंगी।स्पेशल जज एचसी शेंडे ने सार्वजनिक शौचालय के अंदर 7 साल की बच्ची से छेड़छाड़ के लिए एक सफाईकर्मी को दोषी ठहराया और पांच साल की जेल की सजा सुनाई हुए। उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 506 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 10 के साथ पठित धारा 9...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
'रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं': दिल्ली हाईकोर्ट ने कंज़्यूमर फोरम में खाली पदों और बुनियादी सुविधाओं पर बेहतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के कंज़्यूमर फोरम में खाली पदों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं के जिलेवार विवरण को उजागर करते हुए एक बेहतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार द्वारा दायर पूर्व की स्टेटस रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा,"वही तथ्य और आंकड़े दिये गए हैं। हालांकि, हम इससे संतुष्ट नहीं हैं।"इस प्रकार बेंच ने निम्नलिखित पहलुओं पर दिल्ली सरकार से बेहतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी:- कंज़्यूमर फोरम के सदस्यों के स्वीकृत पदों की...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
बच्चों के समग्र विकास में माता-पिता दोनों शामिल हैं, सेटलमेंट एग्रीमेंट में यह प्रतिबिंबित होना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि बच्चों के समग्र विकास में माता-पिता दोनों को शामिल होने चाहिए और सेटलमेंट एग्रीमेंट में यह प्रतिबिंबित होना चाहिए।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश के कथित गैर-अनुपालन के मद्देनजर पत्नी की ओर से दायर अवमानना ​​​​याचिका पर सुनवाई के दरमियान यह टिप्पणियां कीं।याचिकाकर्ता पत्नी की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्रतिवादी पति ने उस आदेश का उल्लंघन किया जो एक सेटलमेंट एग्रीमेंट पर आधारित था क्योंकि पति न तो दूसरे समझौते के लिए आगे आ रहा था और न ही वह बच्चे के...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
[नोटरी अधिनियम की धारा 13] वकील, नोटरी द्वारा किए गए अपराधों का संज्ञान नहीं ले सकते; चार्जशीट दाखिल करने और संज्ञान लेने के लिए केंद्र/राज्य की अनुमति आवश्यक: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने फैसला सुनाया कि नोटरी अधिनियम की धारा 13 के अनुसार, एक वकील और नोटरी द्वारा किए गए अपराधों के लिए न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने के लिए एक बार है, जबकि अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल करने और संज्ञान लेने के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार से पुलिस को अनुमति प्राप्त करनी होगी।जस्टिस के नटराजन की एकल पीठ ने केंद्र सरकार के नोटरी प्रवीण कुमार आद्यापडी और ईश्वर पुजारी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 366, 420, 465, 468, 472,...

डर के मारे किसी में खूंखार अपराधियों के खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण मामले में अतीक अहमद के सहयोगी को जमानत देने से इनकार किया
"डर के मारे किसी में खूंखार अपराधियों के खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं है": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण मामले में अतीक अहमद के सहयोगी को जमानत देने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपहरण-जबरदस्ती वसूली मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद (वर्तमान में देवरिया जेल में बंद) के मुख्य सहयोगी को जमानत देने से इनकार कर दिया।जस्टिस कृष्ण पहल की खंडपीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों में अब यह स्पष्ट हो गया है कि कोई भी डर के मारे खूंखार और कठोर अपराधियों के खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं करता।संक्षेप में मामलाअदालत सांसद अतीक अहमद के कथित गुर्गे गुलाम सरवर की जमानत याचिका पर विचार कर रही थी, जिस पर शिकायतकर्ता/पीड़ित से जबरदस्ती...

दिल्ली हाईकोर्ट ने खुले बाजार में नया NSAIDS लॉन्च करने से पहले गिद्धों पर दवाओं की सेफ्टी टेस्टिंग के लिए सिस्टम बनाने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने खुले बाजार में नया NSAIDS लॉन्च करने से पहले गिद्धों पर दवाओं की सेफ्टी टेस्टिंग के लिए सिस्टम बनाने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने खुले बाजार में नई गैर-स्टेरायडल एंटी इन्फ्लामेट्री दवाएं (NSAIDS) लॉन्च करने से पहले जंगली पक्षियों विशेष रूप से गिद्धों पर दवाओं के सेफ्टी टेस्टिंग के लिए प्रभावी सिस्टम बनाने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को नोटिस जारी किया।एक्टिंग चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की खंडपीठ ने मामले को 24 अगस्त को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट करते हुए चार सप्ताह के भीतर प्रतिवादी अधिकारियों से जवाब मांगा।याचिका में केंद्र, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, केंद्रीय औषधि मानक...

दुर्लभ और असाधारण मामला: उड़ीसा हाईकोर्ट ने जिला जज भर्ती परीक्षा में उम्मीदवार के दो उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन का आदेश दिया
"दुर्लभ और असाधारण मामला": उड़ीसा हाईकोर्ट ने जिला जज भर्ती परीक्षा में उम्मीदवार के दो उत्तरों के 'पुनर्मूल्यांकन' का आदेश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने बार से जिला जज संवर्ग में सीधी भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में शामिल उम्मीदवार के दो उत्तरों के 'पुनर्मूल्यांकन' का आदेश दिया है।चीफ जस्टिस डॉ एस मुरलीधर और जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत व्यापक शक्ति उपलब्ध हो सकती है, भले ही ऐसी स्थिति में पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान न हो, जहां एक उम्मीदवार सही उत्तर देने के बावजूद और जिसके बारे में जरा भी संदेह नहीं हो सकता है, उसे गलत उत्तर देने वाला माना जाता है और परिणामस्वरूप उम्मीदवार को किसी भी अंक...

गुजरात हाईकोर्ट
संक्षिप्त अवधि के लिए 'प्रतिकूल टिप्पणी' का हवाला देते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर को ऐकेडमिक ग्रेड वेतन से इनकार नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एलई कॉलेज, मोरबी के औद्योगिक इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर को एक बड़ी राहत देते हुए प्रतिवादी अधिकारियों को उन्हें 2010 से 8,000 और 2013 से 9,000 रुपये के परिणामी लाभ का शैक्षणिक ग्रेड वेतन (एजीपी) देने का निर्देश दिया।जस्टिस वैष्णव ने कहा कि 2009-10 की कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को छोड़कर 19 साल की सेवा के दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई। अनधिकृत वेतन का मुद्दा जुर्माने का एक पहलू है, जबकि निर्णय लेने की उनकी क्षमता या पहल की कमी के बारे में...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
कानून के तहत किसी को भी एक साथ दो उपचारों को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई

जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने हाल ही में एक आदेश को चुनौती देने के लिए एक पक्ष को फटकार लगाई। उक्त आदेश किसी अन्य अदालत में चुनौती का विषय था।जस्टिस संजीव कुमार ने कहा,"यह न्यायालय यह समझ नहीं पा रहा है कि याचिकाकर्ता अदालत के समक्ष एक ही आदेश को चुनौती देने की हिम्मत कैसे कर सकता है। कानून के तहत किसी को भी दो उपचारों को एक साथ आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं है। याचिकाकर्ता की रिट याचिका, जहां तक ​​​​06.10.2018 के आदेश को चुनौती देती है, पूरी तरह से गलत है और खारिज किए जाने योग्य है।"याचिकाकर्ता ने...

कलकत्ता हाईकोर्ट
चोट की प्रकृति का मेडिकल एविडेंस पीड़ित के चश्मदीद साक्ष्य पर हावी है: कलकत्ता हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 324 के तहत दोषसिद्धि खारिज की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 324 के तहत दोषसिद्धि को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि चोट की प्रकृति से संबंधित मेडिकल एविडेंस पीड़ित के चश्मदीद साक्ष्य पर प्रबल होगा।जस्टिस बिबेक चौधरी आईपीसी की धारा 324 के तहत संबंधित निचली अदालत द्वारा पारित दोषसिद्धि के आदेश और एक साल के कारावास की सजा के साथ-साथ 1,000 रुपये के जुर्माने के खिलाफ दायर अपील पर फैसला सुना रहे थे।इस मामले में मोसिलुद्दीन अहमद नाम के व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि 7 अगस्त, 2016 को आरोप...

कलकत्ता हाईकोर्ट
'अनुचित कानूनी सलाह के लिए वकील आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं': कलकत्ता हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक वकील के खिलाफ कथित रूप से गलत और अनुचित कानूनी सलाह देने के आरोप में शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। उक्त कानूनी सलाह एक कंपनी को बैंक ऋण स्वीकृत कराने में सहायक थी, जिसे बाद में गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया। लोन की बकाया राशि 2.57 करोड़ रुपये थी।जस्टिस आनंद कुमार मुखर्जी ने कहा कि केवल इसलिए कि वकील की राय स्वीकार्य नहीं थी, उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती, विशेष रूप से किसी भी ठोस सबूत के अभाव में कि वह अन्य...

गुवाहाटी हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 482 के तहत शक्तियों का दुर्लभतम मामलों में कम से कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दोहराया

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका से निपटने के दौरान सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट की शक्तियों का कम से कम और दुर्लभतम मामलों में उपयोग करने की आवश्यकता है।जस्टिस संजय कुमार मेधी ने टिप्पणी करते हुए कहा:"भजन लाल (सुप्रा) के उक्त मामले को समग्र रूप से पढ़ने से यह निष्कर्ष निकलेगा कि एफआईआर रद्द करने की शक्ति का प्रयोग बहुत कम और दुर्लभतम मामलों में किया जाना है। झूठे और कष्टप्रद आरोपों के लिए कानून में उपलब्ध उपचार हाईकोर्ट को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत...

एनडीपीएस अपराध संगठित अपराध का हिस्सा, प्रतिबं‌धित पदार्थ की ‌रिकवरी दोषसिद्धि के लिए जरूरी नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
एनडीपीएस अपराध संगठित अपराध का हिस्सा, प्रतिबं‌धित पदार्थ की ‌रिकवरी दोषसिद्धि के लिए जरूरी नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 21 (सी)/29 के तहत दर्ज मामले में एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी, हिरासत या यहां तक ​​कि उसकी सजा के लिए प्रतिबंधित पदार्थ की रिकवरी या जब्ती आवश्यक नहीं है।जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि कानून के तहत अपराध एक संगठित अपराध का हिस्सा है और अभियोजन के पक्ष में कोई भी ठोस और पुष्टि करने वाली सामग्री उसके अपराध को स्थापित करने के लिए पर्याप्त होगी।उन्होंने कहा, "इस...

मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका को 40,000 टन चावल की आपूर्ति करने के राज्य के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका को 40,000 टन चावल की आपूर्ति करने के राज्य के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ एक ए. जयशंकर द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अत्यधिक मात्रा में चावल की खरीद के लिए वर्तमान सरकार के आदेश को रद्द करने और प्रतिवादी को पांचवीं और छठी उत्तरदाताओं (क्रमशः उपभोक्ता मामले मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और भारतीय खाद्य निगम) से चावल खरीदने...

सुनवाई का अवसर जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने तहसीलदार को पोल्ट्री किसान को अपना फार्म शिफ्ट करने का आदेश देने से पहले उसे सुनने को कहा
सुनवाई का अवसर जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने तहसीलदार को पोल्ट्री किसान को अपना फार्म शिफ्ट करने का आदेश देने से पहले उसे सुनने को कहा

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में तहसीलदार को पोल्ट्री किसान को अपने पोल्ट्री फॉर्म को कहीं और स्थानांतरित करने के लिए कहने से पहले उसे सुनने के लिए कहा।जस्टिस विनीत कुमार माथुर ने टिप्पणी करते हुए कहा:"Annex. 5 दिनांक 09.09.2016 के अवलोकन से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को नोटिस पारित करने से पहले सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया। इस न्यायालय को लगता है कि चूंकि नोटिस 09.09.2016 के गलत परिणाम होंगे, इसलिए याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है।"वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता पोल्ट्री...