मुख्य सुर्खियां

केरल हाईकोर्ट
नॉन जॉइनिंग ड्यूटी रिक्तियों को नई रिक्तियों के रूप में माना जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केरल राज्य और अधीनस्थ सेवा नियमों (विशेष नियम) के भाग III के संशोधन के बाद लोक सेवा आयोग (पीएससी) में निवारक अधिकारी के पद पर उत्पन्न होने वाली नॉन जॉइनिंग ड्यूटी (एनजेडी) की रिक्तियां को संशोधित नियमों के अनुसार भरना होगा न कि पूर्ववर्ती नियमों के अनुसार।ज‌स्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास सीपी ने यह भी दोहराया कि सलाह के अनुसार ड्यूटी के लिए रिपोर्ट नहीं करने वाले उम्मीदवार की सलाह के कारण उत्पन्न होने वाली रिक्ति को एक नई रिक्ति के रूप में...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
जज परिभाषित क्षेत्राधिकार से आगे नहीं बढ़ सकते और न्याय के प्रशासन अपनी सनक के अनुसार नहीं चला सकते: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक फैसले में कहा कि धारा 107 और 108 सहपठित आदेश 43 नियम 2 सीपीसी एक अपीलीय अदालत को ट्रायल कोर्ट के समक्ष मौजूद मुकदमे की स्क्रिप्ट को बदलने और एक नई तथ्य स्थिति पैदा करने और किसी दिए गए दीवानी मुकदमे में अपने स्वयं के धारणा-आधारित परिणाम को आगे बढ़ाने का अधिकार नहीं देता।जस्टिस राहुल भारती की खंडपीठ अनुच्छेद 227 के तहत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके समक्ष यह प्रश्न था कि एक अपीलीय अदालत, आदेश 43 नियम 1(आर) सीपीसी के तहत अपने अधिकार क्षेत्र...

2007 के सेवा नियमों के तहत अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
2007 के सेवा नियमों के तहत अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने ओडिशा सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना को बरकरार रखा है, जिसने 'जनहित में' उठाए गए कदम का हवाला देते हुए एक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को उनकी सेवा से अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था।इस तरह की अधिसूचना की पुष्टि करते हुए, चीफ जस्टिस डॉ एस मुरलीधर और जस्ट‌िस राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ ने यह भी माना कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति एक सजा नहीं है; इस प्रकार, ऐसी सेवानिवृत्ति को अधिसूचित करने से पहले संबंधित अधिकारी की पूर्व सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं है।कोर्ट ने कहा,"अब यह...

राज्य स्तर पर नशीली दवाओं के मामलों की निगरानी के लिए स्पेशल कमेटी गठित करें ताकि नशीली दवाओं की तस्करी को खत्म किया जा सके: मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया
'राज्य स्तर पर नशीली दवाओं के मामलों की निगरानी के लिए स्पेशल कमेटी गठित करें ताकि नशीली दवाओं की तस्करी को खत्म किया जा सके': मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया

मणिपुर हाईकोर्ट (Manipur High Court) ने राज्य सरकार को राज्य स्तर पर नशीली दवाओं के मामलों की निगरानी के लिए स्पेशल कमेटी का गठन करने का निर्देश दिया है, जिसमें जिला स्तर पर उप-समितियों का गठन किया गया है ताकि नशीली दवाओं की तस्करी को खत्म किया जा सके।जस्टिस एम. वी. मुरलीधरन की पीठ ने कहा कि मणिपुर राज्य जिसे गहनों की भूमि/कंगलीपाक या मीटीलीपाक कहा जाता है, मादक पदार्थों के परिवहन, तस्करी और बिक्री के अवैध कृत्यों के खतरे का सामना कर रहा है।पूरा मामलापीठ अनिवार्य रूप से एक सहायक उप-निरीक्षक की...

मद्रास हाईकोर्ट
डॉ अम्बेडकर संविधान निर्माता हैं, सभी सरकारी लॉ कॉलेजों में उनका चित्र लगाएं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने लॉ कॉलेजों में डॉ बीआर अम्बेडकर का चित्र लगाने की आवश्यकता पर बल दिया है। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने निदेशक, कानूनी अध्ययन, चेन्नई को सभी सरकारी लॉ कॉलेजों में डॉ अम्बेडकर के चित्रों की स्थापना के लिए एक परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह‌ निर्देश कानून के छात्र के निलंबन के खिलाफ दायर याचिका पर दिया है।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,"डॉ अम्बेडकर भारतीय संविधान के निर्माता हैं। वह सामाजिक मुक्ति के प्रतीक हैं। उनकी विद्वता अद्वितीय है। वह कानून के हर छात्र के लिए...

अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ दिनों बाद सेप्टीसीमिया के कारण घायल पीड़ित की मौत हुई तो आरोपी पर लग सकता है हत्या का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ दिनों बाद सेप्टीसीमिया के कारण घायल पीड़ित की मौत हुई तो आरोपी पर लग सकता है हत्या का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अस्पताल से छुट्टी मिलने के 13 दिन बाद घायल व्यक्ति की मौत के बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत दंडनीय हत्या के अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया जा रहा है, अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में हत्या के अपराध से इंकार नहीं किया जा सकता है।याचिकाकर्ता/आरोपी द्वारा उठाए गए तर्कों को खारिज करते हुए जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने कहा-...मेरी राय में ट्रायल कोर्ट ने कुछ भी गलत नहीं किया...

एक ऐसा व्यक्ति जो अदालत के सामने पेश नहीं होता, वह एडवोकेट नहीं हो सकता, भले ही बार काउंसिल में उसका इनरोलमेंट हो : गुजरात हाईकोर्ट
एक ऐसा व्यक्ति जो अदालत के सामने पेश नहीं होता, वह एडवोकेट नहीं हो सकता, भले ही बार काउंसिल में उसका इनरोलमेंट हो : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने दोहराया कि एक वकील जो अदालतों के सामने पेश नहीं होता है और खुद को "एडवोकेट" के रूप में नामित नहीं कर सकता है, भले ही वह बार काउंसिल में नामांकित हो।कोर्ट ने कहा कि एडवोकेट अधिनियम और बार काउंसिल के नियमों के अनुसार, एक बार रोजगार की शर्तों के लिए एक वकील को अदालतों के सामने याचना करने और पेश होने की आवश्यकता नहीं होती है, तो रोजगार की इस अवधि के दौरान, किसी व्यक्ति को 'एडवोकेट' नहीं कहा जा सकता है क्योंकि वह एक एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस नहीं कर रहा...

केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री पर स्वप्ना सुरेश द्वारा लगाए आरोपों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की
केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री पर स्वप्ना सुरेश द्वारा लगाए आरोपों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें विधायक केटी जलील (K T Jaleel), मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (CM Pinarayi Vijayan) और सरकार के खिलाफ कथित रूप से झूठी जानकारी फैलाने के लिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।जस्टिस ज़ियाद रहमान ए ए की पीठ ने प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली स्वप्ना सुरेश की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह अंतिम रिपोर्ट को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र होंगी।सोने की तस्करी मामले में...

लोक रक्षक भर्ती | कोर्ट आंसर की की शुद्धता का पता नहीं लगा सकता, इसे विशेषज्ञों पर छोड़ देना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट
लोक रक्षक भर्ती | कोर्ट आंसर की की शुद्धता का पता नहीं लगा सकता, इसे विशेषज्ञों पर छोड़ देना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने माना कि एग्जाम आंसर की (Key) की शुद्धता का पता लगाने का कार्य न्यायालय के लिए नहीं है। इसे क्षेत्र के विशेषज्ञों के विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए।जस्टिस बीरेन वैष्णव ने लोक रक्षक (क्लास III) के पदों के लिए आयोजित परीक्षाओं की आंसर की की शुद्धता पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा,"जो भी विकल्प चुना जाता है तो उसमें कुछ उम्मीदवारों को नुकसान होने की संभावना रहती है।" सिंगल जज बेंच ने दोहराया:"... जब परस्पर विरोधी विचार होते हैं तो न्यायाधीशों से यह उम्मीद नहीं की...

मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने वर्दीधारी पुलिस अधिकारियों को अर्दली के रूप में नियुक्त करने की प्रथा को समाप्त करने में डीजीपी के प्रयासों की सराहना की

मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य पुलिस से अर्दली व्यवस्था को हटाने के लिए तमिलनाडु के डीजीपी के प्रयासों की सराहना की।अदालत ने पहले डीजीपी को हलफनामा दायर करने के लिए कहा था। इस हलफनामा में अदालत को उच्च अधिकारियों के आवास पर वर्दीधारी अधिकारियों को अर्दली के रूप में नियुक्त करने की औपनिवेशिक प्रथा को रोकने के लिए किए गए उपायों के बारे में सूचित किया गया था।मामला गुरुवार को जब सामने आया तो डीजीपी सी. सिलेंद्र बाबू ने अदालत को बताया कि उच्च अधिकारियों से अंडरटेकिंग लिया जा रहा है कि वर्दीधारी...

केरल हाईकोर्ट
"मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर आघात होगा": केरल हाईकोर्ट ने 14 वर्षीय बलात्कार पीड़ित की 28 सप्ताह की प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने की अनुमति दी

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को 14 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की 28 सप्ताह की प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने की मांग को लेकर दायर रिट याचिका को अनुमति दी।जस्टिस वी.जी. अरुण ने रिट की अनुमति देते हुए मेडिकल बोर्ड की प्रेग्नेंसी की मेडिकल टर्मिनेशन की सिफारिश को नोट करते हुए कहा,"गर्भावस्था जारी रखने से लड़की के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चोट लग सकती है।"मामला 12.08.2022 को जब सुनवाई के लिए आया तो अदालत ने पीड़िता की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी के लिए याचिका दायर करने का...

God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
"उसने इस्लाम अपनाया और बांग्लादेशी नागरिकता के लिए स्वेच्छा से आवेदन किया": मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिकता छोड़ने वाली बेटी के खिलाफ पिता की याचिका खारिज की

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के सचिव को नागरिकता के त्याग की घोषणा दर्ज करने या अपनी बेटी को नागरिकता के त्याग का अनापत्ति प्रमाण पत्र/प्रमाण पत्र देने से रोकने की मांग की गई थी।कोर्ट ने कहा कि वह 25 साल की उम्र की बालिग लड़की है। साथ ही पिता द्वारा पूर्व में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रिकॉर्ड को देखते हुए अदालत ने कहा कि उसने इस्लाम धर्म अपना लिया है और स्वेच्छा से बांग्लादेशी नागरिकता के लिए आवेदन किया है।जस्टिस...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को COVID कठिनाइयों के कारण फीस जमा करने में विफल दसवीं कक्षा के छात्र का रिजल्ट घोषित करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को COVID कठिनाइयों के कारण फीस जमा करने में विफल दसवीं कक्षा के छात्र का रिजल्ट घोषित करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक छात्र की आर्थिक पृष्ठभूमि और COVID-19 महामारी के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह दसवीं कक्षा के छात्र का रिजल्ट घोषित करें, इस तथ्य के बावजूद कि वह स्कूल को फीस जमा करने में विफल रहा है।जस्टिस संजीव नरूला ने स्वीकार किया कि सामान्य परिस्थितियों में, परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए पूर्व शर्त के रूप में उपस्थिति मानदंड को पूरा किया जाना चाहिए।हालांकि, उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी ने कई परिवारों को प्रभावित किया है जिन्होंने...

भवन नियम आवासीय भवन को प्रार्थना स्थल में बदलने की अनुमति नहीं देते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने निवास को प्रार्थना स्थल में बदलने की मांग वाली याचिका खारिज की
भवन नियम आवासीय भवन को प्रार्थना स्थल में बदलने की अनुमति नहीं देते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने निवास को प्रार्थना स्थल में बदलने की मांग वाली याचिका खारिज की

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि तमिलनाडु जिला नगर पालिका भवन नियम, 1972 के नियम 6(4) में सार्वजनिक पूजा या धार्मिक उद्देश्यों के लिए भवन के निर्माण से पहले जिला कलेक्टर से पूर्व अनुमति अनिवार्य है। अदालत ने इस प्रकार अपने आवासीय स्थान को प्रार्थना स्थल में बदलने की मांग को लेकर दायर याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि इसके लिए अधिकारियों से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।जस्टिस आर विजयकुमार ने कहा कि इमारत रिहायशी इलाके में है और रिहायशी इलाके में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से इलाके...

सेवा मामलों से संबंधित विवाद में जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
सेवा मामलों से संबंधित विवाद में जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि 'सेवा मामलों' से संबंधित विवादों में जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई नहीं की जा सकती।चीफ जस्टिस डॉ एस मुरलीधर और जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ ने प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं से संबंधित मामले का फैसला करते हुए उपरोक्त सिद्धांत का पालन किया, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई बार दोहराया गया।मामले के तथ्य:जगतसिंहपुर जिले के चार निवासियों ने यह जनहित याचिका दायर की। इस याचिका में स्कूल और जन शिक्षा विभाग (एस एंड एमई), ओडिशा...

क्या UIDAI के पास उपलब्ध विशिष्ट विशेषताओं से मृतक मोटर दुर्घटना पीड़ितों की पहचान की जा सकती है? दिल्ली हाईकोर्ट विचार करेगा
क्या UIDAI के पास उपलब्ध 'विशिष्ट विशेषताओं' से मृतक मोटर दुर्घटना पीड़ितों की पहचान की जा सकती है? दिल्ली हाईकोर्ट विचार करेगा

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) एक कानूनी प्रश्न पर विचार करने के लिए तैयार है कि क्या मोटर वाहन दुर्घटना (MACT) मामलों में अज्ञात शवों की पहचान भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पास उपलब्ध विशिष्ट विशेषताओं की मदद से की जा सकती है।जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस अनीश दयाल की खंडपीठ ने कानूनी मुद्दे को तय करने में कोर्ट की सहायता के लिए सीनियर एडवोकेट प्रशांत चंद्र सेन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया।केंद्रीय पहचान डेटा रिपोजिटरी (यूआईडीएआई) के पास उपलब्ध विशिष्ट विशेषताओं के आधार पर मृतक...

माता-पिता का निर्धारण करने के लिए डीएनए टेस्ट का आदेश नहीं दिया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
माता-पिता का निर्धारण करने के लिए डीएनए टेस्ट का आदेश नहीं दिया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अदालत निश्चित रूप से डीएनए टेस्ट का आदेश नहीं दे सकती। इस कारण डीएनए टेस्ट का आदेश देने की प्रार्थना की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, वर्तमान मामले में प्रतिवादी के माता-पिता के बारे में पूछताछ की जा सकती है।जस्टिस अलका सरीन की पीठ ने आगे कहा कि अपनी याचिका के समर्थन में सबूत जोड़कर अपने मामले को साबित करने का बोझ पक्षकार पर है। अदालत किसी पक्ष को अपने मामले को साबित करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती (डीएनए टेस्ट से गुजरना) जैसा कि मुकदमा लड़ने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने घरेलू उड़ानों में सिखों को कृपाण ले जाने की अनुमति पर विमानन मंत्रालय, डीजीसीए को नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने घरेलू उड़ानों में सिखों को कृपाण ले जाने की अनुमति पर विमानन मंत्रालय, डीजीसीए को नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका दायर की गई। इस याचिका में उस अधिसूचना को चुनौती दी गई जिसमें सिख यात्रियों को देश में किसी भी घरेलू उड़ान में कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, गृह मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशक और नागरिक उड्डयन ब्यूरो के महानिदेशक के माध्यम से केंद्र से जवाब मांगा।आक्षेपित अधिसूचना के अनुसार, सिख यात्रियों को कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई है, बशर्ते...

चार्जशीट पर हस्तलिखित संज्ञान आदेश पारित करने के बाद प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी करना अमान्य नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
चार्जशीट पर हस्तलिखित संज्ञान आदेश पारित करने के बाद प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी करना अमान्य नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा है कि यदि संज्ञान लेने का आदेश चार्जशीट के प्रथम पृष्ठ पर हस्तलिखित में पारित किया गया है, न कि प्रोफार्मा भरकर, तो प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी करने का आदेश मान्य होगा।जस्टिस मो. असलम ने स्पष्ट किया कि यदि लिखित आदेश के माध्यम से पुलिस चार्जशीट का संज्ञान लेने के बाद प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी किया जाता है, तो यह नहीं कहा जा सकता है कि संज्ञान आदेश एक प्रोफार्मा आदेश है।अदालत अतिरिक्त सिविल जज (एसडी) / अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट,...