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आबकारी कांस्टेबल परीक्षा : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग पीईटी मानदंडों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड आबकारी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा (U.P. Subordinate Service Selection Board Excise Constable recruitment exam) के लिए पुरुषों और महिलाओं के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET)के लिए अलग-अलग मानदंडों को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को खारिज कर दिया। जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने कहा कि शारीरिक दक्षता में पुरुषों और महिलाओं का वर्गीकरण मनमाना नहीं है और इसलिए पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव का आरोप निराधार है और इसे स्वीकार नहीं...
किसी स्थान पर वेश्यावृत्ति का एकमात्र उदाहरण इसे "वेश्यालय" नहीं बनाता: मेघालय हाईकोर्ट
मेघालय हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक पुरुष के साथ कथित रूप से वेश्यावृत्ति में लिप्त एक लड़की की मौजूदगी से वह स्थान "वेश्यालय" निरूपित नहीं हो सकता।सुशीला बनाम राज्य, 1982 CRI LJ 702 के मामले पर भरोसा करते हुए जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह ने कहा,"जब अभियोजन पक्ष परिसर में केवल एक लड़की की मौजूदगी और वेश्यावृत्ति के एक उदाहरण को साबित कर पाया तो परिसर को "वेश्यालय के लिए इस्तेमाल" नहीं माना जा सकता है। किसी स्थान पर वेश्यावृत्ति का एक मात्र उदाहरण उस स्थान को "वेश्यालय" नहीं बनाता है।"शिकायत के...
मोटर वाहन अधिनियम | बीमाकर्ता अतिरिक्त चालक को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है, यदि केवल एक दावा किया गया है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया कि बीमाकर्ता मोटर वाहन अधिनियम की धारा 147 के तहत एक अतिरिक्त चालक के संबंध में मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, यदि पॉलिसी के तहत केवल एक ही दावा है।धारवाड़ स्थित जस्टिस एचपी संदेश की सिंगल जज बेंच ने कहा,"हालांकि, अगर ड्राइवर और स्पेयर ड्राइवर के संबंध में दो अलग-अलग दावे हैं, जब तक कि अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान नहीं किया जाता है, बीमाकर्ता दोनों ड्राइवरों के लिए भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हो सकता है। यदि दावा केवल एक ड्राइवर के संबंध में है, भले...
POCSO - पीड़ित की उम्र के निर्धारण का मुद्दा किसी भी स्तर पर उठाया जा सकता है, यहां तक कि अपीलीय फोरम में भी: मेघालय हाईकोर्ट
मेघालय हाईकोर्ट (Meghalaya High Court) ने हाल ही में कहा कि यह न्यायालय पर निर्भर है कि पॉक्सो मामले (POCSO Act) की सुनवाई करते हुए उसे मामले को आगे बढ़ाने से पहले पीड़ित की उम्र के बारे में निश्चित होना चाहिए।जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह की ओर से आई यह टिप्पणी में कहा गया:"बच्चे के खिलाफ अपराध की सुनवाई विशेष अदालत द्वारा की जानी चाहिए। हालांकि, यह अदालत के लिए मामले की शुरुआत से निश्चित अधिकार होना अनिवार्य है कि उक्त मामले में पॉक्सो अधिनियम में पाई गई परिभाषा के अनुसार, बच्चा शामिल है। इस संदर्भ...
राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि के म्यूटेशन के लिए आवेदन संपत्ति पर बोझ नहीं बनाता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने हाल ही में संपत्ति विवाद के लिए पक्षकार के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि के म्यूटेशन के लिए संबंधित राजस्व प्राधिकरण के समक्ष आवेदन दाखिल करके रजिस्टर्ड बिक्री विलेख के संबंध में अदालत के यथास्थिति आदेश की जानबूझकर अवज्ञा की है।जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस एपी ठाकर की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के आवेदन से किसी भी तरह से संपत्ति के स्वामित्व और भार के संबंध में यथास्थिति का उल्लंघन नहीं...
हाथरस रेप एंड मर्डर केस: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई से ट्रायल प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाथरस गैंगरेप और मर्डर केस (Hathras Rape & Murder Case) में सीबीआई से ट्रायल प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी। अगली तारीख [20 सितंबर, 2022] से पहले सत्र के स्टेटस के बारे में जिला न्यायाधीश, हाथरस के माध्यम से ट्रायल कोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी गई है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने सीबीआई के वकील अनुराग कुमार सिंह को निर्देश दिया।यूपी सरकार ने अदालत के समक्ष यह भी प्रस्तुत किया कि शवों के सम्मानजनक दाह संस्कार के लिए एसओपी...
भारतीय अदालतें 'टेलीग्राम' को उसके प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले कॉपीराइट उल्लंघनकर्ताओं की जानकारी का खुलासा करने का निर्देश दे सकती हैं : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने पाया कि कॉपीराइट उल्लंघनकर्ताओं (Copyright Infringers) को केवल इस आधार पर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम की नीतियों के तहत शरण लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि इसका फिजिकल सर्वर सिंगापुर में है।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि भारत में अपने बड़े पैमाने पर संचालन करने वाले टेलीग्राम को उल्लंघनकर्ताओं से संबंधित प्रासंगिक जानकारी के प्रकटीकरण के लिए भारतीय कानून और उनके द्वारा पारित आदेशों का पालन करने के लिए निर्देश देना भारतीय न्यायालयों को पूरी तरह से...
[ज्ञानवापी एएसआई सर्वे पर रोक] "राष्ट्रीय महत्व का मामला": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एएसआई डीजी को 10 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा
काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद (Kashi Vishwanath Temple-Gyanvapi Mosque) के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के समक्ष चल रही सुनवाई में हाईकोर्ट ने कल राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा दायर हलफनामे को 'स्केची' बताया और अतिरिक्त सचिव (गृह) यू.पी. सरकार को दस दिनों के भीतर मामले में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा।मामले को 'राष्ट्रीय महत्व' बताते हुए जस्टिस प्रकाश पाडिया की पीठ ने महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली को निर्देश दिया कि वह इस मामले...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने भगवान गणेश की छवि को 'विकृत' करके बनाई गई मूर्तियां पर रोक लगाने की पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार किया
उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने एक मूर्तिकार द्वारा भगवान गणेश की कुछ विशेष प्रकार की मूर्तियों को बनाने और बेचने से रोकने के लिए कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर विचार करने से इनकार कर दिया है।जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि अगर ऐसी मूर्तियों को बनाने और बेचने की अनुमति दी जाती है तो कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो जाती है।कोर्ट ने कहा,"इस प्रकृति के मामलों में जहां अप्रिय घटनाओं की वास्तविक...
आईबीसी की धारा 31 के तहत समाधान योजना लोन एग्रीमेंट के प्रति गारंटर को देयता से मुक्त नहीं करती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हाल ही में दोहराया कि जहां सरफेसी अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू की जाती है और उधारकर्ता और बैंक की किसी भी कार्रवाई से व्यथित है जिसके लिए अधिनियम के तहत उसके पास उपाय है तो किसी भी रिट याचिका पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए।जस्टिस संजीव नरूला ने आगे कहा कि व्यक्तिगत गारंटर की देयता की सीमा को उधारकर्ता यानी कॉर्पोरेट देनदार और व्यक्तिगत गारंटर के बीच समझौते के आलोक में निर्धारित करना होगा, जिसके लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म लोन वसूली न्यायाधिकरण होगा, हाईकोर्ट...
"1-2 दिनों के लिए मांस खाने से खुद को रोकें": गुजरात हाईकोर्ट ने जैन त्योहार के अवसर पर बूचड़खाने को बंद करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर कहा
जैन समुदाय के त्योहार के अवसर पर शहर में एकमात्र बूचड़खाने को बंद करने के अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने याचिकाकर्ता से कहा,"आप 1-2 दिनों के लिए मांस खाने से खुद को रोकें।"जस्टिस संदीप भट्ट की पीठ कुल हिंद जमीयत-अल कुरेश एक्शन कमेटी गुजरात की ओर से दानिश कुरैशी रजावाला और एक अन्य व्यक्ति द्वारा शहर में एकमात्र बूचड़खाने को बंद करने को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रही थी।जब याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप...
नगर पालिका सार्वजनिक स्थानों पर किसी मूर्ति/संरचनाओं की स्थापना के लिए अनुमति नहीं दे सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निगम या नगर पालिका सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों, फुटपाथों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिता वाले स्थानों पर किसी भी मूर्ति/संरचना के निर्माण की अनुमति नहीं दे सकती है।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी की एकल पीठ ने आगे कहा कि भले ही पहले कोई अनुमति दी गई थी जिसके अनुसार अब कोई संरचना बनाई जा रही है, वह भी सुप्रीम कोर्ट के दिनांक 18.02.2013 के विशिष्ट आदेश के विपरीत नहीं किया जा सकता है।भारत संघ और अन्य बनाम गुजरात राज्य और अन्य, एसएलपी 8519/2006 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब से,...
डॉक्टरों की लापरवाही के कारण बच्चे की हुई मौत, एनसीडीआरसी ने माता-पिता को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, नई दिल्ली ने शुक्रवार को छह साल के एक बच्चे के माता-पिता को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया। बच्चे की शंकर नेत्रालय, चेन्नई में भेंगी आंखों में सुधार कराने के लिए हुई सर्जरी में डॉक्टरों द्वारा की गई लापरवाही के कारण मौत हो गई थी।आयोग की अध्यक्षता जस्टिस आरके अग्रवाल ने की, जबकि डॉ एसएम कांतिकर और बिनॉय कुमार सदस्य थे। उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम कुसुम में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दोहराया, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि माता-पिता को बच्चे की...
9.5 साल तक मुकदमे की पीड़ा" का सामना करना पड़ा: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लापरवाही और तेज वाहन चलाने के मामले में दोषी की सजा कम की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के मामले (Rash and Negligent Driving Case) में दोषी ठहराए गए याचिकाकर्ता द्वारा सामना की गई "मुकदमे की पीड़ा" को ध्यान में रखते हुएएक साल की सजा को पहले से ही हिरासत की अवधि यानी 6 महीने तक कम कर दिया।जस्टिस हरनरेश सिंह गिल की खंडपीठ ने सौरभ बख्शी के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए दृष्टिकोण पर भरोसा किया और कहा कि यह न्यायसंगत होगा अगर उसकी मूल सजा को उसके द्वारा पहले से ही भुगतने की अवधि तक कम कर...
एनआई अधिनियम की धारा 138: दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को विशेष न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने पांच सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को "एनआई अधिनियम की धारा 138 (Sec 138 NI Act) के तहत मामलों के त्वरित ट्रायल" में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में स्थापित विशेष न्यायालयों (निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) के पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया।नियुक्त किए गए न्यायाधीशों के नाम इस प्रकार हैं:1. जस्टिस राकेश सिद्धार्थ2. जस्टिस सी.के. चतुर्वेदी3. जस्टिस सतिंदर कुमार गौतम4. जस्टिस चंद्र बोस5. जस्टिस राम भगत सिंहउक्त न्यायाधीशों की पोस्टिंग...
"भीड़ को भड़काते हुए नहीं पाया गया": दिल्ली हाईकोर्ट ने जहांगीरपुरी दंगा मामले में आरोपी को जमानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने अप्रैल में शहर के जहांगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती के जुलूस के दौरान हुई झड़पों (Jahangirpuri Riots Case) के सिलसिले में एक आरोपी बाबुद्दीन को जमानत दी।यह देखते हुए कि बाबुद्दीन 27 अप्रैल से हिरासत में है, जस्टिस योगेश खन्ना की एकल न्यायाधीश की पीठ ने यह देखते हुए जमानत दे दी कि उसे आगे की जांच की आवश्यकता नहीं है।अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी के लिए चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी है और एक सह-आरोपी को भी हाल ही में प्राथमिकी में जमानत दी गई...
"यौन प्रकृति के दुराचार के संबंध में कोई आरोप नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर का निलंबन रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ पारित निलंबन आदेश को रद्द कर दिया। डॉक्टर को इस आरोप में कोई भी चिकित्सा कार्य करने से रोक दिया गया था कि उसने एक मरीज की बेटी का यौन शोषण किया था।अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता (एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर) के खिलाफ यौन प्रकृति के किसी भी दुराचार के संबंध में कोई आरोप नहीं है ताकि उसे सजा दी जा सके।इसके साथ ही जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के प्रबंधन द्वारा पारित उनके निलंबन...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हुबली-धारवाड़ के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी समारोह पर रोक लगाने से किया इनकार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार रात को हुबली-धारवाड़ के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी अनुष्ठान करने के लिए कुछ हिंदू संगठनों को धारवाड़ नगर आयुक्त द्वारा दी गई अनुमति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस अशोक एस किनागी के चैंबर में रात 10 बजे से हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता अंजुमन-ए-इस्लाम को ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी के त्योहारों को रोकने के लिए अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।कोर्ट ने कहा कि विवादित संपत्ति का मालिकाना हक धारवाड़ नगर पालिका का है और याचिकाकर्ता केवल प्लाट का...
एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्त वाहन की अंतरिम कस्टडी सीआरपीसी 451 और 457 के तहत दी जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मजिस्ट्रेट/विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट के पास सीआरपीसी की धारा 451 और 457 के प्रावधान के तहत वाहन/व्हिकल (एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्त) की अंतरिम कस्टडी के लिए आवेदन पर विचार करने की शक्ति है।जस्टिस साधना रानी (ठाकुर) ने कहा,"एनडीपीएस एक्ट की धारा 36-सी और 51 को देखन से यह समझ आता है कि सीआरपीसी के प्रावधान, जहां तक विशेष कानून एनडीपीएस एक्ट के विरोध में नहीं हैं, एनडीपीएस एक्ट पर लागू होंगे और जैसा कि एनडीपीएस एक्ट वाहन की अंतरिम कस्टडी के लिए कोई प्रक्रिया...
आईपीसी की धारा 375 के तहत दिए सात विवरणों के अनुसार 'सहमति' का अर्थ आक्रामक यौन कृत्य के लिए अधूरी एवं जबरन ली गयी सहमति है : कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में आईपीसी की धारा 375 के तहत परिभाषित और आईपीसी की धारा 376 के तहत दंडनीय बलात्कार के अपराध का गठन करने के लिए सहमति (या इसकी अनुपस्थिति) की भूमिका पर विचार किया।इस बात पर जोर देते हुए कि "सहमति" (या इसकी अनुपस्थिति) की प्रबलता धारा 375 में बलात्कार के अपराध की परिभाषित विशेषता है, जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी की पीठ ने कहा कि धारा 375 के तहत निर्धारित सात परिस्थितियां स्वतंत्र इच्छा की एक सूचित अभिव्यक्ति के बजाय "मजबूरी में की गई" सहमति के रूप...








![[ज्ञानवापी एएसआई सर्वे पर रोक] राष्ट्रीय महत्व का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एएसआई डीजी को 10 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा [ज्ञानवापी एएसआई सर्वे पर रोक] राष्ट्रीय महत्व का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एएसआई डीजी को 10 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/08/31/500x300_432992-418392-gyanvapi-mosque.jpg)











