मुख्य सुर्खियां
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को COVID कठिनाइयों के कारण फीस जमा करने में विफल दसवीं कक्षा के छात्र का रिजल्ट घोषित करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक छात्र की आर्थिक पृष्ठभूमि और COVID-19 महामारी के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई को निर्देश दिया कि वह दसवीं कक्षा के छात्र का रिजल्ट घोषित करें, इस तथ्य के बावजूद कि वह स्कूल को फीस जमा करने में विफल रहा है।जस्टिस संजीव नरूला ने स्वीकार किया कि सामान्य परिस्थितियों में, परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए पूर्व शर्त के रूप में उपस्थिति मानदंड को पूरा किया जाना चाहिए।हालांकि, उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी ने कई परिवारों को प्रभावित किया है जिन्होंने...
भवन नियम आवासीय भवन को प्रार्थना स्थल में बदलने की अनुमति नहीं देते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने निवास को प्रार्थना स्थल में बदलने की मांग वाली याचिका खारिज की
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि तमिलनाडु जिला नगर पालिका भवन नियम, 1972 के नियम 6(4) में सार्वजनिक पूजा या धार्मिक उद्देश्यों के लिए भवन के निर्माण से पहले जिला कलेक्टर से पूर्व अनुमति अनिवार्य है। अदालत ने इस प्रकार अपने आवासीय स्थान को प्रार्थना स्थल में बदलने की मांग को लेकर दायर याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि इसके लिए अधिकारियों से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।जस्टिस आर विजयकुमार ने कहा कि इमारत रिहायशी इलाके में है और रिहायशी इलाके में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से इलाके...
सेवा मामलों से संबंधित विवाद में जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि 'सेवा मामलों' से संबंधित विवादों में जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई नहीं की जा सकती।चीफ जस्टिस डॉ एस मुरलीधर और जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ ने प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं से संबंधित मामले का फैसला करते हुए उपरोक्त सिद्धांत का पालन किया, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई बार दोहराया गया।मामले के तथ्य:जगतसिंहपुर जिले के चार निवासियों ने यह जनहित याचिका दायर की। इस याचिका में स्कूल और जन शिक्षा विभाग (एस एंड एमई), ओडिशा...
क्या UIDAI के पास उपलब्ध 'विशिष्ट विशेषताओं' से मृतक मोटर दुर्घटना पीड़ितों की पहचान की जा सकती है? दिल्ली हाईकोर्ट विचार करेगा
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) एक कानूनी प्रश्न पर विचार करने के लिए तैयार है कि क्या मोटर वाहन दुर्घटना (MACT) मामलों में अज्ञात शवों की पहचान भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पास उपलब्ध विशिष्ट विशेषताओं की मदद से की जा सकती है।जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस अनीश दयाल की खंडपीठ ने कानूनी मुद्दे को तय करने में कोर्ट की सहायता के लिए सीनियर एडवोकेट प्रशांत चंद्र सेन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया।केंद्रीय पहचान डेटा रिपोजिटरी (यूआईडीएआई) के पास उपलब्ध विशिष्ट विशेषताओं के आधार पर मृतक...
माता-पिता का निर्धारण करने के लिए डीएनए टेस्ट का आदेश नहीं दिया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अदालत निश्चित रूप से डीएनए टेस्ट का आदेश नहीं दे सकती। इस कारण डीएनए टेस्ट का आदेश देने की प्रार्थना की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, वर्तमान मामले में प्रतिवादी के माता-पिता के बारे में पूछताछ की जा सकती है।जस्टिस अलका सरीन की पीठ ने आगे कहा कि अपनी याचिका के समर्थन में सबूत जोड़कर अपने मामले को साबित करने का बोझ पक्षकार पर है। अदालत किसी पक्ष को अपने मामले को साबित करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती (डीएनए टेस्ट से गुजरना) जैसा कि मुकदमा लड़ने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने घरेलू उड़ानों में सिखों को कृपाण ले जाने की अनुमति पर विमानन मंत्रालय, डीजीसीए को नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका दायर की गई। इस याचिका में उस अधिसूचना को चुनौती दी गई जिसमें सिख यात्रियों को देश में किसी भी घरेलू उड़ान में कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, गृह मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशक और नागरिक उड्डयन ब्यूरो के महानिदेशक के माध्यम से केंद्र से जवाब मांगा।आक्षेपित अधिसूचना के अनुसार, सिख यात्रियों को कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई है, बशर्ते...
चार्जशीट पर हस्तलिखित संज्ञान आदेश पारित करने के बाद प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी करना अमान्य नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा है कि यदि संज्ञान लेने का आदेश चार्जशीट के प्रथम पृष्ठ पर हस्तलिखित में पारित किया गया है, न कि प्रोफार्मा भरकर, तो प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी करने का आदेश मान्य होगा।जस्टिस मो. असलम ने स्पष्ट किया कि यदि लिखित आदेश के माध्यम से पुलिस चार्जशीट का संज्ञान लेने के बाद प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी किया जाता है, तो यह नहीं कहा जा सकता है कि संज्ञान आदेश एक प्रोफार्मा आदेश है।अदालत अतिरिक्त सिविल जज (एसडी) / अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट,...
फिल्म निर्माता ने पत्नी द्वारा पाकिस्तान में कथित रूप से बंधक बनाए गए बच्चों की वापसी की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की
एक फिल्म निर्माता ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में हैबियस कॉर्पस (Habeas Corpus) याचिका दायर की है, जिसमें उसके दो नाबालिग बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए इंटरपोल के हस्तक्षेप की मांग की गई है।याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी पत्नी जो एक पाकिस्तानी नागरिक हैं, साल 2020 में दोनों बच्चों को पाकिस्तान गईं फिर वापस नहीं आई। पत्नी द्वारा उनके बच्चों को बंधक बनाकर रखा गया है।फिल्म निर्माता ने कहा कि पत्नी का अकथनीय आचरण शायद कुछ अज्ञात व्यक्तियों के इशारे पर है, जिन्होंने याचिकाकर्ता के खिलाफ...
जहांगीरपुरी हिंसा: दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका ठुकराई, कहा आरोपी ने कथित तौर पर "दो समुदायों के बीच दरार" पैदा करने की कोशिश की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को जहांगीरपुरी दंगों के सिलसिले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उसका आचरण कथित रूप से "दो समुदायों के बीच दरार" पैदा करने की कोशिश करके "क्षेत्र के सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास" था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह भी कहा कि दंगों के दौरान उनके घर की छत पर संदिग्ध सामग्री मिली थी और वह जांच के दौरान असहयोगी बना रहा।अदालत ने यह देखा,"देश और समुदायों में शांति और सद्भाव सुनिश्चित करना न केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों और...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों के खिलाफ रुपए वसूलने के उद्देश्य से आईपीसी की धारा 376 और एससी / एसटी अधिनियम के तहत दर्ज कथित फर्ज़ी मामलों में सीबीआई जांच का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को वकीलों और अन्य लोगों के खिलाफ रुपए वसूलने के उद्देश्य से बलात्कार के अपराध और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दर्ज कथित तौर पर झूठे मामलों की जांच करने का निर्देश दिया। जस्टिस गौतम चौधरी की पीठ ने जोर देकर कहा कि न्याय के हित में और वकीलों के हितों की रक्षा के लिए जो केवल इस आधार पर झूठे आरोपों के शिकार हैं कि वे आरोपी व्यक्तियों की ओर से केस लड़ रहे हैं, यह आवश्यक है कि मामले की सीबीआई जांच की जाए।संक्षेप में मामलाअदालत कथित...
[दिल्ली दंगे] न्यायिक समय, जनता के धन का सम्मान नहीं: कोर्ट ने एसपीपी को संवेदनशील बनाने को कहा, जांच अधिकारी से अप्रासंगिक गवाहों को छोड़ने के लिए कहा, जुर्माना लगाया
दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को विशेष लोक अभियोजकों (एसपीपी) और जांच अधिकारियों (आईओ) को समन देने करने के बजाय 2020 के दंगों के मामलों में अप्रासंगिक गवाहों को छोड़ने के लिए कदम उठाने के लिए संवेदनशील बनाने का आह्वान किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने दंगों के मामले में एक अप्रासंगिक और असंबंधित गवाह को बुलाने के लिए अभियोजन पर पांच हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया।अदालत ने कहा,"दुर्भाग्य से, अप्रासंगिक और अनावश्यक गवाहों को छोड़ने के लिए कई मामलों में अभियोजन पक्ष को निर्देश देने के...
नीतीश को CM पद से हटाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका, महागठबंधन को बताया गलत
पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) में बिहार के सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को सीएम पद से हटाने की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की गई है।याचिका में कहा गया है कि राज्यपाल द्वारा नीतीश कुमार की सीएम पद पर पुनर्नियुक्ति असंवैधानिक है। इसलिए इन्हें सीएम पद से हटाया जाना चाहिए।यह याचिका पटना की समाजसेवी धर्मशीला देवी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील बरूण सिन्हा ने दायर की है।याचिका में कहा गया है कि नीतीश कुमार ने जो किया है वह संसदीय लोकतंत्र और संविधान के आधारभूत ढांचे के खिलाफ है! नीतीश...
सिविल न्यायालयों को धारा 92 सीपीसी के क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने से पहले 'ट्रस्ट' की धार्मिक/धर्मार्थ प्रकृति का पता लगाना चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 92 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने के लिए सिविल कोर्ट को पहले रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से तथ्यात्मक निष्कर्ष निकालना है कि ट्रस्ट एक सार्वजनिक धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्ट है और यह भी कि क्या न्यायालय से संपर्क करने वाले व्यक्तियों का ट्रस्ट में कोई हित है।जस्टिस आर नटराज की एकल पीठ ने आदर्श सुगम संगीता अकादमी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और यहां प्रतिवादी वृंदा एस राव और पुष्पा एमके को उनके खिलाफ मुकदमा दायर करने की...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने द्विविवाह और पहले पति की हत्या के मामले में पत्नी को आरोपमुक्त करने का आदेश पलटते हुए कहा,साक्ष्य की सराहना करने के लिए ट्रायल आवश्यक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने द्विविवाह और दूसरे पति के साथ मिलकर अपने पहले पति की हत्या की साजिश रचने की आरोपी महिला को आरोप मुक्त करने के सत्र न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया। जस्टिस डॉ. एचबी प्रभाकर शास्त्री की एकल पीठ ने कहा कि ममथा आर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री है, जिसने परिवार के बंटवारे में अपनी नाबालिग बेटी को दी गई संपत्ति को पाने के लिए अपने पहले पति की कथित तौर पर हत्या कर दी थी। ''यह किसी भी संदेह या विवाद से परे है कि आरोप तय करने के चरण में, न्यायालय सबूतों का...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमला करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपी को जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को सीएए-एनआरसी प्रोटेस्त के दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमला करने, पुलिस बाइक को आग लगाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपी अजहर खान को जमानत दे दी। अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, रामपुर शहर के मुस्लिम मौलवियों (उलेमाओं) द्वारा एनआरसी और सीएबी के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था और उन्होंने 21 दिसंबर, 2019 को ईदगाह पर जनता को बुलाया था।रामपुर शहर के मुस्लिम मौलवियों ने 20 दिसंबर 2019 की रात पुलिस प्रशासन को आश्वासन दिया कि रामपुर शहर के...
समझौते से अनुबंध समाप्त होने के बाद अनुबंध के तहत विवाद व्यर्थ, मध्यस्थता के लिए नहीं भेजा जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि एक बार जब पार्टियों के बीच समझौता हो जाने के बाद अनुबंध आपसी समझौते से समाप्त हो जाता है तो उक्त अनुबंध के तहत उत्पन्न होने वाला विवाद व्यर्थ है जिसे मध्यस्थता के लिए नहीं भेजा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि समझौते के तथ्य सहित तथ्यों को छुपाने या दबाने वाला पक्षकार मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (ए एंड सी अधिनियम) की धारा 11 के तहत राहत का हकदार नहीं है।जस्टिस जीएस कुलकर्णी की एकल पीठ ने माना कि मामले में मृत मुद्दों को पुनर्जीवित करने और अनुचित मध्यस्थता को लागू...
'समाज को गलत संदेश देगा': केरल कोर्ट ने सोशल मीडिया के जरिए एसटी महिला का अपमान करने वाले यूट्यूबर को जमानत देने से किया इनकार
केरल के एक सत्र न्यायालय ने हाल ही में एक यूट्यूबर को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसने सोशल मीडिया पर प्रकाशित एक साक्षात्कार के माध्यम से अनुसूचित जनजाति की एक महिला का अपमान किया था। कोर्ट ने इस आधार पर जमानते देने से इनकार किया उसने महिला को अपमानित करने के लिए जानबूझकर वीडियो प्रसारित किया था।एर्नाकुलम के सत्र न्यायाधीश हनी एम वर्गीज ने यह कहते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी कि इस स्तर पर उन्हें जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा, खासकर जब से उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा जमानत से इनकार किए...
कोर्ट, वकील एडवोकेट जनरल के कार्यालय में लगी आग में जले केस रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण के लिए राज्य द्वारा उठाए गए कदमों से अवगत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने देखा कि 17 जुलाई को स्टेट एडवोकेट जनरल कार्यालय की छठी, सातवीं, आठवीं और नौवीं मंजिल पर लगी आग में जले केस रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण में विफल रहा है। कोर्ट ने इसे अत्यंत खेदजनक स्थिति बताई।जस्टिस संजय कुमार सिंह की पीठ ने टिप्पणी की,"यह अत्यंत खेदजनक स्थिति है कि उक्त घटना दिनांक 17.07.2022 को आज लगभग एक माह बीत चुका है, लेकि प्रयागराज स्थित सरकारी वकील के कार्यालय में समुचित कार्य सुचारु रूप से नहीं हो पाया है। राज्य के वकील के पास रिकॉर्ड या उचित...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोर्ट के कर्मचारियों से आदेश बदलवाने की कोशिश करने पर वकील को कड़ी फटकार लगाई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में अदालत के कर्मचारियों के माध्यम से न्यायिक आदेश में बदलाव करने की कोशिश कर रहे एक वकील के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।निजी सचिव (पीएस), जिन्होंने अदालत में डिक्टेशन लिया था, उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता के वकील ने आदेश में कुछ बदलाव करने का अनुरोध किया था, जिस पर अदालत ने कहा, "यह आचरण अशोभनीय है और हम खुली अदालत में सुनाए गए न्यायिक आदेश को बदलने और अदालत में सुनवाई के बिना और दूसरे पक्ष को नोटिस दिए बिना ऐसा करने के इस प्रयास पर अपनी गंभीर नाराजगी व्यक्त करते...
संपत्ति का कब्जा/स्वामित्व बिजली चोरी के खिलाफ कार्यवाही के लिए प्रासंगिक विचार: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट के एक हालिया आदेश में बिजली अधिनियम की धारा 135 के तहत कथित रूप से बिना लाइसेंस के कनेक्शन के एक व्यक्ति को बरी करने के आदेश में यह स्पष्ट किया कि मामले में संपत्ति के स्वामित्व/कब्जे को ध्यान में रखा जाना चाहिए।जस्टिस अशोककुमार जोशी ने राज्य की अपील को कई आधारों पर खारिज कर दिया, जिसमें यह तथ्य भी शामिल था कि पुलिस ने तथाकथित घटना स्थल के लिए आरोपी के कब्जे या स्वामित्व को दिखाने के लिए कोई प्रमाण पत्र या दस्तावेज नहीं मांगे थे।यह माना गया कि ट्रायल कोर्ट के आदेश ने गवाहों के...











![[दिल्ली दंगे] न्यायिक समय, जनता के धन का सम्मान नहीं: कोर्ट ने एसपीपी को संवेदनशील बनाने को कहा, जांच अधिकारी से अप्रासंगिक गवाहों को छोड़ने के लिए कहा, जुर्माना लगाया [दिल्ली दंगे] न्यायिक समय, जनता के धन का सम्मान नहीं: कोर्ट ने एसपीपी को संवेदनशील बनाने को कहा, जांच अधिकारी से अप्रासंगिक गवाहों को छोड़ने के लिए कहा, जुर्माना लगाया](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2021/09/02/500x300_399814-delhiriots.jpg)







